भजन संहिता 23:3
यह पाठ
बीच के इस छोटे पद में दो क्रियाएँ हैं, और दोनों का कर्ता वही चरवाहा है। पहला: वह थके, बिखरे, भटके हुए प्राणी को लौटा लाता है, उसमें फिर से जान डालता है। दूसरा: वह उसे सही रास्तों पर चलाता है, और इसका कारण भेड़ की योग्यता नहीं, बल्कि चरवाहे का अपना नाम है। "वह मेरे जी में जी ले आता है। धार्मिकता के मार्गों में वह अपने नाम के निमित्त मेरी अगुआई करता है।" हरी चराइयों और सुखदाई जल के बाद अब चलना शुरू होता है, और वह चलना भी परमेश्वर का ही काम है, हमारा नहीं।
मूल मर्म
"जी में जी ले आना" का इब्रानी शब्द नेफ़ेश है, जो केवल आत्मा नहीं, पूरा जीता-जागता प्राणी है: साँस, भूख, थकान, इच्छा। दाऊद यह नहीं कह रहा कि परमेश्वर उसे धार्मिक भावनाएँ देते हैं; वह कह रहा है कि जब वह चुक जाता है, तब कोई उसे उठाकर वापस लाता है। और फिर आता है वह वाक्यांश जो पूरे भजन की नींव है: "अपने नाम के निमित्त"। मेरी अगुआई का आधार मेरी वफ़ादारी नहीं, परमेश्वर की अपनी प्रतिष्ठा है। वे मुझे इसलिए नहीं छोड़ते क्योंकि मैं अच्छी भेड़ हूँ, बल्कि इसलिए कि छोड़ देना उनके चरित्र के विरुद्ध होगा। यही अनुग्रह की पूरी व्याकरण है, और यहीं से वह मार्ग खुलता है जो अंततः उस चरवाहे तक जाता है जो भेड़ों के लिए अपना प्राण देता है।
बड़ा सूत्र
इस पद के दोनों क्रियाओं को एक साथ रखिए, और आपको पूरी उद्धार-कहानी का ढाँचा दिखाई देगा: लौटाना और चलाना, बहाली और अगुआई। इस्राएल की पूरी कथा यही है। मिस्र से निकाला गया एक भटका हुआ झुंड, जिसे जंगल में मन्ना से जिलाया गया और फिर रास्ते पर चलाया गया, और मूसा बार-बार परमेश्वर से यही तर्क करते हैं कि जातियाँ क्या कहेंगी, आपके नाम का क्या होगा। "अपने नाम के निमित्त" कोई काव्यात्मक अलंकार नहीं, यह इस्राएल की जीवनरेखा है। और जब यीशु मसीह कहते हैं कि वे अच्छे चरवाहे हैं जो भेड़ों के लिए अपना प्राण देते हैं, तो वे इसी पद की दोनों क्रियाओं को अपने ऊपर ले लेते हैं। बहाली उनके क्रूस से आती है, अगुआई उनके पुनरुत्थान के जीवन से। यशायाह ने जिस भटकी हुई भेड़ों की तस्वीर खींची थी, जिसमें हर एक अपने-अपने मार्ग को फिर गया था, उसका उत्तर यही चरवाहा है जो स्वयं भेड़ बनकर वध के लिए गया, ताकि "धार्मिकता के मार्ग" हमारे लिए खुल सकें। दाऊद जिस चीज़ को अनुभव के रूप में गा रहे थे, वह गोलगोथा में इतिहास बन गई।
आईना
आप जानते हैं वह थकान जिसका नाम लेना मुश्किल है। सोमवार की सुबह, जब स्कूल या दफ़्तर की वही फ़ाइल फिर खुलती है; वह बातचीत जो पति या पत्नी के साथ तीसरी बार अधूरी छूट गई; वह बीमारी जो रिपोर्ट में तो नहीं दिखती पर शरीर जानता है। और उसके साथ वह चुपचाप बैठा अपराधबोध: अगर मेरी प्रार्थना बेहतर होती, अगर मैं नियमित होता, तो शायद परमेश्वर मुझे सँभालते। यह पद उस पूरे हिसाब-किताब को तोड़ देता है। भेड़ स्वयं को चराई तक नहीं घसीटती; उसे लाया जाता है। आपकी बहाली आपकी परियोजना नहीं है। साथ ही यह पद आपके उस गर्व को भी छूता है जो कहता है कि रास्ता मैं चुनूँगा, परमेश्वर बस साथ चलें। नहीं, यहाँ अगुआई उनकी है, और वह हमेशा आरामदायक दिशा में नहीं मुड़ती; अगला ही पद अंधकार भरी तराई का है।
आज एक काम कीजिए: कागज़ पर वह एक जगह लिखिए जहाँ आप इस समय सबसे ज़्यादा थके हुए हैं, और उसके नीचे यही शब्द लिखिए, "अपने नाम के निमित्त", और उसे ज़ोर से पढ़कर परमेश्वर के सामने रख दीजिए।
