विषय

बाइबल में धन और पैसा: कमाई, बचत और उदारता पर परमेश्वर की शिक्षा

परिचय

महीने की पहली तारीख़। तनख़्वाह आई, और आपने मोबाइल पर बैलेंस देखा। कुछ सेकंड के लिए एक हल्की-सी राहत मिली, और फिर उसी राहत के पीछे-पीछे वही पुरानी घबराहट लौट आई: किराया, स्कूल की फ़ीस, दवाई, बहन की शादी, और वह कर्ज़ जिसका ब्याज नींद में भी चलता रहता है। उसी शाम चर्च में किसी ने कहा, "परमेश्वर पर भरोसा रखो।" आपने सिर हिला दिया, पर मन में सवाल रह गया, भरोसा रखना ठीक है, मगर पैसे का हिसाब तो मुझे ही करना है।

पवित्रशास्त्र इस सवाल से भागता नहीं। यीशु मसीह ने स्वर्ग और नरक से ज़्यादा उपमाएँ पैसे, मज़दूरी, कर्ज़, खेत और भण्डार के बारे में दीं। इस पृष्ठ पर आप देखेंगे कि बाइबल में धन को न तो पाप कहा गया है और न ही परमेश्वर की कृपा का प्रमाणपत्र; वह कुछ और है, और वही "कुछ और" आपकी पूरी आर्थिक ज़िंदगी को बदल देता है।

इस मार्गदर्शिका का दृष्टिकोण

अधिकांश लेख पूछते हैं, "बाइबल के अनुसार कितना पैसा रखना ठीक है?" हम एक दूसरा सवाल पूछेंगे, क्योंकि पवित्रशास्त्र स्वयं वही पूछता है: पैसा जेब की चीज़ नहीं, सिंहासन का दावेदार है। यीशु मसीह ने धन को कोई तटस्थ औज़ार नहीं कहा, बल्कि एक प्रतिद्वंद्वी स्वामी कहा, जो सेवा और भक्ति माँगता है। इसलिए इस मार्गदर्शिका का केंद्रीय प्रश्न "कितना" नहीं, "कौन" है: मेरे जीवन का स्वामी कौन है? और इसका उत्तर ग़रीबी नहीं है, बल्कि एक नया स्वामी है, जिसकी उदारता हमारे बटुए से बहकर बाहर निकलती है। कमाई, बचत और दान, तीनों इसी एक प्रश्न के तीन चेहरे हैं।

बाइबल धन और पैसे के बारे में क्या कहती है?

पवित्रशास्त्र की शुरुआत ही मालिकाना हक़ के एक बयान से होती है। "पृथ्वी और जो कुछ उस में है यहोवा ही का है; जगत और उसके सब रहनेवाले भी।" (भजन संहिता 24:1) यह कोई धार्मिक अलंकार नहीं, आर्थिक बुनियाद है। यदि सब कुछ परमेश्वर का है, तो मेरे बैंक खाते में जो है वह मेरी "अपनी कमाई" से पहले किसी और की सौंपी हुई अमानत है। मैं मालिक नहीं, भण्डारी हूँ। दाऊद ने मंदिर के लिए भेंट इकट्ठी करते समय ठीक यही प्रार्थना की: "तुझी से तो सब कुछ मिलता है, और तेरे ही हाथ से पाकर हम ने तुझे दिया है।" (1 इतिहास 29:14)

इसी बुनियाद पर नीतिवचन 3:9 खड़ा होता है: "अपनी सम्पत्ति से और अपनी सारी आय के पहले फल से यहोवा की प्रतिष्ठा करना।" ध्यान दीजिए, यहाँ "बची हुई रकम से" नहीं लिखा है, "पहले फल से" लिखा है। पहला फल वह है जो हाथ में आने से पहले ही परमेश्वर के नाम लिख दिया गया हो। और शब्द भी देखिए: प्रतिष्ठा करना, आदर देना। देना यहाँ कोई कर नहीं, आराधना है। जिस क्रम में हम पैसा ख़र्च करते हैं, उसी क्रम में हमारा हृदय भी खुल जाता है।

फिर यीशु मसीह की वह बात आती है जो सारी बहस को दो-टूक कर देती है: "कोई मनुष्य दो स्वामियों की सेवा नहीं कर सकता, क्योंकि वह एक से बैर और दूसरे से प्रीति रखेगा, या एक से मिला रहेगा और दूसरे को तुच्छ जानेगा। तुम परमेश्वर और धन दोनों की सेवा नहीं कर सकते।" (मत्ती 6:24) यह वाक्य कहता है कि पैसा केवल साधन नहीं, एक मालिक बनने की क्षमता रखता है। कोई भी कुर्सी, मकान या मोबाइल आपसे भक्ति नहीं माँगता; पैसा माँगता है। वह वादा करता है कि वह आपकी सुरक्षा, आपकी इज़्ज़त और आपका भविष्य संभालेगा, यानी वही तीन चीज़ें जिनका वादा परमेश्वर करते हैं।

