विषय

नया जन्म क्या है: बाइबल के अनुसार नए सिरे से जन्म लेने का अर्थ

परिचय

रात के अँधेरे में एक आदमी यरूशलेम की गलियों से होकर चल रहा है। वह कोई साधारण आदमी नहीं है। वह नीकुदेमुस है, फरीसी, यहूदियों का सरदार, शास्त्रों का जानकार, वह व्यक्ति जिसे देखकर लोग कहते होंगे, "अगर कोई परमेश्वर के पास है तो यही है।" और यही आदमी रात में चुपचाप यीशु के पास आता है, क्योंकि भीतर कहीं कुछ खाली है। उसकी धार्मिकता, उसकी पढ़ाई, उसकी प्रतिष्ठा, कुछ भी उस खालीपन को भर नहीं पाया।

यीशु उसे बेहतर बनने की सलाह नहीं देते। वे उससे कहते हैं कि उसे फिर से जन्म लेना होगा।

यह पृष्ठ उसी वाक्य को खोलता है। आप यहाँ जानेंगे कि नया जन्म असल में है क्या, यह बाइबल में उत्पत्ति से लेकर प्रकाशितवाक्य तक कैसे बुना हुआ है, लोग इसे कहाँ गलत समझ लेते हैं, और यह आपकी सोमवार की सुबह को कैसे बदलता है।

इस मार्गदर्शिका का दृष्टिकोण

इस पृष्ठ का दृष्टिकोण एक सीधे सत्य पर टिका है: किसी ने अपना जन्म स्वयं तय नहीं किया। आपने अपने पहले जन्म की योजना नहीं बनाई, तारीख नहीं चुनी, न ही उसमें मेहनत की। आप पैदा हुए, और फिर आपने जीना शुरू किया। बाइबल जब "नया जन्म" शब्द चुनती है, तो वह जानबूझकर ऐसी तस्वीर चुनती है जिसमें इंसान कर्ता नहीं, प्राप्तकर्ता है। इसलिए हम इस विषय को "अपने आपको सुधारने के दस कदम" की तरह नहीं, बल्कि परमेश्वर के एक ऐसे कार्य की तरह देखेंगे जो आपके भीतर होता है, आपके द्वारा नहीं। यही अंतर अनुग्रह और थकान के बीच की रेखा है।

बाइबल नए जन्म के बारे में क्या कहती है?

सबसे स्पष्ट शब्द स्वयं प्रभु यीशु के हैं। यूहन्ना 3:3 में लिखा है, "यीशु ने उसको उत्तर दिया; मैं तुझ से सच सच कहता हूँ, यदि कोई नये सिरे से न जन्मे तो परमेश्वर का राज्य देख नहीं सकता।" ध्यान दीजिए, यीशु यह नहीं कहते कि नीकुदेमुस को और अधिक प्रार्थना करनी चाहिए या और कठोर उपवास रखना चाहिए। वे कहते हैं कि उसे देखने की क्षमता ही नहीं है। जैसे अंधे आदमी को रंगों का वर्णन सुनाना बेकार है, वैसे ही बिना नए जन्म के परमेश्वर का राज्य समझ में नहीं आता। यह जानकारी की कमी नहीं, जीवन की कमी है।

आगे यीशु समझाते हैं कि यह जन्म कैसा है: "क्योंकि जो शरीर से जन्मा है, वह शरीर है; और जो आत्मा से जन्मा है, वह आत्मा है।" शरीर से शरीर पैदा होता है, आत्मा से आत्मा। मनुष्य अपनी ओर से जो कुछ भी उत्पन्न कर सकता है, वह मनुष्य के स्तर का ही होगा। नया जन्म ऊपर से आता है, पवित्र आत्मा के द्वारा।

पुराने नियम में इसी कार्य की भविष्यवाणी बहुत पहले हो चुकी थी। यहेजकेल 36:26 में परमेश्वर कहते हैं, "मैं तुम को नया मन दूँगा, और तुम्हारे भीतर नई आत्मा उत्पन्न करूँगा; और तुम्हारी देह में से पत्थर का हृदय निकालकर तुम को मांस का हृदय दूँगा।" यहाँ सारी क्रियाएँ परमेश्वर की हैं, "मैं दूँगा", "मैं उत्पन्न करूँगा", "मैं निकालूँगा"। पत्थर का हृदय अपने आपको मुलायम नहीं कर सकता। यह एक शल्यक्रिया है, और मरीज़ मेज़ पर बेहोश पड़ा है।

