नीकुदेमुस कौन था: रात में यीशु से मिलने आए धर्मगुरु की कहानी
परिचय
यरूशलेम की एक रात। गलियाँ ख़ाली हैं, छतों पर दीये बुझ चुके हैं, और एक आदमी अपनी चादर सिर तक खींचे हुए किसी के ठिकाने की ओर बढ़ रहा है। वह चोर नहीं है। वह शहर के सबसे सम्मानित लोगों में से एक है, व्यवस्था का पंडित, महासभा का सदस्य, जिसे बाज़ार में देखकर लोग रास्ता छोड़ देते थे। पर आज रात वह किसी ऐसे युवा गुरु से मिलने जा रहा है जिसने मन्दिर में मेज़ें उलट दी थीं। उसके भीतर कुछ है जो किताबों से शान्त नहीं हुआ।
इस आदमी का नाम नीकुदेमुस है। बाइबल उसे केवल तीन बार दिखाती है, और हर बार वह थोड़ा और आगे बढ़ा हुआ मिलता है। इस पृष्ठ पर आप उसकी पूरी कहानी क्रम से देखेंगे, उसकी झिझक भी और उसका साहस भी, और यह भी कि उसकी रात कैसे धीरे-धीरे दोपहर में बदल गई।
इस मार्गदर्शिका का दृष्टिकोण
हम नीकुदेमुस को उसके सवालों से नहीं, उसके गन्धरस से पहचानेंगे। इस पृष्ठ का दृष्टिकोण यह है: नीकुदेमुस की कहानी "रात से दोपहर तक" का सफ़र है। जिस रात यीशु ने उससे नये जन्म की बात कही, उस रात कुछ भी दिखाई नहीं दिया; न कोई आँसू, न कोई अंगीकार, बस उलझे हुए प्रश्न। पर तीन साल बाद, भरी दोपहर में, वही आदमी पचास सेर मसाले उठाए क्रूस के नीचे खड़ा था। नया जन्म एक पल में दिखता नहीं, मगर वह छिपता भी नहीं। यही धीमी, महँगी, सच्ची आस्था इस पूरे पृष्ठ का सूत्र है।
बाइबल नीकुदेमुस के बारे में क्या कहती है?
नीकुदेमुस का ज़िक्र केवल यूहन्ना के सुसमाचार में मिलता है, और कुल तीन दृश्यों में। मत्ती, मरकुस और लूका उसका नाम तक नहीं लेते। यूहन्ना उसे तीन बार लाता है, और हर बार जोड़कर याद दिलाता है कि "यह वही है जो रात को आया था", मानो वह चाहता है कि हम उस रात को भूलें नहीं।
पहली मुलाक़ात में उसका परिचय ही सब कुछ कह देता है। वह फरीसी था, यानी व्यवस्था का सबसे कड़ा पालन करने वाले दल का सदस्य; वह "यहूदियों का सरदार" था, यानी महासभा का सदस्य, उस सत्तर सदस्यों वाली परिषद का जो धार्मिक और कानूनी मामलों का फ़ैसला करती थी। और यीशु उसे "इस्राएल का गुरु" कहते हैं, जिसका अर्थ है कि वह कोई साधारण शास्त्री नहीं, बल्कि शिक्षकों का शिक्षक था।
उसकी बातचीत का आरम्भ बड़े आदर से होता है। यूहन्ना 3:2 कहता है: "उसने रात को यीशु के पास आकर उससे कहा, हे रब्बी, हम जानते हैं, कि तू परमेश्वर की ओर से गुरु होकर आया है; क्योंकि कोई इन चिन्हों को जो तू दिखाता है, यदि परमेश्वर उसके साथ न हो, तो नहीं दिखा सकता।" ध्यान दीजिए, वह "मैं" नहीं, "हम" कहता है। शायद वह अपने कुछ साथियों की ओर से बोल रहा था; महासभा में भी कुछ लोग थे जो मान चुके थे कि इस गलीली युवक में परमेश्वर का हाथ है। पर उसकी स्वीकारोक्ति अधूरी है। वह यीशु को "परमेश्वर की ओर से आया गुरु" कहता है, उद्धारकर्ता नहीं। और यीशु उसकी तारीफ़ पर रुकते नहीं।
