भजन संहिता 102:21
पाठ
एक आदमी जिसकी हड्डियाँ आग की तरह जल रही हैं, जो राख को रोटी की तरह खाता है, अचानक भविष्य की ओर देखता है और कुछ ऐसा कहता है जिसमें उसका अपना नाम तक नहीं है: "तब लोग सिय्योन में यहोवा के नाम का वर्णन करेंगे, और यरूशलेम में उसकी स्तुति की जाएगी।" यह "तब" पिछली पंक्तियों से जुड़ा है, जहाँ परमेश्वर ऊँचे पवित्रस्थान से झुककर बंदियों का कराहना सुनते हैं और मरने के लिए छोड़े गए लोगों के बंधन खोलते हैं। इसका नतीजा कोई निजी राहत की आह नहीं, बल्कि एक सार्वजनिक घोषणा है। जो सुना गया, वह अब सुनाया जाएगा; जो टूटा हुआ शहर था, वही गवाही का मंच बनेगा।
मूल बात
ध्यान दीजिए कि छुटकारे का अंतिम लक्ष्य यहाँ आराम नहीं, आराधना है। परमेश्वर बंदी को इसलिए नहीं खोलते कि वह चैन से अपनी बाकी ज़िंदगी बिता ले, बल्कि इसलिए कि उसके गले से परमेश्वर के नाम का वर्णन निकले। और यह "नाम" कोई शब्द नहीं; इब्रानी में शेम का मतलब है किसी का प्रकट चरित्र, उसकी पहचान जो कर्मों से खुलती है। यानी लोग यह बताएँगे कि परमेश्वर कैसे हैं, क्योंकि उन्होंने अनुभव कर लिया कि वे कैसे हैं। यहाँ आपकी और मेरी सबसे गहरी उलझन पर उँगली रखी जाती है: हम प्रार्थना में अक्सर सिर्फ़ दर्द के बंद होने की माँग करते हैं, जबकि परमेश्वर हमें उस दर्द से निकालकर एक बड़े मक़सद में जोड़ देते हैं, अपनी महिमा के गवाहों की भीड़ में।
साझा सूत्र
इस भजन का अंत उसी "तब" को खींचकर सृष्टि की सीमा तक ले जाता है: "आदि में तूने पृथ्वी की नींव डाली… तू वहीं है, और तेरे वर्षों का अन्त न होगा।" इब्रानियों की पत्री इन्हीं पंक्तियों को उठाकर सीधे पुत्र पर लागू करती है। यानी नए नियम के लेखक ने पहचान लिया कि जो परमेश्वर ऊँचे स्थान से झुककर बंदियों का कराहना सुनते हैं, वे यीशु मसीह में झुके, और इतना झुके कि खुद बंदी बन गए। सिय्योन में नाम के वर्णन की यह प्रतिज्ञा किसी पुनर्निर्मित पत्थर की इमारत पर नहीं, बल्कि उस देह पर टिकी है जो तोड़ी गई और तीसरे दिन उठाई गई। और पद 22 का सपना, कि राज्य-राज्य के लोग इकट्ठे होंगे, ठीक वहीं से चलना शुरू करता है जहाँ खाली कब्र थी।
दर्पण
अपने आप से एक सवाल पूछिए, ईमानदारी से: पिछली बार जब परमेश्वर ने आपको किसी गड्ढे से निकाला, आपने किसे बताया? हममें से बहुत लोग संकट में बहुत बोलते हैं और छुटकारे के बाद चुप हो जाते हैं। नौकरी बच गई, रिपोर्ट साफ़ आ गई, बेटे ने घर लौटने का फ़ोन कर दिया, और हमने राहत की साँस ली, धन्यवाद की एक छोटी प्रार्थना कर ली, और आगे बढ़ गए। यह पद उस चुप्पी को चोर कहता है। क्योंकि आपका छुटकारा सिर्फ़ आपका नहीं था; वह परमेश्वर के चरित्र का सार्वजनिक सबूत था, और आपने उसे अपनी जेब में रख लिया। हमें डर लगता है कि लोग हँसेंगे, या कि हम धार्मिक दिखेंगे, या कि अगली बार छुटकारा न मिला तो? इसलिए हम गवाही को घटाकर "सब ठीक हो गया" कह देते हैं।
