निर्गमन 2:12
पाठ
"जब उसने इधर-उधर देखा कि कोई नहीं है" — मूसा की पहली वयस्क कार्रवाई एक चौकसी भरी नज़र से शुरू होती है। राजकुमार के रूप में पला-बढ़ा यह इब्री जवान अपने भाई-बन्धुओं के दुःखों पर दृष्टि करने बाहर निकलता है, और वहाँ देखता है कि एक मिस्री उसके एक इब्री भाई को मार रहा है। वह हस्तक्षेप करता है, पर बातचीत से नहीं: वह उस मिस्री को मार डालता है और लाश को रेत में छिपा देता है। एक ही वाक्य में तीन क्रियाएँ हैं — देखना, मारना, छिपाना। पहली में करुणा है, दूसरी में क्रोध, और तीसरी में डर। छुड़ानेवाले का जन्म हुआ, पर उसका पहला उद्धार-कार्य रेत के नीचे दफ़न हो जाता है।
मर्म
यह पद हमें एक असहज सच्चाई देता है: सही पक्ष चुनना और सही तरीके से छुड़ाना दो अलग बातें हैं। मूसा की सहानुभूति ग़लत नहीं थी; इब्रानियों का लेखक भी उसकी उस चुनाव-भरी निष्ठा की सराहना करता है कि उसने महल के सुख के बजाय अपने लोगों का दुःख चुना। पर करुणा जब अपने ही बल पर काम करती है, तो वह रेत में लाश छिपाने पर ख़त्म होती है। परमेश्वर का उद्धार मनुष्य के आवेश से नहीं आता, चाहे वह आवेश कितना ही न्यायसंगत क्यों न हो। यहाँ शास्त्र हमें बताता है कि छुटकारा देनेवाला भी स्वयं टूटा हुआ है, और इसीलिए उसे चालीस साल मिद्यान के जंगल में रहना पड़ेगा, जब तक कि जलती झाड़ी से बुलाहट न आए। उद्धार परमेश्वर का काम है, और वे ही उसका समय, तरीक़ा और कर्ता तय करते हैं।
सूत्र
स्तिफ़नुस इस घटना को दोहराते हुए एक बात जोड़ता है जो निर्गमन नहीं कहता: मूसा ने सोचा था कि उसके भाई समझ जाएँगे कि परमेश्वर उसके हाथ से उन्हें छुटकारा दे रहे हैं, पर वे न समझे (प्रेरितों 7)। यहीं से वह पैटर्न शुरू होता है जो पूरे शास्त्र में चलता है: छुड़ानेवाला आता है अपने ही लोगों के पास, और अपने ही लोग उसे ठुकरा देते हैं। मूसा महल छोड़कर ईंट-गारे में उतरता है, जैसे एक दिन प्रभु यीशु स्वर्ग की महिमा छोड़कर हमारी धूल में उतरेंगे। पर अंतर भी तीखा है, और उसे मिटाना नहीं चाहिए: मूसा का पहला उद्धार-कार्य दूसरे की मौत और रेत के नीचे छिपी लाश पर टिका था; मसीह का उद्धार-कार्य उनकी अपनी मौत और खुली हुई क़ब्र पर। मूसा ने छिपाया, मसीह ने अपने आप को सौंप दिया। यही फ़र्क़ छाया और असल का फ़र्क़ है।
दर्पण
यह पद उस जगह पर उँगली रखता है जहाँ हमारा सबसे अच्छा इरादा और हमारा सबसे कच्चा तरीक़ा एक साथ रहते हैं। दफ़्तर में जब किसी के साथ अन्याय होता देखते हैं और हम ग़ुस्से में एक मेल लिख देते हैं जो हालत सुधारने के बजाय बिगाड़ देता है। घर में जब बच्चे की ग़लती पर हाथ उठ जाता है और फिर हम उस पल को किसी से नहीं बताते। पैसों के मामले में जब हमने किसी की मदद के नाम पर एक ऐसा समझौता किया जिसका हिसाब हम आज भी छिपाए हुए हैं। "इधर-उधर देखा कि कोई नहीं है" हमारी उस आदत का नाम है जो अच्छाई भी गवाहों के हिसाब से नापती है। आज दस मिनट निकालिए, काग़ज़ पर उस एक काम को लिखिए जिसे आपने अपने बल पर सुधारने की कोशिश की और फिर रेत में छिपा दिया, और उस काग़ज़ को हाथ में लेकर उसका नाम ज़ोर से परमेश्वर के सामने बोल दीजिए।
मुख्य पात्र
मूसा यहाँ दो दुनियाओं के बीच फटा हुआ आदमी है। ख़ून से इब्री, तालीम से मिस्री राजकुमार। वह उस पिटनेवाले को "मेरे एक इब्री भाई" कहता है, यानी उसने अपना पक्ष चुन लिया है; लेकिन जिस तरीक़े से वह हस्तक्षेप करता है, वह महल का तरीक़ा है। राजकुमार पूछता नहीं, न्याय सुनता नहीं, आदेश देता है और फ़ैसला लागू कर देता है। अगले ही दिन उसके अपने लोग उससे पूछते हैं, "किसने तुझे हम लोगों पर हाकिम और न्यायी ठहराया?" और यही सवाल असली घाव है। मूसा में साहस है, करुणा है, न्याय की भूख है, और अधिकार का भ्रम भी। इसीलिए वह पहले मारता है और फिर डरता है। जो आदमी बुलाहट के बिना छुड़ाने निकलता है, वह अंत में अपने ही किए से भागता है।
