विषय

बपतिस्मा क्या है: बाइबल के अनुसार अर्थ और महत्व

परिचय

कल्पना कीजिए एक आदमी नदी के किनारे खड़ा है। उसका कुर्ता पानी में भीगने ही वाला है। पीछे किनारे पर उसका परिवार खड़ा है, कुछ लोग आँसू पोंछ रहे हैं, कुछ नाराज़ हैं। उसके मुहल्ले के लोग कह रहे हैं, "अब यह हमारा नहीं रहा।" वह आदमी जानता है कि जब वह इस पानी से बाहर निकलेगा, तो उसका नाम, उसकी पहचान, उसकी वफ़ादारी, सब कुछ किसी और के हाथ में होगा। और फिर भी वह मुस्कुरा रहा है।

यही बपतिस्मा है। यह किसी चर्च की औपचारिकता नहीं, यह एक सार्वजनिक अदला-बदली है। पुराना जीवन पानी में छोड़ा जाता है और नया जीवन मसीह के नाम में उठाया जाता है।

इस पृष्ठ पर आप जानेंगे कि बपतिस्मा का असली अर्थ क्या है, यह बाइबल के पहले पन्नों से लेकर अंतिम पन्नों तक किस तरह बुना गया है, कौन-कौन सी ग़लतफ़हमियाँ लोगों को उलझाती हैं, और यह आपके अपने रोज़मर्रा के जीवन में क्या फ़र्क़ लाता है।

इस मार्गदर्शिका का दृष्टिकोण

अधिकतर लेख बपतिस्मा को "विश्वास की गवाही" कहकर आगे बढ़ जाते हैं। हम यहाँ एक ज़्यादा तीखी बात पर टिके रहेंगे: बपतिस्मा का पानी एक स्नान-कुण्ड नहीं, एक कब्र है। पौलुस इसे साफ़ शब्दों में मृत्यु और गाड़े जाने की भाषा में समझाते हैं। इसका अर्थ है कि बपतिस्मा आपकी धार्मिक उपलब्धि पर लगी मुहर नहीं, बल्कि मसीह के पूरे किए हुए काम पर परमेश्वर का हस्ताक्षर है। जब हम इसे कब्र की तरह देखते हैं, तो दो चीज़ें बदल जाती हैं: हम इसे हल्का नहीं लेते, और हम इसे अपनी योग्यता का प्रमाणपत्र भी नहीं बनाते। मरे हुए लोग शेखी नहीं मार सकते। वे केवल जिलाए जा सकते हैं।

बाइबल बपतिस्मा के बारे में क्या कहती है?

बपतिस्मा शब्द यूनानी भाषा के एक शब्द से आया है जिसका अर्थ है डुबोना, भिगोना, पूरी तरह किसी चीज़ में समा जाना। कपड़े को रंग में डुबोया जाता था और वह उसी रंग का हो जाता था। यही तस्वीर बाइबल में विश्वासी के लिए इस्तेमाल होती है: वह मसीह में डुबोया जाता है और मसीह के रंग में रंग जाता है।

प्रभु यीशु की अंतिम आज्ञाओं में बपतिस्मा साफ़-साफ़ शामिल है। मत्ती 28:19 में वे कहते हैं, "इसलिये तुम जाकर सब जातियों के लोगों को चेला बनाओ और उन्हें पिता और पुत्र और पवित्र आत्मा के नाम से बपतिस्मा दो।" ध्यान दीजिए, यह सुझाव नहीं है। चेला बनाने की प्रक्रिया में बपतिस्मा बुना हुआ है। और यह किसी संप्रदाय के नाम से नहीं, बल्कि त्रिएक परमेश्वर के नाम से होता है। "नाम से" का अर्थ है अधिकार में और स्वामित्व में। जैसे किसी दस्तावेज़ पर किसी का नाम लिखने से मालिकाना हक़ बदल जाता है, वैसे ही बपतिस्मा में व्यक्ति सार्वजनिक रूप से परमेश्वर के नाम पर लिख दिया जाता है।

मरकुस 16:16 में यीशु कहते हैं, "जो विश्वास करे और बपतिस्मा ले उसी का उद्धार होगा, परन्तु जो विश्वास न करेगा वह दोषी ठहराया जाएगा।" इस पद को ग़ौर से पढ़िए। दोष का आधार बपतिस्मा न लेना नहीं, बल्कि विश्वास न करना बताया गया है। विश्वास और बपतिस्मा साथ-साथ चलते हैं जैसे शादी और शादी की अंगूठी साथ चलती है; अंगूठी विवाह नहीं बनाती, परन्तु जो व्यक्ति विवाह करके अंगूठी पहनने से इनकार कर दे, उसके प्रेम पर सवाल तो उठेगा।

