स्वर्गदूत कौन हैं: बाइबल के अनुसार उनका स्वरूप, कार्य और सच्चाई
परिचय
रात के दो बजे हैं। अस्पताल के गलियारे में एक माँ बैठी है, बेटे की सर्जरी चल रही है, और उसके होंठ काँपते हुए यही बुदबुदा रहे हैं: "प्रभु, कोई स्वर्गदूत भेज दीजिए।" उसी शहर में कोई हाईवे पर एक बाल-बाल बची दुर्घटना के बाद कह रहा है, "आज तो स्वर्गदूत ने बचा लिया।" और उसी रविवार, किसी कलीसिया में एक जवान लड़का पूछ रहा है, "पास्टर, स्वर्गदूत सच में होते हैं, या ये बस दिलासा देने वाली बातें हैं?"
तीनों के मन में एक ही सवाल है, अलग-अलग शब्दों में: स्वर्गदूत कौन हैं? क्या वे असल में हैं, क्या वे अब भी काम करते हैं, और उनका मेरी ज़िंदगी से क्या लेना-देना है?
इस पृष्ठ पर हम कल्पना या किस्सों से नहीं, बल्कि उत्पत्ति से प्रकाशितवाक्य तक पवित्रशास्त्र की गवाही से यह देखेंगे कि स्वर्गदूत कौन हैं, वे क्या करते हैं, क्या नहीं करते, और उनकी सच्चाई आपके विश्वास को कैसे मज़बूत करती है।
इस मार्गदर्शिका का दृष्टिकोण
स्वर्गदूतों पर लिखी गई बहुत सी बातें उन्हें कहानी का नायक बना देती हैं। यह मार्गदर्शिका एक ही दरवाज़े से इस विषय में घुसती है: इब्रानियों 1:14 का दरवाज़ा, जहाँ स्वर्गदूत "सेवा करनेवाली आत्माएँ" कहलाते हैं। यानी वे स्वामी नहीं, सेवक हैं; मध्यस्थ नहीं, संदेशवाहक हैं; और प्रकाशितवाक्य में जब एक विश्वासी उनके पैरों पर गिरता है, वे उसे उठाकर कहते हैं कि मैं तेरा संगी दास हूँ।
इसलिए हम यह नहीं पूछेंगे, "मेरा स्वर्गदूत कौन है?" हम पूछेंगे, "ये स्वर्गदूत किसकी सेवा में लगे हैं?" यही सवाल हमें अंधविश्वास और उपेक्षा, दोनों गड्ढों से बचाकर सीधे मसीह के सामने ले आता है।
बाइबल स्वर्गदूतों के बारे में क्या कहती है?
बाइबल स्वर्गदूतों के अस्तित्व को साबित करने की कोशिश कभी नहीं करती; वह उन्हें मान लेती है, जैसे वह परमेश्वर को मान लेती है। पहले पन्नों से आख़िरी पन्नों तक वे आते-जाते दिखते हैं, पर हमेशा किसी और के आदेश पर।
सबसे पहली बात उनके स्वरूप के बारे में: वे सृजे गए प्राणी हैं। कुलुस्सियों 1:16 कहता है कि स्वर्ग और पृथ्वी की सारी वस्तुएँ, दृश्य और अदृश्य, सिंहासन, प्रभुताएँ, प्रधानताएँ और अधिकार, सब मसीह ही के द्वारा सृजे गए। इसका अर्थ यह है कि सबसे ऊँचा स्वर्गदूत भी सृष्टिकर्ता नहीं, सृष्टि का हिस्सा है। भजन संहिता 148 स्वर्गदूतों को भी परमेश्वर की स्तुति करने के लिए बुलाता है, क्योंकि उन्हें भी उसी ने बनाया। जो चीज़ सृजी गई है, उसकी उपासना नहीं हो सकती। यह एक छोटी सी बात लगती है, पर आगे हम देखेंगे कि यही बात स्वर्गदूतों के बारे में आधी ग़लतियाँ ठीक कर देती है।
दूसरी बात उनके काम के बारे में, और यहीं हमारा मुख्य पद आता है। इब्रानियों 1:14 पूछता है, "क्या वे सब सेवा करनेवाली आत्माएँ नहीं, जो उद्धार का वारिस होनेवालों के लिये सेवा करने को भेजी जाती हैं?" इस एक वाक्य में बहुत कुछ है। स्वर्गदूत "आत्माएँ" हैं, यानी शरीर रहित प्राणी, जो ज़रूरत पड़ने पर दिखाई देने वाला रूप धारण कर सकते हैं। वे "सेवा करने को भेजी जाती हैं", यानी वे अपनी मर्ज़ी से नहीं, भेजे जाने पर आते हैं। और उनकी सेवा का निशाना हम हैं, "उद्धार का वारिस होनेवाले।" इब्रानियों का पूरा पहला अध्याय यही दिखा रहा है कि पुत्र स्वर्गदूतों से कितना बड़ा है; स्वर्गदूत आराधना करते हैं, पुत्र आराधना पाता है।