इसीलिए लूका 12:15 में प्रभु एक विरासत के झगड़े में फँसे आदमी से कहते हैं: "चौकस रहो, और लोभ से बचे रहो, क्योंकि किसी का जीवन उसकी सम्पत्ति की बहुतायत से नहीं होता।" वह आदमी अन्याय की शिकायत लेकर आया था, और यीशु ने उसके हिस्से का फ़ैसला करने से इनकार कर दिया, क्योंकि असली ख़तरा उसके भाई के पास नहीं, उसके अपने सीने में बैठा था। लोभ का चेहरा हमेशा पहचानना मुश्किल होता है, क्योंकि वह हमें हमेशा "व्यवहारिक" लगता है।

पौलुस इसी बात को तीमुथियुस के लिए खोलते हैं: "क्योंकि रुपये का लोभ सब प्रकार की बुराइयों की जड़ है, और इसी का लालसा करके कितने लोग विश्वास से भटक गए हैं, और अपने आप को नाना प्रकार के दुखों में फँसाया है।" (1 तीमुथियुस 6:10) यहाँ ध्यान दीजिए, जड़ रुपया नहीं, रुपये का लोभ है। और नुक़सान भी दो तरह का है: विश्वास से भटकना और अपने ही हाथों अपने लिए दुख बोना। कितने परिवार, कितनी दोस्ती, कितनी ईमानदारी इसी जड़ से कटी है।

पर पवित्रशास्त्र केवल चेतावनी देकर नहीं छोड़ता, वह स्थिरता भी देता है: "तुम्हारा स्वभाव लोभरहित हो, और जो तुम्हारे पास है, उसी में सन्तोष करो; क्योंकि उसने आप ही कहा है, मैं तुझे कभी न छोड़ूँगा, और न कभी तुझे त्यागूँगा।" (इब्रानियों 13:5) यह वचन बहुत सुंदर तर्क देता है। सन्तोष का आधार यह नहीं कि आपके पास पर्याप्त है, बल्कि यह कि आपके पास परमेश्वर की उपस्थिति है, जो कभी नहीं जाएगी। पैसा आपको छोड़ सकता है, नौकरी छोड़ सकती है, सेहत छोड़ सकती है; वे नहीं छोड़ेंगे। लोभ का इलाज ज़्यादा पैसा नहीं, बेहतर सुरक्षा है।

और धर्मी जीवन का आर्थिक चिह्न क्या है? भजन संहिता 37:21 इसे एक पंक्ति में रख देता है: "दुष्ट ऋण लेता है, और भर नहीं देता, परन्तु धर्मी उदार होकर दान करता रहता है।" यहाँ अधर्म की पहचान चोरी नहीं, वादा तोड़ना है; और धार्मिकता की पहचान कंजूसी से बचना नहीं, बहते रहना है। बाइबल में धन का हिसाब रिश्तों में दिखता है: जिसे लौटाना है वह लौटाया जाता है, और जिसे ज़रूरत है उसे दिया जाता है।

बाइबल में चलने वाला सूत्र

उत्पत्ति में परमेश्वर मनुष्य को एक बग़ीचे में रखते हैं "कि वह उस में काम करे और उसकी रक्षा करे।" काम, उत्पादन और सम्पत्ति पाप के बाद की मजबूरी नहीं, सृष्टि की भलाई का हिस्सा हैं। पतन के बाद जो टूटा वह काम नहीं, काम का रिश्ता है: मिट्टी काँटे उगाने लगी और मनुष्य का मन जमा करने लगा। बाबेल की मीनार से लेकर मिस्र के भण्डारों तक, पवित्रशास्त्र दिखाता है कि इंसान अपनी सुरक्षा ख़ुद बनाना चाहता है।

व्यवस्था में परमेश्वर इस्राएल को एक ऐसी अर्थव्यवस्था देते हैं जो जान-बूझकर "अक्षम" है। खेत के कोने काटे न जाएँ, गिरी हुई बालें छोड़ दी जाएँ, ताकि ग़रीब और परदेशी बीन सकें (लैव्यव्यवस्था 19:9-10)। हर सातवें साल ज़मीन आराम करे, और पचासवें साल जुबली में कर्ज़ माफ़ और ज़मीन वापस। भाई से ब्याज न लिया जाए। और कारण हमेशा वही: तुम मिस्र में दास थे और मैंने तुम्हें छुड़ाया। इस्राएल को धन के मामले में अपने छुड़ाने वाले जैसा बनना था। साथ ही व्यवस्थाविवरण 8 चेतावनी देता है कि जब घर भर जाएँ और झुंड बढ़ जाएँ, तब मन ऊँचा हो सकता है और आदमी कह सकता है, "मेरे ही बल से मैंने यह सब पाया।" समृद्धि परीक्षा है, पुरस्कार नहीं।

