क्षमा कैसे करें: बाइबल के अनुसार माफ़ करने की शक्ति
परिचय
फ़ोन की स्क्रीन पर उसका नाम चमकता है, और आपके पेट में एक गाँठ बन जाती है। पाँच साल पहले की बात है, पर शरीर आज भी याद रखता है। शायद वह आपका भाई है जिसने पिता की ज़मीन में धोखा किया। शायद वह दोस्त जिसने आपकी सबसे निजी बात हँसी का विषय बना दी। शायद वह पति, वह पत्नी, वह पादरी, वह माँ, जिसने वह कहा जो कहा नहीं जाना चाहिए था। और रविवार को कोई मंच से कहता है, "क्षमा कर दो," और आप सिर हिला देते हैं, पर भीतर एक आवाज़ कहती है: इतना आसान नहीं है।
आप सही हैं। यह आसान नहीं है। पर यह असंभव भी नहीं है, और यह वह अस्पष्ट, भावुक, दाँत पीसकर मुस्कुराने वाली चीज़ भी नहीं है जो हमें सिखाई गई है। इस पृष्ठ पर हम बाइबल में क्षमा को उत्पत्ति से प्रकाशितवाक्य तक खोजेंगे, और आप देखेंगे कि परमेश्वर क्षमा को किस भाषा में परिभाषित करते हैं। वह भाषा आपको चौंकाएगी, और मुक्त भी करेगी।
इस मार्गदर्शिका का दृष्टिकोण
बाइबल क्षमा को मुख्य रूप से भावना की भाषा में नहीं, बल्कि बहीखाते की भाषा में बताती है। पवित्रशास्त्र में क्षमा का अर्थ है किसी के नाम पर लिखा कर्ज़ रद्द कर देना, लेखे में से नाम काट देना, वसूली का अधिकार छोड़ देना। यीशु मसीह ने क्षमा को समझाने के लिए दस हज़ार तोड़े के कर्ज़ की कहानी सुनाई, और पौलुस ने क्रूस को "दोषों की लिखी हुई पुस्तक" पर लगी कील कहा। इसलिए इस मार्गदर्शिका में हम क्षमा को एक निर्णय के रूप में देखेंगे, न कि एक अनुभूति के रूप में। यह फ़र्क़ छोटा नहीं है। यह उन लोगों के लिए दरवाज़ा खोलता है जो सालों से इंतज़ार कर रहे हैं कि पहले दिल हल्का हो जाए, तब क्षमा करेंगे।
बाइबल क्षमा के बारे में क्या कहती है?
बाइबल में क्षमा के लिए जो शब्द इस्तेमाल होते हैं, वे मंदिर, अदालत और बाज़ार से आते हैं। इब्रानी भाषा में एक शब्द है नासा, यानी उठा लेना, बोझ को अपने कंधे पर ले लेना। दूसरा शब्द है सलख, जो केवल परमेश्वर के लिए इस्तेमाल होता है, यानी वह क्षमा जो केवल वे दे सकते हैं। और यूनानी में सबसे आम शब्द है अफ़ीएमी, जिसका अर्थ है छोड़ देना, जाने देना, कर्ज़ माफ़ कर देना। यही शब्द उन रसीदों पर लिखा जाता था जब कोई उधार चुका दिया जाता था।
इसलिए जब पतरस यीशु के पास आया, तो उसने एक हिसाब लेकर आया। मत्ती 18:21-22 कहता है, "तब पतरस ने उसके पास आकर उस से कहा, हे प्रभु, यदि मेरा भाई अपराध करता रहे, तो मैं कितनी बार उसे क्षमा करूं, क्या सात बार तक? यीशु ने उस से कहा, मैं तुझ से यह नहीं कहता, कि सात बार, परन्तु सात बार के सत्तर गुने तक।" पतरस उदार बनने की कोशिश कर रहा था। रब्बियों की परंपरा में तीन बार क्षमा करना काफ़ी माना जाता था; पतरस ने दुगुना करके एक जोड़ दिया। यीशु ने उसका कैलकुलेटर तोड़ दिया। सात के सत्तर गुने का मतलब चार सौ नब्बे बार गिनना नहीं है। मतलब है: गिनना बंद करो। जो व्यक्ति गिन रहा है, वह अभी माफ़ नहीं कर रहा, वह हिसाब रख रहा है।
