राहाब का जीवन: एक वेश्या से यीशु की वंशावली तक अनुग्रह की कहानी
परिचय
रात गहरी है। यरीहो की दीवार पर बने एक घर की खिड़की से एक रस्सी लटक रही है, और उस रस्सी के सहारे दो आदमी नीचे उतर रहे हैं। खिड़की के भीतर खड़ी है एक स्त्री जिसका नाम पूरे नगर में बदनामी के साथ जुड़ा है। वह जानती है कि उसने क्या किया है: उसने अपने ही राजा के विरुद्ध जाकर दुश्मन के जासूसों को छिपाया है। अगर पकड़ी गई, तो मौत निश्चित है। और फिर भी वह खिड़की पर एक लाल रंग की डोरी बाँध देती है, जैसे कोई उम्मीद को गाँठ लगा रहा हो।
उस स्त्री का नाम राहाब है। बाइबल उसे तीन बार "वेश्या" कहकर बुलाती है, और तीनों बार उसकी प्रशंसा करती है। इस पृष्ठ पर आप उसके पूरे जीवन को क्रम से देखेंगे: उसका अतीत, उसका विश्वास, उसकी कमज़ोरियाँ, उसका बचाव, उसका विवाह, और वह चौंका देने वाला तथ्य कि यीशु मसीह की वंशावली में उसका नाम लिखा है।
इस मार्गदर्शिका का दृष्टिकोण
अधिकतर लेख राहाब को "एक पापी स्त्री जो बच गई" के रूप में बताते हैं। हम एक और सूत्र पकड़ेंगे: घर। राहाब की पूरी कहानी घरों की कहानी है। एक घर जो शहर की दीवार में बना था और शहर के साथ गिरने वाला था; एक घर जो लाल डोरी के कारण जहाज़ बन गया; एक घर जिसे इस्राएल के बीच में नई जगह मिली; और अंत में वह घराना जिससे दाऊद और मसीह आए। अनुग्रह केवल व्यक्ति को क्षमा नहीं करता, वह उसे एक नया पता देता है, परमेश्वर के लोगों के बीच एक ठिकाना। राहाब का जीवन इसी बात का जीता-जागता प्रमाण है।
बाइबल राहाब के बारे में क्या कहती है?
राहाब पहली बार यहोशू 2 में सामने आती है, और बाइबल उसका परिचय बिना किसी सजावट के देती है: "तब नून के पुत्र यहोशू ने शित्तीम से दो भेदियों को चुपके से भेज दिया, और उन से कहा, जाकर उस देश और यरीहो को देखो। तो वे चल दिए, और राहाब नाम किसी वेश्या के घर में जाकर सो गए" (यहोशू 2:1)। पवित्रशास्त्र उसके पेशे को छिपाता नहीं। वह कनानी थी, यरीहो की निवासी, एक ऐसे नगर की जो विनाश के लिए ठहराया जा चुका था। मानवीय दृष्टि से उसके पास न जाति का लाभ था, न चरित्र का, न धर्म का।
लेकिन फिर वह बोलती है, और उसके मुँह से बाइबल के सबसे साहसी स्वीकारोक्ति-वचनों में से एक निकलता है। पहले वह बताती है कि नगर की हालत क्या है: "मुझे तो निश्चय है कि यहोवा ने तुम्हें यह देश दिया है, और तुम्हारा भय हम लोगों के मन में समाया है, और इस देश के सब निवासी तुम्हारे कारण घबरा रहे हैं" (यहोशू 2:9)। पूरा यरीहो वही समाचार सुन चुका था जो राहाब ने सुना था: लाल समुद्र, मिस्र, सीहोन और ओग। पूरे नगर ने एक ही जानकारी पाई थी। अंतर जानकारी में नहीं था, अंतर प्रतिक्रिया में था।