यूहन्ना 3:3 में उत्तर आता है: "यीशु ने उसको उत्तर दिया, कि मैं तुझ से सच सच कहता हूं, यदि कोई नये सिरे से न जन्मे तो परमेश्वर का राज्य देख नहीं सकता।" यह उत्तर बातचीत को जड़ से उखाड़ देता है। नीकुदेमुस शिक्षा लेने आया था, और यीशु ने कहा कि उसे जन्म लेने की ज़रूरत है। शिक्षा हम अपने प्रयास से लेते हैं; जन्म हम किसी और से पाते हैं। जो मूल शब्द यहाँ इस्तेमाल हुआ है उसका अर्थ "फिर से" भी है और "ऊपर से" भी, और यीशु दोनों अर्थ एक साथ रखते हैं: यह नया आरम्भ ऊपर से, परमेश्वर की ओर से आता है।
नीकुदेमुस का जवाब ईमानदार है और इसीलिए मार्मिक है। यूहन्ना 3:4 में वह पूछता है: "मनुष्य जब बूढ़ा हो गया, तो क्योंकर जन्म ले सकता है? क्या वह अपनी माता के गर्भ में दूसरी बार प्रवेश कर के जन्म ले सकता है?" वह शरीर के स्तर पर सोच रहा है, और यीशु उसे आत्मा के स्तर पर उठाते हैं: "जब तक कोई जल और आत्मा से न जन्मे तो वह परमेश्वर के राज्य में प्रवेश नहीं कर सकता" (यूहन्ना 3:5)। फिर वे हवा का उदाहरण देते हैं, जो जिधर चाहे बहती है और जिसका शब्द तो सुनाई देता है पर जिसका आना-जाना दिखाई नहीं देता। आत्मा से जन्मा व्यक्ति भी ऐसा ही है: उसका परिणाम दिखता है, उसकी प्रक्रिया नहीं।
और यहीं, इसी बातचीत के भीतर, बाइबल का सबसे जाना-पहचाना वचन आता है। यूहन्ना 3:16 कहता है: "क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए।" यह पद किसी भीड़ के सामने नहीं कहा गया था। यह रात के अँधेरे में एक उलझे हुए धर्मगुरु के कान में रखा गया था। जो आदमी सारी उम्र नियमों से परमेश्वर तक पहुँचने की कोशिश करता रहा, उसे बताया गया कि परमेश्वर ने ख़ुद चलकर आना चुना।
परमेश्वर का प्रेम नियम नहीं माँगता, वह पुत्र देता है।
बाइबल में चलने वाला सूत्र
यीशु ने नीकुदेमुस को डाँटा नहीं, पर एक सवाल ज़रूर किया जो चुभता है: "तू इस्राएल का गुरु होकर भी क्या इन बातों को नहीं समझता?" (यूहन्ना 3:10)। इस सवाल का मतलब यह है कि नया जन्म कोई नई शिक्षा नहीं थी। यह पुराने नियम के पन्नों पर पहले से लिखा पड़ा था, और एक गुरु को इसे पहचान लेना चाहिए था।
मूसा ने व्यवस्थाविवरण 30:6 में इस्राएल से कहा था कि परमेश्वर उनके हृदय का खतना करेंगे, ताकि वे अपने पूरे मन से उनसे प्रेम कर सकें। यानी असली बदलाव चमड़ी का नहीं, हृदय का होना था, और वह काम इंसान अपने ऊपर ख़ुद नहीं कर सकता। यिर्मयाह 31:33 में परमेश्वर एक नई वाचा का वादा करते हैं, जिसमें व्यवस्था पत्थर की पटियाओं पर नहीं, लोगों के मन पर लिखी जाएगी। और यहेजकेल 36:26 तो लगभग यूहन्ना 3 की भूमिका है: "मैं तुम को नया मन दूंगा, और तुम्हारे भीतर नई आत्मा उत्पन्न करूंगा; और तुम्हारी देह में से पत्थर का सा मन निकाल कर तुम को मांस का सा हृदय दूंगा।" जल से शुद्धिकरण और आत्मा से नया जीवन, यही दोनों बातें यहेजकेल के उसी अध्याय में एक साथ आती हैं। इसलिए जब यीशु ने "जल और आत्मा" कहा, तो वे नीकुदेमुस को उसके ही पवित्रशास्त्र की ओर लौटा रहे थे।