पिन्तेकुस्त के दिन जब भीड़ का दिल छिद गया और उन्होंने पूछा कि हम क्या करें, तो प्रेरितों के काम 2:38 में पतरस का उत्तर आया, "मन फिराओ, और तुम में से हर एक अपने अपने पापों की क्षमा के लिये यीशु मसीह के नाम से बपतिस्मा ले; तो तुम पवित्र आत्मा का दान पाओगे।" यहाँ तीन चीज़ें एक गुच्छे में बँधी हैं: मन फिराना, बपतिस्मा, और आत्मा का दान। पतरस उन्हें छह महीने का प्रशिक्षण पूरा करने को नहीं कहते। वे उसी दिन, उसी जगह, तीन हज़ार लोगों को पानी में ले जाते हैं।

और अब उस पद पर आइए जो इस पूरे पृष्ठ की धुरी है। रोमियों 6:3-4 कहता है, "क्या तुम नहीं जानते कि हम जितनों ने मसीह यीशु का बपतिस्मा लिया तो उसकी मृत्यु का बपतिस्मा लिया? अतः उस मृत्यु का बपतिस्मा पाने से हम उसके साथ गाड़े गए, ताकि जैसे मसीह पिता की महिमा के द्वारा मरे हुओं में से जिलाया गया, वैसे ही हम भी नए जीवन की सी चाल चलें।" पौलुस पानी को साबुन की तरह नहीं, मिट्टी की तरह देखते हैं। नीचे जाना दफ़नाया जाना है, ऊपर आना जी उठना है।

पानी में उतरना मरना है, पानी से उठना जीना है।

इसी कारण गलातियों 3:27 में एक और तस्वीर आती है: "क्योंकि तुम में से जितनों ने मसीह में बपतिस्मा लिया है उन्होंने मसीह को पहिन लिया है।" पुराने, फटे, गंदे कपड़े कब्र में छोड़ दिए गए; बाहर आते ही मसीह का वस्त्र पहनाया गया। यह वह वस्त्र है जो परमेश्वर देखते हैं जब वे आपको देखते हैं।

और 1 पतरस 3:21 सबसे ज़्यादा ग़लत समझा जाने वाला पद है: "उसी का दृष्टान्त भी, अर्थात् बपतिस्मा, यीशु मसीह के जी उठने के द्वारा, अब तुम्हारा उद्धार करता है; उससे शरीर के मैल को दूर करने का अर्थ नहीं है, परन्तु शुद्ध विवेक से परमेश्वर के वश में हो जाने का अर्थ है।" पतरस बपतिस्मा को उद्धार से जोड़ते हैं, लेकिन उसी साँस में जादू की सोच को काट देते हैं। पानी शरीर की गंदगी धोता है, पाप नहीं। जो बचाता है वह है यीशु मसीह का जी उठना, और बपतिस्मा उस पुनरुत्थान की ओर बढ़ा हुआ हाथ है, एक शुद्ध विवेक की गुहार, एक आत्मसमर्पण।

बाइबल में चलने वाला सूत्र

बाइबल की पहली पंक्तियों में ही परमेश्वर का आत्मा पानी पर मंडरा रहा है, और उस पानी में से जीवन और व्यवस्था निकलती है। यह संयोग नहीं है। पूरे पवित्रशास्त्र में पानी दो काम करता है: वह पुराने को खत्म करता है और नए को जन्म देता है।

नूह के दिनों की जलप्रलय में एक पूरी दुनिया दफ़न हो गई और एक जहाज़ में से नई मानवता बाहर निकली। पतरस इसी घटना को बपतिस्मा का दृष्टान्त कहते हैं। मूसा के दिनों में इस्राएल लाल समुद्र में से निकला; उनके लिए वही पानी मुक्ति का रास्ता बना और फ़िरौन की सेना के लिए कब्र। पौलुस 1 कुरिन्थियों 10:1-2 में कहते हैं कि वे सब बादल और समुद्र में बपतिस्मा पा गए। मिस्र की दासता समुद्र के उस पार रह गई, और उधर से जो निकले वे परमेश्वर की जनता कहलाए।

