अनुग्रह क्या है: परमेश्वर की अनमोल कृपा का अर्थ और सामर्थ्य
परिचय
रात के ग्यारह बजे हैं। बर्तन धुल चुके हैं, बच्चे सो गए हैं, और आप रसोई की बत्ती बुझाने से पहले एक पल वहीं खड़े रह जाते हैं। दिनभर की बातें मन में घूमती हैं: वह झुंझलाहट, वह झूठ जिसे आपने संभाल लिया, वह पुरानी आदत जो आज फिर लौट आई। और भीतर से एक आवाज़ उठती है, "परमेश्वर अब तक तो थक गए होंगे।"
यह पन्ना उसी क्षण के लिए लिखा गया है। अनुग्रह बाइबल के सबसे मीठे शब्दों में से एक है, फिर भी हम में से बहुत लोग इसे ऐसे जीते हैं जैसे यह कोई नाज़ुक चीज़ हो जो हमारी गलतियों से टूट सकती है। आगे आप देखेंगे कि अनुग्रह क्या है, यह उत्पत्ति से प्रकाशितवाक्य तक कैसे बहता है, कौन-सी गलतफ़हमियाँ इसे छोटा कर देती हैं, और यह आपके सोमवार की सुबह को कैसे बदल सकता है।
इस मार्गदर्शिका का दृष्टिकोण
अनुग्रह को अक्सर "दूसरा मौका" कहकर समझाया जाता है। यह पन्ना जानबूझकर उससे आगे जाता है: बाइबल के अनुसार अनुग्रह दूसरा मौका नहीं, नई सृष्टि है। दूसरा मौका पुराने इंसान को एक और कोशिश देता है; अनुग्रह उस इंसान को मसीह में नया जन्म देता है। दूसरा मौका आपके हाथ में पड़ता है और आपकी मेहनत पर टिका रहता है; अनुग्रह परमेश्वर के हाथ में रहता है और उनकी सामर्थ्य पर टिका रहता है। यह भेद छोटा नहीं है। जो लोग अनुग्रह को केवल मौका समझते हैं, वे थक जाते हैं। जो इसे नई सृष्टि समझते हैं, वे आराम पाते हैं और फिर उस आराम में से काम करते हैं।
बाइबल अनुग्रह के बारे में क्या कहती है?
बाइबल का सबसे सघन, सबसे साफ़ वाक्य इफिसियों 2:8 में है: "क्योंकि विश्वास के द्वारा अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है, और यह तुम्हारी ओर से नहीं, वरन् परमेश्वर का दान है।" यहाँ तीन बातें एक साथ कही गई हैं। पहली, उद्धार का स्रोत अनुग्रह है, हमारी योग्यता नहीं। दूसरी, उसे पाने का रास्ता विश्वास है, यानी खुली हथेली, न कि भरी हुई मुट्ठी। तीसरी, वह पूरी चीज़ "परमेश्वर का दान" है। दान की परिभाषा ही यह है कि उसकी कीमत लेने वाला नहीं चुकाता।
पौलुस इसे यहीं नहीं छोड़ते। दो पद बाद वे लिखते हैं, "क्योंकि हम उसी के बनाए हुए हैं; और मसीह यीशु में इसलिये सृजे गए कि भले काम करें, जो परमेश्वर ने पहले से हमारे करने के लिये तैयार किए" (इफिसियों 2:10)। ध्यान दें: "सृजे गए।" यह उत्पत्ति की भाषा है। अनुग्रह मरम्मत का काम नहीं, सृष्टि का काम है। उसी पत्री में पौलुस कहते हैं कि हम "अपराधों के कारण मरे हुए थे" (इफिसियों 2:5), और मरे हुए इंसान को दूसरा मौका नहीं चाहिए होता; उसे जीवन चाहिए होता है।
यही बात 2 कुरिन्थियों 5:17 में गूँजती है: "इसलिये यदि कोई मसीह में है तो वह नई सृष्टि है: पुरानी बातें बीत गईं; देखो, सब बातें नई हो गई हैं।" अनुग्रह पुराने जीवन पर सफ़ेद रंग नहीं पोतता, वह नई नींव रखता है।
अनुग्रह कितना बड़ा है, यह रोमियों 5:20 बताता है: "फिर व्यवस्था बीच में आ गई, कि अपराध बहुत हों, परन्तु जहाँ पाप बहुत हुआ, वहाँ अनुग्रह उससे भी कहीं अधिक हुआ।" यह पद हमारे सबसे गहरे डर का उत्तर है। हमें लगता है कि पाप और अनुग्रह के बीच कोई बराबरी की कुश्ती चल रही है, और कभी-कभी पाप जीत सकता है। पौलुस कहते हैं, नहीं; जहाँ पाप बढ़ा, वहाँ अनुग्रह उससे भी कहीं ज़्यादा बढ़ा। अनुग्रह पाप के पीछे-पीछे नहीं चलता, वह उससे आगे निकल जाता है।
