विषय

बाइबल में चंगाई: क्या परमेश्वर आज भी बीमारों को चंगा करता है

परिचय

अस्पताल के गलियारे में रात के दो बजे एक माँ बैठी है। बेटी अंदर वेंटिलेटर पर है। हाथ में एक छोटी बाइबल है, वही पन्ना जो आँसुओं से मुड़ चुका है: "उसके कोड़े खाने से हम चंगे हो जाएं।" कोई कहता है, "बस विश्वास कर, चंगाई हो जाएगी।" कोई कहता है, "अब ज़्यादा उम्मीद मत रखो।" और वह माँ बीच में खड़ी है, न विश्वास छोड़ पा रही, न दर्द झुठला पा रही।

यह पन्ना उसी गलियारे के लिए लिखा गया है। हम देखेंगे कि बाइबल चंगाई के बारे में असल में क्या कहती है, उत्पत्ति से प्रकाशितवाक्य तक यह धारा कैसे बहती है, क्यों यीशु मसीह ने बीमारों को छुआ, क्यों पौलुस बीमार रहे, और आज आप किस भरोसे और किस प्रार्थना के साथ जी सकते हैं। कोई झूठा आश्वासन नहीं, पर एक ठोस आशा।

इस मार्गदर्शिका का दृष्टिकोण

इस पन्ने का दृष्टिकोण एक वाक्य में यह है: बाइबल में चंगाई मंज़िल नहीं, चिह्न है। हर चंगाई परमेश्वर का हस्ताक्षर है, नई सृष्टि की पहली किरण जो अंधेरे कमरे में पड़ती है। जिस बीमार को यीशु मसीह ने छुआ, वह भी एक दिन मरा; लाजर दोबारा कब्र में गया। इसका मतलब यह नहीं कि चंगाई झूठी थी, बल्कि यह कि वह एक तीर थी जो आगे किसी बड़ी चीज़ की ओर इशारा कर रही थी: मरे हुओं का जी उठना, वह देह जो फिर कभी नहीं टूटेगी। जब हम चिह्न को मंज़िल बना देते हैं, तो चंगाई एक सौदा बन जाती है और परमेश्वर एक मशीन। जब हम चिह्न को चिह्न रहने देते हैं, तो हम प्रार्थना भी साहस से करते हैं और दुख भी सम्मान से सहते हैं।

बाइबल चंगाई के बारे में क्या कहती है?

बाइबल में चंगाई का पहला बड़ा वचन किसी अस्पताल में नहीं, रेगिस्तान में एक कड़वे कुएँ के किनारे मिलता है। मिस्र से निकले लोग मारा नामक जगह पहुँचे, पानी पीने लायक नहीं था, और वहीं परमेश्वर ने अपना एक नाम खोला। निर्गमन 15:26 कहता है: "यदि तू अपने परमेश्वर यहोवा का वचन ध्यान से सुने, और जो मेरी दृष्टि में ठीक है वही करे, और मेरी आज्ञाओं पर कान लगाए और मेरी सब विधियों को माने, तो जितने रोग मैं ने मिस्रियों पर डाले हैं उनमें से एक भी तुझ पर न डालूंगा; क्योंकि मैं तुम्हारा चंगा करनेवाला यहोवा हूं।"

ध्यान दें, यह कोई तकनीकी वादा नहीं है कि "मैं बीमारी ठीक कर देने वाला डॉक्टर हूँ।" यह एक नाम है, एक पहचान: मैं तुम्हारा चंगा करनेवाला यहोवा हूं। परमेश्वर चंगाई करते हैं क्योंकि चंगा करना उनका स्वभाव है, उनका काम-धंधा नहीं। और यह नाम एक वाचा के भीतर दिया गया है, अपने लोगों के साथ रिश्ते के भीतर। इसलिए बाइबल में चंगाई कभी जादू नहीं, हमेशा रिश्ता है।