और तुरंत बाद यीशु ने वह दृष्टांत सुनाया जो इस पूरे विषय की चाबी है। एक दास पर राजा का दस हज़ार तोड़े का कर्ज़ था, एक ऐसी रकम जिसे जीवन भर में नहीं चुकाया जा सकता था। राजा ने पूरा कर्ज़ रद्द कर दिया। वही दास बाहर निकलकर अपने संगी दास का गला पकड़ता है, जिस पर उसका सौ दीनार बाकी था। यीशु का निष्कर्ष कड़ा है: "इसी प्रकार यदि तुम में से हर एक अपने भाई को मन से क्षमा न करेगा, तो मेरा पिता जो स्वर्ग में है, तुम से भी वैसा ही करेगा।"
यहाँ बाइबल में क्षमा का ढाँचा साफ़ दिखता है। परमेश्वर पहले क्षमा करते हैं, और हमारी क्षमा उसका उत्तर है, नकल है, गूँज है। इसलिए इफिसियों 4:32 में क्रम पर ध्यान दें: "और एक दूसरे पर कृपाल, और करुणामय हो, और जैसे परमेश्वर ने मसीह में तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी एक दूसरे के अपराध क्षमा करो।" पौलुस यह नहीं कहते कि तुम्हारे भीतर क्षमा करने की स्वाभाविक शक्ति है। वे कहते हैं कि तुम्हें जो मिला है, वही बाँटो। कुलुस्सियों 3:13 उसी सुर में गाता है: "और यदि किसी को दूसरे से कुछ शिकायत हो, तो एक दूसरे की सह लो, और एक दूसरे के अपराध क्षमा करो: जैसे प्रभु ने तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी करो।"
पर हमें कैसे पता कि परमेश्वर की क्षमा सच में पूरी है? भजन संहिता 103:12 इसका सबसे सुंदर उत्तर देता है: "जैसे पूर्व पश्चिम से दूर है, वैसे ही उसने हमारे अपराधों को हम से दूर किया है।" उत्तर और दक्षिण की सीमा होती है, ध्रुव पर जाकर दिशा बदल जाती है। पूर्व और पश्चिम कभी नहीं मिलते। यह भूगोल नहीं, यह धर्मशास्त्र है: परमेश्वर की क्षमा में आपका पाप वापस लौटकर आपके नाम पर दर्ज नहीं होता।
और वह क्षमा कैसे मिलती है? 1 यूहन्ना 1:9 दरवाज़ा दिखाता है: "यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अनधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है।" ध्यान दीजिए, यूहन्ना नहीं कहते कि परमेश्वर "दयालु" हैं, वे कहते हैं "विश्वासयोग्य और धर्मी"। क्यों? क्योंकि कर्ज़ चुका दिया गया है। क्रूस पर हिसाब बराबर हुआ। परमेश्वर आपको क्षमा करते हुए अपने न्याय के साथ समझौता नहीं कर रहे; वे उस भुगतान का सम्मान कर रहे हैं जो उनके पुत्र ने किया।
बाइबल में चलने वाला सूत्र
क्षमा का धागा पवित्रशास्त्र के पहले पन्नों से शुरू होता है। अदन में मनुष्य ने कर्ज़ बनाया, और परमेश्वर ने चमड़े के वस्त्र दिए, यानी किसी और के लहू से ढँकना। कैन के बाद बदले का गीत लेमेक गाता है, और मानव इतिहास हिसाब रखने की आदत में डूब जाता है। पर उत्पत्ति के अंत में यूसुफ़ अपने भाइयों के सामने खड़ा है, जिन्होंने उसे गड्ढे में डाला और बेच दिया। उसके हाथ में मिसर की पूरी शक्ति है, बदला लेने का हर अधिकार है, और वह रोता है और कहता है कि जो तुमने बुराई के लिए सोचा, परमेश्वर ने भलाई के लिए ठहराया। यूसुफ़ बहीखाता फाड़ देता है।
