यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाला: प्रभु के लिए मार्ग तैयार करने वाला भविष्यद्वक्ता
परिचय
यरदन नदी के किनारे धूल उड़ रही है। यरूशलेम से, यहूदिया के गाँवों से, यरदन के आसपास की बस्तियों से लोग निकल आए हैं, न किसी मंदिर में, न किसी महल में, बल्कि जंगल में, जहाँ न सुख-सुविधा है, न सजावट। और वहाँ खड़ा है एक आदमी जिसके पास कोई पद नहीं, कोई मंदिर नहीं, कोई चमत्कार नहीं; केवल ऊँट के रोम का कठोर वस्त्र, चमड़े का पटुका, और एक आवाज़ जो हड्डियों तक उतर जाती है। लोग उसे सुनने आते हैं, मगर वह हर बार अपनी ओर से हटकर किसी और की ओर उँगली उठा देता है।
यह आदमी इतिहास का सबसे विचित्र सफल प्रचारक है, क्योंकि उसकी सफलता की माप यह थी कि भीड़ उसे छोड़कर किसी दूसरे के पीछे चली जाए। इस पृष्ठ पर आप यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले के पूरे जीवन से गुज़रेंगे, उसके जन्म की भविष्यवाणी से लेकर हेरोदेस के बंदीगृह तक, और देखेंगे कि उसका छोटा होना ही उसकी महानता का रहस्य था।
इस मार्गदर्शिका का दृष्टिकोण
यूहन्ना पर लिखे कई लेख उसे "कठोर प्रचारक" या "अंतिम भविष्यद्वक्ता" कहकर छोड़ देते हैं। यह पृष्ठ एक ही वाक्य के आसपास बुना गया है, जो यूहन्ना के अपने मुँह से निकला: "अवश्य है कि वह बढ़े और मैं घटूँ" (यूहन्ना 3:30)। हम उसके जीवन को घटने की कला के रूप में पढ़ेंगे, गर्भ से लेकर तलवार तक। उसकी बुलाहट, उसकी कठोरता, उसकी लोकप्रियता, यहाँ तक कि बंदीगृह में उठा उसका संदेह भी, सब इस एक धुरी पर घूमता है। यह दृष्टिकोण मायने रखता है, क्योंकि आज हमें बढ़ना सिखाया जाता है, और मसीह की सेवा अक्सर हमसे उलटा माँगती है।
बाइबल यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले के बारे में क्या कहती है?
यूहन्ना की कहानी एक खाली गर्भ और एक बूढ़े याजक की चुप्पी से शुरू होती है। जकर्याह मंदिर में धूप जलाने की सेवा कर रहा था, तब स्वर्गदूत जिब्राईल ने उससे कहा: "हे जकर्याह, भयभीत न हो, क्योंकि तेरी प्रार्थना सुन ली गई है, और तेरी पत्नी इलीशिबा से तेरे लिये एक पुत्र उत्पन्न होगा, और तू उसका नाम यूहन्ना रखना। और तुझे आनन्द और हर्ष होगा, और बहुत लोग उसके जन्म से आनन्दित होंगे। क्योंकि वह प्रभु के सामने महान होगा, और दाखरस और मदिरा कभी न पीएगा, और अपनी माता के गर्भ ही से पवित्र आत्मा से परिपूर्ण हो जाएगा। और इस्राएलियों में से बहुतों को उनके प्रभु परमेश्वर की ओर फेरेगा। वह एलिय्याह की आत्मा और सामर्थ्य में होकर उसके आगे आगे चलेगा, कि पितरों का मन बाल-बच्चों की ओर फेर दे; और आज्ञा न माननेवालों को धर्मियों की समझ पर लाए; और प्रभु के लिये एक योग्य प्रजा तैयार करे" (लूका 1:13-17)।
इन पाँच पदों में यूहन्ना का पूरा जीवन बीज रूप में मौजूद है। ध्यान दीजिए, स्वर्गदूत कहता है वह "प्रभु के सामने महान होगा", मगर उसकी महानता का काम है "प्रभु के लिये एक योग्य प्रजा तैयार करे"। वह किसी और के लिए मैदान तैयार करने वाला मज़दूर है। परमेश्वर उसे बुलाते ही उस उद्देश्य के साथ बुलाते हैं जो उससे बड़ा है।
उसकी बुलाहट में ही उसका घटना छिपा था।