फिर यरदन नदी आती है। एक पीढ़ी जंगल में खप गई, और नई पीढ़ी पानी में से चलकर प्रतिज्ञा के देश में घुसी। नामान नाम का सीरियाई सेनापति उसी यरदन में सात बार डुबकी लगाकर कोढ़ से शुद्ध हुआ, और उसका घमंड भी उसी पानी में रह गया। मंदिर की सेवा में हारून और उसके पुत्रों को याजक बनने से पहले पानी से धोया जाता था। भविष्यद्वक्ता यहेजकेल के द्वारा परमेश्वर ने वादा किया कि वे अपने लोगों पर शुद्ध जल छिड़केंगे, उनका पत्थर का हृदय निकाल कर माँस का हृदय देंगे, और अपना आत्मा उनमें डालेंगे। यह भीतर से किया जाने वाला काम है, जिसकी बाहरी निशानी बपतिस्मा है।

नए नियम की शुरुआत में यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाला उसी यरदन में खड़ा है, मन फिराव का बपतिस्मा देते हुए। और तभी वह होता है जिसकी किसी को अपेक्षा नहीं थी: निष्पाप परमेश्वर का पुत्र पापियों की कतार में लग जाते हैं। यीशु का बपतिस्मा उनके पाप धोने के लिए नहीं था, बल्कि हमारे साथ खड़े होने के लिए था। वहाँ स्वर्ग खुला, आत्मा उतरा, और पिता की आवाज़ आई। बाद में यीशु अपने क्रूस को ही एक बपतिस्मा कहते हैं, जिसे उन्हें लेना ही था। असली डुबकी गुलगुता पर लगी; वहाँ परमेश्वर के क्रोध की गहराई में वे उतरे और तीसरे दिन उठे।

इसलिए हमारा बपतिस्मा कुछ नया आविष्कार नहीं, बल्कि उनके बपतिस्मा में हिस्सेदारी है। कुलुस्सियों 2:11-12 खतने और बपतिस्मा को जोड़ता है: पुराने नियम में शरीर पर लगाया गया चिह्न अब मसीह के साथ गाड़े जाने और जिलाए जाने की निशानी में बदल गया। प्रेरितों के काम में यह सूत्र आगे बढ़ता है: कुशी खोजा रथ से उतरकर पानी में जाता है, कुरनेलियुस का घराना आत्मा पाकर बपतिस्मा लेता है, फिलिप्पी का जेलर आधी रात को अपने सारे घराने के साथ बपतिस्मा लेता है। और अंत में प्रकाशितवाक्य में हम एक ऐसी भीड़ देखते हैं जिनके वस्त्र मेम्ने के लहू में धोकर उजले किए गए हैं, और सिंहासन से बहती जीवन के जल की नदी।

आरंभ के पानी से अंत की नदी तक, एक ही कहानी।

आम भ्रांतियाँ

पहली भ्रांति: पानी में कोई शक्ति है। बहुत लोग सोचते हैं कि बपतिस्मा का पानी अपने आप में पवित्र है, किसी मंत्र या ताबीज़ की तरह काम करता है, और एक बार शरीर भीग गया तो काम पक्का हो गया, चाहे हृदय जैसा भी हो। 1 पतरस 3:21 इस सोच को सीधे काट देता है: "उससे शरीर के मैल को दूर करने का अर्थ नहीं है, परन्तु शुद्ध विवेक से परमेश्वर के वश में हो जाने का अर्थ है।" पानी नहीं, मसीह का लहू शुद्ध करता है। क्रूस पर लटके डाकू ने कभी बपतिस्मा नहीं लिया, फिर भी उसी दिन स्वर्गलोक में पहुँचा, क्योंकि उसने विश्वास किया। भीगा हुआ शरीर और सूखा हुआ हृदय एक भयानक जोड़ी है।

दूसरी भ्रांति: बपतिस्मा केवल एक रस्म है, ले लो या छोड़ दो। पहली भ्रांति की उलटी चरम सीमा यह है। कई लोग सालों से विश्वास करते हैं पर बपतिस्मा को टालते रहते हैं, जैसे यह एक ऐच्छिक कागज़ी काम है। परन्तु मत्ती 28:19 में यीशु ने खुद इसे चेलेपन का हिस्सा बनाया, और प्रेरितों के काम में कोई अनाम, छिपा हुआ विश्वासी नहीं मिलता। जो विश्वास करता है वह पानी में जाता है, और अक्सर उसी दिन। बपतिस्मा से इनकार करना असल में मसीह के सार्वजनिक स्वामित्व से बचने की कोशिश है। जो कब्र में जाने से डरता है, वह पुनरुत्थान का अनुभव भी नहीं करता।