व्यवस्था में परमेश्वर ने क्षमा को कैलेंडर में बुन दिया। हर साल प्रायश्चित का दिन आता था, जब बकरे पर हाथ रखकर पाप उसके ऊपर रखा जाता और वह जंगल में भेज दिया जाता। हर पचासवें वर्ष जुबली का नरसिंगा फूँका जाता, कर्ज़ रद्द होते, गिरवी रखी ज़मीन लौटती, दास आज़ाद होते। इस्राएल को हर पीढ़ी में यह अभ्यास कराया गया कि माफ़ी एक अर्थव्यवस्था है, केवल मनोदशा नहीं।
भविष्यद्वक्ता इसी धागे को आगे खींचते हैं। दाऊद बतशेबा के पाप के बाद भजन संहिता 51 में गिड़गिड़ाता है और शुद्ध किए जाने की भीख माँगता है। मीका 7:19 परमेश्वर के बारे में कहता है, "तू उनके सब पापों को गहिरे समुद्र में डाल देगा।" होशे को आदेश मिलता है कि वह अपनी बेवफ़ा पत्नी को दोबारा ख़रीद कर घर लाए, क्योंकि परमेश्वर का अपनी भटकी हुई प्रजा के साथ यही व्यवहार है। यशायाह 53 में वह सेवक प्रकट होता है जो हमारे अधर्म के कामों का बोझ अपने ऊपर उठाता है। पुराना नियम बार-बार एक ही प्रश्न पूछता है: कोई ऐसा हो जो हमारा कर्ज़ अपने खाते में ले ले।
नए नियम में वह प्रश्न एक नाम पाता है। यीशु मसीह पाप क्षमा करते हैं और धर्म-गुरु भड़क उठते हैं, क्योंकि यह अधिकार केवल परमेश्वर का है, और यही उनकी बात है। वे प्रार्थना सिखाते हुए क्षमा को रोटी के साथ रखते हैं, मत्ती 6:12 में: "और जिस प्रकार हम ने अपने अपराधियों को क्षमा किया है, वैसे ही तू भी हमारे अपराधों को क्षमा कर।" और क्रूस पर, जब कीलें अभी ताज़ी हैं, लूका 23:34 में वे कहते हैं, "हे पिता, इन्हें क्षमा कर, क्योंकि ये जानते नहीं कि क्या कर रहे हैं।"
वहीं क्रूस पर बहीखाता निपटता है। कुलुस्सियों 2:14 कहता है कि परमेश्वर ने विधियों का वह लेख, जो हमारे विरोध में था, मिटा डाला और उसे क्रूस पर कीलों से जड़कर सामने से हटा दिया। और 2 कुरिन्थियों 5:19 में यह घोषणा है कि परमेश्वर ने मसीह में होकर संसार का अपने साथ मेल मिलाप कर लिया "और उनके अपराधों को उनके लेखे में नहीं लगाया।" पुनरुत्थान के बाद यीशु का पहला संदेश शिष्यों के लिए डाँट नहीं, शांति है। स्तिफनुस पत्थरों के नीचे दबते हुए प्रार्थना करता है, "हे प्रभु, यह पाप उन पर मत लगा।" और प्रकाशितवाक्य 21:4 में सूत्र अपने अंत पर पहुँचता है: "वह उनकी आंखों से सब आंसू पोंछ डालेगा; और इसके बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; क्योंकि पहिली बातें जाती रहीं।" अंत में कोई खुला हिसाब नहीं बचेगा। सब चुका दिया जाएगा, कुछ लहू से, कुछ न्याय से, पर कुछ अनसुलझा नहीं रहेगा।
आम भ्रांतियाँ
पहली भ्रांति: क्षमा का मतलब भूल जाना है। यह विचार अक्सर भजन संहिता 103:12 और यशायाह की उस पंक्ति से निकाला जाता है जहाँ परमेश्वर कहते हैं कि वे पापों को स्मरण नहीं करेंगे। पर पवित्रशास्त्र में "स्मरण न करना" स्मृति का लोप नहीं, संबंध की बहाली है। परमेश्वर की याद कमज़ोर नहीं हुई; उन्होंने आपके पाप को हथियार बनाने से इनकार कर दिया है। इसका मतलब है कि आप यह याद रख सकते हैं कि क्या हुआ, और फिर भी सच्ची क्षमा दे सकते हैं। जो व्यक्ति दुर्व्यवहार को भूलने की कोशिश में अपनी बुद्धि बंद कर देता है, वह क्षमा नहीं कर रहा, वह ख़ुद को असुरक्षित कर रहा है।