नीतिवचन इस विषय को रोज़मर्रा की ज़मीन पर उतारते हैं: परिश्रम, ईमानदार तराज़ू, ज़मानत में जल्दबाज़ी का ख़तरा, और यह सच्चाई कि "उधार लेनेवाला उधार देनेवाले का दास होता है" (नीतिवचन 22:7)। भविष्यद्वक्ता फिर तराज़ू उठाते हैं और उन धनवानों पर गरजते हैं जो ग़रीबों को जूतों के दाम पर बेचते हैं (आमोस 2:6), और मलाकी उन लोगों से जवाब माँगते हैं जो दशमांश में परमेश्वर को ठगते हैं।

फिर यीशु मसीह आते हैं, और यहीं हमारा दृष्टिकोण अपनी पूरी गहराई पाता है। वे धन को सिर्फ़ ग़लत इस्तेमाल की चीज़ नहीं कहते, वे उसे नाम देकर बुलाते हैं, एक स्वामी की तरह (मत्ती 6:24)। और वे उस स्वामी को हराने के लिए कोई आर्थिक नीति नहीं लाते, वे अपनी ग़रीबी लाते हैं: "तुम हमारे प्रभु यीशु मसीह का अनुग्रह जानते हो, कि वह धनी होकर भी तुम्हारे लिये दरिद्र बन गया, कि उसके दरिद्र हो जाने से तुम धनी हो जाओ।" (2 कुरिन्थियों 8:9) यह पूरे विषय का केंद्र है। मसीह ने वह सब छोड़ा जो उनका था, ताकि हम वह पाएँ जो हमारा नहीं था। जो इस अनुग्रह से धनी हो गया, उसे अब पैसे से अपनी कीमत साबित करने की ज़रूरत नहीं।

प्रेरितों के काम में यह अनुग्रह बटुओं में उतरता है: यरूशलेम के विश्वासी अपनी सम्पत्ति बेचकर बाँटते हैं, और अकाल के समय अन्यजाति कलीसियाएँ यहूदी भाइयों के लिए चंदा भेजती हैं। पत्रियों में सिद्धांत साफ़ होता है, "हर एक जन जैसा मन में ठाने वैसा ही दान करे, न कुढ़ कुढ़ के, और न दबाव से, क्योंकि परमेश्वर हर्ष से देनेवाले से प्रेम रखता है।" (2 कुरिन्थियों 9:7) और अंत में प्रकाशितवाक्य में दो शहर आमने-सामने खड़े होते हैं: बाबुल, जिसका व्यापार गिर जाता है और जिसके सौदागर रोते हैं, और नया यरूशलेम, जहाँ सोना सड़क पर बिछा है, क्योंकि वहाँ सोने की कीमत ख़त्म हो गई है। पवित्रशास्त्र की कहानी पैसे को नष्ट करके नहीं, उसे उसकी जगह पर रखकर पूरी होती है।

आम भ्रांतियाँ

पहली भ्रांति: पैसा ही सब बुराइयों की जड़ है। यह पंक्ति अक्सर आधी बोली जाती है। 1 तीमुथियुस 6:10 कहता है, "रुपये का लोभ सब प्रकार की बुराइयों की जड़ है।" जड़ वस्तु में नहीं, इच्छा में है। इसीलिए ग़रीब आदमी भी लोभी हो सकता है और धनवान आदमी भी उदार। बाइबल में इब्राहीम, अय्यूब, बोअज़ और लुदिया जैसे सम्पन्न विश्वासी हैं, जिनकी सम्पत्ति दूसरों के लिए आशीष बनी। ख़तरा जेब की मोटाई में नहीं, हृदय की पकड़ में है। और यही हमारा दृष्टिकोण है: सवाल "कितना" नहीं, "कौन स्वामी है" है।

दूसरी भ्रांति: विश्वास करने वाले को परमेश्वर हमेशा आर्थिक रूप से समृद्ध करते हैं। नीतिवचन 3:10 में खत्तों के भर जाने का वादा है, पर वही बाइबल यर्मियाह को कुएँ में, पौलुस को जेल में और स्वयं प्रभु को बिना सिर रखने की जगह के दिखाती है। इब्रानियों 11 का वह हिस्सा पढ़िए जहाँ विश्वास के लोग "कंगाल" और "सताए हुए" होकर मरे, और उनके बारे में कहा गया कि संसार उनके योग्य न था। समृद्धि का सुसमाचार परमेश्वर को एक निवेश योजना बना देता है, और जब बीमारी या छँटनी आती है तो वह विश्वास तोड़ देता है। असली वादा इब्रानियों 13:5 में है: दौलत नहीं, उपस्थिति; "मैं तुझे कभी न छोड़ूँगा।"