तीसरी भ्रांति: पहले जीवन सुधारो, फिर बपतिस्मा लो। यह सबसे दर्दनाक ग़लती है, क्योंकि यह अनुग्रह को उलट देती है। लोग कहते हैं, "मेरी आदतें अभी ठीक नहीं हुईं, मेरा गुस्सा नहीं गया, पहले मैं योग्य बनूँ।" पर सोचिए, कब्र में जाने के लिए कौन सी योग्यता चाहिए? मरने के लिए किसी को प्रशिक्षण नहीं दिया जाता। पतरस ने उन्हीं लोगों को बपतिस्मा दिया जिन्होंने कुछ हफ़्ते पहले मसीह को क्रूस पर चढ़वाया था। बपतिस्मा आपके सुधरे हुए जीवन का पुरस्कार नहीं, आपके नए जीवन का जन्मदिन है। सुधार पानी के बाद आता है, पहले नहीं।

चौथी भ्रांति: बपतिस्मा के बाद पाप करने पर सब खत्म, या फिर दोबारा बपतिस्मा चाहिए। इफिसियों 4:5 कहता है कि एक ही प्रभु, एक ही विश्वास, एक ही बपतिस्मा है। मसीह एक बार मरे और एक बार जी उठे; उनकी मृत्यु में हमारी हिस्सेदारी भी एक बार पानी में दर्शाई जाती है। जब हम गिरते हैं तो हमें नया बपतिस्मा नहीं, बल्कि अपने बपतिस्मा की याद चाहिए। पौलुस रोमियों 6 में यही तर्क देते हैं: तुम मर चुके हो, इसलिए पाप को अपने ऊपर राज मत करने दो। और 1 यूहन्ना 1:9 हमें रोज़ का रास्ता दिखाता है, पापों को मान लेना और क्षमा पाना। कब्र दोबारा खोदने की ज़रूरत नहीं; उसमें से उठकर चलना सीखना है।

आज इसे जीवन में उतारना

अगर बपतिस्मा एक कब्र है, तो इसका असर सोमवार की सुबह भी दिखेगा।

दफ़्तर में जब आपको वह छोटा-सा झूठ बोलने का दबाव पड़ता है जो सबको सामान्य लगता है, तो आपके पास एक अजीब हथियार है: आप उस झूठ बोलनेवाले आदमी के अंतिम संस्कार में शामिल हो चुके हैं। वह पानी में छोड़ दिया गया। इसी तरह जब पैसों का हिसाब ईमानदारी माँगता है, जब रिश्वत का लिफ़ाफ़ा आसान रास्ता दिखाता है, तो सवाल यह नहीं रहता कि "कोई देख रहा है या नहीं", बल्कि "मैं किसके नाम में डुबोया गया हूँ"।

घर में यह और भी ठोस हो जाता है। कई भारतीय परिवारों में बपतिस्मा का मतलब तनाव है, ताने हैं, कभी-कभी घर से निकाले जाने का डर है। ऐसे में यह याद रखना ज़रूरी है कि बपतिस्मा आपको अपने परिवार से नफ़रत करने नहीं, बल्कि उन्हें एक नए तरीक़े से प्रेम करने के लिए भेजता है। मरा हुआ आदमी बदला नहीं लेता। जो पहचान आप पानी में पाए हैं, वह इतनी मज़बूत है कि आप अपने माता-पिता की कठोर बातों को सह सकते हैं, उनकी सेवा कर सकते हैं, और बिना कड़वाहट के दृढ़ रह सकते हैं।

अपने शरीर के बारे में भी यह बात करती है। जिस देह को आपने पानी में डुबोया, वह अब आपकी मनमानी की मालकिन नहीं। पवित्रता, संयम, नज़र पर पहरा, यह सब इसी सच्चाई से निकलता है कि यह शरीर किसी दूसरे के नाम पर दर्ज हो चुका है।

समय के मामले में भी। बपतिस्मा के बाद कैलेंडर आपका अपना नहीं रहता। कलीसिया के साथ इकट्ठा होना, प्रभु भोज में हिस्सा लेना, किसी नए विश्वासी के साथ बाइबल पढ़ना, यह फ़ालतू गतिविधियाँ नहीं, बल्कि उस परिवार का जीवन है जिसमें आप बपतिस्मा के द्वारा गोद लिए गए हैं। 1 कुरिन्थियों 12:13 कहता है कि एक ही आत्मा के द्वारा हम सब एक देह होने के लिये बपतिस्मा पाए। बपतिस्मा कभी निजी मामला नहीं होता; यह आपको एक देह में जोड़ देता है।