यह सूत्र और पीछे तक जाता है। उत्पत्ति 1:2 में परमेश्वर का आत्मा जल के ऊपर मँडराता है और सृष्टि अस्तित्व में आती है। यहेजकेल 37 में सूखी हड्डियों की घाटी पर आत्मा की साँस चलती है और मुर्दे खड़े हो जाते हैं। हर बार एक ही बात: जहाँ परमेश्वर का आत्मा आता है, वहाँ जो नहीं था वह हो जाता है, और जो मर चुका था वह जी उठता है। नीकुदेमुस की समस्या यह नहीं थी कि वह बुरा आदमी था; उसकी समस्या यह थी कि वह धार्मिक रूप से व्यवस्थित मुर्दा था, और मुर्दे को सुधार नहीं, जीवन चाहिए।
फिर यीशु एक और पुरानी तस्वीर खींचते हैं। गिनती 21 में इस्राएली सर्पों के डँसने से मर रहे थे, और परमेश्वर ने मूसा से कहा कि वह पीतल का एक साँप बनाकर खम्भे पर टाँग दे; जो भी उसकी ओर देखता, वह जीता रहता। यूहन्ना 3:14 में यीशु कहते हैं: "और जिस रीति से मूसा ने जंगल में सांप को ऊंचे पर चढ़ाया, उसी रीति से अवश्य है कि मनुष्य का पुत्र भी ऊंचे पर चढ़ाया जाए।" यहाँ सब कुछ क्रूस की ओर मुड़ जाता है। नया जन्म हवा में नहीं होता; उसकी क़ीमत कहीं चुकाई जाती है, और वह जगह गुलगुता है।
यह सूत्र पौलुस में जाकर खुलकर बोलता है। 2 कुरिन्थियों 5:17 कहता है: "इसलिये यदि कोई मसीह में है तो वह नई सृष्टि है: पुरानी बातें बीत गई हैं; देखो, वे सब नई हो गईं।" ध्यान दीजिए, पौलुस "सुधरा हुआ आदमी" नहीं कहता, "नई सृष्टि" कहता है। यही वह शब्द है जिसकी ओर यीशु उस रात इशारा कर रहे थे। और इसी बात को तीतुस 3:5 "नए जन्म के स्नान" और 1 पतरस 1:3 "नया जन्म देकर जीवित आशा" कहकर दोहराता है। नीकुदेमुस की उस एक रात की बातचीत पूरे नए नियम के धर्मविज्ञान की नींव बन गई।
उसके जीवन का सार
नीकुदेमुस के जीवन के तीन निर्णायक क्षण हैं, और तीनों को एक साथ रखने पर एक साफ़ दिशा दिखती है।
पहला क्षण वह रात है, जो यूहन्ना 3 में दर्ज है। वह अकेले आता है, अँधेरे में आता है, और सवालों के साथ आता है। यूहन्ना के सुसमाचार में "रात" कभी केवल समय नहीं होती; यह आत्मिक हालत भी होती है। यूहन्ना 3:19 इसी अध्याय में कहता है: "और दण्ड की आज्ञा यह है कि ज्योति जगत में आई है, और मनुष्यों ने अन्धकार को ज्योति से अधिक प्रिय जाना, क्योंकि उन के काम बुरे थे।" नीकुदेमुस का आना अँधेरे में था, पर वह अँधेरे की ओर नहीं, ज्योति की ओर आ रहा था। यह उसकी कमज़ोरी भी है और उसकी सबसे बड़ी ख़ूबी भी। उसने अपनी पदवी बचाई, पर उसने अपना सवाल दबाया नहीं। बहुत से लोग सवाल ही दबा देते हैं, और इसीलिए कभी उत्तर तक नहीं पहुँचते।
दूसरा क्षण बरसों बाद आता है, झोपड़ियों के पर्व पर। मन्दिर के सिपाही यीशु को पकड़ने गए थे और ख़ाली हाथ लौट आए थे। फरीसी भीड़ को "शापित" कहकर दुत्कार रहे हैं, और तभी एक आवाज़ उठती है। यूहन्ना 7:50 कहता है: "नीकुदेमुस ने, (जो पहिले उसके पास आया था और वह उन्हीं में से एक था) उन से कहा।" और वह जो कहता है वह कानूनी है: "क्या हमारी व्यवस्था किसी मनुष्य को जब तक पहिले उस की सुनकर जान न ले कि वह क्या करता है, दोषी ठहराती है?" (यूहन्ना 7:51)। यहाँ ईमानदारी ज़रूरी है। यह कोई जोशीला अंगीकार नहीं है। वह यीशु के व्यक्ति का नहीं, न्याय-प्रक्रिया का बचाव कर रहा है। यह आधा क़दम है। पर उसकी क़ीमत उसने तुरन्त चुकाई, क्योंकि उसके साथी उसे ताना मारते हैं कि क्या वह भी गलील का हो गया। जो आदमी कभी रात में छिपकर आया था, वह अब दिन में अपने ही दल के बीच अकेला पड़ने लगा है।