और अनुग्रह छिपी हुई चीज़ नहीं है। तीतुस 2:11 कहता है: "क्योंकि परमेश्वर का वह अनुग्रह प्रगट हुआ है, जो सब मनुष्यों के उद्धार का कारण है।" "प्रगट हुआ" का अर्थ है कि अनुग्रह केवल परमेश्वर के मन का एक भाव नहीं रहा, वह इतिहास में आया, एक चेहरा लेकर, एक नाम लेकर। अगला पद जोड़ता है कि यही अनुग्रह "हमें चिताता है, कि हम अभक्ति और सांसारिक अभिलाषाओं से मन फेरकर इस युग में संयम और धार्मिकता और भक्ति से जीवन बिताएँ।" अनुग्रह केवल क्षमा नहीं देता, वह शिक्षक बनकर हमें नए ढंग से जीना सिखाता है।
अनुग्रह का माप क्या है? यूहन्ना 1:16: "क्योंकि उसकी परिपूर्णता से हम सब ने पाया, अर्थात् अनुग्रह पर अनुग्रह।" यह लहरों जैसी भाषा है। एक लहर उतरती है, दूसरी आ जाती है। अनुग्रह की आपूर्ति एक बार की खुराक नहीं, बहती हुई नदी है।
अनुग्रह घटता नहीं; वह लहर पर लहर बनकर आता है।
इब्रानी भाषा में अनुग्रह के लिए शब्द "हेन" है, यूनानी में "खारिस"। दोनों के पीछे एक ही चित्र है: झुकना। बड़ा नीचे झुकता है, छोटे को देता है, और लौटाने की कोई शर्त नहीं रखता। इसीलिए इब्रानियों 4:16 हमें बुलाता है, "इसलिये आओ, हम अनुग्रह के सिंहासन के निकट हियाव बाँधकर चलें, कि हम पर दया हो, और वह अनुग्रह पाएँ, जो आवश्यकता के समय हमारी सहायता करे।" सिंहासन डराता है; अनुग्रह का सिंहासन बुलाता है।
बाइबल में चलने वाला सूत्र
बाइबल में "अनुग्रह" शब्द पहली बार जिस जगह मिलता है, वह चौंकाने वाली है। संसार भ्रष्ट हो चुका है, हिंसा से भर चुका है, और परमेश्वर न्याय की घोषणा करते हैं। ठीक उसी अंधेरे में एक वाक्य चमकता है: "परन्तु यहोवा के अनुग्रह की दृष्टि नूह पर बनी रही" (उत्पत्ति 6:8)। ध्यान दीजिए, पाठ यह नहीं कहता कि नूह ने अनुग्रह कमाया। नूह ने अनुग्रह "पाया", और उसके बाद जल-प्रलय के पार एक नई दुनिया शुरू हुई। पहले ही बार में अनुग्रह अपना असली रंग दिखा देता है: यह सिर्फ़ किसी को बचाता नहीं, यह एक नई शुरुआत गढ़ता है। जहाज से निकलकर नूह एक नई सृष्टि में पैर रखता है, धुली हुई पृथ्वी पर, नई वाचा के इंद्रधनुष के नीचे।
इसके बाद यह सूत्र पूरे पुराने नियम में बुना जाता है। अब्राहम को बुलावा तब मिलता है जब वह मूर्तिपूजकों के बीच रहता है। इस्राएल को मिस्र से निकाला जाता है, इसलिए नहीं कि वह बड़ी जाति थी, बल्कि इसलिए कि परमेश्वर ने वाचा बाँधी थी। सोने के बछड़े के विद्रोह के बाद, जब इस्राएल के मिट जाने की बात होनी चाहिए थी, परमेश्वर स्वयं अपना नाम सुनाते हैं: "यहोवा, यहोवा, ईश्वर दयालु और अनुग्रहकारी, कोप करने में धीरजवन्त, और अति करुणामय और सत्य" (निर्गमन 34:6)। यह परमेश्वर का अपना आत्म-परिचय है, और उसमें अनुग्रह सबसे आगे खड़ा है।