फिर वह मरियम के साथ इलीशिबा की भेंट का दृश्य आता है, जहाँ अजन्मा यूहन्ना गर्भ में उछल पड़ता है (लूका 1:41)। जन्म के बाद जकर्याह की जीभ खुलती है और वह भविष्यवाणी करता है कि यह बालक प्रभु के आगे आगे चलकर उनका मार्ग तैयार करेगा। लूका 1:80 बताता है कि बालक बढ़ता और आत्मा में बलवन्त होता गया, और इस्राएल पर प्रकट होने के दिन तक जंगल में रहा। ये चुप्पी के वर्ष अनदेखे रह जाते हैं, मगर वे बेकार नहीं थे। जंगल ने उसे वह आवाज़ दी जो महलों में नहीं गढ़ी जाती।
फिर वह दिन आया: "उन दिनों में यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाला आकर यहूदिया के जंगल में यह प्रचार करने लगा: 'मन फिराओ, क्योंकि स्वर्ग का राज्य निकट आ गया है।' यह वही है, जिसकी चर्चा यशायाह भविष्यद्वक्ता ने की थी कि 'जंगल में एक पुकारनेवाले का शब्द हो रहा है कि प्रभु का मार्ग तैयार करो, और उसकी सड़कें सीधी करो।' यह यूहन्ना ऊँट के रोम का वस्त्र पहने था, और अपनी कमर में चमड़े का पटुका बाँधे हुए था, और उसका भोजन टिड्डियाँ और वनमधु था। तब यरूशलेम के और सारे यहूदिया के, और यरदन के आस-पास के सारे देश के लोग उसके पास निकल आए। और अपने पापों को मानकर यरदन नदी में उससे बपतिस्मा लिया" (मत्ती 3:1-6)।
यूहन्ना का संदेश सीधा था और उसमें कोई मिठास नहीं थी: मन फिराओ। उसने भीड़ को खुश करने की कोशिश नहीं की; उसने साँपों के बच्चे कहकर पुकारा और कहा कि मन फिराव के योग्य फल लाओ (लूका 3:7-8)। जब लोगों ने पूछा "तो हम क्या करें", उसने अध्यात्मिक रहस्य नहीं बताए, बल्कि रोज़ की बातें कहीं: जिसके पास दो कुर्ते हैं वह बाँटे, चुंगी लेनेवाले ठगी न करें, सिपाही किसी पर अन्याय न करें (लूका 3:10-14)। पश्चाताप उसके लिए भावना नहीं, बल्कि जीवन का पुनर्गठन था।
और जब भीड़ बढ़ी और लोगों ने सोचना शुरू किया कि कहीं वह स्वयं मसीह न हो, तब यूहन्ना ने वह किया जो कोई लोकप्रिय व्यक्ति स्वभाव से नहीं करता। उसने अपनी पहचान घटाकर एक शब्द में समेट दी: "मैं जंगल में एक पुकारनेवाले का शब्द हूँ" (यूहन्ना 1:23)। न भविष्यद्वक्ता का ताज, न एलिय्याह होने का दावा; केवल एक आवाज़। और आवाज़ का काम है सुनाई देकर हवा में मिट जाना, जबकि जिस बात की वह गवाही देती है, वह बनी रहती है। उसने साफ़ कहा कि उसके बाद आनेवाला उससे इतना बड़ा है कि वह उसकी जूती का बन्ध खोलने के भी योग्य नहीं (मत्ती 3:11)।
बाइबल में चलने वाला सूत्र
यूहन्ना आकाश से नहीं टपका। उसके आने से सैकड़ों साल पहले, यशायाह ने बाबुल की बंधुआई में डूबे लोगों को सांत्वना का एक शब्द दिया था: "किसी की पुकार सुनाई देती है, 'जंगल में यहोवा का मार्ग सुधारो, हमारे परमेश्वर के लिये अराबा में एक राजमार्ग चौरस करो'" (यशायाह 40:3)। प्राचीन संसार में जब कोई राजा किसी इलाके का दौरा करता, तो मज़दूर आगे जाकर सड़कें बनाते, गड्ढे भरते, टीले काटते। यशायाह कहता है कि परमेश्वर स्वयं अपने लोगों के पास आ रहे हैं, और कोई आवाज़ रास्ता तैयार करने की पुकार लगा रही है। चारों सुसमाचार इस पद को उठाकर सीधे यूहन्ना पर रख देते हैं। यानी यूहन्ना केवल एक अच्छा प्रचारक नहीं था; वह भविष्यवाणी की पूर्ति था, इतिहास में एक तय की गई कड़ी।