तीसरा और सबसे बड़ा क्षण क्रूस के बाद आता है। यूहन्ना 19:39 कहता है: "और नीकुदेमुस भी जो पहिले उसके पास रात को गया था, पचास सेर के लगभग मिला हुआ गन्धरस और एलवा लेकर आया।" यह सौ रोमी तोल के बराबर था, लगभग तीस किलो से ऊपर; राजाओं के दफ़न में इतने मसाले लगते थे। यह मात्रा चुपके से नहीं ढोई जा सकती। लाश को छूने का मतलब था सात दिन की अशुद्धता, फ़सह के ठीक बीच में। महासभा के सदस्य के लिए क्रूस पर चढ़ाए गए "निन्दक" के शव को सम्मान देने का मतलब था अपने पूरे पद को दाँव पर लगाना। और उसने यह काम तब किया जब बारह चेलों में से ग्यारह छिप चुके थे।
रात का आदमी दोपहर में क्रूस के नीचे खड़ा मिला।
नीकुदेमुस से हम क्या सीखते हैं
पहली सीख यह है कि ज्ञान और नया जन्म एक चीज़ नहीं हैं। नीकुदेमुस पवित्रशास्त्र के सैकड़ों पन्ने कंठस्थ कर चुका होगा, और फिर भी यीशु ने उससे कहा कि उसे नये सिरे से जन्मना है। धर्म का ज्ञान आपको परमेश्वर के राज्य की सीमा तक ला सकता है, पर भीतर नहीं ले जा सकता। हम में से कई लोग कलीसिया में बड़े हुए हैं, गीत याद हैं, वचन याद हैं, सेवा भी करते हैं, और फिर भी भीतर कहीं एक सूखापन है। नीकुदेमुस की कहानी इस सूखेपन का सही नाम बताती है और सही इलाज भी: नियम कड़े करने से नहीं, ऊपर से मिलने वाले जीवन से।
दूसरी सीख यह है कि विश्वास अक्सर धीरे-धीरे बढ़ता है, और धीमा विश्वास झूठा विश्वास नहीं होता। यूहन्ना जानबूझकर हर बार दोहराता है कि "यह वही है जो रात को आया था", ताकि हम उसकी यात्रा देख सकें। रात के सवाल, फिर दिन का आधा-अधूरा बचाव, फिर क्रूस के नीचे खुलेआम प्रेम। तीन दृश्य, और हर दृश्य में थोड़ा और उजाला। अगर आपका विश्वास आज भी सवालों से भरा है, तो यह पद्धति आपको हिम्मत दे: परमेश्वर रात में पूछे गए सच्चे सवाल को ठुकराते नहीं। वे उसे उत्तर देते हैं, और फिर धैर्य से उस उत्तर को पकने देते हैं।
तीसरी सीख सबसे चुभने वाली है: असली बदलाव वहाँ दिखता है जहाँ क़ीमत चुकानी पड़ती है। नीकुदेमुस के नये जन्म का प्रमाण उसकी समझदार बातें नहीं थीं; प्रमाण तीस किलो मसाले थे, जिन्हें ढोते हुए पूरा यरूशलेम उसे देख सकता था। वह दिन उसके लिए पद, प्रतिष्ठा और शायद परिषद की कुर्सी की क़ीमत लेकर आया। पवित्र आत्मा जब किसी के भीतर काम करते हैं, तो देर-सबेर वह व्यक्ति किसी ऐसी जगह खड़ा मिलता है जहाँ खड़े होने का कोई सांसारिक फ़ायदा नहीं है। यही वह मोड़ है जहाँ गुप्त चेला खुला चेला बन जाता है, और जहाँ हवा का शब्द आख़िरकार सुनाई देने लगता है।
दर्पण