दाऊद के भजनों में अनुग्रह पाप के कबूलनामे के साथ चलता है। भविष्यद्वक्ताओं में यह और भी तीखा हो जाता है: होशे को कहा जाता है कि वह बेवफ़ा पत्नी को लौटाकर प्रेम करे, ताकि इस्राएल समझे कि परमेश्वर का प्रेम कैसा है। बंधुआई के बाद जब लोग खंडहरों में लौटते हैं, तो जो चीज़ उन्हें फिर से जाति बनाती है, वह उनकी योग्यता नहीं, परमेश्वर की करुणा है।
और फिर सब कुछ एक व्यक्ति में इकट्ठा हो जाता है। यूहन्ना 1:14 कहता है कि वचन देहधारी हुआ "और अनुग्रह और सच्चाई से परिपूर्ण होकर हमारे बीच में डेरा किया", और पद 17 जोड़ता है, "इसलिये कि व्यवस्था तो मूसा के द्वारा दी गई, परन्तु अनुग्रह और सच्चाई यीशु मसीह के द्वारा पहुँची।" इसके बाद अनुग्रह कोई विचार नहीं रहता, वह चलता-फिरता है, कुष्ठियों को छूता है, चुंगी लेने वालों के घर भोजन करता है, पत्थर उठाए हाथों के बीच एक स्त्री के आगे खड़ा हो जाता है। क्रूस पर अनुग्रह की कीमत दिखती है, और खाली कब्र में उसकी सामर्थ्य।
प्रेरितों के पत्रों में यह सूत्र फैलता है: सेंतमेंत धर्मी ठहराया जाना (रोमियों 3:24), अनुग्रह से बुलाया जाना (गलातियों 1:15), अनुग्रह से सेवा के लिए सामर्थ्य पाना (1 कुरिन्थियों 15:10)। और बाइबल का अंतिम वाक्य, प्रकाशितवाक्य 22:21, यही है: "प्रभु यीशु मसीह का अनुग्रह पवित्र लोगों के साथ रहे। आमीन।" जो शब्द जल-प्रलय के अंधेरे में पहली बार चमका था, वही शब्द पूरे पवित्रशास्त्र को विदा देता है। उत्पत्ति में अनुग्रह ने एक परिवार को नई दुनिया में उतारा; प्रकाशितवाक्य में वह पूरी सृष्टि को नया करता है। यही तो वह सूत्र है: अनुग्रह कभी केवल माफ़ी देकर रुकता नहीं, वह हमेशा कुछ नया रचता है।
आम भ्रांतियाँ
पहली भ्रांति: अनुग्रह का मतलब है कि परमेश्वर ने पाप को गंभीरता से लेना छोड़ दिया। यह सबसे पुरानी शिकायत है, और पौलुस इसका जवाब सीधे देते हैं: "तो हम क्या कहें? क्या हम पाप करते रहें कि अनुग्रह बहुत हो? कदापि नहीं! हम जो पाप के लिये मर गए, कैसे उसमें आगे को जीवन बिताएँ?" (रोमियों 6:1-2)। क्रूस को देखिए और बताइए कि परमेश्वर पाप को हल्का लेते हैं। अनुग्रह पाप की कीमत घटाता नहीं, वह उसे चुकाता है। और तीतुस 2:11-12 के अनुसार यही अनुग्रह हमारा शिक्षक बनकर हमें संयम और भक्ति सिखाता है। जो अनुग्रह पाप को आरामदेह बना देता है, वह बाइबल का अनुग्रह नहीं।
दूसरी भ्रांति: पहले अपने को सुधारो, फिर अनुग्रह मिलेगा। यह हमारे मन को सबसे स्वाभाविक लगता है, और यही सबसे बड़ा झूठ है। इफिसियों 2:8 कहता है, "यह तुम्हारी ओर से नहीं, वरन् परमेश्वर का दान है।" रोमियों 5:8 जोड़ता है कि मसीह हमारे लिए तब मरे जब हम पापी ही थे। अगर अनुग्रह पाने के लिए पहले सुधरना ज़रूरी होता, तो नूह को "अनुग्रह पाया" न कहा जाता, बल्कि "अनुग्रह अर्जित किया" कहा जाता। दान को कमाने की कोशिश उसका अपमान है। आप साफ़ होकर स्नान करने नहीं जाते; आप स्नान करने जाते हैं ताकि साफ़ हों।
तीसरी भ्रांति: मेरा पाप अनुग्रह से बड़ा है। यह भ्रांति विनम्रता का मुखौटा पहनकर आती है, पर भीतर से यह अविश्वास है। रोमियों 5:20 की भाषा नापने लायक नहीं है: "जहाँ पाप बहुत हुआ, वहाँ अनुग्रह उससे भी कहीं अधिक हुआ।" जिस आदमी ने यह लिखा, उसने पहले कलीसिया को उजाड़ा था। पौलुस अपने बारे में लिखते हैं, "परन्तु परमेश्वर के अनुग्रह से मैं जो कुछ हूँ, वह हूँ" (1 कुरिन्थियों 15:10)। अगर अनुग्रह उस आदमी को प्रेरित बना सकता है, तो आपकी सूची भी उसके लिए बहुत लंबी नहीं है।