मलाकी ने पुराने नियम को इस वादे पर बंद किया था: "देखो, मैं अपने दूत को भेजता हूँ, और वह मेरे आगे आगे मार्ग सीधा करेगा" (मलाकी 3:1), और आगे कहा कि परमेश्वर एलिय्याह भविष्यद्वक्ता को भेजेंगे, जो पितरों का मन बाल-बच्चों की ओर फेर देगा (मलाकी 4:5-6)। ध्यान दीजिए कि स्वर्गदूत ने लूका 1:17 में लगभग यही शब्द दोहराए। इसलिए यीशु ने बाद में स्पष्ट कहा कि जिसे आना था, वह एलिय्याह यूहन्ना ही है (मत्ती 11:14)। यूहन्ना का ऊँट के रोम का वस्त्र और चमड़े का पटुका संयोग नहीं था; एलिय्याह भी ऐसा ही दिखता था (2 राजा 1:8)। परमेश्वर ने पुराने नियम के अंतिम पन्ने को नए नियम के पहले पन्ने से एक ही आदमी के ज़रिए जोड़ दिया।
पुराने नियम की तड़प थी: परमेश्वर कब आएँगे? नए नियम का उत्तर है: वे आ चुके हैं। और उन दोनों के बीच खड़ा है यूहन्ना, दहलीज़ पर, एक हाथ पुराने में और एक हाथ नए में। इसीलिए उसकी सबसे ऊँची घड़ी वह थी जब उसने केवल घोषणा नहीं की, बल्कि उँगली उठाकर एक व्यक्ति को दिखाया: "देखो, यह परमेश्वर का मेम्ना है, जो जगत के पाप उठा ले जाता है!" (यूहन्ना 1:29)।
यह वाक्य पूरे पुराने नियम का सार है। फसह की रात के मेम्ने, दिन-रात मंदिर में चढ़ाए जानेवाले बलिदान, यशायाह 53 का वह मेम्ना जो वध होने के लिए ले जाया जाता है, सब कुछ यूहन्ना की उँगली की दिशा में सिमट आता है। उसने यह नहीं कहा, "देखो, यह हमारा नया शिक्षक है" या "देखो, हमारा राजा"। उसने पाप की समस्या को केंद्र में रखा और उस पर उत्तर रखा। यूहन्ना ने पानी से बपतिस्मा दिया; मसीह पवित्र आत्मा से बपतिस्मा देंगे। यूहन्ना ने पाप दिखाए; मसीह पाप उठा ले गए। यही सूत्र है जो बाइबल के पहले पन्ने से अंतिम पन्ने तक चलता है, और यूहन्ना उस सूत्र का सबसे ईमानदार सेवक है, क्योंकि वह अपने आप पर कभी नहीं रुका।
उसके जीवन का सार
तीन घड़ियाँ यूहन्ना के जीवन को समझने के लिए पर्याप्त हैं।
पहली घड़ी यरदन के पानी में है। यीशु गलील से आकर यूहन्ना के पास बपतिस्मा लेने आए, और यूहन्ना ने उन्हें रोका: मुझे तो तेरे हाथ से बपतिस्मा लेने की आवश्यकता है (मत्ती 3:14)। सोचिए इस दृश्य की विडंबना: पापों के अंगीकार के लिए बना बपतिस्मा, और सामने खड़ा वह जिसमें कोई पाप नहीं। यीशु ने कहा कि सब धार्मिकता को पूरा करने के लिए ऐसा ही होना उचित है। यूहन्ना ने समझ न आने पर भी आज्ञा मानी, और उस पल आकाश खुला, आत्मा कबूतर की तरह उतरा, और पिता की आवाज़ आई। यूहन्ना की सेवकाई का शिखर वह क्षण था जब वह किनारे हो गया और सारी रोशनी दूसरे पर पड़ी। जीवन भर उसने जो कहा था, वह उस दिन उसके हाथों में आ गया।
दूसरी घड़ी तब आई जब उसके चेलों ने शिकायत की कि यीशु के पास ज़्यादा लोग जा रहे हैं। यह हर सेवक की परीक्षा है, और यहीं यूहन्ना ने वह शब्द कहे जो उसका जीवन-सूत्र बन गए। उसने अपनी तुलना दुल्हे के मित्र से की, जो दुल्हे का शब्द सुनकर आनन्द से भर जाता है (यूहन्ना 3:29), और फिर कहा: "अवश्य है कि वह बढ़े और मैं घटूँ" (यूहन्ना 3:30)। यह हार का शब्द नहीं, आनन्द का शब्द है। दुल्हे का मित्र दुल्हन का हाथ पकड़ने नहीं आता; वह विवाह को सफल देखकर खुश होता है। यूहन्ना ने अपनी घटती भीड़ को नुकसान नहीं, बल्कि अपनी बुलाहट की पूर्ति के रूप में गिना।
