बाइबल व्याख्या

न्यायियों 6:12

बाइबल

पाठ

गिदोन एक गड्ढे में छिपकर गेहूँ झाड़ रहा है। दाखरस का कुण्ड अनाज फटकने की जगह नहीं है; वहाँ हवा नहीं चलती, भूसा उड़ता नहीं, काम दुगुना और नतीजा आधा होता है। पर वह वहीं है, क्योंकि खुले खलिहान में खड़ा होना मिद्यानियों को न्योता देना है। और ठीक उसी क्षण, उसी गड्ढे के किनारे, यहोवा का दूत उसे दर्शन देकर कहता है: "हे शूरवीर सूरमा, यहोवा तेरे संग है।" एक डरे हुए आदमी को, जो अपनी ही ज़मीन पर चोर की तरह काम कर रहा है, योद्धा कहकर पुकारा जाता है। पद बारह में कोई आज्ञा नहीं, कोई शर्त नहीं, कोई डाँट नहीं। सिर्फ़ एक नाम और एक वाक्य। यही पूरी कहानी का बीज है।

मूल मर्म

यह पद हमें परमेश्वर के बोलने के तरीके के बारे में कुछ बुनियादी बात सिखाता है: वे जो देखते हैं उसका वर्णन नहीं करते, वे जो करने वाले हैं उसका ऐलान करते हैं। गिदोन उस पल में शूरवीर नहीं है, और स्वर्गदूत झूठ भी नहीं बोल रहा। परमेश्वर का वचन वह वास्तविकता रचता है जिसे वह पुकारता है, ठीक वैसे ही जैसे सृष्टि के आरंभ में उन्होंने कहा और हो गया। पर ध्यान दीजिए कि वाक्य का भार गिदोन पर नहीं, दूसरे हिस्से पर टिका है: "यहोवा तेरे संग है।" यह वाचा की भाषा है, वही वादा जो मूसा और यहोशू को मिला था। गिदोन की वीरता कोई छिपा हुआ गुण नहीं जिसे बस खोजना है; वह परमेश्वर की उपस्थिति का नतीजा है। अनुग्रह पहले आता है, योग्यता बाद में। यही क्रम पूरे शास्त्र का क्रम है, और यही कारण है कि यह पद सांत्वना देने से पहले हमारी आत्मनिर्भरता को तोड़ता है।

सामान्य सूत्र

न्यायियों की पुस्तक एक ही चक्र को सात बार दोहराती है: पाप, दासत्व, दुहाई, छुटकारा। हर बार परमेश्वर किसी को खड़ा करते हैं, और हर बार वह व्यक्ति अधूरा साबित होता है, गिदोन भी। यह चक्र अपने आप में एक तड़प है, एक ऐसे छुड़ानेवाले की जो खुद छूटा हुआ न हो। इसलिए यह पद आगे की ओर इशारा करता है। जब स्वर्गदूत मरियम के पास आता है, तो अभिवादन लगभग यही है: प्रभु तेरे साथ है, और वहाँ भी एक अनजान, शक्तिहीन व्यक्ति को परमेश्वर का काम सौंपा जाता है। और यीशु अपने चेलों को विदा करते समय जो अंतिम वचन देते हैं, "मैं तुम्हारे संग हूँ," वही वाक्य है जो गिदोन ने गड्ढे में सुना था, अब देह लेकर स्थायी हो गया। गिदोन को उपस्थिति का वादा मिला; हमें उपस्थिति स्वयं मिली है।

दर्पण

आप भी कहीं गड्ढे में काम कर रहे हैं। वह दफ़्तर हो सकता है जहाँ आप अपनी राय दबाकर रखते हैं क्योंकि बोलने की क़ीमत चुकानी पड़ेगी। वह घर हो सकता है जहाँ आप अपने विश्वास के बारे में चुप हैं क्योंकि माता-पिता या ससुराल का डर है, ठीक जैसे गिदोन ने बाल की वेदी रात में गिराई, दिन में नहीं। वह आपका मन हो सकता है, जहाँ आपने बहुत पहले तय कर लिया कि आप बड़े काम के लिए नहीं बने; और यह विनम्रता जैसा दिखता है, पर असल में यह एक सुरक्षित जगह है, क्योंकि जो कुछ नहीं होने का दावा करता है, उससे कुछ माँगा नहीं जाता। परमेश्वर का वचन इस सुरक्षा को तोड़ता है। वे आपकी आत्म-छवि से सहमत नहीं होते। वे आपकी परिस्थिति को आपका नाम बनने नहीं देते।

आज दस मिनट निकालिए। कागज़ के एक टुकड़े पर वह एक काम लिखिए जो आप डर के मारे छिपकर या आधे मन से कर रहे हैं, और उसके नीचे लिखिए: "यहोवा तेरे संग है।" उस कागज़ को वहीं रखिए जहाँ वह काम होता है।