और तब वह अपनी निर्णायक बात कहती है: "जब हम ने यह सुना, तब हमारा मन पिघल गया, और तुम्हारे कारण किसी के जी में जी न रहा; क्योंकि तुम्हारा परमेश्वर यहोवा ऊपर आकाश का और नीचे पृथ्वी का परमेश्वर है" (यहोशू 2:11)। ध्यान दीजिए वह क्या नहीं कहती। वह यह नहीं कहती कि "तुम्हारा देवता हमारे देवताओं से बड़ा है।" वह कहती है कि यहोवा ऊपर आकाश और नीचे पृथ्वी, दोनों के परमेश्वर हैं। यह एकेश्वरवाद की घोषणा है, और यह उसी भाषा में है जो मूसा व्यवस्थाविवरण में इस्राएल को सिखाते हैं। एक कनानी वेश्या के होंठों पर इस्राएल का विश्वास-वाक्य। यही राहाब की कहानी का धड़कता हुआ हृदय है।
इसके बाद आता है सौदा। राहाब अपने परिवार के लिए दया माँगती है, और भेदिये एक शर्त रखते हैं: "सुन, जब हम इस देश में आएँगे, तब जिस खिड़की से तू ने हमको उतारा है उसमें यही लाल रंग की डोरी बाँध देना, और अपने माता पिता, भाइयों, वरन अपने पिता के घराने के सब लोगों को अपने यहाँ इकट्ठा कर रखना" (यहोशू 2:18)। यह वचन छोटा दिखता है पर इसमें उद्धार का पूरा ढाँचा छिपा है: एक चिह्न जो बाहर से दिखाई दे, और एक जगह जहाँ इकट्ठा होना ज़रूरी है। जो घर के भीतर रहेगा, वह बचेगा; जो बाहर निकलेगा, वह नहीं। डोरी जादू नहीं थी, वह वाचा की निशानी थी।
फिर यरीहो गिरता है, और बाइबल लेखा-जोखा देती है: "और यहोशू ने राहाब वेश्या को उसके पिता के घराने समेत, वरन उसके सब लोगों को जीवित छोड़ दिया; और वह आज के दिन तक इस्राएलियों के मध्य में रहती है, क्योंकि उसने उन दूतों को छिपा रखा था जिन्हें यहोशू ने यरीहो का भेद लेने को भेजा था" (यहोशू 6:25)। "इस्राएलियों के मध्य में रहती है।" वह केवल ज़िंदा नहीं बची; उसे एक पता मिला, एक समुदाय मिला, एक नया घर मिला।
बाइबल में चलने वाला सूत्र
राहाब का नाम पुराने नियम में यहोशू की पुस्तक के बाद लगभग खो जाता है, पर उसका खून नहीं खोता। वह मत्ती की वंशावली में फिर प्रकट होती है: "और सलमोन और राहाब से बोअज उत्पन्न हुआ, और बोअज और रूत से ओबेद उत्पन्न हुआ, और ओबेद से यिशै उत्पन्न हुआ" (मत्ती 1:5)। इस एक पद में दो विदेशी स्त्रियाँ खड़ी हैं, राहाब कनानी और रूत मोआबी, और उनके बीच से दाऊद का घराना निकलता है। मत्ती यह जानबूझकर करते हैं। यहूदी वंशावलियों में स्त्रियों का नाम सामान्यतः नहीं आता था, और विदेशी स्त्रियों का तो और भी कम। मत्ती मसीह के वंश-वृक्ष की शुरुआत ही इस संकेत से करते हैं कि यह राजा केवल एक जाति का उद्धारकर्ता नहीं है।
अनुग्रह वंशावली में भी हस्ताक्षर छोड़ जाता है।
नया नियम राहाब को दो और बार उठाता है, और दोनों बार एक अलग पहलू से। इब्रानियों की पुस्तक उसे विश्वास के नायकों की सूची में रखती है: "विश्वास ही से राहाब वेश्या आज्ञा न माननेवालों के साथ नाश नहीं हुई; इसलिये कि उसने भेदियों को कुशल से रखा था" (इब्रानियों 11:31)। हाबिल, नूह, अब्राहम, मूसा और फिर राहाब। लेखक उसका पुराना पेशा छिपाते नहीं, पर उसे विश्वास की मिसाल कहते हैं, क्योंकि विश्वास की परख यह नहीं कि आप कहाँ से आए हैं, बल्कि यह कि आप किस पर भरोसा रखते हैं।