तीसरी घड़ी हेरोदेस के बंदीगृह में है। "क्योंकि हेरोदेस ने आप ही अपने भाई फिलिप्पुस की पत्नी हेरोदियास के कारण, जिससे उसने विवाह किया था, लोगों को भेजकर यूहन्ना को पकड़वाकर बन्दीगृह में जकड़वा दिया था। क्योंकि यूहन्ना ने हेरोदेस से कहा था, 'अपने भाई की पत्नी को रखना तुझे उचित नहीं'" (मरकुस 6:17-18)। यूहन्ना ने सत्ता के सामने भी वही बात कही जो उसने भीड़ से कही थी। मरकुस 6:19-29 आगे बताता है कि हेरोदियास मन में बैर रखती थी, हेरोदेस के जन्मदिन के भोज में उसकी बेटी के नाच से खुश होकर राजा ने आधा राज्य देने की शपथ खा ली, और माँ के सिखाने पर लड़की ने थाल में यूहन्ना का सिर माँग लिया। एक शराबी शपथ, एक नाच, और परमेश्वर के भविष्यद्वक्ता का सिर काट दिया गया।
इससे पहले, उसी अंधेरी कोठरी में यूहन्ना डोल गया था। उसने अपने चेलों को यीशु के पास भेजकर पूछवाया कि क्या आनेवाला वही हैं, या उन्हें किसी दूसरे की बाट जोहनी चाहिए (मत्ती 11:2-3)। बाइबल उसके इस संदेह को छिपाती नहीं। जिसने मेम्ने की ओर उँगली उठाई थी, वही जंजीरों में पूछ रहा था। और यीशु ने उसे डाँटा नहीं; उन्होंने अपने कामों का समाचार भेजा और उसी सभा में कहा: "मैं तुम से सच कहता हूँ कि जो स्त्रियों से जन्मे हैं, उनमें से यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से कोई बड़ा नहीं हुआ; फिर भी स्वर्ग के राज्य में छोटे से छोटा उससे बड़ा है" (मत्ती 11:11)। यूहन्ना का घटना उसकी मौत में पूरा हुआ, और ठीक वहीं मसीह ने उसे सबसे बड़ा कहा।
यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले से हम क्या सीखते हैं
पहला पाठ: बुलाहट का माप प्रभावशीलता नहीं, वफ़ादारी है। यूहन्ना ने एक भी चमत्कार नहीं किया। लोगों ने खुद कहा, "यूहन्ना ने तो कोई चिन्ह नहीं दिखाया, परन्तु जो कुछ यूहन्ना ने इसके विषय में कहा था वह सब सच था" (यूहन्ना 10:41)। उसकी सारी सामर्थ्य इस बात में थी कि उसने सच कहा और सही व्यक्ति की ओर इशारा किया। यदि आपकी सेवा में भीड़ नहीं, चमत्कार नहीं, तालियाँ नहीं, यूहन्ना का जीवन आपको बताता है कि यह किसी असफलता का सबूत नहीं है। यीशु ने उसे "जलता और चमकता हुआ दीपक" कहा (यूहन्ना 5:35), और दीपक की महिमा यही है कि वह अपने आप को जलाकर दूसरी चीज़ों को दिखाता है।
दूसरा पाठ: घटना अपमान नहीं, स्वतंत्रता है। हमारे भीतर एक भूख है कि हमें देखा जाए, गिना जाए, याद रखा जाए। यूहन्ना 3:30 उस भूख पर सीधा प्रहार करता है। जब मसीह बढ़ते हैं, तो हमारा घटना नुकसान नहीं होता, क्योंकि हम खाली नहीं होते, हम बदल जाते हैं। जो व्यक्ति अपने नाम की रक्षा करने के बोझ से मुक्त हो जाता है, वह सबसे हल्का चलनेवाला व्यक्ति होता है। यूहन्ना जंगल में खुश था और बंदीगृह में भी उसने अपनी स्थिति पर मोल-भाव नहीं किया।
तीसरा पाठ: संदेह विश्वास का अंत नहीं है। यूहन्ना का सवाल हमारे लिए एक तोहफ़ा है। वह हमें बताता है कि परमेश्वर के सबसे बड़े सेवक भी अंधेरे में लड़खड़ाते हैं, और मसीह ऐसे लड़खड़ाते हुए व्यक्ति को छोड़ते नहीं। ध्यान दीजिए, यूहन्ना अपने संदेह के साथ कहीं और नहीं गया; उसने वह सवाल सीधे यीशु के पास भेजा। यही करना है। संदेह को दबाइए नहीं, उसे मसीह के सामने रखिए।
संदेह को मसीह के पास ले जाइए, दूर नहीं।
दर्पण
अब सवाल आपसे। आपके भीतर वह कौन-सी जगह है जहाँ आप बढ़ना चाहते हैं, चाहे इसके लिए मसीह को थोड़ा पीछे करना पड़े?