पत्थर प्रार्थना नहीं करता; परमेश्वर उसे बदल देते हैं।

पौलुस इसी सच्चाई को सृष्टि की भाषा में कहते हैं। 2 कुरिन्थियों 5:17 कहता है, "इसलिये यदि कोई मसीह में है तो वह नई सृष्टि है: पुरानी बातें बीत गई हैं; देखो, वे सब नई हो गईं।" सृष्टि वह काम है जो केवल परमेश्वर करते हैं। जब उत्पत्ति के पहले अध्याय में कुछ नहीं था, तब परमेश्वर ने कहा और हो गया। उसी शक्ति से वे एक मरे हुए मन में जीवन बोलते हैं।

अगर कोई अब भी सोचे कि इसमें उसकी मेहनत का कुछ हिस्सा है, तो तीतुस 3:5 उस सोच को जड़ से काट देता है: "तो उसने हमारा उद्धार किया: और यह धर्म के कामों के कारण नहीं, जो हम ने आप किए, पर अपनी दया के अनुसार, नये जन्म के स्नान, और पवित्र आत्मा के हमें नया बनाने के द्वारा हुआ।" "धर्म के कामों के कारण नहीं" का मतलब है कि आपकी सबसे अच्छी धार्मिकता भी इस जन्म का कारण नहीं बन सकती। कारण केवल उनकी दया है।

फिर प्रश्न उठता है, परमेश्वर यह काम करते किस साधन से हैं? 1 पतरस 1:23 उत्तर देता है: "क्योंकि तुम ने नाशमान नहीं पर अविनाशी बीज से परमेश्वर के जीवते और सदा ठहरनेवाले वचन के द्वारा नया जन्म पाया है।" बीज वचन है। जब सुसमाचार सुनाया जाता है और पवित्र आत्मा उसे मन में डालते हैं, तब जीवन फूटता है। इसीलिए प्रचार, बाइबल पढ़ना और सुसमाचार सुनाना कोई औपचारिकता नहीं, जीवन का साधन है।

और यह नया जन्म किसी शून्य में नहीं होता, यह मसीह की मृत्यु और पुनरुत्थान से जुड़ा है। रोमियों 6:4 कहता है, "अतः उस मृत्यु का बपतिस्मा पाने से हम उसके साथ गाड़े गए, ताकि जैसे मसीह पिता की महिमा के द्वारा मरे हुओं में से जिलाया गया, वैसे ही हम भी नये जीवन की सी चाल चलें।" पुराना व्यक्ति कब्र में छोड़ दिया गया; जो उठा है, वह नए जीवन के लिए उठा है। यूहन्ना 1:13 इसी बात को संक्षेप में कहता है कि ऐसे लोग "न तो लहू से, न शरीर की इच्छा से, न मनुष्य की इच्छा से, परन्तु परमेश्वर से उत्पन्न हुए हैं।"

बाइबल में चलने वाला सूत्र

यह विषय बाइबल के एक कोने में पड़ा हुआ विचार नहीं है; यह पहली से आखिरी किताब तक चलने वाला धागा है।

शुरुआत उत्पत्ति में होती है, जहाँ पृथ्वी बेडौल और सुनसान थी और "परमेश्वर का आत्मा जल के ऊपर मण्डलाता था।" वही आत्मा जो अव्यवस्था पर मँडराए और वहाँ से सृष्टि निकली, वही आत्मा आज एक टूटे हुए इंसान पर मँडराते हैं। फिर अब्राहम की कहानी आती है, जहाँ परमेश्वर एक बाँझ स्त्री और एक बूढ़े आदमी से एक जाति उत्पन्न करने का वादा करते हैं। इसहाक का जन्म मनुष्य की शक्ति से नहीं, प्रतिज्ञा से हुआ। परमेश्वर शुरू से ही सिखा रहे हैं कि उनके लोग स्वाभाविक रूप से नहीं, अलौकिक रूप से पैदा होते हैं।

व्यवस्थाविवरण 30:6 में मूसा कहते हैं कि "तेरा परमेश्वर यहोवा तेरे और तेरे वंश के मन का खतना करेगा।" बाहरी चिह्न काफी नहीं था; हृदय को बदलना था, और वह काम परमेश्वर अपने हाथ में लेते हैं। दाऊद इसी आवश्यकता को अपने पाप के बाद महसूस करते हैं और भजन 51:10 में पुकारते हैं, "हे परमेश्वर, मेरे अन्दर शुद्ध मन उत्पन्न कर, और मेरे भीतर स्थिर आत्मा नये सिरे से उत्पन्न कर।" ध्यान दीजिए, वे अपने मन को साफ करने का वादा नहीं करते; वे परमेश्वर से नया मन माँगते हैं।