दूसरी भ्रांति: क्षमा एक भावना है, जो अपने आप आनी चाहिए। यहीं हमारा बहीखाते वाला दृष्टिकोण राहत देता है। मरकुस 11:25 कहता है, "और जब कभी तुम खड़े होकर प्रार्थना करते हो, तो यदि किसी से तुम्हारा कुछ विरोध हो, तो क्षमा करो: कि तुम्हारा पिता भी, जो स्वर्ग में है, तुम्हारे अपराध क्षमा करे।" यह एक आज्ञा है, प्रार्थना के बीच में दी गई एक क्रिया। यीशु आपसे यह नहीं पूछते कि आपका मन तैयार है या नहीं; वे कहते हैं कि लेखे से नाम काट दो। भावनाएँ अक्सर बहुत बाद में, कभी-कभी महीनों बाद, उस निर्णय के पीछे चलकर आती हैं। पहले निर्णय, फिर उपचार।
तीसरी भ्रांति: क्षमा करने का मतलब है कि रिश्ता वैसा ही चलता रहे। बाइबल क्षमा और मेल-मिलाप में अंतर करती है। क्षमा एकतरफ़ा है, इसे आप अकेले कर सकते हैं। मेल-मिलाप दोतरफ़ा है, इसके लिए पश्चाताप, सच्चाई और बदले हुए व्यवहार की ज़रूरत होती है। यीशु ने मत्ती 18 में क्षमा सिखाने से पहले उसी अध्याय में यह भी सिखाया कि पाप करने वाले भाई का सामना कैसे किया जाए, और कभी-कभी वह प्रक्रिया दूरी पर ख़त्म होती है। कर्ज़ माफ़ करने का मतलब यह नहीं है कि आप उसी व्यक्ति को दोबारा तिजोरी की चाबी दे दें।
चौथी भ्रांति: क्षमा का मतलब है कि न्याय की माँग छोड़ देना। रोमियों 12:19 कहता है, "हे प्रियों, अपना पलटा न लेना; परन्तु क्रोध को परमेश्वर पर छोड़ दो, क्योंकि लिखा है, कि पलटा लेना मेरा काम है, मैं ही बदला दूंगा; प्रभु यह कहता है।" ध्यान दीजिए, यह न्याय को रद्द नहीं करता, इसे स्थानांतरित करता है। आप बदला लेना छोड़ते हैं क्योंकि आप न्यायी को भरोसे में लेते हैं। इसलिए एक स्त्री अपने पति को क्षमा कर सकती है और फिर भी पुलिस बुला सकती है। एक मंडली किसी सेवक को क्षमा कर सकती है और फिर भी उसे पद से हटा सकती है। क्षमा दंड की अनुपस्थिति नहीं, व्यक्तिगत प्रतिशोध की मृत्यु है।
आज इसे जीवन में उतारना
व्यावहारिक रूप से क्षमा की शुरुआत हिसाब को नाम देने से होती है। जब तक आप ठीक-ठीक नहीं जानते कि किसने आपका क्या "बकाया" है, आप उसे माफ़ नहीं कर सकते, केवल दबा सकते हैं। इसलिए कागज़ लीजिए और परमेश्वर के सामने ईमानदारी से लिखिए: उसने मेरा भरोसा तोड़ा, मेरे साल चुराए, मेरी बेटी के सामने मेरा अपमान किया, मेरे पैसे लौटाए नहीं, मेरे शरीर पर हाथ उठाया। भजन संहिता के लेखक अपनी पीड़ा को सजाते नहीं थे। परमेश्वर को गोल-मोल शिकायतें नहीं चाहिए, सच्ची शिकायतें चाहिए।
फिर वह निर्णय आता है जो सबसे कठिन है और सबसे मुक्त करने वाला। परमेश्वर के सामने प्रार्थना में कहिए कि मैं इस कर्ज़ की वसूली छोड़ता हूँ। मैं उससे वह माफ़ी नहीं वसूलूँगा जो उसने कभी नहीं माँगी। मैं उसे मन में सज़ा देना, बातचीत में उसे नीचा दिखाना, और उसके बुरे दिनों में चुपचाप ख़ुश होना छोड़ता हूँ। इफिसियों 4:32 और कुलुस्सियों 3:13 दोनों इसी अभ्यास की तरफ़ इशारा करते हैं, और दोनों में एक ही ईंधन है: जैसे प्रभु ने तुम्हें क्षमा किया।