तीसरी भ्रांति: आध्यात्मिकता का मतलब है पैसे की योजना न बनाना। कुछ लोग बजट, बचत और बीमा को अविश्वास मान लेते हैं। पर नीतिवचन चींटी की तरफ़ इशारा करके गर्मियों में जमा करने की बुद्धि सिखाते हैं, यूसुफ़ ने सात वर्ष के अकाल के लिए भण्डार भरे, और यीशु ने ख़ुद उस आदमी की बात की जो मीनार बनाने से पहले ख़र्च का हिसाब लगाता है। अंतर इरादे में है। मत्ती 6 का धनी मूर्ख नहीं था क्योंकि उसने बचाया, बल्कि क्योंकि उसने कहा "मेरी उपज, मेरे भण्डार, मेरे प्राण" और परमेश्वर तथा पड़ोसी दोनों उस वाक्य से गायब थे। बचत सेवा का साधन है, सुरक्षा का देवता नहीं।

चौथी भ्रांति: उदारता वही कर सकता है जिसके पास बचत हो। यीशु ने भण्डार के सामने बैठकर उस विधवा को देखा जिसने दो दमड़ियाँ डालीं, और कहा कि उसने सबसे बढ़कर डाला। मकिदुनिया की कलीसियाएँ "भारी कंगालपन" में भी देने के लिए विनती करती रहीं। उदारता आय का प्रतिशत नहीं, हृदय की दिशा है। भजन संहिता 37:21 धर्मी को उदार कहता है, और साथ ही चुकाने वाला भी; इसलिए देने का मतलब अपनी ज़िम्मेदारियों से भागना नहीं है। पहले वादा निभाइए, फिर हाथ खोलिए, दोनों एक ही धार्मिकता के दो अंग हैं।

आज इसे जीवन में उतारना

शुरुआत वहीं से कीजिए जहाँ नीतिवचन 3:9 शुरू करता है, क्रम से। तनख़्वाह आने के बाद बचा हुआ पैसा देने का इंतज़ार मत कीजिए, पहले हिस्से को अलग रखिए। बहुत सारे विश्वासियों के लिए यह एक ठोस अनुशासन बन जाता है: आय आते ही पहला हिस्सा परमेश्वर के काम और ज़रूरतमंदों के लिए, दूसरा कर्ज़ और वादों के लिए, तीसरा ज़रूरतों के लिए, और जो बचे वह भविष्य और आगे की सेवा के लिए। यह कोई जादुई फ़ॉर्मूला नहीं, पर यह एक बात साफ़ करता है कि पहला दावा किसका है।

फिर कर्ज़ को सच्चाई से देखिए। भजन संहिता 37:21 उस आदमी को दुष्ट कहता है जो लेता है और भरता नहीं; यह बहुत तीखी बात है, क्योंकि हमारे बीच कर्ज़ न चुकाना अक्सर "मजबूरी" कहकर ढक दिया जाता है। जिनसे आपने उधार लिया है, उन्हें एक ईमानदार तारीख़ दीजिए, भले वह धीमी हो। चुपचाप गायब हो जाना विश्वास की गवाही को उससे ज़्यादा नुक़सान पहुँचाता है, जितना हम सोचते हैं। और नए कर्ज़ से पहले पूछिए कि यह मुझे किसका दास बना रहा है।

घर में पैसे की बातचीत को आध्यात्मिक बातचीत बनाइए। पति-पत्नी मिलकर महीने में एक बार खाते खोलकर बैठें, बिना ताने और बिना छिपाव। जहाँ पैसा छिपाया जाता है, वहाँ भरोसा टूटता है। बच्चों को शुरू से सिखाइए कि हर रुपये के तीन हिस्से हैं: देना, बचाना, ख़र्च करना। जन्मदिन पर मिले पैसे से भी यह अभ्यास शुरू हो सकता है।

काम की जगह पर मत्ती 6:24 सबसे ज़्यादा चुभता है। वह अतिरिक्त कमाई, जो झूठे बिल, नक़ली रसीद या रिश्वत से आती है, आपसे भक्ति माँग रही है। ईमानदार तराज़ू आज भी परमेश्वर को प्रिय है, चाहे उससे धंधा धीमा चले। और लूका 12:15 उस दूसरी लड़ाई के लिए है, बँटवारे की लड़ाई; ज़मीन और विरासत के झगड़े ने कितने भाइयों को जीवन भर अलग कर दिया है। किसी रिश्ते को बचाने के लिए हिस्सा छोड़ देना घाटा नहीं, आज़ादी है।

आख़िर में, सन्तोष का अभ्यास कीजिए। इब्रानियों 13:5 को हफ़्ते भर दोहराइए, ख़ासकर तब जब मोबाइल पर किसी और का नया घर, नई गाड़ी और विदेश यात्रा दिखे। तुलना ही लोभ का सबसे तेज़ इंजन है। धन्यवाद के साथ जो है उसे गिनना, और चुपचाप किसी की ज़रूरत पूरी कर देना, ये दो आदतें मिलकर पैसे को उसके सिंहासन से उतार देती हैं।