याकूब उसी घटना को दूसरे कोण से देखते हैं: "और वैसे ही राहाब वेश्या भी जब उसने दूतों को अपने घर में उतारा, और दूसरे मार्ग से विदा किया, तो क्या कर्मों से धर्मी न ठहरी?" (याकूब 2:25)। यहाँ कोई विरोधाभास नहीं है। इब्रानियों बताते हैं कि राहाब के भीतर क्या था, याकूब बताते हैं कि वह भीतर की चीज़ बाहर कैसे दिखी। उसका विश्वास केवल एक भावना नहीं था; उसने अपनी जान जोखिम में डाली, अपने नगर के विरुद्ध खड़ी हुई, और अपने घर का दरवाज़ा खोल दिया। जीवित विश्वास हमेशा किसी न किसी दरवाज़े को खोलता है।
और यह सूत्र मसीह तक जाता है। यीशु ने धार्मिक अगुवों से कहा था कि चुंगी लेनेवाले और वेश्याएँ उनसे पहले परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करती हैं (मत्ती 21:31)। राहाब उस वाक्य की जीती-जागती मिसाल है, और वह यीशु के जन्म से बहुत पहले जी चुकी थी। जो परमेश्वर यरीहो की दीवार पर बने एक घर में अपनी दया भेजते हैं, वही परमेश्वर एक दिन देह धारण कर के पापियों के साथ भोजन करेंगे। लूका 19:10 इसी बात को समेटता है: "क्योंकि मनुष्य का पुत्र खोए हुओं को ढूँढ़ने और उनका उद्धार करने आया है।" राहाब पहली बार खोजी नहीं गई थी; वह खोजी गई थी और उसे मालूम भी नहीं था कि कौन उसे खोज रहा है।
उसके जीवन का सार
पहला निर्णायक क्षण: वह सुनती है और मान लेती है। राहाब के जीवन का मोड़ उस दिन नहीं आया जब भेदिये उसके घर आए, बल्कि उन वर्षों में आया जब वह काफ़िलों और व्यापारियों से इस्राएल के परमेश्वर के बारे में सुनती रही। यरीहो के हर निवासी ने वही कहानियाँ सुनीं। सबके मन पिघल गए, पर केवल एक मन ने झुककर कहा कि यह परमेश्वर सचमुच परमेश्वर हैं। बाकी नगर ने डर को दीवार मोटी करने में बदल दिया; राहाब ने डर को समर्पण में बदल दिया। यही अंतर उसे बचा ले गया। विश्वास का जन्म अक्सर किसी चमत्कार से नहीं, बल्कि सुनी हुई बात को गंभीरता से लेने से होता है।
दूसरा निर्णायक क्षण: वह जोखिम उठाती है, कमज़ोरियों के साथ। राहाब ने भेदियों को छत पर सन के डंठलों के नीचे छिपाया और राजा के सिपाहियों से झूठ बोला कि वे जा चुके हैं। यहाँ हमें ईमानदार होना चाहिए: बाइबल उसके झूठ की प्रशंसा नहीं करती, वह उसके विश्वास की प्रशंसा करती है। इब्रानियों और याकूब दोनों इस बात को उभारते हैं कि उसने भेदियों को "कुशल से रखा," न कि यह कि उसने चतुराई से झूठ बोला। परमेश्वर अधूरे लोगों के अधूरे कदमों को भी अपने हाथ में ले लेते हैं। राहाब पूर्ण नहीं थी; उसकी नैतिक समझ कनानी थी, उसका पेशा गंदा था, उसकी भाषा भी शायद खुरदरी रही होगी। पर उसने अपनी जान उस परमेश्वर के लोगों के साथ जोड़ दी जिनके बारे में उसने बस सुना भर था।