अब बहुत ठोस स्थितियाँ। दफ़्तर में जिस सहकर्मी ने आपका श्रेय ले लिया, उसके साथ आपको दोस्ती नहीं करनी है, पर उसके ईमेल का जवाब बदले की भाषा में देना बंद करना है। परिवार में, जिस चाचा ने संपत्ति में धोखा किया, उसके लिए प्रार्थना कीजिए, नाम लेकर, तीस दिन। यह आपके भीतर की ज़मीन को नरम करता है। शादी में, जहाँ रोज़ छोटी चोटें लगती हैं, वहाँ नियम बनाइए कि सूरज डूबने से पहले हिसाब बंद होगा, क्योंकि जोड़े छोटे-छोटे बिलों के ढेर से टूटते हैं, एक बड़े धमाके से नहीं।
अगर आपकी चोट गहरी और पुरानी है, तो यह जान लीजिए कि क्षमा एक बार का समारोह नहीं, बार-बार दोहराया जाने वाला निर्णय है। जब पुरानी यादें रात दो बजे लौटें, तो अपने आप से कहिए: यह कर्ज़ मैंने माफ़ कर दिया है, मैं इसे दोबारा वसूलने नहीं जा रहा। यह सात के सत्तर गुने का असली अर्थ है, कभी-कभी एक ही व्यक्ति के लिए, एक ही घाव के लिए। और जहाँ आप ही अपराधी हैं, वहाँ देर न कीजिए। 1 यूहन्ना 1:9 का दरवाज़ा आज भी खुला है, और जिस व्यक्ति को आपने चोट पहुँचाई है, उसके पास बहाने के बिना जाना, मसीही परिपक्वता के सबसे सुंदर चिह्नों में से एक है।
दर्पण
आप जानते हैं कि यह पन्ना किसके बारे में है। जब आपने शीर्षक पढ़ा, तभी एक चेहरा आपके मन में आया, और आपने उसे तुरंत धकेल दिया। मैं आपसे यह नहीं कहूँगा कि आपकी चोट छोटी है। मैं आपसे यह पूछूँगा कि उस चोट को अपने साथ ढोने की क़ीमत आप कब तक चुकाएँगे।
देखिए यह कहाँ-कहाँ रिस रहा है। आप अपने जीवनसाथी पर उस ग़ुस्से से चिल्लाते हैं जो सच में अपने पिता के लिए है। आप उस मंडली में नहीं जाते जहाँ वह व्यक्ति बैठता है, और इस तरह आपने अपने चोट पहुँचाने वाले को यह अधिकार दे दिया है कि वह तय करे आप कहाँ आराधना करेंगे। आपकी नींद उड़ी हुई है, आपका पेट ख़राब है, आपकी कल्पना में वे भाषण चलते रहते हैं जो आप कभी नहीं देंगे। यह कड़वाहट पैसे की तरह है जो आप उधार देकर भूल गए, और ब्याज आप ख़ुद चुका रहे हैं।
अब कठिन प्रश्न। जब आप मत्ती 6:14 पढ़ते हैं, "इसलिये यदि तुम मनुष्यों के अपराध क्षमा करोगे, तो तुम्हारा स्वर्गीय पिता भी तुम्हें क्षमा करेगा," तो आपके भीतर क्या हिलता है? यीशु यहाँ धमकी नहीं दे रहे, वे निदान कर रहे हैं। जिसने वास्तव में यह समझा है कि उसका दस हज़ार तोड़े का कर्ज़ रद्द हुआ है, वह किसी का गला पकड़कर सौ दीनार नहीं वसूलता। अगर आपके हाथ किसी के गले पर हैं, तो सवाल यह नहीं है कि वह कितना दोषी है। सवाल यह है कि क्या आपको अपनी क्षमा का आकार याद है।
आपकी माफ़ी की क्षमता, आपको मिली माफ़ी के बराबर है।
तो आज, इस पन्ने को बंद करने से पहले, एक नाम लीजिए। एक। और परमेश्वर के सामने ज़ोर से कहिए कि मैं इस कर्ज़ को छोड़ता हूँ। आपकी आवाज़ काँप सकती है। कोई बात नहीं। काँपती आवाज़ में दिया गया निर्णय भी निर्णय है।
बच्चों के लिए समझाया गया
बच्चों को क्षमा समझाने के लिए बड़े शब्द नहीं चाहिए, एक तस्वीर चाहिए। सबसे अच्छी तस्वीर वही है जो यीशु ने दी: उधार का हिसाब। आप एक कागज़ पर लिख सकते हैं कि "तुमने मेरा खिलौना तोड़ा", "तुमने मुझे धक्का दिया", और फिर बच्चे के हाथ में वह कागज़ देकर उसे फाड़ने या मिटाने दीजिए। बच्चा अपनी उँगलियों से महसूस करता है कि क्षमा का मतलब है हिसाब मिटा देना, फिर उसे बार-बार निकालकर सामने न रखना। साथ में यह भी कहिए कि परमेश्वर ने हमारे साथ यही किया, और यीशु मसीह ने वह कीमत ख़ुद चुकाई।