दूसरा स्तंभ भजन संहिता 103:3 है: "वही तेरे सब अधर्म को क्षमा करता, और तेरे सब रोगों को चंगा करता है।" यह पद अक्सर आधा पढ़ा जाता है। जो लोग बीमारी को छोटी बात समझते हैं, वे पहले हिस्से पर रुक जाते हैं; जो लोग शरीर को ही सब कुछ समझते हैं, वे दूसरे हिस्से पर टूट पड़ते हैं। दाऊद दोनों को एक साँस में जोड़ते हैं। पाप और रोग, दोनों उस टूटन के फल हैं जो उत्पत्ति 3 में सृष्टि में घुस आई। और परमेश्वर दोनों के आगे झुकने वाले नहीं, दोनों पर अधिकार रखने वाले हैं। पर यहाँ भी दृष्टिकोण याद रखिए: दाऊद जानते थे कि वे भी एक दिन मरेंगे। तो "सब रोगों को चंगा करता है" एक वाचा की भाषा है, एक निश्चित भविष्य की गारंटी, जिसकी किस्तें आज भी मिलती रहती हैं।

तीसरा स्तंभ यशायाह 53:5 है, वह पद जो हर चंगाई सभा में गूँजता है: "परन्तु वह हमारे ही अपराधों के कारण घायल किया गया, वह हमारे अधर्म के कामों के हेतु कुचला गया; हमारी ही शान्ति के लिये उस पर ताड़ना पड़ी कि उसके कोड़े खाने से हम चंगे हो जाएं।" यशायाह यहाँ एक ऐसे दास की बात कर रहे हैं जो हमारी जगह घायल होता है। पद का केंद्र क्षमा है, पर यशायाह की शब्दावली शरीर से खींची गई है: घायल, कुचला, कोड़े, चंगे। परमेश्वर हमारी टूटन को अंदर और बाहर, दोनों तरफ से छूते हैं।

नए नियम में यही धारा देह धारण कर लेती है। मत्ती 8:16 में हम पढ़ते हैं: "जब सांझ हुई तो वे उसके पास बहुत से लोगों को लाए जिन में दुष्टात्माएं थीं और उसने उन आत्माओं को बात ही से निकाल दिया, और सब बीमारों को चंगा किया।" और अगले ही पद में मत्ती बताते हैं कि यह किस लिए हुआ: "उसने आप हमारी दुर्बलताओं को ले लिया और हमारी बीमारियों को उठा लिया।" यीशु मसीह की चंगाइयाँ भीड़ जुटाने का तमाशा नहीं थीं। वे उसके परिचय पत्र थे: राज्य आ गया है, राजा पहुँच गया है, और जहाँ राजा पैर रखता है वहाँ शाप पीछे हटने लगता है।

अंत में 1 पतरस 2:24 इस पूरी बात को क्रूस पर टाँक देता है: "वह आप ही हमारे पापों को अपनी देह पर लिए हुए क्रूस पर चढ़ गया, जिस से हम पापों के लिये मर कर धार्मिकता के लिये जीवित हों: उसी के मार खाने से तुम चंगे हुए।" पतरस यशायाह को उद्धृत करते हैं और उसका सबसे गहरा अर्थ खोलते हैं: पापों से चंगाई, अंतरात्मा की चंगाई, परमेश्वर के साथ रिश्ते की चंगाई। यह इनकार नहीं है कि शरीर भी चंगा होगा; यह क्रम है। पहले जड़, फिर पत्ते। पहले क्षमा, फिर वह देह जो कभी नहीं सड़ेगी।

बाइबल में चलने वाला सूत्र

चंगाई का सूत्र बाइबल के पहले पन्नों से शुरू होता है, हालाँकि वहाँ शब्द "चंगाई" नहीं है। अदन में कोई बीमारी नहीं थी क्योंकि कोई दूरी नहीं थी। जब मनुष्य ने परमेश्वर से मुँह मोड़ा, तो शरीर, मिट्टी, रिश्ते, सब में दरार पड़ गई। उसी दिन से बाइबल की कहानी एक मरीज़ की कहानी बन जाती है जो किसी वैद्य की खोज में है।

व्यवस्था में परमेश्वर स्वयं को वह वैद्य घोषित करते हैं। व्यवस्थाविवरण 32:39 में वे कहते हैं: "मैं ही मार डालता, और मैं ही जिलाता हूं; मैं ही घायल करता, और मैं ही चंगा करता हूं।" इस्राएल का परमेश्वर बीमारी से डरता नहीं, वह उससे ऊपर है। जंगल में जब साँपों ने काटा, तो चंगाई का माध्यम एक खम्भे पर लटका पीतल का साँप बना, जिसे यीशु मसीह ने बाद में अपने क्रूस का चिह्न कहा। नामान का कोढ़ यरदन के सात डुबकियों में गया, हिजकिय्याह को पन्द्रह साल और मिले, और अंजीर की टिकिया फोड़े पर रखी गई। यानी परमेश्वर चंगाई करने के लिए साधारण चीज़ों को इस्तेमाल करने में शर्माते नहीं। भविष्यद्वक्ताओं के मुँह में चंगाई राष्ट्र के लिए भी प्रार्थना बन जाती है। यिर्मयाह 17:14 पुकारता है: "हे यहोवा, मुझे चंगा कर, तब मैं चंगा हो जाऊंगा; मेरा उद्धार कर, तब मेरा उद्धार हो जाएगा; क्योंकि मैं तेरी ही स्तुति करता हूं।"