तीसरा निर्णायक क्षण: दीवार गिरती है और उसका घर खड़ा रहता है। यहोशू 6:17 में आज्ञा साफ़ है कि पूरा नगर अर्पण की वस्तु है, केवल राहाब और उसके घर के लोग जीवित छोड़े जाएँगे। जब सातवें दिन दीवार गिरी, तो दीवार पर बना वह घर खड़ा रहा, और उसमें इकट्ठा उसका पूरा परिवार बच गया। कल्पना कीजिए उस दृश्य की: धूल, चीखें, आग, और उसके बीच एक घर जिसकी खिड़की पर लाल डोरी हिल रही है। उसे पहले छावनी के बाहर रखा गया, फिर धीरे-धीरे वह इस्राएल के बीच में बस गई, और अंततः उसका विवाह यहूदा के गोत्र के सलमोन से हुआ। जो स्त्री एक बदनाम घर की मालकिन थी, वह अब एक इस्राएली परिवार की माता बनी, और उसके बेटे बोअज़ ने आगे चलकर एक और बाहरी स्त्री, रूत, को अपने घर में जगह दी। दया सीख बनकर अगली पीढ़ी तक पहुँची।
राहाब से हम क्या सीखते हैं
पहला, आपका अतीत आपकी पहचान का आखिरी शब्द नहीं है, पर परमेश्वर उसे मिटाते भी नहीं। यह ध्यान देने लायक है कि इब्रानियों 11:31 और याकूब 2:25, दोनों में उसे "राहाब वेश्या" कहा गया है। परमेश्वर ने उसके अतीत को इतिहास से नहीं हटाया; उन्होंने उसे अपने अनुग्रह का गवाह बना दिया। हम अक्सर चाहते हैं कि हमारा अतीत भुला दिया जाए; परमेश्वर उसे क्षमा करके उसी के ऊपर अपनी महिमा का हस्ताक्षर कर देते हैं। 1 कुरिन्थियों 6:11 इसी सच्चाई को कहता है: "और तुम में से कितने ऐसे ही थे, परन्तु तुम प्रभु यीशु मसीह के नाम से और हमारे परमेश्वर के आत्मा से धोए गए, और पवित्र हुए, और धर्मी ठहरे।" "ऐसे ही थे", भूतकाल, पर कहानी से मिटाया हुआ नहीं।
दूसरा, विश्वास हमेशा किसी ठोस चीज़ से चिपकता है। राहाब ने अपने दिल में एक अच्छी भावना नहीं पाली; उसने खिड़की पर एक लाल डोरी बाँधी और अपने परिवार को उस घर में इकट्ठा किया। उसका भरोसा दिखाई देने वाला था, नापने लायक था, जोखिम भरा था। आज भी विश्वास का यही स्वभाव है। यह बपतिस्मा के पानी में उतरता है, यह प्रभु भोज की रोटी थामता है, यह माफ़ी के शब्द बोलता है, यह गलत कमाई छोड़ देता है। जहाँ भरोसा केवल विचार बना रहता है, वहाँ याकूब का सवाल हमें चुभता है।
तीसरा, अनुग्रह आपके अकेले के लिए नहीं आता। राहाब ने सिर्फ़ अपनी जान नहीं माँगी; उसने अपने माता-पिता और भाइयों को उस घर में खींच लिया। उसका उद्धार एक पूरे घराने का उद्धार बन गया। जब परमेश्वर आप पर दया करते हैं, तो वह दया आपके कमरे में बंद रहने के लिए नहीं होती। आपके घर में कोई है जिसे आपके द्वारा उस "लाल डोरी" तक लाया जाना है।
बचाया हुआ व्यक्ति अपने पीछे दरवाज़ा बंद नहीं करता।
दर्पण
आप जानते हैं कि लोग आपके बारे में क्या फुसफुसाते हैं। शायद वह सच भी है। शायद आपके जीवन का एक हिस्सा ऐसा है जिसे आप प्रार्थना-सभा में कभी नहीं बताएँगे: वह रिश्ता, वह लत, वह पैसा जो ईमानदारी से नहीं आया, वे साल जिनके बारे में आपके बच्चे कुछ नहीं जानते। और इसलिए आप मंडली में बैठते तो हैं, पर हमेशा थोड़ा पीछे, थोड़ा किनारे, जैसे कोई मेहमान जो जानता है कि वह असल में परिवार का सदस्य नहीं है।