श्रोता
जिन लोगों ने यह वृत्तांत पहली बार सुना, वे जंगल में डेरों में बैठे इस्राएली थे, और मूसा उनके सामने ज़िंदा खड़ा था: वही व्यवस्था देनेवाला जिसने उन्हें "हत्या न करना" सिखाया। ध्यान दीजिए कि यह कहानी छिपाई नहीं गई। कोई भी राष्ट्र अपने संस्थापक की जीवनी ऐसे शुरू नहीं करता। उन्हें सुनाई दे रहा था कि उनका नेता कोई निर्दोष देवता नहीं, बल्कि एक क्षमा पाया हुआ पापी है, जिसे परमेश्वर ने उसकी नाकामी के बाद चालीस साल तराशा। और यह उनके लिए राहत थी, क्योंकि वे ख़ुद बग़ावत, बड़बड़ाहट और सोने के बछड़े का बोझ लिए चल रहे थे। उद्धार उनकी योग्यता पर नहीं, परमेश्वर की वाचा पर टिका था।
बारीकी
"कोई नहीं है" — यह इस पद का सबसे भारी झूठ है, और मूसा उसे नेकनीयती से बोलता है। वह इधर-उधर देखता है, यानी क्षैतिज दिशा में; ऊपर नहीं देखता। यह अध्याय दृष्टि के शब्द से बुना हुआ है: मूसा "उनके दुःखों पर दृष्टि करने लगा", और अध्याय के अंत में "परमेश्वर ने इस्राएलियों पर दृष्टि करके उन पर चित्त लगाया।" मनुष्य की दृष्टि गवाह ढूँढ़ती है; परमेश्वर की दृष्टि दुःख ढूँढ़ती है। जिस रेत में मूसा ने लाश छिपाई, उसी रेत के देश में परमेश्वर एक झाड़ी जलाकर उसे बुलाएँगे। परमेश्वर ने सब देखा था, और फिर भी बुलाया। यही अनुग्रह का असली चेहरा है।
चिंतन
आपके जीवन में वह कौन-सा "रेत में छिपाया हुआ" काम है जिसे आपने अच्छे इरादे से किया, पर अपने ही बल पर?
मूसा का पहला उद्धार-प्रयास असफल हुआ और मसीह का सफल; इस फ़र्क़ का असर आज आपके भरोसे पर क्या होना चाहिए?
Exodus में और गहराई से जानें
चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।
Traces how God rescues a people for himself, from slavery to Sinai.
An accessible chapter by chapter guide that keeps pointing to Jesus.
Exodus: An Introduction and Commentary
A trusted Tyndale commentary: compact, careful and clear on every passage.
Rich, sermon shaped exposition of the whole exodus story.
Faith.network earns a small commission on Kobo purchases made through these links, at no extra cost to you. It helps keep the studies free.
Exodus 2:12 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।
निर्गमन 2:12 का क्या अर्थ है?
निर्गमन 2:12 किस विषय में है?
निर्गमन 2:12 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
निर्गमन 2:12 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
निर्गमन 2:12 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
Exodus 2 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
किसने तुझे हम पर हाकिम और न्यायी ठहराया?" यह सवाल मूसा को चुभ गया, क्योंकि सच यही था। अभी परमेश्वर ने उसे भेजा नहीं था। उसने इधर उधर देखकर, छिपकर, अपने हाथ से छुड़ाना चाहा। चालीस साल बाद वही मूसा जलती झाड़ी के सामने बुलाया गया। तेरे भीतर का जोश गलत नहीं है। पर पूछ ले, यह काम तू कर रहा है या परमेश्वर तुझसे करवा रहा है?
पिता, जब मुझे किनारे धकेला जाता है और कोई पक्ष नहीं लेता, तब भी तू देखता है। तू ऐसे लोग भेजता है जो उठकर मेरी मदद करते हैं। मुझे भी वैसा ही साहस दे कि जहाँ किसी के साथ अन्याय हो, मैं चुप न रहूँ, बल्कि आगे बढ़कर हाथ बढ़ाऊँ।
पिता, धन्यवाद कि आपने फ़िरौन की बेटी के मन में तरस डाल दिया, जब उसने रोते हुए बच्चे को देखा। धन्यवाद कि मूसा का वह छोटा सा रोना भी अनसुना न रहा, और आपने शत्रु के घर में ही उसके लिए सुरक्षा तैयार कर रखी थी। हमारे आँसुओं पर भी आपकी वही दयादृष्टि है।
इस अंश को किसी और स्तर पर देखें
शुरुआती, धर्मशास्त्री, या कोई अलग लंबाई? सेटिंग्स बदलें और अपना संस्करण बनाएँ।
अध्ययन टूल में खोलें