और अकेलेपन में? जब रात को लगता है कि किसी को आपकी परवाह नहीं, तब बपतिस्मा एक तारीख़ है जिस पर आप उँगली रख सकते हैं। उस दिन कुछ गवाहों के सामने परमेश्वर के नाम में आपका नाम जोड़ा गया। भावनाएँ बदलती हैं, आपकी गिनती नहीं बदलती।

दर्पण

अब मैं सीधे आपसे बात करूँगा।

अगर आप सालों से विश्वास कर रहे हैं और बपतिस्मा को "सही समय" के लिए टाल रहे हैं, तो ईमानदारी से पूछिए: आप किस चीज़ का इंतज़ार कर रहे हैं? नौकरी की सुरक्षा? पिताजी की सहमति? शादी हो जाने तक? या यह डर कि अगर आपने खुलकर पानी में उतर गए तो रिश्तेदार क्या कहेंगे? यह सवाल आपको दोषी ठहराने के लिए नहीं है। यह आपको आज़ाद करने के लिए है, क्योंकि जिस चीज़ से आप डर रहे हैं, वह पहले ही हो चुकी है। मसीह में आपका पुराना जीवन पहले ही मर गया। जिन लोगों की राय से आप डरते हैं, वे एक मरे हुए आदमी को धमकी दे रहे हैं।

और अगर आपने बपतिस्मा वर्षों पहले ले लिया था, शायद बचपन में, शायद जोश में, तो दूसरा सवाल है: आप उसमें से उठकर चल रहे हैं या कब्र में लेटे रह गए हैं? पौलुस ने नहीं कहा कि तुम मर गए, बस इतना ही। उन्होंने कहा कि तुम मरे ताकि नए जीवन की सी चाल चलो। यह चाल दिखती है: पैसे के लेन-देन में, पत्नी या पति के साथ बोलने के लहज़े में, मोबाइल की स्क्रीन पर, कर्मचारियों के साथ व्यवहार में, उस व्यक्ति को क्षमा करने में जिसका नाम सुनते ही आपका चेहरा बदल जाता है।

और तीसरी बात, जो सबसे कोमल है। अगर आप इस समय अपनी असफलताओं से थक चुके हैं और सोच रहे हैं कि आपका बपतिस्मा बेकार गया, तो सुनिए: आपका बपतिस्मा आपकी वफ़ादारी का वादा नहीं था, यह परमेश्वर की वफ़ादारी की निशानी था। पानी आपने चुना, पर नाम उन्होंने लिखा। और वे अपने हस्ताक्षर से पीछे नहीं हटते।

बच्चों के लिए समझाया गया

बच्चों के साथ बपतिस्मा की बात करना उतना कठिन नहीं जितना लगता है, क्योंकि बच्चे तस्वीरों की भाषा बड़ों से बेहतर समझते हैं। सबसे आसान तरीक़ा यह है कि उन्हें एक गंदे कपड़े और एक नए कपड़े की कहानी सुनाइए, या फिर एक बीज की, जो मिट्टी में दबता है और उसमें से पौधा निकलता है। कह सकते हैं: "जब कोई यीशु पर भरोसा करता है, तो वह पानी में जाता है और बाहर आता है, जैसे यीशु कब्र में गए और तीसरे दिन जी उठे। यह दिखाने का तरीक़ा है कि अब यह बच्चा या यह व्यक्ति यीशु का हो गया है।"

बच्चों के सवालों से घबराइए नहीं। "क्या पानी जादू का है?" जैसे सवाल का सरल उत्तर है: नहीं, पानी बस पानी है; यीशु हमें साफ़ करते हैं, पानी तो केवल एक चित्र है। "क्या मैं बपतिस्मा ले सकता हूँ?" पूछने पर उसे हड़बड़ी में हाँ या ना कहने की ज़रूरत नहीं; उसके साथ बैठकर पूछिए कि वह यीशु के बारे में क्या समझता है, और अपनी कलीसिया के अगुवों से बात करने के लिए उसे प्रोत्साहित कीजिए। बच्चे की सच्ची जिज्ञासा को गंभीरता से लेना उसके भरोसे को गहरा करता है।

हर उम्र को एक ही तरह की व्याख्या रास नहीं आती। छोटे बच्चों (तीन से छह साल) को कहानी और चित्र चाहिए, स्कूल जाने वाले बच्चों (सात से बारह साल) को "क्यों" के उत्तर चाहिए, और किशोरों (बारह साल से ऊपर) को ईमानदार बातचीत चाहिए, जिसमें दोस्तों का दबाव, पहचान और परिवार की प्रतिक्रिया जैसी बातें शामिल हों। हमारे यहाँ इन तीनों उम्र के लिए अलग-अलग तैयार की गई व्याख्याएँ उपलब्ध हैं, ताकि आप अपने बच्चे की उम्र और समझ के अनुसार यह बात उसके दिल तक पहुँचा सकें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बपतिस्मा का सही अर्थ क्या है?