बँधुआई के अँधेरे में यह सूत्र और साफ हो जाता है। यिर्मयाह 31:33 में परमेश्वर एक नई वाचा की प्रतिज्ञा करते हैं, जिसमें वे अपनी व्यवस्था पत्थर की पटियों पर नहीं बल्कि लोगों के हृदय पर लिखेंगे। यहेजकेल उसी को हृदय परिवर्तन की भाषा में कहते हैं, और फिर सूखी हड्डियों की घाटी में जाकर दिखाते हैं कि परमेश्वर मरे हुए लोगों की एक पूरी सेना को जीवित कर सकते हैं। इस्राएल अपनी कब्र से स्वयं नहीं निकला; परमेश्वर की साँस ने उसे उठाया।

फिर नया नियम आता है और नीकुदेमुस की उस रात में सब कुछ एक बिंदु पर आ जाता है। यीशु पुराने नियम की सारी प्रतिज्ञाओं को एक वाक्य में समेट देते हैं: नए सिरे से जन्म लेना अवश्य है। और वे केवल आदेश देकर नहीं जाते, वे स्वयं क्रूस पर जाते हैं, गाड़े जाते हैं, और तीसरे दिन जी उठते हैं। 1 पतरस 1:3 इसी को जोड़ता है, कि परमेश्वर ने "यीशु मसीह को मरे हुओं में से जी उठने के द्वारा, अपनी बड़ी दया से, हमें जीवित आशा के लिये नया जन्म दिया।" मसीह का खाली कब्र नए जन्म का स्रोत है; वहीं से यह नया जीवन बहकर हम तक आता है।

पिन्तेकुस्त के दिन आत्मा उँडेले जाते हैं, और यहेजकेल की भविष्यवाणी हजारों लोगों में पूरी होने लगती है। पत्र इसी को समझाते हैं, और अंत में प्रकाशितवाक्य 21:5 में सिंहासन पर बैठे हुए परमेश्वर कहते हैं, "देख, मैं सब कुछ नया कर देता हूँ।" जो काम आज आपके भीतर शुरू हुआ है, वही एक दिन पूरी सृष्टि में पूरा होगा। आपका नया जन्म उस नई दुनिया का पहला फल है।

आम भ्रांतियाँ

पहली भ्रांति यह है कि नया जन्म एक ज़ोरदार भावनात्मक अनुभव है, और अगर आपके पास आँसुओं वाली कोई नाटकीय कहानी नहीं है तो शायद आपका नया जन्म हुआ ही नहीं। यीशु ने स्वयं इस सोच को संतुलित किया: "हवा जिधर चाहती है उधर चलती है, और तू उसका शब्द सुनता है, परन्तु नहीं जानता, कि वह कहाँ से आती और किधर को जाती है; जो कोई आत्मा से जन्मा है वह ऐसा ही है।" हवा दिखाई नहीं देती, उसका असर दिखाई देता है। कुछ लोगों का जीवन एक रात में पलटता है, कुछ का धीरे-धीरे, जैसे सुबह का उजाला फैलता है। प्रमाण भावना नहीं, फल है।

दूसरी भ्रांति यह है कि नया जन्म पा लेने के बाद पाप का संघर्ष खत्म हो जाना चाहिए। अगर ऐसा होता, तो रोमियों 6:4 में यह कहने की ज़रूरत न पड़ती कि "हम भी नये जीवन की सी चाल चलें।" चलना एक प्रक्रिया है। नवजात शिशु पूरी तरह जीवित होता है, फिर भी उसे बढ़ना, गिरना, सीखना पड़ता है। नया जन्म आपको परिपूर्ण नहीं, जीवित बनाता है। अंतर यह है कि अब पाप आपका स्वभाव नहीं, आपका शत्रु है; अब आप गिरकर वहीं पड़े नहीं रहते, आपके भीतर कोई है जो आपको उठाता है।

तीसरी भ्रांति यह है कि बपतिस्मा लेना या कलीसिया का सदस्य बन जाना ही नया जन्म है। बपतिस्मा बहुत महत्वपूर्ण है, वह नए जन्म का सार्वजनिक चिह्न और गवाही है, पर पानी हृदय को नहीं बदलता। नीकुदेमुस के पास धर्म की हर योग्यता थी और फिर भी यीशु ने उससे कहा कि उसे नए सिरे से जन्म लेना है। तीतुस 3:5 साफ कहता है कि उद्धार "धर्म के कामों के कारण नहीं, जो हम ने आप किए" हुआ। बाहरी रस्म भीतर के जन्म की जगह नहीं ले सकती; वह उसका उत्सव है, उसका कारण नहीं।