चौथी भ्रांति: अनुग्रह का मतलब है कि मेरी कमज़ोरी और दर्द हट जाएगा। पौलुस ने तीन बार प्रार्थना की कि उनका काँटा निकल जाए, और उत्तर मिला: "मेरा अनुग्रह तेरे लिये बहुत है; क्योंकि मेरी सामर्थ्य निर्बलता में सिद्ध होती है" (2 कुरिन्थियों 12:9)। काँटा नहीं हटा, पर पौलुस बदल गए। अनुग्रह ने परिस्थिति नहीं बदली, उसने इंसान को नया कर दिया, इतना कि वे अपनी निर्बलताओं पर घमण्ड करने लगे। यहाँ भी वही सूत्र है: अनुग्रह आपको आसान ज़िंदगी का दूसरा मौका नहीं देता, वह आपको एक ऐसा नया जीवन देता है जो कमज़ोरी के बीच भी खड़ा रह सकता है, क्योंकि उसकी ताक़त कहीं और से आती है।
आज इसे जीवन में उतारना
काम की जगह पर सोचिए। आप अपनी पहचान अपने प्रदर्शन से बनाते हैं, इसलिए हर आलोचना जान पर लगती है और हर तारीफ़ नशे जैसी लगती है। अनुग्रह इस चक्र को तोड़ता है, क्योंकि आपकी सबसे गहरी पहचान किसी रिपोर्ट में नहीं, मसीह में है। जो आदमी जानता है कि वह पहले से स्वीकारा गया है, वह बेहतर काम करता है, क्योंकि वह डर से नहीं, कृतज्ञता से काम करता है। इफिसियों 2:10 का क्रम याद रखिए: पहले सृजे गए, फिर भले काम। कार्य पहचान बनाता नहीं, पहचान से निकलता है।
परिवार में यह और साफ़ दिखता है। जिस माता-पिता ने कल रात चिल्लाकर बच्चों को डरा दिया, उनके लिए दूसरा मौका काफ़ी नहीं है; दूसरा मौका तो वे पिछले हफ़्ते भी ले चुके थे। जो चीज़ असल में बदलती है, वह है अनुग्रह से मिली नई सामर्थ्य: क्षमा माँगने की हिम्मत, और अपने बच्चों को उसी नाप से मापना छोड़ देना जिससे परमेश्वर ने आपको नहीं मापा। जिस घर में अनुग्रह बहता है, वहाँ गलतियाँ छिपाई नहीं जातीं; वहाँ उन्हें सामने लाया जा सकता है।
पैसे के मामले में अनुग्रह मुट्ठी खोलता है। जो मानता है कि उसके पास जो कुछ है वह दान है, वह देने में डरता नहीं। और शरीर के मामले में, बीमारी, बुढ़ापा, पुरानी थकान, यहाँ 2 कुरिन्थियों 12:9 रोज़ का सहारा बन जाता है। बहुत लोग इसे इलाज न मिलने पर हार मानकर बोलते हैं; असल में यह पौलुस का विजय-गीत था।
अकेलेपन में अनुग्रह का रूप बदलता है। जब कोई फ़ोन नहीं करता, तब इब्रानियों 4:16 का निमंत्रण याद कीजिए कि अनुग्रह के सिंहासन तक हियाव बाँधकर जाना है। प्रार्थना उस समय सबसे ज़्यादा ज़रूरी होती है जब हम उसके लायक सबसे कम महसूस करते हैं।
और समय के मामले में: अनुग्रह आपको यह आज़ादी देता है कि आप सब कुछ नहीं कर सकते, और यह ठीक है। परमेश्वर आपको सब्त देते हैं, मशीन को नहीं देते। यूहन्ना 1:16 के अनुसार जो चाहिए वह "अनुग्रह पर अनुग्रह" है, यानी आज के लिए आज का अनुग्रह, कल के लिए कल का। कल की चिंता को आज के अनुग्रह से चुकाने की कोशिश मत कीजिए।
आज का अनुग्रह आज के लिए है, कल के लिए नहीं।
दर्पण