पुराने नियम का सबसे सुंदर संकेत मलाकी 4:2 में है: "पर तुम्हारे लिये जो मेरे नाम का भय मानते हो, धर्म का सूर्य उदय होगा, और उसकी किरणों से तुम चंगे हो जाओगे।" सूर्योदय। यही हमारा दृष्टिकोण है। किरणें सूरज नहीं होतीं, पर वे झूठ भी नहीं होतीं; वे सच्ची खबर होती हैं कि रात बीत चुकी है।

फिर यीशु मसीह आते हैं और किरणें फूट पड़ती हैं। मत्ती 9:35 बताता है कि वे "हर प्रकार की बीमारी और दुर्बलता को दूर करता रहा।" वे कोढ़ी को छूते हैं, जिसे छूना मना था। वे अंधे की आँखों में मिट्टी लगाते हैं। वे बैतहसदा के कुण्ड पर सैकड़ों बीमारों के बीच से एक को उठाते हैं, जो बताता है कि उनका मक़सद हर बीमारी मिटाना नहीं, बल्कि यह दिखाना था कि मिटाने वाला कौन है। और अंत में वही देह खुद घायल होती है, कुचली जाती है, कोड़े खाती है। वैद्य मरीज़ बन जाता है, ताकि मरीज़ जी सके।

पुनरुत्थान के बाद यह सूत्र कलीसिया में बहता है। प्रेरितों के काम में लंगड़ा आदमी यीशु मसीह के नाम से उठ खड़ा होता है, और साथ ही स्तिफनुस पत्थरों से मारा जाता है। पौलुस चंगाई करते हैं, पर तुफिमुस को बीमार छोड़ आते हैं, और तीमुथियुस की बार-बार होने वाली बीमारी के लिए व्यावहारिक सलाह देते हैं। यह विरोधाभास नहीं, यही तो "पहले से आ गया, पर अभी पूरा नहीं" वाला समय है।

और सूत्र प्रकाशितवाक्य में खुलकर खिलता है। जीवन के वृक्ष के "पत्तों से जाति जाति के लोग चंगे होते थे," और परमेश्वर "उनकी आंखों से सब आंसू पोंछ डालेगा; और इसके बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी।" बाइबल एक बीमार बगीचे से शुरू होकर एक चंगे शहर पर खत्म होती है।

आम भ्रांतियाँ

पहली भ्रांति: "अगर चंगाई नहीं हुई, तो विश्वास कम था।" यह बात लाखों दुखी लोगों की पीठ पर एक और बोझ रख देती है। बाइबल में विश्वास चंगाई का बटन नहीं है। यीशु मसीह ने कई बार बेहोश, बेजान, बिना माँगने वालों को चंगा किया; कब्र में पड़े लाजर के पास कोई विश्वास बचा ही नहीं था। दूसरी ओर पौलुस, जिनके हाथों से चंगाइयाँ हुईं, अपने ही काँटे के लिए तीन बार प्रार्थना करके भी वह उत्तर नहीं पाए जो वे चाहते थे। 2 कुरिन्थियों 12:9 में प्रभु उनसे कहते हैं: "मेरा अनुग्रह तेरे लिये बहुत है; क्योंकि मेरी सामर्थ्य निर्बलता में सिद्ध होती है।" अगर विश्वास की कमी से चंगाई रुकती, तो पौलुस पहला दोषी होते। सच यह है कि परमेश्वर कब चिह्न देते हैं और कब अनुग्रह, यह उनका बुद्धिमान चुनाव है, हमारी परीक्षा का नतीजा नहीं।