चौथी भ्रांति, और शायद सबसे गहरी, यह है कि नया जन्म मेरे अपने निर्णय और मेरी इच्छाशक्ति का परिणाम है। बहुत से लोग नए साल के संकल्प की तरह इसे लेते हैं: अब से मैं बदल जाऊँगा। पर यूहन्ना 1:13 कहता है कि परमेश्वर की सन्तानें "न तो लहू से, न शरीर की इच्छा से, न मनुष्य की इच्छा से, परन्तु परमेश्वर से उत्पन्न हुए हैं।" इसका मतलब यह नहीं कि विश्वास करना ज़रूरी नहीं; विश्वास अनिवार्य है। पर विश्वास नए जन्म का उत्पादक नहीं, उसका पहला साँस है। जैसे बच्चा पैदा होने के बाद रोता है, वैसे ही नया जन्मा हुआ व्यक्ति मसीह को थामता है। यही इस पृष्ठ का केंद्रीय दृष्टिकोण है, और यही आपको उस थकान से मुक्त करता है जो अपने दम पर आत्मिक जीवन पैदा करने की कोशिश से आती है।

आज इसे जीवन में उतारना

सबसे पहले, यह आपकी आत्मिक सुरक्षा की जड़ बदल देता है। अगर आपका नया जन्म आपके प्रदर्शन पर टिका होता, तो हर बुरा दिन आपके उद्धार पर प्रश्नचिह्न लगा देता। पर जो जन्म परमेश्वर ने दिया है, वह आपकी असफलता से रद्द नहीं होता। बच्चा बुरा व्यवहार करने पर अपने माता-पिता की सन्तान होना बंद नहीं कर देता। इसलिए जब आप किसी पाप में फिसलते हैं, तो भागने की जगह पिता के पास लौटिए, क्योंकि रिश्ता जन्म पर आधारित है, अंकों पर नहीं।

दूसरा, यह आपके काम को बदल देता है। अगर आप एक नई सृष्टि हैं, तो दफ्तर में आपकी ईमानदारी केवल नियम पालन नहीं, स्वभाव की अभिव्यक्ति है। 2 कुरिन्थियों 5:17 कहता है कि "पुरानी बातें बीत गई हैं", तो वह पुरानी आदत, छोटी चालाकियाँ, झूठे बिल, सहकर्मी की पीठ पीछे की बातें, अब आपके नए स्वभाव से मेल नहीं खातीं। आप बदलने की कोशिश नहीं कर रहे; आप उस व्यक्ति की तरह जीना सीख रहे हैं जो आप पहले से हैं।

तीसरा, यह परिवार में क्षमा को संभव बनाता है। बहुत से घरों में वर्षों पुरानी कड़वाहट पत्थर की तरह जमी होती है, और लोग कहते हैं, "मैं माफ नहीं कर सकता, मेरा स्वभाव ही ऐसा है।" यहेजकेल 36:26 इसी पत्थर के बारे में बात करता है। जिस हृदय को परमेश्वर ने माँस का बनाया है, वह महसूस कर सकता है, झुक सकता है, पहल कर सकता है। आप वह फोन कॉल कर सकते हैं जो दस साल से नहीं हुआ।

चौथा, यह आपके पैसे और समय को खोल देता है। जो व्यक्ति मानता है कि यह जीवन उसने खुद कमाया है, वह उसे कसकर पकड़ता है। जिसने जीवन उपहार में पाया है, वह खुले हाथों से देता है।

और पाँचवाँ, यह आपको वचन के पास बिठाता है। 1 पतरस 1:23 के अनुसार आप "अविनाशी बीज" से जन्मे हैं, और जिस बीज से आप जन्मे हैं, उसी से आप बढ़ते भी हैं। रोज़ाना दस मिनट बाइबल के साथ बैठना कोई धार्मिक टैक्स नहीं, भोजन है।

नया जन्म एक बार, नई चाल रोज़।

दर्पण

अब मैं सीधे आपसे बात करना चाहता हूँ।

आप शायद वर्षों से कलीसिया जा रहे हैं। आप गीत जानते हैं, प्रार्थना की भाषा जानते हैं, शायद आप किसी सेवकाई में भी हैं। और फिर भी, जब सब चले जाते हैं और आप अकेले होते हैं, तो भीतर एक सन्नाटा होता है जिसे आप किसी को नहीं बताते। नीकुदेमुस भी रात में आया था, क्योंकि कुछ सवाल दिन के उजाले में पूछे नहीं जाते। अगर यह आप हैं, तो यह पृष्ठ आपको शर्मिंदा करने नहीं, आपके पास बैठने आया है।

पूछिए अपने आप से: क्या मेरे भीतर कुछ ऐसा है जो केवल परमेश्वर ही समझा सकते हैं? क्या मेरी ईमानदारी तब भी टिकती है जब कोई नहीं देख रहा? जब कोई मुझे चोट पहुँचाता है, तो क्या मेरे भीतर क्षमा की कोई खींच है, भले ही वह कमज़ोर हो? क्या पाप अब मुझे सचमुच दुखी करता है, या सिर्फ पकड़े जाने का डर है?