दफ़्तर में जब किसी और की तारीफ़ हुई और आपके काम का ज़िक्र भी नहीं आया, तब आपके मन में जो जलन उठी, वह छोटी बात नहीं थी; वह एक इशारा था कि हम अपने नाम को कितनी मज़बूती से पकड़े रहते हैं। कलीसिया में जब कोई नया व्यक्ति आपसे अच्छा गाने लगा, अच्छा सिखाने लगा, तो क्या आपने मन ही मन उसे नापना शुरू किया? परिवार में जब आपके बच्चे आपसे आगे निकल गए और उन्हें आपकी सलाह की ज़रूरत कम पड़ने लगी, क्या आपने उसे अपने खिलाफ़ चोट समझा या परमेश्वर की भलाई?
यूहन्ना का जीवन इन जगहों पर चुभता है, क्योंकि हम सफलता को जोड़ने में मापते हैं और वह घटने में मापता है। पैसे के मामले में भी यही परीक्षा है। यूहन्ना ने कहा था कि जिसके पास दो कुर्ते हैं, वह बाँट दे। यह उपदेश उस आदमी के मुँह से आया जिसके पास एक ही कुर्ता था। हमारी अलमारी हमारे उपदेश से ज़्यादा सच बोलती है।
और यदि आप आज किसी बंदीगृह जैसी जगह में हैं, बीमारी के बिस्तर पर, अकेलेपन के कमरे में, किसी ऐसी नौकरी में जहाँ आपकी कोई कद्र नहीं, किसी ऐसी प्रार्थना के साथ जिसका उत्तर वर्षों से नहीं आया, तो यूहन्ना का सवाल आपका भी सवाल हो सकता है: क्या मैंने सही व्यक्ति पर भरोसा किया? सुनिए, मसीह ने उस सवाल को अविश्वास नहीं कहा। उन्होंने उत्तर भेजा, और फिर उस डोलते आदमी को स्त्रियों से जन्मे सब लोगों में सबसे बड़ा कहा। आपकी सबसे कमज़ोर घड़ी में भी उनका आपके बारे में फ़ैसला बदला नहीं है। जो आपके लिए मरे, वे आपसे शर्मिंदा नहीं होते।
बच्चों के लिए समझाया गया
बच्चों को यूहन्ना बहुत जल्दी भा जाता है, क्योंकि उसमें सब कुछ है जो एक कहानी को रोचक बनाता है: जंगल, अजीब कपड़े, टिड्डियों का भोजन, नदी में बपतिस्मा, और एक दुष्ट राजा। मगर मनोरंजन के पीछे असली बात न खो जाए, इसका ध्यान रखना ज़रूरी है।
छोटे बच्चों के लिए सबसे सरल तस्वीर यह है: यूहन्ना एक "रास्ता तैयार करनेवाला" था। जैसे किसी खास मेहमान के आने से पहले हम घर साफ़ करते हैं, कुर्सियाँ लगाते हैं, दरवाज़ा खोलकर रखते हैं, वैसे ही परमेश्वर ने यूहन्ना को भेजा कि लोगों के दिल यीशु के आने के लिए तैयार हो जाएँ। आप बच्चे से पूछ सकते हैं, "अगर तुम्हारा सबसे अच्छा दोस्त आ रहा हो, तो तुम क्या-क्या तैयार करोगे?" और फिर बताइए कि यूहन्ना ने लोगों से कहा, अपने दिल को तैयार करो, गलत कामों के लिए माफ़ी माँगो, क्योंकि यीशु आ रहे हैं।