दूसरी भ्रांति: "क्रूस पर हर बीमारी की चंगाई खरीद ली गई, इसलिए मुझे आज ही स्वस्थ होने का हक़ है।" 1 पतरस 2:24 सच है, पर उसका समय समझना होगा। उसी क्रूस पर हमारे पापी स्वभाव की मौत भी खरीदी गई, फिर भी हम रोज़ पाप से लड़ते हैं। उसी क्रूस पर मृत्यु हार गई, फिर भी विश्वासी कब्रिस्तान में दफ़नाए जाते हैं। रोमियों 8 कहता है कि हम "देह के छुटकारे" की बाट जोह रहे हैं। जो क़ानूनी रूप से हमारा हो गया है, वह अनुभव में किस्तों में मिलता है, और आखिरी किस्त पुनरुत्थान के दिन चुकेगी। चिह्न आज मिलते हैं, पूर्णता उस दिन।

तीसरी भ्रांति: "बीमारी हमेशा पाप का दंड है।" यह अय्यूब के मित्रों का धर्मशास्त्र है, जिसे परमेश्वर ने खुद खारिज किया। यूहन्ना 9 में शिष्यों ने अंधे आदमी के बारे में यही पूछा, किसने पाप किया, और यीशु मसीह ने साफ़ मना किया। हाँ, बाइबल यह भी मानती है कि कुछ बीमारियाँ हमारे चुनावों का सीधा फल होती हैं, और कुछ मामलों में परमेश्वर अनुशासन के लिए इसका उपयोग करते हैं। पर बीमार व्यक्ति को देखकर पहला सवाल "इसने क्या पाप किया" नहीं, बल्कि "मैं इसकी सेवा कैसे करूँ" होना चाहिए।

चौथी भ्रांति: "दवा, डॉक्टर और इलाज पर भरोसा करना विश्वास की कमी है।" बाइबल में परमेश्वर सामान्य साधनों से काम करने में कोई हिचक नहीं दिखाते। यशायाह ने राजा के फोड़े पर अंजीर रखने को कहा, लूका खुद "प्रिय वैद्य" कहलाए, पौलुस ने तीमुथियुस को पेट की बीमारी के लिए व्यावहारिक सलाह दी, और भले सामरी ने घायल आदमी के घावों पर तेल और दाखरस डाला। जो परमेश्वर रोटी देते हैं, वे किसान और चक्की से इनकार नहीं करते। दवा लेना प्रार्थना का विरोध नहीं, प्रार्थना का उत्तर हो सकती है।

आज इसे जीवन में उतारना

तो व्यावहारिक रूप से क्या करें, जब रिपोर्ट हाथ में हो और घुटने काँप रहे हों?

पहला, माँगिए। साफ़, सीधा, बेझिझक। याकूब 5:14 कलीसिया को एक ठोस निर्देश देता है: "यदि तुम में कोई रोगी हो, तो कलीसिया के प्राचीनों को बुलाए, और वे प्रभु के नाम से उस पर तेल मलकर उसके लिये प्रार्थना करें।" ध्यान दीजिए, यहाँ कोई विशेष चमत्कारी सेवक नहीं बुलाया जा रहा; कलीसिया के अपने अगुवे बुलाए जा रहे हैं। तेल कोई जादुई पदार्थ नहीं, बल्कि एक दृश्य चिह्न है कि यह व्यक्ति परमेश्वर के हाथों में सौंपा जा रहा है। और यह पहल बीमार की है: "बुलाए।" कई बार हमारी सबसे बड़ी गलती चुपचाप अकेले सहना है। अपने विश्वासी समुदाय को अपने कमरे में आने दें।

दूसरा, नाम पुकारिए, फ़ॉर्मूला नहीं। निर्गमन 15:26 का परमेश्वर आज भी वही हैं, "मैं तुम्हारा चंगा करनेवाला यहोवा हूं।" प्रार्थना में शब्दों का सही संयोजन खोजने की ज़रूरत नहीं; उस व्यक्ति को पुकारने की ज़रूरत है जो सुनते हैं। और यीशु मसीह की तरह प्रार्थना कीजिए, जिन्होंने गतसमनी में साफ़ माँगा कि कटोरा हट जाए, और साथ ही कहा कि आपकी इच्छा पूरी हो। यह दोहरी प्रार्थना कमज़ोरी नहीं, परिपक्वता है।

तीसरा, डॉक्टर के पास जाइए और वहाँ भी परमेश्वर को देखिए। इलाज कराते हुए धन्यवाद देना सीखिए। नर्स के हाथ, दवाइयों का शोध, अस्पताल तक पहुँचाने वाला पड़ोसी, यह सब भी उसी वैद्य का इंतज़ाम है।