और अगर उत्तर निराशाजनक लगें, तो सुनिए: यह खबर बुरी नहीं है। बुरी खबर तब होती अगर समाधान यह होता कि "और ज़्यादा कोशिश करो"। आप जानते हैं कि आपने कितनी बार कोशिश की है। जनवरी के संकल्प, आँसुओं भरी प्रतिज्ञाएँ, उपवास, वह डायरी जिसमें आपने लिखा था "अब कभी नहीं"। वह सब पत्थर को पॉलिश करने जैसा था।

परमेश्वर पॉलिश नहीं करते। वे बदल देते हैं।

तो अपने खालीपन को छिपाइए मत। उसे लेकर मसीह के पास आइए, ठीक वैसे ही जैसे आप हैं, अपने थके हुए विवाह के साथ, अपने कर्ज़ के साथ, अपनी गुप्त लत के साथ, अपने बीमार शरीर और अपनी अकेली शामों के साथ। नया जन्म उन लोगों को मिलता है जो मानते हैं कि वे अपने आपको जन्म नहीं दे सकते। यह स्वीकारोक्ति ही वह दरवाज़ा है जिससे जीवन भीतर आता है।

बच्चों के लिए समझाया गया

बच्चों को यह विषय समझाना मुश्किल लगता है, क्योंकि "नया जन्म" शब्द सुनकर वे सचमुच माँ के पेट में लौटने की कल्पना करने लगते हैं, ठीक वैसे ही जैसे नीकुदेमुस ने किया था। इसलिए तस्वीरों से शुरू कीजिए, परिभाषा से नहीं।

एक सरल तरीका यह है: बच्चे से पूछिए कि क्या वह अपने जन्मदिन पर मौजूद था। वह हँसेगा और कहेगा हाँ। फिर पूछिए कि क्या उसने खुद तय किया था कि वह कब पैदा हो। वह कहेगा नहीं। बस यहीं से बात खुलती है। परमेश्वर कहते हैं कि हमें एक और जन्म चाहिए, वह जन्म जो हमारे भीतर होता है, जिसमें परमेश्वर हमें एक नया मन देते हैं ताकि हम उनसे प्रेम करना चाहें। जैसे पत्थर कठोर होता है और गुब्बारा नरम, वैसे ही परमेश्वर हमारा कठोर मन लेकर नरम मन देते हैं, और यहेजकेल 36:26 ठीक यही बात कहता है।

छोटे बच्चों के लिए बीज की तस्वीर भी बहुत अच्छी काम करती है: एक छोटा सा बीज मिट्टी में डालिए, उसे रोज़ पानी दीजिए, और कुछ दिनों बाद अंकुर दिखाइए। फिर 1 पतरस 1:23 से बताइए कि परमेश्वर का वचन वैसा ही बीज है जो हमारे भीतर नया जीवन उगाता है।

बड़े बच्चों के साथ आप मसीह की मृत्यु और पुनरुत्थान तक जा सकते हैं, और बता सकते हैं कि नया जीवन खाली कब्र से आता है।

अलग-अलग उम्र के लिए अलग भाषा चाहिए, इसलिए हमारे पास इस विषय पर अलग से तैयार की गई व्याख्याएँ उपलब्ध हैं: छोटे बच्चों के लिए तीन से छह वर्ष, स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए सात से बारह वर्ष, और किशोरों के लिए बारह वर्ष से ऊपर। हर उम्र के बच्चे को यह सुनने का हक है कि परमेश्वर उन्हें नया जीवन देना चाहते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नया जन्म क्या है, सरल शब्दों में?

नया जन्म परमेश्वर का वह कार्य है जिसमें पवित्र आत्मा एक आत्मिक रूप से मरे हुए व्यक्ति के भीतर नया जीवन उत्पन्न करते हैं, जिससे वह पाप से घृणा करने और मसीह पर विश्वास करने योग्य बन जाता है। यह सुधार नहीं, सृष्टि है। यूहन्ना 3:3 में यीशु कहते हैं, "यदि कोई नये सिरे से न जन्मे तो परमेश्वर का राज्य देख नहीं सकता।" जैसे शारीरिक जन्म आपको इस दुनिया में लाता है, वैसे ही यह जन्म आपको परमेश्वर के परिवार और उनके राज्य में लाता है।

क्या नया जन्म और उद्धार एक ही बात है?