अब ज़रा ईमानदारी से सोचिए: आप किस "रात" में यीशु से मिलते हैं? वह समय जब कोई नहीं देखता, जब मोबाइल की रोशनी में आप बाइबल ऐप खोलते हैं और फिर जल्दी से बन्द कर देते हैं क्योंकि कमरे में कोई और आ गया। वह व्हाट्सऐप ग्रुप जहाँ आपके विश्वास की बात आती है और आप चुप रह जाते हैं। वह दफ़्तर जहाँ सब जानते हैं कि आप "थोड़े धार्मिक" हैं, पर कोई नहीं जानता कि आप किस पर भरोसा रखते हैं। नीकुदेमुस आपको शर्मिन्दा करने नहीं आया; वह आपको यह बताने आया है कि अँधेरे में आया हुआ क़दम भी क़दम है, और यीशु ने उसे दरवाज़े से नहीं लौटाया।
पर वह एक और सवाल भी छोड़ जाता है, और वह सवाल आसान नहीं है। आपके विश्वास को आज तक कितनी क़ीमत चुकानी पड़ी है? परिवार में वह रिश्ता जिसे आपने माफ़ कर दिया और बदले में कुछ नहीं मिला। वह पैसा जो आपने चुपचाप किसी ज़रूरतमन्द को दिया और किसी को नहीं बताया। वह प्रमोशन जो आपने इसलिए खो दिया क्योंकि आपने झूठी रिपोर्ट पर दस्तख़त करने से मना कर दिया। वह समय जो आपने किसी अकेले बुज़ुर्ग के साथ बैठकर गँवा दिया। नीकुदेमुस के तीस किलो मसाले हमें याद दिलाते हैं कि प्रेम जब तक महँगा न हो, तब तक वह सिर्फ़ राय है।
और अगर आज आपके पास देने को कुछ भी नहीं है, सिर्फ़ थका हुआ शरीर, उधार में डूबा खाता, बीमार देह और एक ऐसा मन जो प्रार्थना करना भूल चुका है, तो उस रात की सबसे बड़ी बात याद रखिए। यीशु ने नीकुदेमुस से यह नहीं कहा कि "और मेहनत कर।" उन्होंने कहा कि जन्म लेना होगा, और जन्म कोई ख़ुद को नहीं देता। जन्म मिलता है। यही आपकी सबसे बड़ी राहत है: जिस काम की ज़रूरत आपको है, वह काम करने वाले आप नहीं, परमेश्वर हैं।
बच्चों के लिए समझाया गया
बच्चों को नीकुदेमुस की कहानी सुनाना आसान है, क्योंकि इसमें वे सारी चीज़ें हैं जो बच्चों को खींचती हैं: रात, एक छिपकर आने वाला आदमी, और एक पहेली जैसा जवाब। आप शुरुआत ऐसे कर सकते हैं: "एक बहुत बड़े और समझदार आदमी थे जिन्हें सब लोग बहुत मानते थे। पर उनके मन में एक सवाल था जो किसी किताब से हल नहीं हो रहा था। इसलिए एक रात वे चुपके से यीशु के पास गए।" फिर यीशु का जवाब बताइए, कि परमेश्वर के परिवार में आने के लिए नया जन्म चाहिए; जैसे बीज से पौधा निकलता है, वैसे ही परमेश्वर हमारे भीतर नया जीवन डालते हैं, और वह काम हम ख़ुद नहीं कर सकते, वे करते हैं।
छोटे बच्चों के लिए हवा वाला उदाहरण बहुत काम आता है। हवा दिखती नहीं, पर पेड़ की पत्तियाँ हिलती हैं और हम जान जाते हैं कि हवा चल रही है। वैसे ही पवित्र आत्मा दिखाई नहीं देते, पर उनका काम दिखाई देता है। और कहानी को वहाँ ख़त्म कीजिए जहाँ यूहन्ना ने ख़त्म की: वही आदमी बाद में दिन के उजाले में, सबके सामने, यीशु से प्रेम करता हुआ दिखा।
Faith.network पर इसी कहानी के अलग-अलग उम्र के अनुसार तैयार किए गए संस्करण उपलब्ध हैं: छोटे बच्चों (3 से 6 वर्ष) के लिए सरल चित्रात्मक भाषा में, स्कूल जाने वाले बच्चों (7 से 12 वर्ष) के लिए सवाल-जवाब और गतिविधियों के साथ, और किशोरों (12 वर्ष से ऊपर) के लिए उन सवालों के साथ जो वे सचमुच पूछते हैं, जैसे "क्या चुपचाप विश्वास करना ठीक है?" और "नया जन्म मेरे लिए क्या मायने रखता है?"