बड़े बच्चों के साथ आप एक कदम आगे जा सकते हैं और उन्हें यूहन्ना का सबसे बड़ा वाक्य दिखा सकते हैं: वह चाहता था कि लोग उसकी तारीफ़ न करें, बल्कि यीशु के पीछे चलें। यह उस उम्र के लिए बहुत जीवंत सबक है जब हर बच्चा सबसे आगे दिखना चाहता है। किशोरों के साथ बंदीगृह के संदेह पर बात करना बहुत फलदायक होता है, क्योंकि वे ईमानदार सवालों की उम्र में होते हैं और उन्हें जानना चाहिए कि सवाल पूछना पाप नहीं है।
Faith.network पर यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले की कहानी के लिए अलग-अलग उम्र के अनुसार तैयार की गई व्याख्याएँ उपलब्ध हैं: तीन से छह साल के छोटे बच्चों के लिए, सात से बारह साल के बच्चों के लिए, और बारह साल से ऊपर के किशोरों के लिए। परिवार की आराधना या रविवार की कक्षा के लिए उस उम्र के अनुसार सामग्री चुनिए, ताकि बात केवल टिड्डियों पर न रुके, बल्कि मेम्ने तक पहुँचे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाला कौन था?
यूहन्ना जकर्याह नामक याजक और इलीशिबा का पुत्र था, जिसका जन्म परमेश्वर की एक विशेष प्रतिज्ञा के बाद बुढ़ापे में हुआ (लूका 1:13-17)। वह यीशु मसीह का रिश्ते में भाई था, उनसे लगभग छह महीने बड़ा, और उसे प्रभु के आगे आगे चलकर मार्ग तैयार करने के लिए बुलाया गया था। उसने यहूदिया के जंगल में मन फिराव का प्रचार किया, यरदन नदी में लोगों को बपतिस्मा दिया, और यीशु को "परमेश्वर का मेम्ना" कहकर पहचाना। हेरोदेस के पाप पर चुप न रहने के कारण उसे बंदी बनाया गया और अंत में उसका सिर काट दिया गया।
यूहन्ना ने लोगों को बपतिस्मा क्यों दिया?
उसका बपतिस्मा मन फिराव का चिह्न था, न कि उद्धार का साधन। मत्ती 3:6 कहती है कि लोगों ने "अपने पापों को मानकर" यरदन नदी में उससे बपतिस्मा लिया। यहूदी लोग समझते थे कि गैर-यहूदियों को शुद्ध होने की ज़रूरत है, पर यूहन्ना ने परमेश्वर के अपने लोगों को कहा कि उन्हें भी शुद्ध होने की ज़रूरत है, क्योंकि जन्म या वंश किसी को राज्य में प्रवेश नहीं देता। यह बपतिस्मा एक सार्वजनिक स्वीकारोक्ति थी: मैं पापी हूँ, और मैं आनेवाले मसीह के लिए तैयार होना चाहता हूँ।
यूहन्ना का बपतिस्मा और मसीही बपतिस्मा में क्या अंतर है?
यूहन्ना ने स्वयं यह अंतर बताया: वह पानी से बपतिस्मा देता है, पर आनेवाला पवित्र आत्मा और आग से बपतिस्मा देगा (मत्ती 3:11)। यूहन्ना का बपतिस्मा आगे की ओर देखता था, मसीह के आने की तैयारी में; मसीही बपतिस्मा पीछे की ओर देखता है, मसीह की मृत्यु और पुनरुत्थान में हमारी सहभागिता के चिह्न के रूप में। प्रेरितों 19:1-5 में पौलुस इफिसुस के कुछ शिष्यों से मिलता है जिन्होंने केवल यूहन्ना का बपतिस्मा लिया था, और वे प्रभु यीशु के नाम में बपतिस्मा लेते हैं।
क्या यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाला ही एलिय्याह था?