चौथा, अगर चंगाई नहीं मिलती, तो 2 कुरिन्थियों 12:9 में जाकर बैठ जाइए। पौलुस ने अपनी निर्बलता का जश्न नहीं मनाया, पर उन्होंने पाया कि उस काँटे के साथ मसीह और भी नज़दीक थे। कई विश्वासी गवाही देते हैं कि उन्होंने अपनी सबसे कमज़ोर हालत में परमेश्वर को सबसे साफ़ देखा। यह बीमारी की तारीफ़ नहीं, अनुग्रह की गवाही है।

पाँचवाँ, चंगाई के साधन बनिए। भजन संहिता 103:3 का परमेश्वर घावों को छूने वाले परमेश्वर हैं, और उनकी कलीसिया को उन्होंने हाथ, समय और थैली दी है। किसी बीमार पड़ोसी के लिए खाना बना देना, अस्पताल का बिल चुपचाप भर देना, अकेले बुज़ुर्ग के साथ आधा घंटा बैठना, यह छोटी-छोटी किरणें हैं उसी सूर्योदय की।

दर्पण

अब सीधे आपसे। आपके भीतर कहीं एक हिसाब चल रहा है, है न? आपने मन ही मन तय कर लिया है कि अगर परमेश्वर सच में भले हैं, तो उन्हें यह रिपोर्ट बदल देनी चाहिए। और चूँकि वह नहीं बदली, आपने प्रार्थना धीरे-धीरे कम कर दी है। बाहर से आप कलीसिया जाते हैं, स्तुति में हाथ भी उठाते हैं, पर भीतर एक दरवाज़ा बंद कर दिया गया है, जिस पर लिखा है "इस विषय में अब कोई उम्मीद नहीं।"

मैं आपसे वह झूठा वादा नहीं करूँगा कि अगले हफ़्ते सब ठीक हो जाएगा। पर मैं आपसे यह पूछूँगा: क्या आपने परमेश्वर से चंगाई माँगना छोड़ दिया है क्योंकि आपको उन पर भरोसा नहीं, या क्योंकि आप और निराशा नहीं झेल सकते? यह फ़र्क़ मायने रखता है। दूसरे हाल में परमेश्वर आपसे नाराज़ नहीं हैं; वे आपके थके हुए दिल के इतने करीब हैं जितना आप सोच भी नहीं सकते।

और एक और बात। कहीं ऐसा नहीं कि आपने शरीर की चंगाई पर इतना ध्यान लगा दिया कि उस चंगाई को नज़रअंदाज़ कर दिया जो आपको सबसे ज़्यादा चाहिए? वह कड़वाहट जो आपने अपने भाई के लिए दस साल से पाल रखी है। वह लत जिसे आप "थोड़ी सी आदत" कहते हैं। वह पैसे का डर जो आपको रात में जगाए रखता है। वह घाव जो पिता के शब्दों ने बचपन में बनाया और जो आज आपके अपने बच्चों पर उतर रहा है। परमेश्वर आपके शरीर से बेपरवाह नहीं हैं, पर वे आपके शरीर से आगे भी देखते हैं।

आज रात, बिना सुंदर शब्दों के, यह कह देना काफ़ी है: "प्रभु, मुझे चंगा कीजिए, जहाँ से आप चाहें शुरू कीजिए।" यह प्रार्थना छोटी है, पर कायर नहीं।

बच्चों के लिए समझाया गया

बच्चे बीमारी को बड़ों से ज़्यादा गहराई से महसूस करते हैं, बस उसे शब्दों में नहीं बाँध पाते। जब घर में कोई दादी अस्पताल में हो, या कोई दोस्त गंभीर बीमार हो, तो बच्चा दो सवाल भीतर लिए घूमता है: क्या यह मेरी गलती से हुआ, और क्या यीशु मसीह सुन रहे हैं?