अब मैं सीधे आपसे बात करूँ। आप जानते हैं कि आपके भीतर एक हिसाब-किताब की कॉपी चलती रहती है। उसमें एक तरफ़ आपकी सेवाएँ, आपकी प्रार्थनाएँ, आपका उपवास, आपका दान लिखा जाता है, और दूसरी तरफ़ आपकी असफलताएँ। जिस दिन पलड़ा भारी लगता है, आप परमेश्वर के सामने सिर उठाकर खड़े होते हैं। जिस दिन हल्का लगता है, आप उनसे नज़रें चुराते हैं, चर्च में पीछे बैठते हैं, प्रार्थना छोटी कर देते हैं। वह कॉपी ही आपकी थकान की जड़ है।
अनुग्रह उस कॉपी को ठीक नहीं करता, वह उसे फाड़ देता है। आप उस दिन भी उतने ही प्रिय थे जब आपने कुछ नहीं किया, और उस दिन भी उतने ही प्रिय हैं जब आपने वह किया जिसे आप किसी को बता नहीं सकते। यह सुनने में अच्छा लगता है, पर सच पूछिए तो यह चुभता भी है, क्योंकि इसका मतलब है कि आपकी धार्मिकता से परमेश्वर पर आपका कोई हक़ नहीं बनता। आपका अनुशासन आपको उस भाई से ऊँचा नहीं बनाता जिसके पाप ज़्यादा दिखाई देते हैं।
तो इसे ठोस बनाइए। उस रिश्ते के बारे में सोचिए जिसमें आप हिसाब रख रहे हैं, कि उसने कितनी बार माफ़ी माँगी और कितनी बार नहीं। उस पैसे के बारे में सोचिए जिसे आप इसलिए पकड़े हुए हैं क्योंकि भीतर कहीं लगता है कि सुरक्षा आपकी अपनी कमाई है। उस शरीर के बारे में सोचिए जिसे आप आईने में नापसंद करते हैं, जबकि वही शरीर पवित्र आत्मा का मंदिर कहलाया गया है। उस अकेली शाम के बारे में सोचिए जब आपने प्रार्थना इसलिए नहीं की क्योंकि आपको लगा कि आप गंदे हैं।
अनुग्रह आपको दूसरा मौका देने नहीं आया, कि "चलो एक बार और कोशिश कर लो।" वह आपको नया बनाने आया है। और नया बनना इसी से शुरू होता है कि आप खाली हाथ लौट आएँ, आज ही, बिना खुद को पहले सुधारे।
बच्चों के लिए समझाया गया
बच्चों को अनुग्रह समझाना उतना कठिन नहीं है जितना हम सोचते हैं, क्योंकि बच्चे उपहार की भाषा अच्छी तरह जानते हैं। सबसे सरल तरीक़ा यह है: उन्हें याद दिलाइए कि जन्मदिन पर मिलने वाला तोहफ़ा उन्होंने कमाया नहीं था, वह उन्हें इसलिए मिला क्योंकि किसी ने उनसे प्रेम किया। अनुग्रह ऐसा ही है, बस उससे कहीं बड़ा: परमेश्वर हमें वह देते हैं जिसके हम हक़दार नहीं, और उसका सबसे बड़ा तोहफ़ा यीशु मसीह हैं।
दूसरा चित्र और भी सुंदर है, और यह हमारे इस पन्ने के दृष्टिकोण से जुड़ा है। बच्चे से पूछिए: अगर कोई खिलौना टूट जाए तो क्या होता है? हम उसे जोड़ते हैं, और जोड़ पर निशान रह जाता है। पर परमेश्वर हमारे साथ सिर्फ़ जोड़-मरम्मत नहीं करते; वे हमें भीतर से नया बना देते हैं, जैसे किसी ने बिलकुल नया दिल दे दिया हो। यह बताते समय उत्पत्ति 6:8 की नूह की कहानी और यीशु का ज़क्कई के घर जाना दोनों काम आते हैं, क्योंकि दोनों में परमेश्वर पहले आते हैं और इंसान बाद में बदलता है।
ध्यान रखिए कि छोटे बच्चों को लंबी व्याख्या नहीं, एक पक्की तस्वीर चाहिए, जबकि बड़े बच्चे "फिर हम अच्छे काम क्यों करें" जैसे सवाल पूछेंगे। इसीलिए हमारे यहाँ अलग-अलग उम्र के लिए अलग सामग्री तैयार की गई है: छोटे बच्चों (3 से 6 वर्ष), स्कूल जाने वाले बच्चों (7 से 12 वर्ष) और किशोरों (12 वर्ष से ऊपर) के लिए अनुग्रह की अलग-अलग व्याख्याएँ उपलब्ध हैं। उन्हें उसी उम्र के हिसाब से पढ़ाइए, और फिर मिलकर प्रार्थना कीजिए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अनुग्रह का सरल अर्थ क्या है?
