न्यायियों 6:5
पाठ
गिदोन की कहानी शुरू होने से पहले पाठक को एक तस्वीर दिखाई जाती है: मिद्यानी अकेले नहीं आते, वे अपने पशु और डेरे साथ लाते हैं, यानी वे लूटकर लौटने नहीं, बल्कि बस जाने और चर जाने आते हैं। उनकी संख्या का वर्णन करने के लिए लेखक के पास बस एक ही चित्र है, "टिड्डियों के दल के समान", और उनके ऊँट गिने नहीं जा सकते। अंत में उद्देश्य साफ लिखा है: "वे देश को उजाड़ने के लिये उसमें आया करते थे।"
मर्म
यह पद परमेश्वर के बारे में कुछ कठोर कहता है, और वह पद 1 में पहले ही कहा जा चुका है: यहोवा ने उन्हें मिद्यानियों के वश में कर रखा। यानी टिड्डियों जैसी यह भीड़ इतिहास की दुर्घटना नहीं, बल्कि वाचा के भीतर का न्याय है। इस्राएल को यह देश उपहार में मिला था, और उपहार का भोग तभी तक था जब तक वे देनेवाले के प्रति वफादार रहते। जब वे भूल गए कि रोटी किसकी है, तो रोटी ही उठा ली गई। यहाँ मनुष्य की एक गहरी भूल उजागर होती है: हम सोचते हैं कि हमारी उपज हमारे परिश्रम का फल है, जब तक कोई आकर उसे चर न जाए। परमेश्वर लूट को अपना उपदेश बना देते हैं।
मूल सूत्र
"टिड्डियों के दल के समान" शब्द किसी भी इस्राएली के कान में एक ही स्मृति जगाते: मिस्र, जहाँ टिड्डियाँ फिरौन के देश को खा गई थीं। अब वही विपत्ति उलटकर परमेश्वर की अपनी प्रजा पर आ पड़ी है। जो देश वादे का था, वह मिस्र जैसा हो गया है। और ध्यान दीजिए, इसका इलाज बेहतर खेती या मजबूत किले नहीं है; दो पद बाद परमेश्वर एक नबी भेजते हैं और फिर एक दुर्बल आदमी को बुलाते हैं जो दाखरस के कुण्ड में छिपकर गेहूँ झाड़ रहा है। यही परमेश्वर की बचाने की रीति है: उजड़े हुए देश में एक छुड़ानेवाला। गिदोन उस बड़े छुड़ानेवाले की धुँधली छाया है जो स्वयं छिपे हुए, छोटे और तुच्छ रूप में आया, और जिसने भूखे देश को अपने आप से भरा।
दर्पण
यह पद उस डर को छूता है जिसे हम शायद ही नाम देते हैं: बोने का डर। मिद्यानी हर साल ठीक फसल के समय आते थे, तो बोने का क्या फायदा? आप भी शायद यही महसूस करते हों। नौकरी में जो बनाया, वह किसी और के नाम चढ़ गया। बचत जो जोड़ी, वह इलाज में बह गई। बच्चों में जो निवेश किया, वह किसी और आवाज़ ने चर लिया। शरीर, समय और उत्साह धीरे-धीरे उजड़ते जाते हैं, और मन चुपचाप तय कर लेता है कि अब कुछ नहीं बोऊँगा। पद 6 बताता है कि इस्राएल ने आखिर क्या किया: उन्होंने दुहाई दी। आज दस मिनट लीजिए, कागज़ पर एक ही वाक्य में लिखिए कि इस साल आपका क्या "चर लिया" गया, और उसे ज़ोर से पढ़कर परमेश्वर के सामने रख दीजिए।
प्रश्न