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नीकुदेमुस कौन था और वह क्या काम करता था?
नीकुदेमुस पहली सदी का एक यहूदी धर्मगुरु था जो फरीसी दल से जुड़ा था और यहूदी महासभा का सदस्य था, यानी उस सर्वोच्च परिषद का जो धार्मिक और कानूनी फ़ैसले करती थी। यूहन्ना 3:1 उसे "यहूदियों का एक सरदार" कहता है, और यीशु उसे "इस्राएल का गुरु" कहकर सम्बोधित करते हैं, जिससे पता चलता है कि वह शिक्षकों में भी ऊँचे दर्जे का था। उसकी पहचान धन, शिक्षा और सामाजिक प्रतिष्ठा तीनों से जुड़ी थी, और यही बात उसके आगे के फ़ैसलों को इतना महँगा बनाती है।
नीकुदेमुस रात में यीशु से मिलने क्यों आया?
बाइबल सीधा कारण नहीं बताती, इसलिए हमें सावधानी से सोचना चाहिए। सबसे सम्भावित कारण डर और सावधानी है, क्योंकि महासभा का सदस्य होकर खुलेआम यीशु से मिलना उसकी प्रतिष्ठा और पद दोनों के लिए ख़तरा था। कुछ लोग यह भी कहते हैं कि रब्बी अक्सर रात में शान्ति से शास्त्र-चर्चा करते थे, इसलिए यह समय गम्भीर बातचीत के लिए उपयुक्त था। दोनों बातें सच हो सकती हैं। यूहन्ना के लिए यह "रात" एक गहरा संकेत भी है, कि वह अभी ज्योति तक पहुँचा नहीं था, पर ज्योति की ओर चल पड़ा था।
"नये सिरे से जन्म लेना" का क्या अर्थ है?
यूहन्ना 3:3 में यीशु कहते हैं कि जब तक कोई नये सिरे से न जन्मे, वह परमेश्वर का राज्य देख नहीं सकता। मूल भाषा का शब्द "फिर से" और "ऊपर से" दोनों अर्थ रखता है, और दोनों सही हैं: यह एक नया आरम्भ है जो स्वर्ग से, पवित्र आत्मा के द्वारा आता है। इसका मतलब सुधार या आत्म-अनुशासन नहीं, बल्कि नया जीवन पाना है। 2 कुरिन्थियों 5:17 इसी को "नई सृष्टि" कहता है। जैसे अपने पहले जन्म में हमने कुछ नहीं किया था, वैसे ही इस जन्म में भी देने वाले परमेश्वर हैं, पाने वाले हम।
क्या नीकुदेमुस सचमुच विश्वासी बना?
यूहन्ना कहीं साफ़ शब्दों में यह नहीं लिखता कि "नीकुदेमुस ने विश्वास किया", पर उसके काम ज़ोर से बोलते हैं। यूहन्ना 19:39 में वह क्रूस पर चढ़ाए गए यीशु के शव को राजाओं जैसा सम्मान देने के लिए बड़ी मात्रा में मसाले लेकर खुलेआम आता है, उस समय जब यीशु के अपने चेले छिपे हुए थे। यह काम उसकी जान, पद और धार्मिक शुद्धता तीनों को ख़तरे में डालता था। कलीसिया की परम्परा सदा से उसे विश्वासी मानती आई है, और सुसमाचार का पूरा ढाँचा हमें उसी दिशा में ले जाता है।
नीकुदेमुस का नाम बाइबल में कितनी बार आता है?