संदर्भ

यह घटना राजाओं के पहले के उस अस्थिर दौर में है जब इस्राएल के पास कोई केंद्रीय सत्ता नहीं थी, बस गोत्र और उनके बुज़ुर्ग। मिद्यानी ऊँटों पर आते थे, और यह नई सैन्य तकनीक थी: तेज़, दूरगामी, अचानक। वे बसने नहीं, लूटने आते थे, ठीक फ़सल कटने के मौसम में, सात साल लगातार। इसका मतलब भूख, और भूख का मतलब अपमान भी, क्योंकि जो अपनी दी हुई भूमि पर अपनी रोटी नहीं बचा सकता, वह अपनी पहचान भी खो देता है। गिदोन का घर ओप्रा में है, मनश्शे के अबीएजेर कुल में, और उसके पिता योआश के आँगन में बाल की वेदी खड़ी है। यानी दुश्मन बाहर है, पर समझौता भीतर है। जो व्यक्ति छुड़ाने के लिए बुलाया जा रहा है, वह खुद एक समझौतावादी घर का सबसे छोटा बेटा है।

श्रोताओं का चेहरा

न्यायियों की पुस्तक उन लोगों के लिए लिखी गई जो बाद की पीढ़ियों में यही सवाल पूछ रहे थे जो गिदोन ने पूछा: यदि यहोवा हमारे संग होता, तो यह सब विपत्ति क्यों? वे अपने पुरखों की कहानियाँ जानते थे, मिस्र, समुद्र, मन्ना, और उन्हें अपने आसपास की हालत में उनका कोई निशान नहीं दिखता था। इस पद में उन्हें दो बातें एक साथ सुनाई देती थीं। पहली, कि परमेश्वर की चुप्पी उनकी अनुपस्थिति नहीं है; दूत तब आता है जब कोई उम्मीद नहीं बची। दूसरी, और यह चुभने वाली बात है, कि बाल उर्वरता और वर्षा का देवता माना जाता था, और वही बाल सात साल से फ़सल नहीं बचा पाया। जिन देवताओं को उन्होंने सुरक्षा के लिए चुना, उन्होंने उन्हें गड्ढे में पहुँचा दिया।

मुख्य पात्र

गिदोन की पहली प्रतिक्रिया कृतज्ञता नहीं, शिकायत है, और यह ईमानदार शिकायत है: "अब तो यहोवा ने हमको त्याग दिया।" वह विरासत में मिली कहानियों और अपने अनुभव के बीच फँसा आदमी है, और यह फँसाव कड़वाहट में बदल चुका है। वह सावधान है, चिन्ह माँगता है, फिर ऊन के साथ दो बार परखता है, रात में वेदी गिराता है। कोई भी इसे बहादुरी नहीं कहेगा। और फिर भी परमेश्वर उसे न फटकारते हैं, न छोड़ते हैं; वे उसके सवाल का जवाब देते हैं और उसके चिन्ह दे देते हैं। गिदोन का चरित्र हमें मनुष्य के बारे में यह बताता है कि डर और बुलावा एक ही हृदय में साथ रह सकते हैं। और परमेश्वर के बारे में यह, कि वे तैयार लोगों की तलाश में नहीं निकलते; वे गड्ढों में उतरकर नाम बदल देते हैं।

चिंतन

आपके जीवन में वह कौन सी जगह है जहाँ आपने डर को स्थायी घर बना लिया है, और आप उसे व्यावहारिक समझदारी कहकर बचाते हैं?

अगर परमेश्वर आज आपको उस नाम से पुकारें जो आपकी वर्तमान हालत से मेल नहीं खाता, तो आपकी पहली प्रतिक्रिया क्या होगी: गिदोन जैसा सवाल, या चुप समर्पण?

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Judges For You

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Judges: Such a Great Salvation

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The Message of Judges

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Steady guidance through the darkest chapters of Israel's story.

Judges and Ruth: An Introduction and Commentary

Arthur Cundall

A trusted Tyndale commentary: compact, careful and clear on every passage.

Judges, Ruth

K. Lawson Younger

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Judges 6:12 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