बपतिस्मा का मूल अर्थ है किसी चीज़ में पूरी तरह डुबोया जाना। बाइबल में यह मसीह की मृत्यु, गाड़े जाने और पुनरुत्थान में विश्वासी की हिस्सेदारी का चिह्न है, जैसा रोमियों 6:3-4 समझाता है। इसके साथ ही यह पापों की क्षमा, नए जन्म, और परमेश्वर के परिवार में शामिल होने की सार्वजनिक निशानी है। सरल शब्दों में, बपतिस्मा एक ही समय में अंतिम संस्कार और जन्मदिन है: पुराना जीवन दफ़नाया जाता है और नया जीवन मसीह के नाम में शुरू होता है।

क्या बपतिस्मा के बिना उद्धार नहीं हो सकता?

उद्धार केवल अनुग्रह से, विश्वास के द्वारा, मसीह के काम पर आधारित है। मरकुस 16:16 में दोष का आधार बपतिस्मा न लेना नहीं, बल्कि विश्वास न करना बताया गया है, और क्रूस पर पछताए हुए डाकू को बिना बपतिस्मा के स्वर्गलोक का वादा मिला। इसलिए पानी बचाने वाली शक्ति नहीं है। परन्तु इसका यह मतलब नहीं कि बपतिस्मा वैकल्पिक है; यीशु ने इसकी आज्ञा दी और प्रेरितों ने विश्वास करनेवालों को तुरंत बपतिस्मा दिया। जो जानबूझकर इससे बचता रहता है, उसे अपने विश्वास की सच्चाई पर दोबारा विचार करना चाहिए।

बपतिस्मा किस नाम से लेना चाहिए, पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा के नाम से या यीशु के नाम से?

यह विरोध नहीं, दो पहलू हैं। मत्ती 28:19 में यीशु ने "पिता और पुत्र और पवित्र आत्मा के नाम से" बपतिस्मा देने की आज्ञा दी, और प्रेरितों के काम 2:38 में पतरस "यीशु मसीह के नाम से" बपतिस्मा लेने की बात करते हैं। प्रेरितों के काम में "यीशु के नाम से" इस बात पर ज़ोर देता है कि यह यूहन्ना का मन फिराव का बपतिस्मा नहीं, बल्कि मसीह का बपतिस्मा है, जबकि मत्ती त्रिएक परमेश्वर के पूरे नाम को सामने रखता है। कलीसिया परंपरागत रूप से त्रिएक नाम का प्रयोग करती आई है, और यह पूरी तरह उचित है।

क्या छोटे बच्चों का बपतिस्मा बाइबल के अनुसार सही है?

इस पर सच्चे मसीही एक-दूसरे से असहमत रहे हैं, और यह असहमति मुक्ति का प्रश्न नहीं। जो शिशु बपतिस्मा देते हैं वे पुराने नियम के खतने से समानता, घरानों के बपतिस्मा, और कुलुस्सियों 2:11-12 की ओर इशारा करते हैं। जो केवल विश्वास करनेवालों को बपतिस्मा देते हैं वे इस बात पर ज़ोर देते हैं कि प्रेरितों के काम में हर बपतिस्मा से पहले विश्वास और मन फिराव दिखता है। दोनों पक्ष अनुग्रह पर भरोसा करते हैं। सबसे ज़रूरी बात यह है कि कोई भी व्यक्ति बचपन की रस्म को व्यक्तिगत विश्वास का विकल्प न समझे।

पानी में डुबकी लेना ज़रूरी है या छिड़काव भी चलता है?

शब्द का अर्थ और रोमियों 6 की गाड़े जाने की तस्वीर पूरी डुबकी की ओर झुकती है, और इसीलिए अनेक कलीसियाएँ नदी, तालाब या कुण्ड में डुबकी देती हैं। फिर भी बाइबल कहीं बपतिस्मा को अमान्य ठहराने के लिए पानी की मात्रा को शर्त नहीं बनाती, और यहेजकेल की छिड़काव वाली भविष्यद्वाणी भी शुद्धिकरण की भाषा में बोलती है। बीमार, अपंग या जेल में बंद व्यक्ति के मामले में कलीसिया सदा लचीली रही है। असली सवाल पानी की गहराई नहीं, हृदय का समर्पण है।

क्या दोबारा बपतिस्मा लेना चाहिए?