राहाब को देखिए। वह मंदिर में पली-बढ़ी स्त्री नहीं थी। वह दुश्मन के खेमे की थी, उस पेशे में थी जिसका नाम लेना भी शर्म की बात है, और उसके पास परमेश्वर को देने के लिए कोई योग्यता नहीं थी। उसके पास केवल दो चीज़ें थीं: एक सुनी हुई बात, और एक खुला दरवाज़ा। उसने उन्हीं दोनों के साथ परमेश्वर की दया पर दाँव लगा दिया, और वह जीत गई।
अब ईमानदारी से पूछिए: क्या आपकी समस्या आपका अतीत है, या आपका अविश्वास? यरीहो के बाकी लोगों ने भी वही सुना था जो राहाब ने सुना था। वे ज़्यादा बुरे नहीं थे; वे बस अपनी दीवारों के पीछे सुरक्षित महसूस करते रहे। आपकी दीवारें क्या हैं? आपकी नौकरी की स्थिरता? आपकी धार्मिक आदतें? आपका यह तर्क कि "मैं बाद में सुधर जाऊँगा"? वे दीवारें भी एक दिन गिरेंगी, और उस दिन केवल वही खड़ा रहेगा जिसने अपने आपको परमेश्वर की दया के घर के भीतर कर लिया है।
इफिसियों 2:8 कहता है: "क्योंकि विश्वास के द्वारा अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है, और यह तुम्हारी ओर से नहीं, वरन परमेश्वर का दान है।" राहाब ने यह वचन कभी नहीं पढ़ा। उसने बस उसे जी लिया। आज वह वचन आपके सामने खुला पड़ा है। खिड़की पर डोरी बाँधने में देर मत कीजिए।
बच्चों के लिए समझाया गया
बच्चों को राहाब की कहानी सुनाते समय शर्मिंदगी महसूस करना स्वाभाविक है, क्योंकि उसका पेशा ऐसा है जिसे छोटे बच्चों को समझाना कठिन है। पर इस कहानी को छोड़ देना ठीक नहीं, क्योंकि यह बाइबल की सबसे खूबसूरत अनुग्रह-कहानियों में से एक है। छोटे बच्चों के लिए आप सीधे कह सकते हैं कि राहाब एक ऐसी स्त्री थी जिसे शहर के लोग अच्छा नहीं मानते थे, जिसने बहुत सी गलत बातें की थीं, पर जिसने परमेश्वर के बारे में सुना और उन पर भरोसा किया। ज़ोर उस लाल डोरी पर दीजिए: वह एक निशानी थी कि "इस घर के लोग परमेश्वर के हैं, इन्हें बचाया जाएगा।" बच्चे चिह्नों और रंगों को आसानी से याद रखते हैं, और यह चिह्न उन्हें आगे चलकर मसीह के लहू को समझने में मदद करेगा।
बड़े बच्चों के साथ आप ईमानदारी बढ़ा सकते हैं: राहाब का जीवन पहले गंदा था, लेकिन परमेश्वर ने उसे बदला, उसे एक नया परिवार दिया, और यीशु की वंशावली में उसका नाम लिखा। यह उन्हें सिखाता है कि परमेश्वर किसी को भी "बहुत बिगड़ा हुआ" मानकर छोड़ नहीं देते। किशोरों के साथ आप कठिन सवालों में उतर सकते हैं: राहाब के झूठ का सवाल, यरीहो के न्याय का सवाल, और यह कि विश्वास और कर्म कैसे जुड़ते हैं।
हमारी वेबसाइट पर राहाब की कहानी की अलग-अलग आयु-वर्गों के लिए तैयार व्याख्याएँ उपलब्ध हैं: छोटे बच्चों (3 से 6 वर्ष), स्कूल जाने वाले बच्चों (7 से 12 वर्ष), और किशोरों (12 वर्ष से ऊपर) के लिए। अपने बच्चे की उम्र के अनुसार उपयुक्त पृष्ठ चुनिए और परिवार के साथ मिलकर पढ़िए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
राहाब कौन थी और वह कहाँ रहती थी?