यीशु ने कहा कि जिसे आना था वह एलिय्याह यूहन्ना ही है (मत्ती 11:14), और स्वर्गदूत ने पहले ही कहा था कि वह "एलिय्याह की आत्मा और सामर्थ्य में होकर" चलेगा (लूका 1:17)। इसका अर्थ पुनर्जन्म नहीं है। जब याजकों ने सीधे पूछा, "क्या तू एलिय्याह है?", यूहन्ना ने इनकार किया (यूहन्ना 1:21), क्योंकि वह अपने ऊपर कोई उपाधि नहीं चाहता था। मलाकी 4:5-6 की प्रतिज्ञा यूहन्ना की सेवकाई में पूरी हुई: वह एलिय्याह जैसी भूमिका में आया, लोगों के मन परमेश्वर की ओर फेरने के लिए।
यूहन्ना ने यीशु को "परमेश्वर का मेम्ना" क्यों कहा?
यूहन्ना 1:29 में वह कहता है: "देखो, यह परमेश्वर का मेम्ना है, जो जगत के पाप उठा ले जाता है!" हर यहूदी के लिए मेम्ने का अर्थ बलिदान था: फसह की रात के मेम्ने, और मंदिर में रोज़ चढ़ाए जानेवाले पशु। यूहन्ना कह रहा था कि यीशु ही वह अंतिम और सच्चा बलिदान हैं, जिसकी ओर सारी व्यवस्था इशारा करती थी। ध्यान देने लायक बात यह है कि उसने "उठा ले जाता है" कहा, केवल ढकना नहीं। मसीह पाप को हटाते हैं, टालते नहीं।
"अवश्य है कि वह बढ़े और मैं घटूँ" का क्या अर्थ है?
यूहन्ना 3:30 उस समय कहा गया जब यूहन्ना के चेलों ने शिकायत की कि लोग यीशु के पीछे जा रहे हैं। यूहन्ना ने खुद को दुल्हे का मित्र कहा, जो दुल्हे की आवाज़ सुनकर आनन्दित होता है (यूहन्ना 3:29)। उसका मतलब यह था कि उसकी पूरी सार्थकता मसीह की महिमा में है, अपनी लोकप्रियता में नहीं। यह हार मानने का वाक्य नहीं, बल्कि गहरी संतुष्टि का वाक्य है; एक ऐसा जीवन जो अपने नाम की रक्षा के बोझ से आज़ाद हो गया है।
यूहन्ना को क्यों मार डाला गया?
क्योंकि उसने राजा के व्यक्तिगत पाप पर चुप रहने से इनकार किया। हेरोदेस ने अपने भाई फिलिप्पुस की पत्नी हेरोदियास से विवाह किया था, और यूहन्ना ने उससे साफ़ कहा, "अपने भाई की पत्नी को रखना तुझे उचित नहीं" (मरकुस 6:18)। इस कारण उसे बंदीगृह में डाल दिया गया। बाद में हेरोदेस के जन्मदिन के भोज में हेरोदियास की बेटी के नाच से प्रसन्न होकर राजा ने शपथ खाई, और माँ के सिखाने पर लड़की ने थाल में यूहन्ना का सिर माँग लिया (मरकुस 6:17-29)।
बंदीगृह में यूहन्ना ने यीशु पर संदेह क्यों किया?
मत्ती 11:2-3 में वह अपने चेलों से पूछवाता है कि क्या यीशु ही वह आनेवाला हैं, या उन्हें किसी दूसरे की बाट जोहनी चाहिए। यूहन्ना ने आग और न्याय का मसीह घोषित किया था, कुल्हाड़ी जो जड़ पर रखी है; मगर यीशु बीमारों को चंगा कर रहे थे और पापियों के साथ भोजन कर रहे थे, और यूहन्ना खुद जंजीरों में सड़ रहा था। उसकी अपेक्षा और उसकी परिस्थिति दोनों उसे झकझोर रही थीं। यीशु ने उसे धिक्कारा नहीं, बल्कि अपने कामों का प्रमाण भेजा।
यीशु ने यूहन्ना को सबसे बड़ा और सबसे छोटा दोनों क्यों कहा?