दर्पण

आपको यह पृष्ठ पढ़ते हुए कहीं थोड़ी बेचैनी हुई हो, तो उसे जल्दी से मत झटकिए। आप जानते हैं कि आपकी सबसे लंबी और सबसे ईमानदार बातचीत किस विषय पर होती है, और आप जानते हैं कि रात को नींद किस हिसाब से उड़ती है। हम बहुत आराम से कह देते हैं कि पैसा हमारे लिए बड़ी बात नहीं है, और फिर उसी पैसे के लिए रिश्ते में ठंडक, माता-पिता से दूरी, और नौकरी में समझौते बर्दाश्त कर लेते हैं।

अपने पिछले तीन महीनों का ख़र्च देखिए। वह आपके विश्वास का कथन है, आपके गीतों से ज़्यादा सच्चा। आप जहाँ पैसा लगाते हैं, वहीं अपना समय, अपनी सोच और अपनी उम्मीद भी लगाते हैं। यीशु ने कहा था कि जहाँ धन है वहाँ मन भी लगा रहेगा; उन्होंने यह ताना नहीं मारा, निदान किया।

कुछ लोगों के लिए यह विषय चुभता है क्योंकि उनके पास बहुत है और वे उसे छोड़ नहीं पाते। और कुछ के लिए यह चुभता है क्योंकि उनके पास कम है और वे उसकी कमी से लड़ते-लड़ते कड़वे हो गए हैं। लोभ दोनों में जी सकता है। अमीर का लोभ कहता है, "और थोड़ा"; ग़रीब का लोभ कहता है, "परमेश्वर ने मेरे साथ अन्याय किया"। दोनों का इलाज एक ही है, और वह बैंक में नहीं, क्रूस पर मिलता है, जहाँ वे धनी होकर भी हमारे लिए दरिद्र बन गए।

तो आज एक ठोस कदम उठाइए। वह कर्ज़ चुकाना शुरू कीजिए जिसे आप टाल रहे हैं। वह रकम लौटाइए जो आपने किसी से बिना बताए ले ली थी। किसी विधवा, किसी बेरोज़गार युवक, किसी बीमार पड़ोसी की ज़रूरत चुपचाप पूरी कीजिए, ऐसे कि किसी को पता न चले। और अपने पैसे के ऊपर हाथ रखकर प्रार्थना कीजिए, "प्रभु, यह आपका है, मैं तो भण्डारी हूँ।" जिस दिन यह प्रार्थना सच हो जाती है, उस दिन डर का एक बड़ा हिस्सा जाना शुरू कर देता है।

बच्चों के लिए समझाया गया

बच्चों को पैसे की बात समझाने का सबसे अच्छा तरीक़ा उपदेश नहीं, हाथ में रखी असली चीज़ है। एक सिक्का या एक नोट लेकर पूछिए, "यह कहाँ से आया?" बात काम पर आएगी, फिर उस ताक़त पर जो काम करने के लिए परमेश्वर देते हैं, और फिर इस सच्चाई पर कि सब कुछ पहले से ही उनका है। बच्चे "मालिक" और "देखभाल करने वाले" का फ़र्क़ जल्दी समझ लेते हैं; उनसे कहिए कि हम परमेश्वर के पैसे के देखभाल करने वाले हैं, जैसे कोई बड़ा भाई छोटे भाई का टिफ़िन संभालता है।

इसके बाद तीन डिब्बों का सरल अभ्यास कीजिए: एक देने के लिए, एक बचाने के लिए, एक ख़र्च के लिए। जब बच्चा अपने ही हाथ से किसी ज़रूरतमंद को कुछ देता है, तो भजन संहिता 37:21 की "उदारता" उसके लिए शब्द नहीं, याद बन जाती है। और जब वह अपनी मनपसंद चीज़ के लिए कुछ हफ़्ते इंतज़ार करता है, तो सन्तोष का पहला पाठ शुरू हो जाता है। साथ में वह विधवा की कहानी सुनाइए जिसने दो छोटी दमड़ियाँ डालीं, और ज़क्कई की कहानी, जिसने यीशु से मिलने के बाद अपना पैसा लौटाना शुरू किया। बच्चों को यह सुनना चाहिए कि यीशु से मिलने पर पैसा भी बदल जाता है।

बड़े बच्चों के साथ आप मत्ती 6:24 पर बात कर सकते हैं: दो मालिकों की सेवा क्यों नहीं हो सकती, और पैसा कैसे चुपके से मालिक बनने की कोशिश करता है।

हमारी वेबसाइट पर इस विषय की अलग-अलग उम्र के लिए तैयार व्याख्याएँ उपलब्ध हैं, छोटे बच्चों के लिए (तीन से छह वर्ष), स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए (सात से बारह वर्ष), और किशोरों के लिए (बारह वर्ष से ऊपर), जिनमें कहानियाँ, सवाल और घर पर करने के सरल अभ्यास दिए गए हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या बाइबल में धन को पाप कहा गया है?