राहाब एक कनानी स्त्री थी जो यरीहो नगर में रहती थी, और यहोशू 2:1 उसे सीधे-सीधे वेश्या कहता है। उसका घर नगर की शहरपनाह की दीवार में बना हुआ था, जिससे वह खिड़की से रस्सी लटकाकर भेदियों को नगर के बाहर उतार सकी। वह उस समय की थी जब इस्राएल चालीस वर्ष जंगल में घूमने के बाद यरदन पार करने की तैयारी कर रहा था, लगभग यहोशू के नेतृत्व की शुरुआत में। उसके परिवार में माता-पिता और भाई-बहन थे, जिन सबको उसने अपने घर में इकट्ठा किया।
क्या राहाब सचमुच वेश्या थी, या वह सिर्फ़ एक धर्मशाला चलाती थी?
कुछ पुराने यहूदी व्याख्याकारों ने उसे "सराय चलाने वाली" बताने की कोशिश की, ताकि उसकी छवि सुधारी जा सके। पर बाइबल खुद ऐसा कोई बचाव नहीं करती। इब्रानी शब्द का सामान्य अर्थ वेश्या ही है, और नया नियम यूनानी में भी वही शब्द इस्तेमाल करता है, दोनों जगह: इब्रानियों 11:31 और याकूब 2:25। परमेश्वर का वचन उसके अतीत को छिपाने की कोशिश नहीं करता, क्योंकि उस अतीत के बिना अनुग्रह की चमक कम हो जाती है। उसकी गरिमा उसकी सफ़ाई से नहीं, परमेश्वर की दया से आती है।
राहाब ने झूठ बोला था, तो क्या बाइबल झूठ को सही ठहराती है?
नहीं। ध्यान दीजिए कि नया नियम कहीं भी उसके झूठ की प्रशंसा नहीं करता। इब्रानियों 11:31 कहता है कि उसने "भेदियों को कुशल से रखा," और याकूब 2:25 कहता है कि उसने उन्हें अपने घर में उतारा और दूसरे मार्ग से विदा किया। जिस बात की सराहना होती है, वह है उसका विश्वास और उसकी मेहमाननवाज़ी, न कि उसके शब्दों का छल। परमेश्वर अपूर्ण लोगों के सच्चे कदमों को स्वीकार करते हैं, उनकी हर कमज़ोरी पर मुहर लगाए बिना। यह हमारे लिए राहत की बात है, क्योंकि हमारा विश्वास भी मिश्रित होता है।
लाल रंग की डोरी का क्या अर्थ है?
यहोशू 2:18 के अनुसार वह डोरी एक पहचान-चिह्न थी, ताकि इस्राएली सेना जान सके कि किस घर को छोड़ना है। कई मसीही व्याख्याकार इसमें फसह की रात के लहू की याद देखते हैं, जब द्वार पर लगे चिह्न ने घर के भीतर के लोगों को बचाया, और आगे चलकर मसीह के लहू की ओर इशारा पाते हैं। बाइबल खुद यह तुलना स्पष्ट शब्दों में नहीं करती, इसलिए इसे हठ के साथ नहीं, पर कृतज्ञता के साथ देखना चाहिए। मूल सिद्धांत वही है: उद्धार एक दिए हुए चिह्न पर भरोसा करने से आता है।
क्या मत्ती 1:5 की राहाब वही यरीहो वाली राहाब है?