अनुग्रह का अर्थ है परमेश्वर की वह भलाई जो हमें बिना किसी योग्यता के, बिना किसी शर्त के मिलती है। इब्रानी शब्द "हेन" और यूनानी शब्द "खारिस" दोनों के पीछे एक ही चित्र है: बड़ा नीचे झुककर छोटे को देता है और बदले में कुछ नहीं माँगता। इफिसियों 2:8 इसे "परमेश्वर का दान" कहता है। बाइबल के अनुसार यह केवल क्षमा नहीं, बल्कि नया जीवन और नई सामर्थ्य भी है, इसलिए अनुग्रह को केवल "माफ़ी" कहकर समझना उसे छोटा कर देना है।
अनुग्रह और दया में क्या अंतर है?
दोनों परमेश्वर के प्रेम के दो पहलू हैं। दया का मतलब है कि परमेश्वर हमें वह सज़ा नहीं देते जिसके हम हक़दार थे, और अनुग्रह का मतलब है कि वे हमें वह देते हैं जिसके हम कभी हक़दार नहीं थे। दया दंड रोकती है, अनुग्रह आशीष उँडेलता है। निर्गमन 34:6 में परमेश्वर अपने आत्म-परिचय में दोनों को साथ रखते हैं, "दयालु और अनुग्रहकारी"। सुसमाचार में ये दोनों क्रूस पर मिलते हैं: वहाँ हमारा दंड हट जाता है और परमेश्वर की संतान होने का अधिकार मिल जाता है।
क्या अनुग्रह पूरी तरह मुफ़्त है या मुझे कुछ करना पड़ता है?
अनुग्रह हमारे लिए पूरी तरह मुफ़्त है, पर वह सस्ता नहीं है; उसकी कीमत मसीह ने अपने लहू से चुकाई। इफिसियों 2:8 साफ़ कहता है कि उद्धार "तुम्हारी ओर से नहीं, वरन् परमेश्वर का दान है"। हमारी ओर से केवल एक ही चीज़ होती है, विश्वास, और वह भी कोई कमाई नहीं बल्कि खाली हाथ फैलाना है। जो लोग पहले खुद को सुधारकर अनुग्रह के योग्य बनना चाहते हैं, वे कभी तैयार नहीं हो पाते, क्योंकि दान कमाने की चीज़ नहीं, लेने की चीज़ है।
बाइबल में "अनुग्रह" शब्द पहली बार कहाँ आता है?
उत्पत्ति 6:8 में, और वह जगह बड़ी अर्थपूर्ण है: "परन्तु यहोवा के अनुग्रह की दृष्टि नूह पर बनी रही।" यह वाक्य उस समय आता है जब पूरी पृथ्वी की भ्रष्टता और आने वाले न्याय का वर्णन हो रहा है। ध्यान दीजिए कि पाठ यह नहीं कहता कि नूह ने अनुग्रह अर्जित किया; उसने अनुग्रह पाया। और उस अनुग्रह का परिणाम केवल बचाव नहीं था, बल्कि जल-प्रलय के पार एक नई शुरुआत थी। पहली ही बार में अनुग्रह अपना असली स्वभाव दिखा देता है: वह नया रचता है।
इफिसियों 2:8 का असली अर्थ क्या है?