ये जुड़े हुए हैं पर एक जैसे नहीं। उद्धार एक बड़ा शब्द है जिसमें परमेश्वर का पूरा बचाने का कार्य आता है, जिसमें नया जन्म, धर्मी ठहराया जाना, पवित्र किया जाना और अंत में महिमा पाना सब शामिल है। नया जन्म उस पूरे कार्य की शुरुआत है, वह क्षण जब भीतर जीवन आता है। तीतुस 3:5 दोनों को एक साथ रखता है: "तो उसने हमारा उद्धार किया... नये जन्म के स्नान, और पवित्र आत्मा के हमें नया बनाने के द्वारा।" नया जन्म उद्धार का द्वार है।

मैं कैसे जानूँ कि मेरा नया जन्म हुआ है या नहीं?

तारीख याद होना ज़रूरी नहीं, जीवन के चिह्न दिखना ज़रूरी है। पहला यूहन्ना इन चिह्नों की सूची देता है: यीशु मसीह पर सच्चा विश्वास, पाप के प्रति नई संवेदनशीलता, विश्वासियों से प्रेम, और परमेश्वर की आज्ञा मानने की भीतरी इच्छा। अगर आपका मन उस बात से दुखी होता है जो पहले आपको सामान्य लगती थी, अगर आप मसीह को चाहते हैं न कि केवल उनके लाभ, तो यह जीवन का प्रमाण है। अपने अनुभव की तीव्रता नहीं, अपनी दिशा देखिए।

क्या बपतिस्मा लेने से नया जन्म हो जाता है?

बपतिस्मा मसीह की आज्ञा है और हर विश्वासी के लिए महत्वपूर्ण है, पर जल अपने आप हृदय को नहीं बदलता। बपतिस्मा उस मृत्यु और पुनरुत्थान का चिह्न है जो नए जन्म में भीतर घटित होता है, जैसा रोमियों 6:4 कहता है कि हम उनके साथ गाड़े गए ताकि नए जीवन की सी चाल चलें। जो व्यक्ति विश्वास के बिना बपतिस्मा लेता है, वह भीगकर बाहर आता है, नया होकर नहीं। चिह्न को उस वस्तु से न बदलिए जिसकी वह ओर इशारा करता है।

यूहन्ना 3:5 में "जल और आत्मा से जन्म" का क्या अर्थ है?

सबसे अच्छा अर्थ पुराने नियम की पृष्ठभूमि से मिलता है। यहेजकेल 36 में परमेश्वर पहले शुद्ध जल छिड़कने की बात करते हैं और फिर कहते हैं, "मैं तुम को नया मन दूँगा, और तुम्हारे भीतर नई आत्मा उत्पन्न करूँगा।" जल शुद्धिकरण का चित्र है, आत्मा नए जीवन का। नीकुदेमुस एक शास्त्री था, उसे यह संदर्भ तुरंत समझ में आना चाहिए था। इसलिए यीशु उससे कह रहे हैं कि नई वाचा की वह प्रतिज्ञा अब पूरी हो रही है, और उसे भी उसकी ज़रूरत है।

क्या नया जन्म पाने के बाद भी पाप होता है?

हाँ, संघर्ष जारी रहता है, पर अब वह संघर्ष है, समर्पण नहीं। नया जन्म आपको पापरहित नहीं बनाता, आपको जीवित बनाता है, और जीवित व्यक्ति ही लड़ सकता है। रोमियों 6:4 में "नये जीवन की सी चाल चलें" का भाव ही यह है कि चलना सीखना है, और चलने में ठोकर भी लगती है। अंतर यह है कि अब पाप आपको स्वाभाविक नहीं, पराया लगता है। जहाँ पहले आराम था, अब बेचैनी है, और वह बेचैनी ही नए जीवन का सबूत है।

नए जन्म और धर्म परिवर्तन में क्या अंतर है?

धर्म परिवर्तन एक बाहरी, सामाजिक और कानूनी बदलाव है: नाम, समुदाय, रीति-रिवाज बदल जाते हैं। नया जन्म भीतरी है, और केवल परमेश्वर उसे कर सकते हैं। कोई व्यक्ति कलीसिया के रजिस्टर में नाम लिखवाकर भी पत्थर के हृदय के साथ जी सकता है। नीकुदेमुस को किसी दूसरे धर्म में जाने की ज़रूरत नहीं थी, उसे नए जन्म की ज़रूरत थी। 2 कुरिन्थियों 5:17 कहता है, "यदि कोई मसीह में है तो वह नई सृष्टि है", और नई सृष्टि कागज़ पर नहीं, हृदय में बनती है।

क्या नया जन्म दोबारा खो सकता है?