आज ही एक व्यक्ति को फ़ोन कीजिए या संदेश भेजिए और उसे एक ठोस बात बताइए जो परमेश्वर ने बीते साल में आपके लिए की, तारीख़ और परिस्थिति समेत, बिना "किसी तरह" या "संयोग से" जैसे शब्दों के पीछे छिपे।
प्रसंग
यह भजन उस समय की गंध लिए हुए है जब यरूशलेम मलबा था। पद 14 में जो लोग "उसके पत्थरों को चाहते हैं, और उसके खंडहरों की धूल पर तरस खाते हैं", वे निर्वासन झेल चुके या लौट आए लोग हैं, जिनके लिए मंदिर की जली हुई नींव कोई रूपक नहीं, रोज़ का दृश्य थी। ऐसे में आराधना की भाषा ही टूट गई थी: कहाँ स्तुति करो, किसके सामने, किस वेदी पर? पड़ोसी जातियाँ मज़ाक उड़ाती थीं (पद 8), और उस दौर में किसी जाति का अपमान सीधे उसके देवता का अपमान माना जाता था। तो जब यह प्रार्थना करनेवाला कहता है कि यरूशलेम में फिर स्तुति की जाएगी, वह सिर्फ़ भक्ति नहीं कर रहा, वह एक हारे हुए राजा के दोबारा सिंहासन पर बैठने की घोषणा कर रहा है।
एक बारीकी
"वर्णन करेंगे" पर रुकिए। इब्रानी क्रिया साफ़र का मूल अर्थ है गिनना, हिसाब लगाना, और वहीं से बना है कहानी सुनाना, ब्योरेवार बताना। यह गाना नहीं है, यह बयान है। जैसे कोई अदालत में गवाही देता है: यह हुआ, इस दिन, इस तरह। भजनकार यह नहीं कहता कि लोग सिय्योन में परमेश्वर की भावनाओं में बह जाएँगे; वह कहता है कि वे तथ्य गिनाएँगे। हमारी आराधना अक्सर इसी बिंदु पर कमज़ोर पड़ती है: हम भावनाओं की भाषा में समृद्ध हैं और ब्योरों में कंगाल। "परमेश्वर भला है" कहना आसान है; यह कहना कि परमेश्वर ने उस मंगलवार को क्या किया, जोखिम भरा है, क्योंकि उसे झुठलाया जा सकता है। सच्ची स्तुति हमेशा थोड़ी जोखिम भरी होती है।
मुख्य पात्र
इस पद का असली पात्र वह भीड़ नहीं जो स्तुति करेगी, बल्कि वे परमेश्वर हैं जिन्होंने पहले सुना। पद 19-20 उनकी मुद्रा दिखाते हैं: "यहोवा ने अपने ऊँचे और पवित्रस्थान से दृष्टि की; स्वर्ग से पृथ्वी की ओर देखा है, ताकि बन्दियों का कराहना सुने।" ध्यान दीजिए, कराहना, प्रार्थना नहीं। कराह वह आवाज़ है जो तब निकलती है जब शब्द ख़त्म हो चुके हों, जब आदमी इतना थक गया हो कि ठीक से माँग भी न सके। परमेश्वर की ऊँचाई यहाँ दूरी नहीं, बल्कि दृष्टि-क्षेत्र है: वे इतने ऊँचे हैं कि सबसे नीचे वाले को देख सकें। और पद 17 इसे और नंगा कर देता है, वे "लाचार की प्रार्थना को तुच्छ नहीं जानते"। यह परमेश्वर हैं जो कमज़ोर की टूटी-फूटी भाषा को नीचा नहीं समझते।
शास्त्र की गूँज
यह पूरा नक़्शा पहले भी खींचा जा चुका था। मिस्र में इस्राएल कराहा, और निर्गमन 2 कहता है कि परमेश्वर ने उनका कराहना सुना और अपनी वाचा को स्मरण किया; उसके बाद जो हुआ वह छुटकारा था, और छुटकारे के तुरंत बाद जो हुआ वह लाल समुद्र के किनारे का गीत था। यही क्रम भजन 102 में दोहराया जा रहा है: कराह, दृष्टि, बंधन का खुलना, फिर वर्णन। बाइबल में छुटकारा कभी चुपचाप ख़त्म नहीं होता; उसके पीछे हमेशा एक गीत या एक गवाही चलती है। और इसी भजन के भीतर पद 18 इसे और आगे बढ़ाता है: यह बात लिखी जाएगी, ताकि आनेवाली पीढ़ी स्तुति करे। यानी आपकी गवाही उनके लिए भी है जो अभी पैदा नहीं हुए।