बच्चों के साथ ईमानदार रहना ज़रूरी है। उन्हें यह न सिखाइए कि क्षमा का मतलब है चुप रहना या यह कहना कि "कुछ नहीं हुआ"। उन्हें सिखाइए कि वे सच बोल सकते हैं, दुख बता सकते हैं, माता-पिता को बता सकते हैं, और फिर भी दिल से क्षमा कर सकते हैं। यह अंतर बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा है, और इसे बचपन में सीखना उन्हें जीवन भर बचाता है।
हर उम्र के लिए भाषा अलग होनी चाहिए। बहुत छोटे बच्चों (तीन से छह वर्ष) के लिए कहानी और तस्वीर काम करती है। स्कूल जाने वाले बच्चों (सात से बारह वर्ष) के लिए मत्ती 18 का दृष्टांत और अपने दोस्तों के झगड़ों से जुड़े उदाहरण असरदार होते हैं। किशोरों (बारह वर्ष से ऊपर) के लिए ज़्यादा गहरे सवाल उठते हैं: क्या मुझे उसे माफ़ करना है जिसने मुझे ऑनलाइन बदनाम किया, क्या माफ़ी का मतलब दोस्ती है, क्या मैं ख़ुद को माफ़ कर सकता हूँ। इन तीनों आयु-वर्गों के लिए अलग-अलग तैयार व्याख्याएँ हमारे यहाँ उपलब्ध हैं, ताकि आप अपने बच्चे की उम्र के अनुसार सही शब्द चुन सकें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बाइबल में क्षमा का असली अर्थ क्या है?
बाइबल में क्षमा का मूल अर्थ है किसी के नाम पर लिखा कर्ज़ रद्द कर देना और उसे वसूलने का अधिकार छोड़ देना। इब्रानी में इसे बोझ उठा लेना कहा गया है और यूनानी में जाने देना। इसका मतलब यह नहीं है कि जो हुआ वह ठीक था, बल्कि यह कि अपराधी से बदला लेने का हक़ आप परमेश्वर के हाथ में सौंप देते हैं। भजन संहिता 103:12 इसे सबसे साफ़ चित्र देता है, जहाँ परमेश्वर हमारे अपराधों को पूर्व और पश्चिम की दूरी जितना दूर कर देते हैं।
क्या क्षमा करने के लिए भूल जाना ज़रूरी है?
नहीं। बाइबल कहीं यह आज्ञा नहीं देती कि आप अपनी स्मृति मिटा दें। जब परमेश्वर कहते हैं कि वे हमारे पापों को स्मरण नहीं करेंगे, तो इसका अर्थ है कि वे उन्हें हमारे विरुद्ध इस्तेमाल नहीं करेंगे, न कि उनकी जानकारी ख़त्म हो गई। आप ठीक-ठीक याद रख सकते हैं कि क्या हुआ, उससे सीख भी सकते हैं, समझदारी से सीमाएँ भी बना सकते हैं, और फिर भी सच्चे मन से क्षमा कर सकते हैं। भूलने की कोशिश में सच्चाई दबाना क्षमा नहीं, इनकार है।
अगर सामने वाला माफ़ी न मांगे तो क्या मैं फिर भी क्षमा कर सकता हूँ?
हाँ, और यही सबसे मसीह-जैसा क्षण होता है। यीशु मसीह ने क्रूस पर उन लोगों के लिए क्षमा माँगी जो उस समय पछता भी नहीं रहे थे, और स्तिफनुस ने पत्थर मारने वालों के लिए वही प्रार्थना की। मरकुस 11:25 में शर्त सामने वाले के पश्चाताप पर नहीं, आपकी प्रार्थना पर रखी गई है। ध्यान रखें, बिना पश्चाताप के रिश्ता पूरी तरह बहाल नहीं हो सकता, पर आपके हृदय में कड़वाहट का कर्ज़ रद्द होना उसी क्षण संभव है।
मत्ती 18:22 में "सात बार के सत्तर गुने" का क्या मतलब है?