अधिकांश परंपरागत व्याख्याकार हाँ कहते हैं, और यह सबसे स्वाभाविक पाठ है। मत्ती 1:5 में नाम अचानक नहीं आता; मत्ती जानबूझकर चार स्त्रियों को वंशावली में रखते हैं जिनकी कहानियों में अनहोनी और अनुग्रह दोनों हैं। कुछ लोग समय-सीमा पर सवाल उठाते हैं, क्योंकि यरीहो से दाऊद तक की पीढ़ियाँ कम लगती हैं, पर बाइबल की वंशावलियाँ अक्सर कुछ कड़ियाँ छोड़ देती हैं और "पुत्र" शब्द वंशज के अर्थ में भी आता है। यहूदी परंपरा भी राहाब के इस्राएल में विवाह करने की बात जानती है।
राहाब और सलमोन का विवाह कैसे हुआ?
बाइबल हमें इसका विवरण नहीं देती। हम केवल इतना जानते हैं कि यहोशू 6:25 के अनुसार राहाब इस्राएलियों के बीच में बस गई, और मत्ती 1:5 के अनुसार सलमोन से उसका पुत्र बोअज़ हुआ। सलमोन यहूदा के गोत्र का था और संभवतः उन्हीं अगुवों में से, जिन्होंने यरीहो की लड़ाई देखी थी। बीच का सारा वर्णन पवित्रशास्त्र में नहीं है, इसलिए कल्पना को तथ्य नहीं बनाना चाहिए। जो महत्वपूर्ण है वह यह है कि एक कनानी स्त्री को इस्राएल में पूरी तरह अपनाया गया, और उससे दाऊद का घराना निकला।
इब्रानियों 11:31 और याकूब 2:25 एक-दूसरे का खंडन क्यों करते दिखते हैं?
वे अलग-अलग सवालों का जवाब दे रहे हैं। इब्रानियों का लेखक पूछता है कि राहाब नाश क्यों नहीं हुई, और उत्तर देता है: विश्वास के कारण। याकूब पूछते हैं कि असली विश्वास कैसा दिखता है, और उत्तर देते हैं: ऐसा, कि राहाब ने दूतों को अपने घर में उतारा और उन्हें बचाकर भेजा। पौलुस कहते हैं कि कर्मों से कोई धर्मी नहीं ठहरता, और याकूब कहते हैं कि जो विश्वास कुछ नहीं करता वह मरा हुआ है। दोनों मिलकर एक ही सच्चाई कहते हैं: बचाने वाला विश्वास अकेला होता है, पर कभी निष्क्रिय नहीं होता।
यरीहो के सब लोग नाश हुए, तो राहाब को क्यों बचाया गया?
क्योंकि उसने परमेश्वर के सामने आत्मसमर्पण किया। यहोशू 2:11 दिखाता है कि पूरे नगर ने एक ही समाचार सुना था और सब डर गए थे, पर केवल राहाब ने उस डर को विश्वास में बदला। यरीहो का न्याय कनान के सदियों पुराने घोर पाप पर परमेश्वर का धैर्यपूर्ण, पर अंततः निश्चित उत्तर था। राहाब का बचना यह सिद्ध करता है कि परमेश्वर का न्याय अंधा नहीं है; उस न्याय के बीच में भी दया का दरवाज़ा खुला था, और जो भीतर आया, वह बचा। यही सिद्धांत आज भी काम करता है।
क्या भजन संहिता और यशायाह में जिस "राहाब" का ज़िक्र है, वह यही स्त्री है?
नहीं, वह एक अलग शब्द है। भजन संहिता 87:4 और यशायाह 51:9 जैसे पदों में "राहाब" मिस्र या समुद्री राक्षस के लिए काव्यात्मक नाम है, और इब्रानी में उसकी वर्तनी अलग है। यरीहो वाली राहाब के नाम का अर्थ "चौड़ा" या "विस्तृत" है। हिंदी में दोनों एक जैसे लिखे जाते हैं, इसलिए भ्रम होना स्वाभाविक है। जब भी राहाब का नाम पढ़ें, संदर्भ देखिए: अगर बात यरीहो, भेदियों या वंशावली की है, तो वह हमारी राहाब है।
बाइबल में राहाब का नाम कितनी बार और कहाँ आता है?