सबसे साधारण तरीका यह है कि उन्हें यह बताया जाए कि यीशु मसीह जब इस धरती पर थे, तो वे बीमार लोगों से दूर नहीं भागे, बल्कि उनके पास गए और उन्हें छुआ। बच्चों को यह चित्र दें: परमेश्वर बीमारी से नहीं डरते, और वे बीमार बच्चों से मुँह नहीं मोड़ते। साथ ही ईमानदारी ज़रूरी है। बच्चे झूठे वादे बहुत जल्दी पकड़ लेते हैं, इसलिए यह न कहें कि "अगर तुम प्रार्थना करोगे तो दादी ज़रूर ठीक हो जाएँगी।" इसकी जगह कहें कि हम माँग सकते हैं, और परमेश्वर सुनते हैं, और वे सबसे भला ही करते हैं, और एक दिन वे हमारे सब आँसू पोंछ देंगे और किसी को दर्द नहीं होगा। बच्चों के लिए यह अंतिम वादा बहुत बड़ी शांति लाता है।

प्रार्थना भी उन्हें सिखाएँ, छोटी और सच्ची: "प्रभु यीशु, आप दादी को छू दीजिए।" उन्हें बीमार व्यक्ति के लिए कार्ड बनाने या फल भेजने में शामिल करें, ताकि वे सीखें कि प्रार्थना और सेवा साथ चलती हैं।

हमारे पास इस विषय पर उम्र के अनुसार अलग समझाइशें उपलब्ध हैं: छोटे बच्चों के लिए (तीन से छह साल), प्राथमिक कक्षा के बच्चों के लिए (सात से बारह साल), और किशोरों के लिए (बारह साल और ऊपर), जिनमें सवाल, कहानी और प्रार्थनाएँ उनकी समझ के स्तर पर दी गई हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या परमेश्वर आज भी बीमारों को चंगा करते हैं?

हाँ। बाइबल कहीं यह नहीं कहती कि परमेश्वर ने चंगा करना बंद कर दिया। जो निर्गमन 15:26 में कहते हैं "मैं तुम्हारा चंगा करनेवाला यहोवा हूं," वे बदले नहीं हैं, और याकूब 5:14 का निर्देश आज भी कलीसिया के लिए खुला है। पर बाइबल यह भी नहीं कहती कि वे हर बार, हर व्यक्ति को, तुरंत चंगा करेंगे। चंगाई परमेश्वर का हस्ताक्षर है, हमारा अधिकार नहीं। इसलिए हम साहस से माँगते हैं और उत्तर उनके हाथ में छोड़ते हैं, यह जानकर कि उनकी अंतिम योजना में हमारी देह पूरी तरह नई होगी।

यशायाह 53:5 में "उसके कोड़े खाने से हम चंगे हो जाएं" का क्या अर्थ है?

यह पद उस दास की बात करता है जो हमारी जगह घायल हुआ। यशायाह की भाषा शरीर से ली गई है, पर पद का केंद्र हमारे अपराध और अधर्म हैं, इसलिए मुख्य अर्थ पाप से चंगाई और परमेश्वर के साथ मेल है, जैसा 1 पतरस 2:24 इसे खोलता है। इसका मतलब यह नहीं कि शरीर बाहर रह गया; मत्ती 8:17 इसी भविष्यवाणी को यीशु मसीह की चंगाइयों में पूरा होते देखता है। पूरा फल पुनरुत्थान में मिलेगा, जब वह देह मिलेगी जो फिर कभी बीमार नहीं होगी।

अगर मेरी चंगाई नहीं हुई, तो क्या मेरे विश्वास में कमी है?

यह निष्कर्ष बाइबल से नहीं आता, और यह दुखी लोगों पर बहुत क्रूर बोझ डालता है। पौलुस ने अपने काँटे के लिए तीन बार प्रार्थना की और 2 कुरिन्थियों 12:9 में उत्तर मिला "मेरा अनुग्रह तेरे लिये बहुत है," फिर भी काँटा रहा। यीशु मसीह ने कई बार उन्हें चंगा किया जिनके पास माँगने की ताक़त भी नहीं थी। विश्वास परमेश्वर पर भरोसा है, चंगाई निकालने का यंत्र नहीं। अगर आप बीमार हैं, तो पहले खुद पर इलज़ाम लगाने की जगह उनकी उपस्थिति में शांति से बैठना सीखिए।

क्या बीमारी पाप का दंड है?

कभी-कभी बीमारी हमारे चुनावों का सीधा नतीजा होती है, और बाइबल में कुछ जगह परमेश्वर ने अनुशासन के लिए भी इसका उपयोग किया। पर बीमारी को हमेशा पाप का दंड मान लेना अय्यूब के मित्रों की गलती है, जिसे परमेश्वर ने खुद गलत ठहराया। यूहन्ना 9 में शिष्यों के इसी सवाल पर यीशु मसीह ने साफ़ कहा कि यह उस व्यक्ति या उसके माता-पिता के पाप का फल नहीं था। इस टूटी सृष्टि में बीमारी सबको छूती है, धर्मी को भी। बीमार के सामने हमारा काम जज बनना नहीं, सेवा करना है।

डॉक्टर के पास जाना और दवा लेना क्या विश्वास की कमी है?