नहीं। पवित्रशास्त्र सम्पत्ति को परमेश्वर का दिया हुआ वरदान मानता है, और इब्राहीम, अय्यूब तथा बोअज़ जैसे धनवान विश्वासियों की कहानियाँ पूरे सम्मान के साथ बताता है। चेतावनी वस्तु पर नहीं, इच्छा पर है: 1 तीमुथियुस 6:10 कहता है कि "रुपये का लोभ सब प्रकार की बुराइयों की जड़ है"। इसलिए सवाल यह नहीं कि आपके पास कितना है, बल्कि यह कि आपका पैसा किसकी सेवा में लगा है और उसकी पकड़ आपके हृदय पर कितनी मज़बूत है।

मत्ती 6:24 में "धन" का क्या अर्थ है?

मूल यूनानी में यहाँ "ममोना" शब्द है, जो अरामी भाषा से आया है और धन-सम्पत्ति के लिए इस्तेमाल होता था। यीशु मसीह इसे एक व्यक्ति की तरह पेश करते हैं, एक स्वामी की तरह जिसकी सेवा की जा सकती है। यही इस वचन की चुभने वाली बात है: पैसा केवल चीज़ नहीं, वह भक्ति माँगने वाली शक्ति बन सकता है, जो सुरक्षा, इज़्ज़त और भविष्य का वादा करके परमेश्वर की जगह लेना चाहता है। इसलिए मत्ती 6:24 कहता है कि दोनों की सेवा असंभव है।

क्या मसीहियों को आज भी दशमांश देना चाहिए?

नया नियम प्रतिशत का नियम दोहराता नहीं, पर उदारता का स्तर घटाता भी नहीं। नीतिवचन 3:9 का सिद्धांत बना रहता है कि पहला और सबसे अच्छा हिस्सा परमेश्वर का आदर करने के लिए अलग रखा जाए, और 2 कुरिन्थियों 9:7 कहता है कि हर एक जैसा मन में ठाने वैसा दान करे, न कुढ़ कुढ़ के और न दबाव से। बहुत विश्वासी दशमांश को एक स्वस्थ शुरुआती अनुशासन मानते हैं, बोझ नहीं; असली माप हृदय की ख़ुशी और नियमितता है।

बाइबल के अनुसार कर्ज़ लेना पाप है?

कर्ज़ को पाप नहीं कहा गया, पर उसे ख़तरा कहा गया है। नीतिवचन 22:7 साफ़ कहता है कि "उधार लेनेवाला उधार देनेवाले का दास होता है", और भजन संहिता 37:21 उस व्यक्ति पर उँगली रखता है जो ऋण लेता है और चुकाता नहीं। इसलिए दो बातें ज़रूरी हैं: कर्ज़ लेने से पहले ईमानदारी से सोचिए कि यह आपको किसका दास बना रहा है, और लेने के बाद चुकाने को आध्यात्मिक ज़िम्मेदारी मानिए, चाहे वह धीरे-धीरे ही हो।

क्या समृद्धि का सुसमाचार बाइबल के अनुसार सही है?

नहीं। यह शिक्षा परमेश्वर को एक निवेश योजना और विश्वास को लेन-देन बना देती है। पवित्रशास्त्र आर्थिक आशीष की संभावना से इनकार नहीं करता, पर वह कहीं भी धन को विश्वास का प्रमाणपत्र नहीं बनाता। यीशु मसीह ग़रीबी में जन्मे, पौलुस ने भूख और कमी दोनों जानी, और इब्रानियों 11 के विश्वास के नायक कमी में मरे। इब्रानियों 13:5 का वादा सम्पत्ति नहीं, उपस्थिति है: "मैं तुझे कभी न छोड़ूँगा, और न कभी तुझे त्यागूँगा।"

लूका 12:15 में यीशु लोभ के बारे में क्या सिखा रहे हैं?

एक व्यक्ति उनसे विरासत का बँटवारा करवाने आया था, और प्रभु ने न्यायाधीश बनने से इनकार करके उसका ध्यान उसके ही हृदय पर मोड़ दिया: "चौकस रहो, और लोभ से बचे रहो, क्योंकि किसी का जीवन उसकी सम्पत्ति की बहुतायत से नहीं होता।" फिर उन्होंने उस धनी की कहानी सुनाई जिसने भण्डार बढ़ाए और उसी रात मर गया। सीख यह है कि जीवन का मूल्य और सुरक्षा मालिकाना हक़ में नहीं, परमेश्वर के साथ रिश्ते में है।

1 तीमुथियुस 6:10 का असली अर्थ क्या है?

यह वचन अक्सर आधा उद्धृत होता है, जैसे पैसा ही बुराई की जड़ हो। पौलुस लिखते हैं कि "रुपये का लोभ सब प्रकार की बुराइयों की जड़ है, और इसी का लालसा करके कितने लोग विश्वास से भटक गए हैं, और अपने आप को नाना प्रकार के दुखों में फँसाया है"। यानी जड़ इच्छा है, और उसका फल दोहरा है: आध्यात्मिक भटकाव और ख़ुद पर लाया गया दुख। यही कारण है कि पौलुस आगे सन्तोष, भलाई और उदारता को दवा के रूप में सुझाते हैं।

क्या बाइबल बचत और निवेश की अनुमति देती है?