न्यायियों 6:12 का क्या अर्थ है?
गिदोन एक गड्ढे में छिपकर गेहूँ झाड़ रहा है। दाखरस का कुण्ड अनाज फटकने की जगह नहीं है; वहाँ हवा नहीं चलती, भूसा उड़ता नहीं, काम दुगुना और नतीजा आधा होता है। पर वह वहीं है, क्योंकि खुले खलिहान में खड़ा होना मिद्यानियों को न्योता देना है। और ठीक उसी क्षण, उसी गड्ढे के किनारे, यहोवा का दूत उसे दर्शन देकर कहता है: "हे शूरवीर सूरमा, यहोवा तेरे संग है।" एक डरे हुए आदमी को, जो अपनी ही ज़मीन पर चोर की तरह काम कर रहा है, योद्धा कहकर पुकारा जाता है। पद बारह में कोई आज्ञा नहीं, कोई शर्त नहीं, कोई डाँट नहीं। सिर्फ़ एक नाम और एक वाक्य। यही पूरी कहानी का बीज है।
न्यायियों 6:12 किस विषय में है?
न्यायियों की पुस्तक एक ही चक्र को सात बार दोहराती है: पाप, दासत्व, दुहाई, छुटकारा। हर बार परमेश्वर किसी को खड़ा करते हैं, और हर बार वह व्यक्ति अधूरा साबित होता है, गिदोन भी। यह चक्र अपने आप में एक तड़प है, एक ऐसे छुड़ानेवाले की जो खुद छूटा हुआ न हो। इसलिए यह पद आगे की ओर इशारा करता है। जब स्वर्गदूत मरियम के पास आता है, तो अभिवादन लगभग यही है: प्रभु तेरे साथ है, और वहाँ भी एक अनजान, शक्तिहीन व्यक्ति को परमेश्वर का काम सौंपा जाता है। और यीशु अपने चेलों को विदा करते समय जो अंतिम वचन देते हैं, "मैं तुम्हारे संग हूँ," वही वाक्य है जो गिदोन ने गड्ढे में सुना था, अब देह लेकर स्थायी हो गया। गिदोन को उपस्थिति का वादा मिला; हमें उपस्थिति स्वयं मिली है।
न्यायियों 6:12 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
आज दस मिनट निकालिए। कागज़ के एक टुकड़े पर वह एक काम लिखिए जो आप डर के मारे छिपकर या आधे मन से कर रहे हैं, और उसके नीचे लिखिए: "यहोवा तेरे संग है।" उस कागज़ को वहीं रखिए जहाँ वह काम होता है।
न्यायियों 6:12 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
न्यायियों की पुस्तक उन लोगों के लिए लिखी गई जो बाद की पीढ़ियों में यही सवाल पूछ रहे थे जो गिदोन ने पूछा: यदि यहोवा हमारे संग होता, तो यह सब विपत्ति क्यों? वे अपने पुरखों की कहानियाँ जानते थे, मिस्र, समुद्र, मन्ना, और उन्हें अपने आसपास की हालत में उनका कोई निशान नहीं दिखता था। इस पद में उन्हें दो बातें एक साथ सुनाई देती थीं। पहली, कि परमेश्वर की चुप्पी उनकी अनुपस्थिति नहीं है; दूत तब आता है जब कोई उम्मीद नहीं बची। दूसरी, और यह चुभने वाली बात है, कि बाल उर्वरता और वर्षा का देवता माना जाता था, और वही बाल सात साल से फ़सल नहीं बचा पाया। जिन देवताओं को उन्होंने सुरक्षा के लिए चुना, उन्होंने उन्हें गड्ढे में पहुँचा दिया।
न्यायियों 6:12 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
आपके जीवन में वह कौन सी जगह है जहाँ आपने डर को स्थायी घर बना लिया है, और आप उसे व्यावहारिक समझदारी कहकर बचाते हैं?
हमारे साझेदारों के सहयोग से संभव

Judges 6 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 2

मिद्यानियों के डर के मारे इस्राएलियों ने पहाड़ों में गुफाएँ, और खोह, और गढ़ बना लिए।"

डर ने उन्हें मेहनती बना दिया, पर गलत दिशा में। जो हाथ वेदी बना सकते थे, वे छिपने की जगहें खोदते रहे। आज भी हम डर के मारे बहुत कुछ बनाते हैं, दीवारें, बहाने, चुप्पी। सोचो, तुम्हारी कौन सी गुफा असल में डर से खुदी है?

धन्यवाद संपादकीय पर पद 20

आपका धन्यवाद कि आपने गिदोन को साफ साफ कहा, "मांस और अख़मीरी रोटियाँ लेकर इस चट्टान पर रख दे," और उलझन में उसे अपनी आवाज़ सुनाई। धन्यवाद कि हमारी छोटी सी भेंट भी आपके सामने रखी जा सकती है, और एक साधारण चट्टान आपकी उपस्थिति की जगह बन जाती है।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 15

गिदोन दाख के कुण्ड में छिपकर गेहूँ झाड़ रहा था, डर के मारे। और परमेश्वर उसे "हे शूरवीर" कहकर पुकारता है। गिदोन का जवाब सुन: "हे प्रभु, मैं इस्राएल को कैसे छुड़ाऊँ? देख, मेरा कुल मनश्शे में सबसे निर्बल है, और मैं अपने पिता के घराने में सबसे छोटा हूँ।" वह अपनी कमज़ोरियाँ गिनता है, परमेश्वर उसकी बुलाहट। तू अपने आपको जिस नाम से जानता है, क्या परमेश्वर तुझे उसी नाम से बुलाता है?

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