यह पद कहता है, "क्योंकि विश्वास के द्वारा अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है, और यह तुम्हारी ओर से नहीं, वरन् परमेश्वर का दान है।" इसमें उद्धार का कारण अनुग्रह है, माध्यम विश्वास है, और स्रोत परमेश्वर हैं। "तुम्हारी ओर से नहीं" शब्द हर तरह के धार्मिक घमंड की जड़ काट देते हैं। और अगले पदों में पौलुस जोड़ते हैं कि हम मसीह यीशु में "सृजे गए" हैं, यानी अनुग्रह पुराने इंसान की मरम्मत नहीं करता, वह नई सृष्टि खड़ी करता है।
क्या अनुग्रह का मतलब यह है कि अब पाप से कोई फ़र्क नहीं पड़ता?
बिलकुल नहीं। पौलुस ने यही सवाल खुद उठाया और सख़्ती से उत्तर दिया: "क्या हम पाप करते रहें कि अनुग्रह बहुत हो? कदापि नहीं!" (रोमियों 6:1-2)। तीतुस 2:11 के बाद अगला पद बताता है कि यही अनुग्रह हमें सिखाता है कि हम अभक्ति और सांसारिक अभिलाषाओं से मन फेरकर संयम और भक्ति से जीवन बिताएँ। सच्चा अनुग्रह पाप को आसान नहीं बनाता, वह उसे बेस्वाद बना देता है, क्योंकि वह हृदय ही बदल देता है।
2 कुरिन्थियों 12:9 में "मेरा अनुग्रह तेरे लिये बहुत है" का क्या मतलब है?
पौलुस ने तीन बार प्रार्थना की कि उनके शरीर का काँटा हटा दिया जाए। उत्तर मिला, "मेरा अनुग्रह तेरे लिये बहुत है; क्योंकि मेरी सामर्थ्य निर्बलता में सिद्ध होती है।" यानी परमेश्वर ने समस्या नहीं हटाई, पर उसमें रहने की सामर्थ्य दी। यह पद उन सबके लिए है जो पुरानी बीमारी, लगातार संघर्ष या ऐसी सीमा के साथ जी रहे हैं जो जाने का नाम नहीं लेती। अनुग्रह यहाँ कोई सांत्वना-पुरस्कार नहीं है; यह वह सामर्थ्य है जो कमज़ोरी में सबसे साफ़ दिखाई देती है।
"अनुग्रह पर अनुग्रह" का क्या अर्थ है?
यूहन्ना 1:16 कहता है, "क्योंकि उसकी परिपूर्णता से हम सब ने पाया, अर्थात् अनुग्रह पर अनुग्रह।" यहाँ चित्र लहरों का है: एक अनुग्रह की जगह दूसरा आता है, फिर तीसरा, बिना रुके। इसका अर्थ है कि मसीह में परमेश्वर की भलाई की आपूर्ति कभी ख़त्म नहीं होती, और हमें रोज़-रोज़ नया अनुग्रह मिलता है। यह व्यावहारिक रूप से बहुत राहत देता है, क्योंकि आपको कल की ताक़त आज नहीं चाहिए; आपको आज के लिए आज का अनुग्रह चाहिए, और वह मौजूद है।
क्या पुराने नियम में भी अनुग्रह था, या वह केवल नए नियम की बात है?
पुराना नियम अनुग्रह से भरा हुआ है। "अनुग्रह" शब्द पहली बार उत्पत्ति 6:8 में आता है, और निर्गमन 34:6 में परमेश्वर स्वयं को "दयालु और अनुग्रहकारी" कहकर प्रकट करते हैं। इस्राएल को चुना जाना, बंधुआई से छुड़ाया जाना और बार-बार क्षमा पाना, यह सब अनुग्रह ही था। यूहन्ना 1:17 यह नहीं कहता कि पहले अनुग्रह नहीं था, बल्कि यह कि "अनुग्रह और सच्चाई यीशु मसीह के द्वारा पहुँची", यानी जो पहले वादों और छायाओं में था, वह मसीह में पूरी तरह प्रकट हुआ।
अनुग्रह और व्यवस्था का आपस में क्या संबंध है?