मुख्य विवरण यहोशू 2 और यहोशू 6 में है, विशेष रूप से यहोशू 2:1 से 21 और यहोशू 6:17, 6:22 से 25 तक। नए नियम में उसका नाम तीन जगह आता है: मत्ती 1:5 में यीशु की वंशावली में, इब्रानियों 11:31 में विश्वास के नायकों के बीच, और याकूब 2:25 में जीवित विश्वास की मिसाल के रूप में। इतनी कम आयतों में इतनी बड़ी गवाही बिरली है। हर बार जब नया नियम उसका नाम लेता है, वह उसे सम्मान के साथ लेता है, उसके पुराने पेशे का उल्लेख करने के बावजूद।
राहाब के बाद उसका क्या हुआ, वह कितने वर्ष जीवित रही?
बाइबल इसका ब्यौरा नहीं देती। यहोशू 6:25 का वाक्य "वह आज के दिन तक इस्राएलियों के मध्य में रहती है" बताता है कि जब यहोशू की पुस्तक लिखी जा रही थी, तब तक या तो वह स्वयं या उसका घराना इस्राएल के बीच जाना-पहचाना था। हम जानते हैं कि उसने विवाह किया, उसका एक पुत्र बोअज़ हुआ, और उसके वंश से ओबेद, यिशै और दाऊद आए। उसकी मृत्यु, उसकी कब्र या उसके अंतिम वर्षों के बारे में पवित्रशास्त्र चुप है, और यह चुप्पी हमें उसके जीवन के असली केंद्र, उसके विश्वास, पर लौटा देती है।
राहाब की कहानी आज मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से क्या मायने रखती है?
वह यह साबित करती है कि परमेश्वर के पास आने के लिए आपको पहले खुद को सुधारना नहीं पड़ता। राहाब के पास न धर्म था, न अच्छा नाम, न सही जाति, और फिर भी वह विश्वास के नायकों की सूची में है। अगर आप सोचते हैं कि आपका अतीत आपको हमेशा के लिए अयोग्य बना चुका है, तो मत्ती 1:5 आपके सामने खड़ा है: परमेश्वर ने उसे केवल क्षमा ही नहीं किया, उन्होंने उसे अपने पुत्र की वंशावली में जगह दी। आपकी कहानी भी उसी अनुग्रह के हाथों में लिखी जा सकती है।
अंत में
राहाब की कहानी को घरों के सूत्र से पढ़िए, और आप उसे कभी नहीं भूलेंगे। एक बदनाम घर, जो दीवार में बना था और दीवार के साथ गिरने वाला था। फिर वही घर एक लाल डोरी के कारण पूरे परिवार के लिए शरणस्थान बन गया। फिर वह स्त्री इस्राएल के बीच में बस गई, उसे एक नया पता मिला, एक नया घराना मिला। और अंत में उसी घराने से बोअज़, ओबेद, यिशै, दाऊद और यीशु मसीह आए। अनुग्रह ने उसे सिर्फ़ बचाया नहीं; उसने उसे घर दिया।
यही वह वादा है जो यीशु ने यूहन्ना 14:2 में दोहराया, कि उनके पिता के घर में बहुत से रहने के स्थान हैं। राहाब उन स्थानों में से एक में पहले से बैठी है, और उसका नाम आज भी हमारी बाइबलों में "राहाब वेश्या" लिखा है, इसलिए नहीं कि परमेश्वर उसे शर्मिंदा करना चाहते हैं, बल्कि इसलिए कि हम भूल न जाएँ कि वे किस तरह के लोगों को अपने घर में लाते हैं।
आगे पढ़ने के लिए यहोशू 2 और यहोशू 6 को एक साथ धीरे-धीरे पढ़िए, फिर इब्रानियों 11 और याकूब 2 को, और अंत में मत्ती 1 की वंशावली को। और पढ़ते हुए यह प्रार्थना कीजिए कि परमेश्वर आपको भी वह डोरी बाँधने का साहस दें।