मत्ती 11:11 में यीशु कहते हैं कि स्त्रियों से जन्मे लोगों में यूहन्ना से बड़ा कोई नहीं हुआ, फिर भी स्वर्ग के राज्य में छोटे से छोटा उससे बड़ा है। पहली बात यूहन्ना के काम के बारे में है: वह एकमात्र भविष्यद्वक्ता था जिसने मसीह की ओर उँगली उठाकर दिखाया। दूसरी बात युग के बारे में है: यूहन्ना क्रूस और पुनरुत्थान से पहले खड़ा था। जो लोग मसीह के पूरे किए गए काम में विश्वास करते हैं, वे विशेषाधिकार में यूहन्ना से आगे हैं, अपने गुण के कारण नहीं, बल्कि अनुग्रह के कारण।
यूहन्ना जंगल में क्यों रहता था और वह क्या खाता था?
मत्ती 3:4 बताती है कि वह ऊँट के रोम का वस्त्र पहनता था, चमड़े का पटुका बाँधता था, और उसका भोजन टिड्डियाँ और वनमधु था। लूका 1:80 कहती है कि वह इस्राएल पर प्रकट होने के दिन तक जंगल में रहा। जंगल इस्राएल के इतिहास में परमेश्वर से नई मुलाकात की जगह था, और यूहन्ना का साधारण जीवन ही उसका उपदेश था: उसने ऐसा कुछ भी नहीं पकड़ा जिसे खोने के डर से वह सच बोलना छोड़ दे। एक याजक का पुत्र होकर उसने मंदिर की सुविधा छोड़ी और मरुभूमि चुनी।
क्या यूहन्ना ने कोई चमत्कार किया था?
नहीं। यूहन्ना 10:41 में लोग कहते हैं कि यूहन्ना ने तो कोई चिन्ह नहीं दिखाया, परन्तु जो कुछ उसने यीशु के विषय में कहा था वह सब सच था। यह बहुत बड़ी बात है: पुराने नियम का यह अंतिम भविष्यद्वक्ता चमत्कारों के बिना ही अपनी पीढ़ी को हिला गया, केवल परमेश्वर के वचन की स्पष्टता और अपने जीवन की सच्चाई से। यीशु ने उसे "जलता और चमकता हुआ दीपक" कहा (यूहन्ना 5:35)। सेवा में सामर्थ्य तमाशे से नहीं, वफ़ादारी और सच्चाई से आती है।
यूहन्ना के चेलों का क्या हुआ?
कुछ चेलों ने उसकी गवाही मानकर यीशु के पीछे चलना शुरू कर दिया; अन्द्रियास उनमें से एक था (यूहन्ना 1:35-40)। कुछ यूहन्ना के साथ बने रहे, उपवास और प्रार्थना के अपने तरीकों के साथ (मत्ती 9:14), और उन्होंने ही उसका शव लेकर कब्र में रखा (मरकुस 6:29)। दशकों बाद भी इफिसुस में ऐसे लोग मिलते हैं जो केवल यूहन्ना का बपतिस्मा जानते थे (प्रेरितों 19:1-5)। यूहन्ना का उद्देश्य अपना समूह बनाना नहीं था, बल्कि लोगों को मसीह के हाथों में सौंप देना था।
अंत में
यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले की कब्र पर कोई मंदिर नहीं बना, कोई आंदोलन उसके नाम से नहीं चला। उसने अपनी सारी ऊर्जा किसी और की ओर इशारा करने में खर्च कर दी, और मसीह ने उसे स्त्रियों से जन्मे सब लोगों में सबसे बड़ा कह दिया। यही उसके जीवन का पूरा गणित है: जो घटता है, उसे परमेश्वर बड़ा करते हैं। यशायाह 40:3 की पुकार, लूका 1:13-17 की प्रतिज्ञा, मत्ती 3:1-6 का जंगल, यूहन्ना 1:29 की उठी हुई उँगली, यूहन्ना 3:30 का समर्पण, मरकुस 6:17-29 का खून, और मत्ती 11:11 का प्रमाणपत्र, सब एक ही दिशा में बहते हैं, मेम्ने की ओर।
अगर आप आगे पढ़ना चाहें, तो यशायाह 40 पूरा पढ़िए और देखिए कि परमेश्वर अपने थके हुए लोगों से कैसे बात करते हैं। फिर यूहन्ना 3:22-36 धीरे-धीरे पढ़िए और खुद से पूछिए कि आपके जीवन के किस हिस्से में मसीह को बढ़ना है और आपको घटना है। और अंत में प्रार्थना कीजिए कि परमेश्वर आपको भी एक आवाज़ बनाएँ, जो सुनाई देकर मिट जाए, मगर जिसका इशारा हमेशा सही व्यक्ति की ओर रहे।