नीकुदेमुस का नाम केवल यूहन्ना के सुसमाचार में आता है, कुल पाँच बार, और वह तीन दृश्यों में दिखाई देता है। पहला दृश्य यूहन्ना 3 में रात की बातचीत है। दूसरा यूहन्ना 7:50 में है, जहाँ वह महासभा में यीशु के लिए निष्पक्ष सुनवाई की माँग करता है। तीसरा यूहन्ना 19:39 में है, जहाँ वह अरिमतियाह के यूसुफ के साथ मिलकर यीशु का दफ़न करता है। मत्ती, मरकुस और लूका उसका उल्लेख नहीं करते, जिससे यूहन्ना का यह व्यक्तिगत ब्यौरा और भी मूल्यवान हो जाता है।
क्या यूहन्ना 3:16 नीकुदेमुस से कही गई बात का हिस्सा है?
हाँ, यूहन्ना 3:16 उसी रात की बातचीत के प्रवाह में आता है: "क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए।" कुछ अनुवाद यहाँ यीशु के शब्दों का उद्धरण समाप्त मानकर इसे यूहन्ना की टिप्पणी के रूप में पढ़ते हैं, पर विषय वही रहता है। इसका अर्थ यह है कि बाइबल का सबसे प्रसिद्ध वचन किसी सभा में नहीं, एक अकेले, डरे हुए, उलझे हुए इंसान को कहा गया था।
नीकुदेमुस और अरिमतियाह के यूसुफ के बीच क्या सम्बन्ध था?
दोनों महासभा के सदस्य थे और दोनों यीशु की ओर खिंचे हुए थे पर खुलकर सामने नहीं आए थे। यूहन्ना 19:38 यूसुफ को "यीशु का चेला था, परन्तु यहूदियों के डर से इस बात को छिपाए रखता था" कहकर वर्णित करता है। क्रूस के बाद दोनों एक साथ सामने आते हैं: यूसुफ पिलातुस से शव माँगता है और अपनी नई कब्र देता है, नीकुदेमुस दफ़न के मसाले लाता है। जो डर उन्हें अलग-अलग छिपाए हुए था, वही क्रूस उन्हें एक साथ खुले में खींच लाया।
नीकुदेमुस पचास सेर गन्धरस और एलवा क्यों लाया?
यह मात्रा साधारण नहीं थी; यह लगभग तीस किलो से अधिक सुगन्धित मसाले थे, जितने राजाओं के दफ़न में लगाए जाते थे। यहूदी रिवाज में शव को कपड़े में लपेटते समय इन मसालों की तहें लगाई जाती थीं। इतनी बड़ी मात्रा दो बातें कहती है: पहली, नीकुदेमुस बहुत धनी था; दूसरी, वह यीशु को एक राजा का सम्मान दे रहा था। जो आदमी कभी छिपकर आया था, वह अब ऐसा उपहार लाया जिसे छिपाया ही नहीं जा सकता था, और जिसकी क़ीमत उसने अपनी प्रतिष्ठा से चुकाई।
क्या नीकुदेमुस महासभा में यीशु के विरुद्ध फ़ैसले में शामिल था?
बाइबल यह नहीं बताती कि यीशु पर मुक़दमे की उस रात नीकुदेमुस मौजूद था या नहीं। लूका 23:51 अरिमतियाह के यूसुफ के बारे में कहता है कि वह उनके विचार और उनके इस काम से सहमत न था, जिससे लगता है कि परिषद में कुछ असहमत आवाज़ें थीं। मुमकिन है कि इन दोनों को जानबूझकर बुलाया ही न गया हो, क्योंकि उनका झुकाव सबको पता था। जो हम निश्चित रूप से जानते हैं वह यह है कि यूहन्ना 7:51 में उसने सार्वजनिक रूप से न्यायसंगत सुनवाई की माँग की थी।
नीकुदेमुस के साथ आगे क्या हुआ?