नहीं। यशायाह ने राजा हिजकिय्याह के फोड़े पर अंजीर की टिकिया रखने को कहा, लूका खुद वैद्य थे और पौलुस ने उन्हें "प्रिय वैद्य" कहा, और पौलुस ने तीमुथियुस की बार-बार होने वाली बीमारी के लिए व्यावहारिक सलाह दी। भले सामरी ने घावों पर तेल और दाखरस डाला, और यीशु मसीह ने उसे मिसाल बताया। परमेश्वर साधारण साधनों से काम करने में शर्माते नहीं। असली सवाल यह है कि आपका भरोसा दवा पर है या दवा देने वाले पर, और इलाज कराते हुए भी आप प्रार्थना छोड़ते नहीं।

याकूब 5:14 में तेल मलने का क्या मतलब है?

याकूब 5:14 कहता है कि रोगी कलीसिया के प्राचीनों को बुलाए और वे प्रभु के नाम से उस पर तेल मलकर प्रार्थना करें। बाइबल के ज़माने में तेल दोनों काम करता था, दवा का भी और समर्पण के चिह्न का भी। तेल में कोई शक्ति नहीं होती; शक्ति उस नाम में है जिसमें प्रार्थना की जाती है। यह एक दृश्य निशानी है कि यह व्यक्ति परमेश्वर के हाथों में सौंपा जा रहा है और अकेला नहीं छोड़ा गया। ध्यान देने वाली बात यह भी है कि पहल बीमार की है, वह अपने अगुवों को बुलाए।

चंगाई का वरदान क्या आज भी कलीसिया में है?

1 कुरिन्थियों 12 में पवित्र आत्मा के वरदानों की सूची में "चंगा करने के वरदान" शामिल हैं, और बाइबल कहीं इनकी समाप्ति की तारीख़ नहीं देती। दुनिया भर से आज भी विश्वसनीय गवाहियाँ आती हैं जहाँ प्रार्थना के बाद परमेश्वर ने स्पष्ट हस्तक्षेप किया। साथ ही सतर्क रहना ज़रूरी है, क्योंकि इस क्षेत्र में सबसे ज़्यादा शोषण भी होता है। सच्ची सेवा यीशु मसीह को बड़ा करती है, पैसा नहीं माँगती, झूठी गारंटी नहीं देती, और जो चंगे नहीं हुए उन्हें दोषी ठहराकर छोड़ नहीं देती।

बीमारी के लिए प्रार्थना कैसे करूँ?

सीधे और सच्चे शब्दों में। परमेश्वर को उनके नाम से पुकारिए, जैसे भजन संहिता 103:3 आपको सिखाता है कि वे क्षमा करने वाले और चंगा करने वाले हैं। जो चाहते हैं वह साफ़ माँगिए, बिना यह डर के कि माँगना बेअदबी है। और गतसमनी की तरह इसे जोड़िए कि उनकी इच्छा पूरी हो। अकेले न लड़िए; अपने विश्वासी समुदाय और कलीसिया के अगुवों को बुलाइए। और उत्तर आने तक रोज़ छोटी-छोटी बातों के लिए धन्यवाद देना जारी रखिए, क्योंकि धन्यवाद दिल को कड़वाहट से बचाता है।

क्या हर बीमारी के पीछे दुष्टात्मा होती है?

नहीं। सुसमाचारों में मत्ती 8:16 जैसे पदों में दुष्टात्माओं का निकाला जाना और बीमारों का चंगा किया जाना अलग-अलग बताया गया है, यानी बाइबल हर बीमारी को आत्मिक हमला नहीं कहती। कुछ मामले सचमुच आत्मिक थे, पर बुखार, कोढ़, अंधापन और लकवा को सुसमाचार साधारण बीमारी के रूप में ही पेश करते हैं। हर लक्षण के पीछे शत्रु खोजने से डर बढ़ता है और इलाज टलता है। समझदारी इसमें है कि हम प्रार्थना करें, सही इलाज कराएँ, और आत्मिक विवेक के लिए परिपक्व अगुवों की मदद लें।

पौलुस के "शरीर में काँटे" का क्या मतलब था और परमेश्वर ने उसे क्यों नहीं हटाया?