यह कोई गणित का लक्ष्य नहीं है, बल्कि गिनती छोड़ने का आदेश है। पतरस ने सात बार का प्रस्ताव रखा था, जो उस समय की परंपरा से दुगुना उदार था, और यीशु ने उसका पैमाना ही उलट दिया। जो व्यक्ति क्षमा की संख्या गिन रहा है, वह असल में बहीखाता बंद नहीं कर रहा, बस उसे मुल्तवी कर रहा है। इस वाक्य के पीछे उत्पत्ति 4 में लेमेक के बदले के गीत की गूँज भी सुनाई देती है; मसीह के राज्य में बदले की जगह असीम माफ़ी ने ले ली है।
क्या मत्ती 6:14 का मतलब है कि मेरा उद्धार मेरे क्षमा करने पर निर्भर है?
उद्धार केवल अनुग्रह से, विश्वास के द्वारा मिलता है, और यह मसीह के कार्य पर टिका है, हमारे प्रदर्शन पर नहीं। मत्ती 6:14 शर्त नहीं, लक्षण बताता है। जो व्यक्ति परमेश्वर की क्षमा की गहराई को सच में समझ चुका है, उसके भीतर दूसरों को क्षमा करने की क्षमता जन्म लेती है। इसलिए लगातार, जानबूझकर, कड़ा हृदय एक चेतावनी है कि हमने अनुग्रह को केवल जानकारी के रूप में लिया है, अनुभव के रूप में नहीं। यह डराने के लिए नहीं, जाँचने के लिए लिखा गया है।
क्षमा और मेल-मिलाप में क्या अंतर है?
क्षमा वह निर्णय है जो आप अकेले, आज, परमेश्वर के सामने ले सकते हैं। मेल-मिलाप दो लोगों का काम है और उसके लिए सच्चाई का स्वीकार, पश्चाताप और समय के साथ बदला हुआ व्यवहार चाहिए। कुलुस्सियों 3:13 आपको क्षमा करने को कहता है, पर बाइबल कहीं यह वादा नहीं करती कि हर रिश्ता पहले जैसा हो जाएगा। कभी-कभी सबसे बुद्धिमान रास्ता है कि आप हृदय में कर्ज़ माफ़ करें और सुरक्षित दूरी बनाए रखें, विशेष रूप से जहाँ हिंसा या शोषण रहा है।
क्या मुझे उस व्यक्ति के पास वापस लौटना चाहिए जो बार-बार चोट पहुँचाता है?
क्षमा का अर्थ स्वयं को दोबारा नुक़सान के लिए सौंप देना नहीं है। यीशु ने अपने शिष्यों को साँपों जैसा बुद्धिमान होने को कहा, और उन्होंने ख़ुद भी कई बार उन जगहों से हट जाना चुना जहाँ लोग उन्हें मारना चाहते थे। जहाँ शारीरिक, यौन या भावनात्मक शोषण हो, वहाँ सीमाएँ बनाना, ज़िम्मेदार लोगों को बताना और आवश्यक होने पर कानूनी सहायता लेना पाप नहीं, विवेक है। हृदय में कर्ज़ रद्द कीजिए, पर तिजोरी की चाबी सोच-समझकर दीजिए।
मैं ख़ुद को कैसे क्षमा करूँ?
बाइबल "ख़ुद को क्षमा करने" की भाषा इस्तेमाल नहीं करती, क्योंकि आपके पाप का सबसे बड़ा लेनदार आप नहीं, परमेश्वर हैं। इसलिए असली प्रश्न यह है कि क्या आप उस क्षमा को स्वीकार करेंगे जो वे देते हैं। 1 यूहन्ना 1:9 कहता है कि वे क्षमा करने में विश्वासयोग्य और धर्मी हैं, यानी यह उनके चरित्र और मसीह के चुकाए दाम पर टिका है, आपकी भावनाओं पर नहीं। जब पुराना अपराध लौटकर आपको कोसे, तो अपने आप से यह कहिए कि वह हिसाब क्रूस पर बंद हो चुका है।
क्या परमेश्वर हर पाप क्षमा करते हैं, या कोई अक्षम्य पाप है?