सात साल। यह पाठ यह नहीं समझाता कि परमेश्वर ने छुड़ाने से पहले इतनी देर क्यों की। इस्राएल पहले वर्ष में भी उतना ही भूखा था जितना सातवें में। और गिदोन का प्रश्न पद 13 में बिलकुल जायज़ है: "यदि यहोवा हमारे संग होता, तो हम पर यह सब विपत्ति क्यों पड़ती?" परमेश्वर उसका सीधा उत्तर नहीं देते; वे केवल गिदोन को भेज देते हैं। यहाँ सस्ता दिलासा नहीं मिलता। पाप के परिणाम असली हैं, और परमेश्वर उन्हें तुरंत नहीं हटाते। पर एक बात पाठ छिपाता नहीं: दुहाई सुनी गई। देर का रहस्य बना रहता है; बहरापन नहीं।
शास्त्र की प्रतिध्वनि
निर्गमन 10 में टिड्डियाँ परमेश्वर का हथियार थीं, मिस्र के विरुद्ध, इस्राएल के पक्ष में। न्यायियों 6 में वही चित्र पलट जाता है, और यही इस पद की सबसे तीखी बात है: वाचा तोड़नेवाली प्रजा उसी पक्ष में खड़ी हो जाती है जहाँ कभी फिरौन खड़ा था। दूसरी प्रतिध्वनि यूहन्ना 10 में सुनाई देती है, जहाँ यीशु कहते हैं कि चोर केवल चुराने, मारने और नाश करने आता है, पर वे स्वयं जीवन देने आए हैं, और वह भी भरपूरी से। मिद्यानी का उद्देश्य "देश को उजाड़ना" था; मसीह का उद्देश्य उजड़े को फिर से बसाना है। दोनों पदों को साथ रखिए, तो न्यायियों की यह विपत्ति सुसमाचार की पृष्ठभूमि बन जाती है।
पहले सुननेवाले
जिन लोगों ने यह कहानी पहली बार सुनी, वे किसान थे। वे जानते थे कि गेहूँ बोने से काटने तक कितने महीने लगते हैं, और ऊँटों पर सवार तेज़ हमलावरों के सामने पैदल किसान कितना असहाय होता है। ऊँट उस युग में नई सैन्य ताकत थे, रेगिस्तान पार करने का साधन, अचानक आने और गायब हो जाने की क्षमता। इसलिए "अनगिनत ऊँट" उनके लिए काव्य नहीं, आतंक था। और उन्हें यह भी याद था कि अब्राहम की संतान को अनगिनत होने का वादा था; अब अनगिनत दुश्मन है। बाद की पीढ़ियाँ, जो स्वयं अश्शूर और बाबेल के साये में यह पढ़ती थीं, इसमें अपना ही चेहरा देखती थीं, और साथ ही यह आशा कि परमेश्वर फिर किसी को भेजेंगे।
चिंतन
आपके जीवन का कौन सा हिस्सा इस समय "टिड्डियों के दल" जैसा लगता है, और क्या आपने उसे परमेश्वर के सामने नाम लेकर रखा है, या सिर्फ सहते जा रहे हैं?
यदि परमेश्वर का उत्तर बेहतर फसल नहीं बल्कि एक छुड़ानेवाला है, तो यीशु मसीह पर भरोसा करना आपकी आज की ठोस स्थिति में व्यावहारिक रूप से कैसा दिखेगा?
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Judges 6 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
गिदोन दाख के कुण्ड में छिपकर गेहूँ झाड़ रहा था, डर के मारे। और परमेश्वर उसे "हे शूरवीर" कहकर पुकारता है। गिदोन का जवाब सुन: "हे प्रभु, मैं इस्राएल को कैसे छुड़ाऊँ? देख, मेरा कुल मनश्शे में सबसे निर्बल है, और मैं अपने पिता के घराने में सबसे छोटा हूँ।" वह अपनी कमज़ोरियाँ गिनता है, परमेश्वर उसकी बुलाहट। तू अपने आपको जिस नाम से जानता है, क्या परमेश्वर तुझे उसी नाम से बुलाता है?
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