हाँ, बुद्धिमानी से की गई बचत को पवित्रशास्त्र सराहता है। नीतिवचन चींटी की मिसाल देकर समय रहते जमा करने की सीख देते हैं, यूसुफ़ ने अकाल के लिए भण्डार भरे, और यीशु की तोड़ों की कहानी में जमा किए हुए धन के ज़िम्मेदार उपयोग की प्रशंसा है। फ़र्क़ नीयत का है। जब बचत दूसरों की सेवा और परिवार की ज़िम्मेदारी के लिए हो, वह बुद्धि है; जब वह डर मिटाने और ख़ुद को सुरक्षित बनाने का साधन बन जाए, वह मूर्तिपूजा की तरफ़ पहला कदम है।

बाइबल के अनुसार कितना दान देना चाहिए?

नया नियम कोई निश्चित अंक नहीं देता, पर तीन माप देता है। पहला, क्रम: नीतिवचन 3:9 के अनुसार पहला फल, बचा हुआ नहीं। दूसरा, हृदय: 2 कुरिन्थियों 9:7 के अनुसार ख़ुशी से, दबाव से नहीं। तीसरा, अनुपात: पौलुस लिखते हैं कि हर एक अपनी आय के अनुसार अलग रखे, इसलिए कम आय वाले का छोटा दान बड़े दान से कम नहीं। विधवा की दो दमड़ियाँ यीशु की नज़र में सबसे बड़ी भेंट थीं।

क्या बाइबल में ब्याज लेना मना है?

व्यवस्था में इस्राएल को अपने ज़रूरतमंद भाई से ब्याज लेने से रोका गया था, क्योंकि उद्देश्य किसी की मजबूरी से लाभ कमाना नहीं, उसे उठाना था। यह मुख्य रूप से ग़रीबी में दिए गए कर्ज़ के बारे में था, न कि व्यापारिक लेन-देन के बारे में। इसीलिए यीशु की तोड़ों की कहानी में निवेश और लाभ की भाषा सामान्य रूप से इस्तेमाल होती है। सिद्धांत आज भी वही है: कमज़ोर की मजबूरी पर मुनाफ़ा कमाना परमेश्वर की दृष्टि में शोषण है।

क्या लॉटरी और जुआ बाइबल के अनुसार ग़लत है?

बाइबल में "जुआ" शब्द से सीधी मनाही नहीं है, पर उसका पूरा रुख़ इसके विपरीत है। पवित्रशास्त्र ईमानदार परिश्रम से कमाई को सम्मान देता है और आसान धन के पीछे दौड़ने वालों को चेताता है। जुआ मूलतः दूसरों के नुक़सान से लाभ उठाता है, लोभ को भड़काता है, और परमेश्वर की देखभाल पर भरोसे के बजाय संयोग पर आशा रखता है। जहाँ ऐसी आदत परिवार का पैसा और मन की शांति निगल जाती है, वहाँ वह पहले से ही एक स्वामी बन चुकी है।

पैसे की चिंता से छुटकारा कैसे मिलेगा?

यीशु मसीह ने मत्ती 6 में चिंता का इलाज ज़्यादा आय नहीं, बल्कि पिता की देखभाल पर नज़र टिकाना बताया, और कहा कि पहले परमेश्वर के राज्य की खोज करो। इसके साथ इब्रानियों 13:5 सन्तोष को उनकी स्थायी उपस्थिति से जोड़ता है। व्यवहार में तीन चीज़ें मदद करती हैं: जो है उसके लिए रोज़ धन्यवाद देना, दूसरों से तुलना करने वाली आदतों को कम करना, और नियमित उदारता, क्योंकि देना पैसे की पकड़ को उसी क्षण ढीला कर देता है।

क्या पति-पत्नी को पैसे की बात खुलकर करनी चाहिए?

हाँ, और यह बहुत ज़रूरी है। जहाँ आय, ख़र्च और कर्ज़ छिपाए जाते हैं, वहाँ भरोसा धीरे-धीरे टूटता है, और पैसा रिश्ते में सबसे बड़ा झगड़ा बन जाता है। मसीही विवाह में दोनों मिलकर परमेश्वर के भण्डारी हैं, इसलिए महीने में एक बार साथ बैठकर खाते देखना, देने का हिस्सा तय करना और बड़े ख़र्च पर सहमति बनाना आध्यात्मिक अभ्यास है। प्रार्थना के साथ किया गया ऐसा हिसाब झगड़े को घटाता है और एकता को बढ़ाता है।