मसीह का लहू हर तरह के पाप के लिए पर्याप्त है, चाहे वह हत्या हो, विश्वासघात हो, व्यभिचार हो या धर्म के नाम पर की गई हिंसा; पौलुस स्वयं मंडली को सताने वाला था। यीशु ने पवित्र आत्मा की निंदा को क्षमा न होने वाला पाप कहा, और यह किसी एक कड़वे वाक्य की बात नहीं, बल्कि उस जानबूझकर, अंत तक जारी रहने वाले इनकार की बात है जिसमें व्यक्ति आत्मा की गवाही को ठुकराता रहता है। जो व्यक्ति चिंतित होकर यह प्रश्न पूछ रहा है, उसका चिंतित होना ही संकेत है कि उसका हृदय अभी कठोर नहीं हुआ।
मैंने क्षमा कर दिया, फिर भी ग़ुस्सा वापस क्यों आता है?
क्योंकि क्षमा एक निर्णय है और उपचार एक प्रक्रिया। घाव भरने में समय लगता है, और यादें शरीर में बसती हैं, केवल विचारों में नहीं। ग़ुस्से की लहर लौटने का मतलब यह नहीं है कि आपकी क्षमा झूठी थी; इसका मतलब है कि आपको उस निर्णय पर फिर से खड़ा होना है। हर बार जब वह भावना उठे, परमेश्वर के सामने कहिए कि यह कर्ज़ मैंने माफ़ किया है और मैं उसे वापस नहीं वसूलूँगा। यही "सात बार के सत्तर गुने" का रोज़मर्रा का रूप है।
न्याय की माँग करना या कानूनी कार्रवाई करना क्या क्षमा के विरुद्ध है?
नहीं। रोमियों 12:19 व्यक्तिगत बदले को मना करता है, न्याय को नहीं; बल्कि यह न्याय को परमेश्वर के हाथ में सौंपता है, और रोमियों 13 में परमेश्वर सरकार को न्याय का साधन कहते हैं। इसलिए धोखाधड़ी की रिपोर्ट करना, शोषण के मामले में पुलिस में जाना, या किसी सेवक को ज़िम्मेदारी से हटाना क्षमा का उल्लंघन नहीं है। अंतर उद्देश्य में है: आप उसे नष्ट करने के लिए नहीं, बल्कि सच्चाई, सुरक्षा और सुधार के लिए काम करते हैं।
क्षमा करने के लिए मैं कैसे प्रार्थना करूँ?
सादगी से और सच्चाई से। परमेश्वर को ठीक-ठीक बताइए कि क्या हुआ और उसने आपसे क्या छीना; भजन संहिता के लेखकों ने अपनी पीड़ा को कभी सजाया नहीं। फिर स्पष्ट शब्दों में कहिए कि आप उस कर्ज़ की वसूली छोड़ते हैं और बदला परमेश्वर पर छोड़ते हैं। इसके बाद उस व्यक्ति के लिए, नाम लेकर, भलाई की प्रार्थना कीजिए, चाहे शुरू में यह यंत्रवत लगे। अंत में परमेश्वर से माँगिए कि वे आपको अपनी दी हुई क्षमा का आकार दिखाएँ, क्योंकि वही आपके हृदय को नरम करता है।
अंत में
बाइबल में क्षमा कोई मुलायम भावना नहीं है जिसका इंतज़ार आप बैठकर करें। यह एक हस्ताक्षर है, एक फाड़ा हुआ बिल है, एक बंद खाता है। इसीलिए यीशु ने इसे सिखाने के लिए राजा और दास और दस हज़ार तोड़े की कहानी चुनी, और इसीलिए पौलुस ने क्रूस को उस लेख पर लगी कील कहा जो हमारे विरोध में लिखा था। जब आप यह समझ लेते हैं, तो क्षमा असंभव नहीं रह जाती; वह कठिन रह जाती है, पर संभव हो जाती है, क्योंकि उसका ईंधन आपके भीतर से नहीं आता, बल्कि उस अनुग्रह से आता है जो आपको पहले मिला।
आगे के मनन के लिए मत्ती 18 का पूरा अध्याय एक बैठक में पढ़िए, फिर भजन संहिता 51 और भजन संहिता 103 को साथ रखकर पढ़िए, और अंत में इफिसियों 4:32 तथा कुलुस्सियों 3:13 को याद कर लीजिए, ताकि जब चोट लगे तो वचन आपसे पहले बोले। और आज ही एक नाम चुनकर वह प्रार्थना कीजिए जिसे आप महीनों से टाल रहे हैं। जिस कर्ज़ को आप छोड़ देते हैं, वही आपको छोड़ता है।