कठिन प्रश्न
अगर वे "धार्मिकता के मार्गों" में अगुआई करते हैं, तो विश्वासी लोग गलत रास्तों पर क्यों पहुँच जाते हैं? दाऊद स्वयं बतशेबा तक पहुँचे थे, और उन्होंने यह भजन शायद उसके बाद ही गाया। यहाँ कोई सस्ता उत्तर नहीं है। पद यह दावा नहीं करता कि भेड़ कभी नहीं भटकेगी; वह पहले ही मान लेता है कि प्राण चुक जाता है और उसे लौटाना पड़ता है। यानी भटकना इस चरवाहे के काम का हिस्सा है, अपवाद नहीं। परंतु इससे यह सवाल हल नहीं होता कि वह लौटाना कभी-कभी वर्षों बाद क्यों आता है, और कुछ लोग ज़ाहिर तौर पर कभी नहीं लौटते। मैं इसे खुला छोड़ता हूँ। जो हम जानते हैं वह इतना है: जो नाम दाँव पर लगा है वह हमारा नहीं, उनका है, और वे अपने नाम को हल्के में नहीं लेते।
अंतर्पाठ
पहले पद के साथ जुड़ा संदर्भ यशायाह 40:11 है, जहाँ परमेश्वर अपने झुंड को गोद में उठाकर ले चलते हैं; वहाँ यही कोमलता निर्वासन से लौटते लोगों के लिए कही गई है, यानी बहाली का वादा राष्ट्रीय स्तर पर भी वही है जो दाऊद व्यक्तिगत रूप से गा रहे हैं। दूसरी ओर यूहन्ना 10 है, जहाँ यीशु मसीह अपने आप को अच्छा चरवाहा कहते हैं और भेड़ों को नाम लेकर बाहर बुलाकर आगे-आगे चलते हैं। ध्यान दीजिए, वहाँ भी क्रम वही है: पहले जीवन देना, फिर आगे चलकर अगुआई करना। भजन 23:3 और यूहन्ना 10 के बीच एक ही व्यक्ति खड़ा है, बस एक में छाया है और दूसरे में शरीर।
मुख्य पात्र
इस पद का असली पात्र भेड़ नहीं, चरवाहा है, और उसका चरित्र दो शब्दों में खुलता है: पहल और प्रतिष्ठा। वह इंतज़ार नहीं करता कि थकी भेड़ खुद उठे; वह लौटाता है। और वह अपनी अगुआई की ज़मानत अपने ही नाम पर देता है, जो सबसे ऊँची ज़मानत है जो परमेश्वर दे सकते हैं, क्योंकि इससे ऊपर कोई गवाह नहीं। यह उस परमेश्वर की तस्वीर है जिसकी महिमा और जिसकी करुणा एक-दूसरे से अलग नहीं की जा सकतीं। उनकी महिमा इसी में है कि वे थके हुए को उठाते हैं। और जब वह चरवाहा देहधारी होकर आया, तो उसने यह सब चरनी से क्रूस तक जीकर दिखाया, न किसी की योग्यता देखकर, बल्कि इसलिए कि वह अपने स्वभाव के विरुद्ध नहीं जा सकता।
चिंतन
आपके जीवन का वह कौन-सा हिस्सा है जिसे आप अब भी अपनी मेहनत से बहाल करने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि यह पद कहता है कि लौटाना चरवाहे का काम है?
अगर परमेश्वर आपकी अगुआई अपने नाम के निमित्त करते हैं, तो इससे आपके उस डर में क्या बदलता है कि कहीं आप उनके धैर्य की सीमा पार न कर जाएँ?
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Psalms 23:3 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।
भजन संहिता 23:3 का क्या अर्थ है?
भजन संहिता 23:3 किस विषय में है?
भजन संहिता 23:3 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
भजन संहिता 23:3 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
भजन संहिता 23:3 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
Psalms 23 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
When I read Psalm 23 with the loss of my father still fresh in my memory, verse 4 struck me most of all: even though I walk through the valley of the shadow of death, I will fear no evil, for You are with me. It was not a band-aid but a hand on my shoulder.
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