पहले सुननेवाले
कल्पना कीजिए कि आप वहाँ खड़े हैं, आपके पैरों के नीचे राख है, आपके चाचा बाबुल में मर गए, और कोई आपको यह पंक्ति पढ़कर सुनाता है कि यरूशलेम में फिर स्तुति की जाएगी। आपकी पहली प्रतिक्रिया शायद आँसू न हों, बल्कि कड़वाहट हो: किस यरूशलेम में? पहले सुननेवालों के लिए यह पद सांत्वना से ज़्यादा एक चुनौती था, ईंट उठाने का बुलावा। साथ ही यह उनके अपमान का उत्तर था। जिन जातियों ने उनके नाम से श्राप दिया था (पद 8), वही जातियाँ पद 22 में उपासना करने इकट्ठी होंगी। यह बदला नहीं, उलटफेर है। हम इसे धार्मिक कविता की तरह पढ़ते हैं; उन्होंने इसे उस देश की ख़बर की तरह सुना जो अभी अस्तित्व में नहीं था।
कठिन प्रश्न
लेकिन एक काँटा बचा रहता है। यह "तब" कब? जो आदमी यह लिख रहा है, वह दो पद बाद गिड़गिड़ाता है: "हे मेरे परमेश्वर, मुझे आधी आयु में न उठा ले।" उसे पता है कि हो सकता है वह उस दिन को देखने के लिए ज़िंदा न रहे। और भजन उसे कोई आश्वासन नहीं देता कि वह रहेगा। यह असहज है, और इसे चिकना कर देना बेईमानी होगी। बाइबल हर पीड़ित को यह नहीं कहती कि तुम अपनी आँखों से जवाब देखोगे। यहाँ जो दिया गया है वह छोटा और कठोर है: परमेश्वर के वर्ष पीढ़ी से पीढ़ी तक बने रहेंगे, और "तेरे दासों की सन्तान बनी रहेगी"। यानी आपकी कहानी शायद आपके भीतर पूरी न हो, पर वह अधूरी भी नहीं रहेगी। पुनरुत्थान इसी ज़िद का अंतिम उत्तर है, मगर यह भजन अभी वहाँ तक नहीं पहुँचता; वह अंधेरे में भरोसे के साथ खड़ा रहता है।
चिंतन के प्रश्न
आपके जीवन का कौन-सा छुटकारा अब तक बिना बताए पड़ा है, और आप उसे किससे छिपा रहे हैं?
जब आप प्रार्थना करते हैं, तो आप मुख्यतः दर्द के ख़त्म होने की माँग करते हैं या परमेश्वर के प्रकट होने की?
अगर आपकी प्रार्थना का उत्तर आपके जीवनकाल में न आए, बल्कि आपके बच्चों के समय में आए, तो क्या आप आज भी उसी विश्वास से प्रार्थना करेंगे?
पढ़ने योग्य मसीही पुस्तकें
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Psalms 102:21 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।
भजन संहिता 102:21 का क्या अर्थ है?
भजन संहिता 102:21 किस विषय में है?
भजन संहिता 102:21 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
भजन संहिता 102:21 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
भजन संहिता 102:21 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
Psalms 102 में आपको क्या स्पर्श करता है?
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