बाइबल जिस भाषा का प्रयोग करती है वही उत्तर दे देती है। जन्म को वापस नहीं लिया जा सकता, और 1 पतरस 1:23 उस बीज को "अविनाशी" कहता है जिससे हम जन्मे हैं। जिस परमेश्वर ने आपको जन्म दिया है, वे आपको थामे भी रखते हैं। इसका अर्थ यह नहीं कि लापरवाही सुरक्षित है; जो सचमुच जन्मा है वह बढ़ता है, और जिसमें कोई फल ही नहीं, उसे अपने जन्म की जाँच करनी चाहिए। सुरक्षा हमारी पकड़ में नहीं, परमेश्वर की पकड़ में है।

नया जन्म पाने के लिए मुझे क्या करना चाहिए?

आप अपने जन्म का प्रबंध नहीं कर सकते, पर आप उस जगह जा सकते हैं जहाँ परमेश्वर जीवन देते हैं। वचन सुनिए और पढ़िए, क्योंकि 1 पतरस 1:23 के अनुसार वही अविनाशी बीज है। अपनी असमर्थता ईमानदारी से परमेश्वर के सामने रखिए और उनसे नया मन माँगिए, जैसे दाऊद ने भजन 51:10 में माँगा। और यीशु मसीह पर भरोसा कीजिए, जिनकी मृत्यु आपके पाप के लिए और जिनका जी उठना आपके नए जीवन के लिए है। परमेश्वर ऐसे पुकारने वालों को लौटाते नहीं।

क्या बच्चों का भी नया जन्म हो सकता है?

बिलकुल। परमेश्वर उम्र की सीमा में बँधे नहीं हैं, और पवित्र आत्मा एक सात साल के बच्चे के हृदय में उतनी ही सच्चाई से काम कर सकते हैं जितनी सत्तर साल के व्यक्ति में। कई विश्वासी बता भी नहीं सकते कि कब उन्होंने पहली बार विश्वास किया, क्योंकि वे बचपन से मसीह को जानते आए हैं। माता-पिता का काम दबाव डालना नहीं, बीज बोना है: वचन सुनाना, प्रार्थना सिखाना, और घर में अनुग्रह दिखाना। जन्म देना परमेश्वर का काम है, पानी देना हमारा।

नया जन्म और पुनर्जन्म या आवागमन में क्या अंतर है?

ये दो बिलकुल अलग बातें हैं। आवागमन का विचार यह है कि आत्मा मरने के बाद किसी दूसरे शरीर में फिर से जन्म लेती है, और यह चक्र कर्मों से चलता है। बाइबल का नया जन्म इसी जीवन में, इसी शरीर में होता है, और यह कर्मों से नहीं बल्कि दया से मिलता है, जैसा तीतुस 3:5 स्पष्ट कहता है कि यह "धर्म के कामों के कारण नहीं" हुआ। नया जन्म शरीर नहीं बदलता, हृदय बदलता है, और वह एक ही बार होता है।

क्या नए जन्म के समय कोई विशेष अनुभव या भावना ज़रूरी है?

नहीं। यीशु ने हवा की तुलना दी: आप उसका शब्द सुनते हैं पर नहीं जानते कि वह कहाँ से आती और किधर जाती है। कुछ लोगों के लिए यह एक तूफान जैसा क्षण होता है, दूसरों के लिए सुबह के धीरे-धीरे फैलते उजाले जैसा। परमेश्वर भावनाओं के एक ही साँचे में काम नहीं करते। इसलिए अपनी गवाही की नाटकीयता से दूसरों से तुलना मत कीजिए। पूछिए कि क्या मसीह आज आपके लिए प्रिय हैं और क्या पाप आपके लिए कड़वा है; यही असली माप है।

अंत में

नीकुदेमुस उस रात कोई तकनीक लेने नहीं आया था, और यीशु ने उसे कोई तकनीक दी भी नहीं। उन्होंने उसे एक ऐसा सत्य दिया जो पहले तोड़ता है और फिर उठाता है: आप अपने आपको जन्म नहीं दे सकते, पर परमेश्वर दे सकते हैं, और वे देना चाहते हैं। पत्थर का हृदय निकालकर माँस का हृदय देना उनका वादा है, और उस वादे की कीमत मसीह ने क्रूस पर चुकाई।

अगर आप इस पृष्ठ से एक बात लेकर जाएँ, तो यह ले जाइए: आपकी सबसे बड़ी ज़रूरत सुधार नहीं, जीवन है। और जीवन उपहार है।