नया नियम दफ़न के बाद उसका कोई ज़िक्र नहीं करता, इसलिए आगे की सारी जानकारी परम्परा से आती है और उसे बाइबल जितना भरोसेमन्द नहीं माना जा सकता। प्राचीन कलीसिया की परम्पराएँ कहती हैं कि पतरस और यूहन्ना ने उसे बपतिस्मा दिया, कि उसे महासभा से निकाल दिया गया, उसकी सम्पत्ति छीन ली गई और उसे यरूशलेम से निकाला गया। यहूदी लेखों में नकदीमोन बेन गुरयोन नाम के एक धनी यरूशलेमी का उल्लेख मिलता है, जिसे कुछ विद्वान उससे जोड़ते हैं, पर यह निश्चित नहीं है।
नीकुदेमुस और सामरी स्त्री की कहानी में क्या फ़र्क़ है?
यूहन्ना ने ये दोनों कहानियाँ जानबूझकर आमने-सामने रखी हैं। नीकुदेमुस पुरुष है, यहूदी है, धर्मगुरु है, सम्मानित है और रात में आता है; सामरी स्त्री अकेली है, तिरस्कृत है, धर्म-ज्ञान से दूर है और दोपहर की धूप में मिलती है। नीकुदेमुस बहुत बातें जानता है पर समझ नहीं पाता; स्त्री कुछ नहीं जानती पर तुरन्त पूरे गाँव को बुला लाती है। दोनों को एक ही चीज़ की ज़रूरत है, ऊपर से मिलने वाला जीवन, और यीशु दोनों के पास जाकर बैठते हैं। सुसमाचार किसी की पदवी से प्रभावित नहीं होता।
क्या आज भी कोई "गुप्त चेला" हो सकता है?
नीकुदेमुस की कहानी हमें दोनों तरफ़ से सम्भालती है। एक ओर वह दिखाती है कि परमेश्वर कमज़ोर, डरे हुए, आधे-अधूरे क़दम को भी ठुकराते नहीं, इसलिए जो अभी छिपकर खोज रहे हैं वे निराश न हों। दूसरी ओर वह यह भी दिखाती है कि आत्मा का काम किसी को सदा छिपा नहीं रहने देता; देर-सबेर प्रेम ऐसी जगह खड़ा कर देता है जहाँ क़ीमत चुकानी पड़ती है। इसलिए सही सवाल यह नहीं है कि "क्या गुप्त चेला होना सम्भव है", बल्कि यह है कि "मैं अब भी किस रात में रुका हुआ हूँ।"
अंत में
नीकुदेमुस की कहानी को लोग अक्सर यूहन्ना 3 तक सीमित कर देते हैं, और वहीं से उसकी असली ख़ूबसूरती छूट जाती है। उस रात कुछ भी ऐसा नहीं हुआ जिसे गिना जा सके; कोई अंगीकार नहीं, कोई घोषणा नहीं, बस एक बुज़ुर्ग शिक्षक जो गर्भ और जन्म की बातों में उलझा हुआ घर लौट गया। पर बीज ज़मीन में गिर चुका था। तीन साल बाद, जब सबसे अँधेरा दिन आया और यीशु के अपने लोग भाग खड़े हुए, तब वही आदमी तीस किलो मसाले उठाए, सबकी नज़रों के सामने, एक मरे हुए "अपराधी" को राजा का सम्मान देने आया। हवा का शब्द आख़िरकार सुनाई दे गया।
अगर आप आज भी सवालों की रात में बैठे हैं, तो यह कहानी आपको जल्दबाज़ी में नहीं धकेलती, पर वह आपको वहीं छोड़ती भी नहीं। आगे पढ़ने के लिए यूहन्ना 3 को पूरा, धीरे-धीरे, प्रार्थना के साथ पढ़िए, फिर यहेजकेल 36:25-27 खोलिए और देखिए कि परमेश्वर ने नया मन देने का वादा सदियों पहले कर रखा था, और अन्त में 2 कुरिन्थियों 5:17 पर रुककर पूछिए: मुझमें कौन सी पुरानी बातें बीत चुकी हैं, और क्या अभी भी बीतनी बाक़ी हैं?