अंत में

बाइबल में धन का विषय कभी एक सादा सवाल नहीं रहा, "यह उचित है या नहीं"। पवित्रशास्त्र इसे सिंहासन का सवाल बनाता है। पैसा आपकी सेवा भी कर सकता है और आपको ग़ुलाम भी बना सकता है, और यह फ़ैसला इस बात से नहीं होता कि आपके खाते में कितना है, बल्कि इससे कि आपका हृदय किसे स्वामी मानता है। इसीलिए नीतिवचन 3:9 क्रम बदलने को कहता है, भजन संहिता 37:21 वादे निभाने और हाथ खोलने को कहता है, मत्ती 6:24 दोहरी भक्ति को असंभव बताता है, लूका 12:15 लोभ पर चौकस रहने को कहता है, 1 तीमुथियुस 6:10 जड़ की पहचान कराता है, और इब्रानियों 13:5 एक ऐसी सुरक्षा देता है जो कोई मंदी छीन नहीं सकती।

आगे बढ़ने के लिए एक छोटा सुझाव: इस हफ़्ते मत्ती 6:19-34 और 2 कुरिन्थियों 8 तथा 9 अध्याय धीरे-धीरे पढ़िए, और हर पढ़ाई के बाद एक ही प्रश्न पर रुकिए, "प्रभु, आपने जो मुझे सौंपा है, उसका अगला ईमानदार कदम क्या है?" जो भण्डारी बनकर जीना सीख लेता है, वह पहली बार पैसे के साथ आज़ादी से जीना सीखता है।

यह पृष्ठ साझा करें

सुसमाचार फैलाने में मदद करें। यह व्याख्या किसी ऐसे व्यक्ति को भेजें जिसे इससे प्रोत्साहन मिल सके।

WhatsApp Email Facebook X / Twitter
दैनिक वचन

हर सुबह आपके इनबॉक्स में एक बाइबल अंश और मनन

हर सुबह आपको एक बाइबल अंश और एक छोटा मनन मिलेगा, जिससे आप अपना दिन आरंभ कर सकें। पहले से ही 5.898 लोग साथ पढ़ रहे हैं।

आपको पहले एक पुष्टिकरण ईमेल मिलेगा। आप कभी भी एक क्लिक से सदस्यता समाप्त कर सकते हैं।

अंतर्दृष्टियों की दीवार

पवित्रशास्त्र में आपको क्या स्पर्श करता है? हम किसके लिए प्रार्थना करें? हम परमेश्वर का किसके लिए धन्यवाद करें?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर नहेम्याह 9:21

चालीस साल जंगल में, और लिखा है, "उनको कुछ घटी न हुई; न तो उनके वस्त्र पुराने हुए और न…

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर रूत 2:6

खेत के सेवक ने रूत का नाम नहीं लिया। उसने कहा, "वह मोआबी जवान स्त्री है, जो नाओमी के साथ…

प्रार्थना संपादकीय पर रूत 4:10

पिता, आपने बोअज के ज़रिए एक अनजान विधवा को घर, नाम और भविष्य दिया। मैं भी कई बार खुद को…

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर विलापगीत 5:14

वृद्ध लोग फाटक के पास बैठना छोड़ गए, और जवानों ने गाना बजाना छोड़ दिया है।" शहर गिरा तो सिर्फ…

धन्यवाद संपादकीय पर विलापगीत 3:13

पिता, धन्यवाद कि जब दर्द ऐसा लगता है मानो तूने "अपने तरकश के तीरों" से भीतर तक बेध दिया हो,…

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर एस्तेर 1:7

सोने के पात्र, और हर एक दूसरे से अलग। इतनी दौलत कि दोहराने की ज़रूरत ही नहीं पड़ी, और दाखमधु…

अस्वीकरण: Faith.network बाइबल अध्ययन और मनन तैयार करने के लिए स्वचालित भाषा मॉडलों का उपयोग करता है। सारी सामग्री बाइबल के मूल पाठ से ही तैयार की जाती है और प्रतिदिन एक स्वतंत्र, स्वचालित गुणवत्ता जाँच द्वारा परखी जाती है: प्रत्येक भाषा साइट से यादृच्छिक नमूने पवित्रशास्त्र के प्रति निष्ठा, बाइबल के शब्दशः उद्धरण, भाषा और स्पष्टता के आधार पर आँके जाते हैं, और परिणाम बिना संपादन के प्रकाशित किए जाते हैं। फिर भी, कोई भी व्याख्या अचूक नहीं है और त्रुटियाँ हो सकती हैं। इस मंच पर कुछ भी पेशेवर सलाह नहीं है, और इसकी सामग्री से कोई अधिकार प्राप्त नहीं किया जा सकता। जो आप पढ़ें उसे सदा स्वयं बाइबल से जाँचें, और Faith.network को अपने व्यक्तिगत बाइबल अध्ययन, प्रार्थना और स्थानीय कलीसिया के जीवन के पूरक के रूप में उपयोग करें, कभी भी उनके स्थान पर नहीं। हमारी पूर्ण अस्वीकरण सूचना और उपयोग की शर्तें लागू होती हैं। हमारी दैनिक गुणवत्ता जाँच देखें

© 2026 Faith.Network. सर्वाधिकार सुरक्षित।

Faith.network एक सेवकाई है Faith.network · KvK 84972599 · connect@faith.network

हमारे साझेदारों के सहयोग से संभव
कंपनी?