व्यवस्था परमेश्वर की पवित्रता का आईना है; वह दिखाती है कि हम कहाँ खरे नहीं उतरते, पर वह हमें बदल नहीं सकती। रोमियों 5:20 कहता है कि व्यवस्था इसलिए बीच में आई कि अपराध बहुत हों, "परन्तु जहाँ पाप बहुत हुआ, वहाँ अनुग्रह उससे भी कहीं अधिक हुआ।" यानी व्यवस्था बीमारी की पहचान कराती है और अनुग्रह इलाज देता है। मसीही जीवन में व्यवस्था बेकार नहीं होती; वह अब डर की मालकिन नहीं, बल्कि कृतज्ञता से चलने वाले जीवन की राह दिखाने वाली बन जाती है।
क्या मैं परमेश्वर का अनुग्रह खो सकता हूँ?
अनुग्रह परमेश्वर की पकड़ पर टिका है, हमारी पकड़ पर नहीं, और यही उसकी सबसे बड़ी सांत्वना है। जो उद्धार हमारे कामों से नहीं मिला, वह हमारे कामों से खोया भी नहीं जा सकता। फिर भी नया नियम चेतावनी देता है कि हम अनुग्रह को व्यर्थ न करें और उससे दूर न भटकें, इसलिए यह लापरवाही का बहाना नहीं है। अगर आपके मन में यह डर उठता है, तो यह अपने आप में एक अच्छा संकेत है; जो सचमुच अनुग्रह से गिर चुका होता, उसे इसकी परवाह ही न होती।
"सस्ता अनुग्रह" क्या होता है?
सस्ता अनुग्रह वह है जिसमें क्षमा तो ली जाती है, पर मन फिराव नहीं होता; जिसमें क्रूस की बात होती है, पर अपना क्रूस उठाने की नहीं। ऐसा अनुग्रह दरअसल अनुग्रह है ही नहीं, वह अपने आप को दी गई छूट है। असली अनुग्रह मुफ़्त है पर मुफ़्तखोरी नहीं; वह लेने वाले को बदल देता है। तीतुस 2:11-12 इसी को दिखाता है: वही अनुग्रह जो उद्धार लाता है, वही हमें नए ढंग से जीना भी सिखाता है।
मैं कैसे जानूँ कि परमेश्वर का अनुग्रह मुझ पर है?
इसका उत्तर अपनी भावनाओं में मत खोजिए, वचन में खोजिए। तीतुस 2:11 कहता है कि परमेश्वर का अनुग्रह प्रगट हुआ है, और वह "सब मनुष्यों के उद्धार का कारण" है, यानी वह छिपा हुआ या चुनिंदा लोगों तक सीमित रहस्य नहीं है। यदि आप मसीह पर भरोसा करते हैं, तो अनुग्रह आपका है, चाहे आज आपका मन कुछ भी कहे। साथ ही अनुग्रह अपने निशान छोड़ता है: पाप पर दुख, क्षमा करने की चाह, प्रार्थना की भूख और परमेश्वर के लोगों से प्रेम।
अंत में
जिस बात के साथ हमने शुरुआत की थी, उसी पर लौटते हैं: अनुग्रह दूसरा मौका नहीं है। दूसरा मौका आपको वहीं छोड़ देता है जहाँ आप थे, बस थोड़ी और उम्मीद के साथ। अनुग्रह आपको उठाकर मसीह में रख देता है और कहता है कि पुरानी बातें बीत गईं। नूह के लिए वह जहाज़ के पार की नई दुनिया थी, पौलुस के लिए वह काँटे के बीच मिली नई सामर्थ्य थी, और आपके लिए वह वही नई सृष्टि है जिसका वादा 2 कुरिन्थियों 5:17 में किया गया है।
इसलिए आज की प्रार्थना बड़ी सरल हो सकती है। परमेश्वर को अपनी उपलब्धियों की सूची सुनाने के बजाय, खाली हाथ उनके सामने जाइए और इफिसियों 2:8 को ऊँची आवाज़ में पढ़िए, फिर रोमियों 5:20 को, फिर यूहन्ना 1:16 को। इन तीन पदों को इस हफ़्ते अपने साथ रखिए, एक-एक करके, धीरे-धीरे।
खाली हाथ ही अनुग्रह पाने का एकमात्र सही तरीक़ा है।
और अगर आप और गहरे जाना चाहें, तो रोमियों के पाँचवें और छठे अध्याय को साथ-साथ पढ़िए। वहाँ आप देखेंगे कि अनुग्रह क्षमा पर रुकता नहीं; वह चलता है, बदलता है, और अंत तक साथ जाता है, ठीक उस अंतिम वाक्य तक जिससे पूरी बाइबल विदा लेती है।