आगे के अध्ययन के लिए यूहन्ना 3 को पूरा धीरे-धीरे पढ़िए, फिर यहेजकेल 36 और 37 को साथ रखकर देखिए कि परमेश्वर कैसे सूखी हड्डियों को खड़ा करते हैं, और अंत में रोमियों 6 से 8 तक जाइए, जहाँ पौलुस समझाते हैं कि नया जीवन रोज़ कैसा दिखता है। बाइबल खोलते समय प्रार्थना कीजिए कि जिस आत्मा ने ये शब्द दिए, वही आपके भीतर उन्हें जीवित करें।

जो जन्म परमेश्वर देते हैं, वह सदा रहता है।

यह पृष्ठ साझा करें

सुसमाचार फैलाने में मदद करें। यह व्याख्या किसी ऐसे व्यक्ति को भेजें जिसे इससे प्रोत्साहन मिल सके।

WhatsApp Email Facebook X / Twitter
दैनिक वचन

हर सुबह आपके इनबॉक्स में एक बाइबल अंश और मनन

हर सुबह आपको एक बाइबल अंश और एक छोटा मनन मिलेगा, जिससे आप अपना दिन आरंभ कर सकें। पहले से ही 6.223 लोग साथ पढ़ रहे हैं।

आपको पहले एक पुष्टिकरण ईमेल मिलेगा। आप कभी भी एक क्लिक से सदस्यता समाप्त कर सकते हैं।

अंतर्दृष्टियों की दीवार

पवित्रशास्त्र में आपको क्या स्पर्श करता है? हम किसके लिए प्रार्थना करें? हम परमेश्वर का किसके लिए धन्यवाद करें?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर कुलुस्सियों 1:17

और वही सब वस्तुओं में प्रथम है, और सब वस्तुएँ उसी में स्थिर रहती हैं।" ज़रा सोचो, जो चीज़ें तुम्हें…

प्रार्थना संपादकीय पर श्रेष्ठगीत 6:4

पिता, मुझे यकीन करना मुश्किल लगता है कि तू मुझे देखकर खुश होता है। मैं अपनी कमियाँ गिनता रहता हूँ,…

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर निर्गमन 12:10

उस रात मेम्ने का कुछ भी बचाकर नहीं रखना था। "और उसमें से कुछ सवेरे तक न रहने देना।" परमेश्वर…

धन्यवाद संपादकीय पर इब्रानियों 9:6

पिता, धन्यवाद कि जब सब कुछ तैयार हो गया, तब याजक "हर समय" पहले तम्बू में सेवा करते रहे। आपकी…

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर दानिय्येल 9:27

दानिय्येल घुटनों पर था, अपने लोगों के पाप का बोझ लिए। और उत्तर में उसे यह सुनाया गया कि आगे…

प्रार्थना संपादकीय पर यिर्मयाह 4:4

पिता, मेरा मन कई जगह कठोर हो गया है और मैं इसे ऊपर से ठीक दिखाने की कोशिश करता रहा…

अस्वीकरण: Faith.network बाइबल अध्ययन और मनन तैयार करने के लिए स्वचालित भाषा मॉडलों का उपयोग करता है। सारी सामग्री बाइबल के मूल पाठ से ही तैयार की जाती है और प्रतिदिन एक स्वतंत्र, स्वचालित गुणवत्ता जाँच द्वारा परखी जाती है: प्रत्येक भाषा साइट से यादृच्छिक नमूने पवित्रशास्त्र के प्रति निष्ठा, बाइबल के शब्दशः उद्धरण, भाषा और स्पष्टता के आधार पर आँके जाते हैं, और परिणाम बिना संपादन के प्रकाशित किए जाते हैं। फिर भी, कोई भी व्याख्या अचूक नहीं है और त्रुटियाँ हो सकती हैं। इस मंच पर कुछ भी पेशेवर सलाह नहीं है, और इसकी सामग्री से कोई अधिकार प्राप्त नहीं किया जा सकता। जो आप पढ़ें उसे सदा स्वयं बाइबल से जाँचें, और Faith.network को अपने व्यक्तिगत बाइबल अध्ययन, प्रार्थना और स्थानीय कलीसिया के जीवन के पूरक के रूप में उपयोग करें, कभी भी उनके स्थान पर नहीं। हमारी पूर्ण अस्वीकरण सूचना और उपयोग की शर्तें लागू होती हैं। हमारी दैनिक गुणवत्ता जाँच देखें

© 2026 Faith.Network. सर्वाधिकार सुरक्षित।

Faith.network एक सेवकाई है Faith.network · KvK 84972599 · connect@faith.network

हमारे साझेदारों के सहयोग से संभव
कंपनी?