बाइबल यह नहीं बताती कि वह काँटा ठीक क्या था; कुछ लोग आँखों की तकलीफ़ सोचते हैं, कुछ लगातार विरोध। जो साफ़ है वह उत्तर है। 2 कुरिन्थियों 12:9 में प्रभु कहते हैं: "मेरा अनुग्रह तेरे लिये बहुत है; क्योंकि मेरी सामर्थ्य निर्बलता में सिद्ध होती है।" परमेश्वर ने काँटा हटाने की जगह पौलुस को अपनी उपस्थिति दी, और पौलुस ने पाया कि यही ज़्यादा कीमती था। यह हमें सिखाता है कि "नहीं" कहने वाला परमेश्वर भी प्रेम करने वाला परमेश्वर है, और कमज़ोरी उनकी सामर्थ्य के लिए बंद दरवाज़ा नहीं।

मानसिक बीमारी और मन के घावों के बारे में बाइबल क्या कहती है?

बाइबल इंसान को टुकड़ों में नहीं देखती। भजनकार अपनी हड्डियों के गलने और आत्मा के थकने की बात एक साथ करता है, एलिय्याह गहरी निराशा में मरने की इच्छा करता है और परमेश्वर उसे डाँटने की जगह खाना और नींद देते हैं, और भजन संहिता 147 कहता है कि वे खेदित मन वालों को चंगा करते हैं। इसलिए अवसाद, चिंता या आघात को "विश्वास की कमी" कहकर टालना बाइबल के अनुसार नहीं है। प्रार्थना, वचन, समुदाय, नींद, दवा और सही परामर्श, ये सब परमेश्वर के दिए साधन हो सकते हैं।

क्या चंगाई के लिए मन्नत, चढ़ावा या किसी खास सेवक की ज़रूरत है?

नहीं। बाइबल में चंगाई कभी सौदे की तरह पेश नहीं होती। यीशु मसीह ने किसी बीमार से शुल्क नहीं लिया, और पतरस ने प्रेरितों के काम 3 में कहा कि उनके पास सोना-चाँदी नहीं, पर यीशु मसीह के नाम में जो है वही वे देते हैं। जब कोई सेवक चंगाई के बदले पैसा, मन्नत या विशेष बलिदान माँगता है, तो यह सुसमाचार नहीं बल्कि उसका उलटा है। याकूब 5:14 आपको अपनी ही कलीसिया के प्राचीनों की ओर भेजता है, किसी दूर के चमत्कारी नाम की ओर नहीं।

अंत में

चंगाई का सवाल आखिर में एक ही सवाल पर आ टिकता है: क्या मैं उस परमेश्वर पर भरोसा कर सकता हूँ जो चंगा कर सकते हैं, पर हमेशा वैसा नहीं करते जैसा मैं चाहता हूँ? बाइबल का उत्तर एक तर्क नहीं, एक व्यक्ति है। वह वैद्य जो खुद घायल हुआ। यशायाह 53:5 का वह दास जो कुचला गया, ताकि हमारी सबसे गहरी बीमारी, परमेश्वर से हमारा अलगाव, जड़ से ठीक हो जाए। इसलिए हर चंगाई, चाहे किसी अस्पताल के बिस्तर पर हुई हो या किसी छोटी प्रार्थना सभा में, उस सुबह की एक किरण है जो अब रुक नहीं सकती।

तो माँगते रहिए। प्राचीनों को बुलाइए, दवा लीजिए, बीमारों की सेवा कीजिए, और उन्हें दोष देना बंद कीजिए जो चंगे नहीं हुए। और जब उत्तर देर से आए, तो 2 कुरिन्थियों 12:9 पर टिक जाइए; वहाँ जो अनुग्रह मिलता है, वह आपकी सोच से बड़ा है।

आगे इसी विषय में गहराई से जाने के लिए भजन संहिता 103 पूरा पढ़िए, फिर यशायाह 53, फिर मरकुस के सुसमाचार में यीशु मसीह की चंगाइयाँ एक-एक करके देखिए। और अंत में प्रकाशितवाक्य 21 और 22 खोलिए, जहाँ आँसू पोंछे जाते हैं और जीवन के वृक्ष के पत्ते जातियों को चंगा करते हैं। वहीं इस पूरी कहानी का अंत लिखा है, और वह अंत भला है।

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