इफिसियों 4:5 के अनुसार एक ही प्रभु, एक ही विश्वास, एक ही बपतिस्मा है, इसलिए सामान्य नियम यह है कि बपतिस्मा एक बार होता है और गिरने या भटकने पर दोहराया नहीं जाता; तब पश्चाताप और क्षमा का रास्ता खुला है। हाँ, कुछ लोग ऐसे हैं जिन्होंने बिना किसी विश्वास के, केवल परिवार के दबाव या परंपरा के कारण पानी लिया था और बाद में सच में मसीह पर भरोसा किया। ऐसे मामलों में अपनी कलीसिया के अगुवों के साथ ईमानदारी से बात करके निर्णय लेना सबसे बुद्धिमानी है।

पानी के बपतिस्मा और पवित्र आत्मा के बपतिस्मा में क्या अंतर है?

पानी का बपतिस्मा बाहरी, दिखाई देने वाली निशानी है जो कलीसिया देती है; आत्मा का बपतिस्मा वह भीतरी काम है जो मसीह करते हैं, जिसमें वे विश्वासी को अपनी देह में जोड़ते और अपने आत्मा से भरते हैं। 1 कुरिन्थियों 12:13 कहता है कि एक ही आत्मा के द्वारा हम सब एक देह होने के लिये बपतिस्मा पाए। प्रेरितों के काम 2:38 इन दोनों को साथ रखता है: मन फिराव और बपतिस्मा के साथ आत्मा का दान। आदर्श स्थिति यह है कि बाहरी चिह्न और भीतरी सच्चाई दोनों मौजूद हों।

बपतिस्मा कौन दे सकता है?

नए नियम में बपतिस्मा देनेवाले अलग-अलग लोग थे: प्रेरित, फिलिप्पुस जैसा सुसमाचार प्रचारक, और अनन्याह जैसा साधारण चेला। बाइबल कहीं यह नहीं कहती कि केवल किसी विशेष पद पर बैठा व्यक्ति ही यह कर सकता है, परन्तु बपतिस्मा कभी निजी, गुप्त काम भी नहीं है; यह कलीसिया के जीवन का हिस्सा है। इसलिए व्यवस्था और जवाबदेही के लिए सबसे अच्छा यही है कि यह स्थानीय कलीसिया की देखरेख में, उसके अगुवों के द्वारा या उनकी स्वीकृति से किया जाए।

बपतिस्मा लेने के लिए उम्र कितनी होनी चाहिए?

बाइबल कोई निश्चित उम्र नहीं बताती। जिन कलीसियाओं में विश्वासियों का बपतिस्मा होता है, वहाँ शर्त उम्र नहीं बल्कि समझ और सच्चा मन फिराव है: व्यक्ति जानता हो कि वह पापी है, कि यीशु मसीह उसके लिए मरे और जी उठे, और वह उनका अनुयायी बनना चाहता है। बच्चों के मामले में जल्दबाज़ी और टालमटोल, दोनों से बचना चाहिए। माता-पिता और कलीसिया के अगुवे मिलकर बच्चे से बात करें, उसके विश्वास को सुनें, और फिर प्रेम से आगे बढ़ें।

यीशु ने बपतिस्मा क्यों लिया जब उनमें कोई पाप नहीं था?

यीशु का बपतिस्मा उनके पाप धोने के लिए नहीं था, क्योंकि उनमें कोई पाप नहीं था। वे पापियों की कतार में खड़े होकर अपने आप को उन लोगों के साथ जोड़ रहे थे जिन्हें वे बचाने आए थे, और अपने पिता की सारी धार्मिकता पूरी कर रहे थे। वहाँ पवित्र आत्मा उन पर उतरा और पिता ने उन्हें अपना प्रिय पुत्र कहा, जिससे उनकी सार्वजनिक सेवा शुरू हुई। यह उनके क्रूस की ओर भी इशारा था, जिसे उन्होंने खुद एक बपतिस्मा कहा, वह गहरा पानी जिसमें वे हमारे लिए उतरे।

अगर परिवार बपतिस्मा लेने से रोक रहा है तो क्या करें?

सबसे पहले, अपने परिवार को शत्रु मानना बंद कीजिए; उनका डर अक्सर प्रेम और सामाजिक दबाव से निकलता है। उनके साथ आदर से बात करें, समझाएँ कि आप उनसे मुँह नहीं मोड़ रहे बल्कि मसीह के पीछे चल रहे हैं, और अपने व्यवहार से यह साबित करें कि आपका विश्वास आपको बेहतर बेटा, बेटी, पति या पत्नी बना रहा है। साथ ही अपनी कलीसिया के अगुवों को इस स्थिति में शामिल करें, उनसे प्रार्थना और सलाह लें, और धैर्य रखें। कभी-कभी परमेश्वर समय देते हैं, और कभी-कभी वे साहस माँगते हैं, पर मसीह की आज्ञा किसी के डर से रद्द नहीं होती।

बपतिस्मा के बाद जीवन में क्या बदलना चाहिए?

बपतिस्मा नए जीवन की शुरुआत है, समाप्ति नहीं। रोमियों 6:4 के अनुसार इसका उद्देश्य यह है कि हम नए जीवन की सी चाल चलें, इसलिए स्वाभाविक कदम हैं: कलीसिया के साथ नियमित मिलना, बाइबल पढ़ना और प्रार्थना में बढ़ना, प्रभु भोज में हिस्सा लेना, जाने-पहचाने पापों को छोड़ना, और अपने विश्वास के बारे में दूसरों से बात करना। बदलाव एक दिन में पूरा नहीं होता, पर दिशा बदल जाती है। जब आप गिरें, तो निराश होकर पीछे न हटें; अपने बपतिस्मा को याद कीजिए और उस अनुग्रह पर फिर भरोसा कीजिए जिसने आपको बुलाया।

अंत में

बपतिस्मा को एक धार्मिक रस्म के रूप में देखना आसान है, कैमरे, कपड़े, गवाह, और फिर घर वापस। परन्तु पवित्रशास्त्र हमें एक और ही तस्वीर देता है: पानी एक कब्र है, और जो उसमें उतरता है वह अपने पुराने जीवन को वहीं छोड़ देता है। इसीलिए यह न आपकी उपलब्धि का प्रमाणपत्र है और न कोई जादुई क्रिया; यह परमेश्वर के अनुग्रह पर किया गया हस्ताक्षर है, मसीह की मृत्यु और पुनरुत्थान में आपकी हिस्सेदारी की सार्वजनिक घोषणा।

कब्र में जाने के लिए योग्यता नहीं चाहिए, केवल विश्वास।

अगर आप विश्वास करते हैं और अब तक बपतिस्मा नहीं लिया, तो इस पृष्ठ को बंद करने से पहले एक कदम उठाइए: अपनी कलीसिया के अगुवे से बात कीजिए। और अगर आपका बपतिस्मा बहुत पहले हो चुका है, तो रोमियों 6 को पूरा पढ़िए, धीरे-धीरे, अपने नाम को उसमें रखकर। इसके बाद प्रेरितों के काम में बपतिस्मा की कहानियों को क्रम से पढ़ें, और कुलुस्सियों 2 और 1 पतरस 3 पर ठहरें। जो पानी आपके ऊपर से बह गया, वह सूख गया; परन्तु जिस नाम में आप डुबोए गए, वह सदा बना रहता है।

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अंतर्दृष्टियों की दीवार

पवित्रशास्त्र में आपको क्या स्पर्श करता है? हम किसके लिए प्रार्थना करें? हम परमेश्वर का किसके लिए धन्यवाद करें?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर 1 शमूएल 23:26

पहाड़ के एक ओर शाऊल, दूसरी ओर दाऊद, और बीच में सिर्फ पत्थर की एक दीवार। "दाऊद शाऊल के डर…

प्रार्थना संपादकीय पर लैव्यव्यवस्था 13:47

हे प्रभु, तू उन दागों पर भी ध्यान देता है जो मेरे कपड़ों तक फैल जाते हैं, जिन्हें मैं छिपाकर…

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर गिनती 26:8

गिनती की लंबी नामावली में एक छोटी सी पंक्ति, "पल्लू का पुत्र एलीआब।" बस इतना ही। पर अगली आयतों में…

धन्यवाद संपादकीय पर अय्यूब 20:21

पिता, धन्यवाद कि आपने मुझे लालच के उस गड्ढे से बचाया, जहाँ कुछ भी बचा नहीं रहता। धन्यवाद कि मेरी…

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर गलातियों 3:19

वह अपराधों के कारण दी गई," पौलुस कहता है। व्यवस्था तुम्हें बुरा नहीं बनाती, वह सिर्फ नाम देती है उस…

प्रार्थना संपादकीय पर 1 शमूएल 19:17

पिता, कभी कभी हम डर और दबाव के बीच फँस जाते हैं, और सही चुनना आसान नहीं लगता। जहाँ अपने…

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