तीसरी बात उनकी सुरक्षा के बारे में। भजन संहिता 91:11 कहता है, "क्योंकि वह तेरे विषय में अपने दूतों को आज्ञा देगा, कि वे तेरे सब मार्गों में तेरी रक्षा करें।" ध्यान दीजिए, यहाँ भी नायक कौन है। दूत रक्षा करते हैं, पर आज्ञा परमेश्वर देते हैं। यह पद किसी जादुई कवच का वादा नहीं है, वरना शैतान इसी पद को यीशु मसीह के सामने प्रलोभन में इस्तेमाल न करता और प्रभु उसे उत्तर न देते कि अपने परमेश्वर की परीक्षा न कर। यह पद उस व्यक्ति के लिए है जो सर्वशक्तिमान की छाया में बसता है, और यह बताता है कि उसकी हिफ़ाज़त में अदृश्य संसाधन भी लगे हुए हैं।
चौथी बात: वे संदेश लाते हैं। लूका 1:26 कहता है, "छठवें महीने में परमेश्वर की ओर से गब्रिएल स्वर्गदूत गलील के नासरत नगर में एक कुँवारी के पास भेजा गया।" इस पद को पढ़िए और गिनिए कि इसमें कितनी बार संदेशवाहक की पहचान उसके भेजने वाले से जुड़ी है: "परमेश्वर की ओर से", "भेजा गया"। गब्रिएल का महत्व इसमें नहीं कि वह कितना तेजस्वी था, बल्कि इसमें कि वह किसका समाचार लेकर आया था।
पाँचवीं बात: वे छुड़ाते हैं, लेकिन अपने नाम से नहीं। दानिय्येल 6:22 में सिंहों की मांद से निकलकर दानिय्येल राजा से कहता है, "मेरे परमेश्वर ने अपना दूत भेजकर सिंहों के मुँह को ऐसा बन्द कर दिया कि उन्होंने मेरी कुछ भी हानि नहीं की।" गवाही में दूत का ज़िक्र है, पर श्रेय "मेरे परमेश्वर" को जाता है। यही स्वर्गदूतों का लहजा है, और यही उन पर लिखी हर सच्ची बात का लहजा होना चाहिए।
छठी बात: वे असंख्य हैं और आराधना में डूबे हैं। प्रकाशितवाक्य 5:11 में यूहन्ना लिखता है, "और जब मैंने दृष्टि की, तो उस सिंहासन और उन प्राणियों और उन प्राचीनों के चारों ओर बहुत से स्वर्गदूतों का शब्द सुना, जिनकी गिनती लाखों और करोड़ों की थी।" वे वहाँ सिंहासन के "चारों ओर" हैं, बीच में नहीं। बीच में मेम्ना है।
स्वर्गदूत कभी मंच के बीच में खड़े नहीं होते।
बाइबल में चलने वाला सूत्र
स्वर्गदूतों का धागा पवित्रशास्त्र में इतनी बार दिखता है कि उसे अनदेखा करना मुश्किल है, और हर बार वह उसी केंद्र की ओर मुड़ता है।
उत्पत्ति में, अदन से निकाले जाने के बाद, करूब और अग्नि की धधकती तलवार जीवन के वृक्ष के मार्ग की रखवाली करते हैं। पहली बार स्वर्गदूत एक बंद दरवाज़े के पहरेदार के रूप में सामने आते हैं। हाजिरा जंगल में रोती है, और यहोवा का दूत उसे ढूँढ़ निकालता है। अब्राहम के हाथ में छुरी है, और स्वर्ग से आवाज़ आकर इसहाक को बचा लेती है। याकूब बेतेल में सीढ़ी देखता है जिस पर परमेश्वर के दूत चढ़ते-उतरते हैं, यानी स्वर्ग और पृथ्वी के बीच आवाजाही बंद नहीं हुई है।
निर्गमन से मलाकी तक वे मिशन पर दिखते हैं। मूसा जलती झाड़ी के सामने खड़ा है और वहाँ यहोवा का दूत प्रकट होता है। इस्राएल के आगे-आगे एक दूत चलता है। एलिय्याह थककर मरने की इच्छा करता है, और एक दूत उसे छूकर रोटी और पानी देता है, क्योंकि कभी-कभी स्वर्ग की सेवा बहुत ज़मीनी होती है। एलीशा का सेवक दुश्मन की फ़ौज देखकर घबराता है, और प्रार्थना के बाद उसकी आँखें खुलती हैं कि पहाड़ अग्निमय घोड़ों और रथों से भरा है। यशायाह मंदिर में सेराफों को "पवित्र, पवित्र, पवित्र" पुकारते सुनता है, और ध्यान दीजिए, वे अपने मुँह नहीं दिखाते, अपने मुँह ढाँपते हैं। दानिय्येल में मीकाईल और गब्रिएल नाम से आते हैं, राष्ट्रों के पीछे चलती अदृश्य लड़ाई का पर्दा ज़रा सा उठता है, और सिंहों की मांद में वही दूत दानिय्येल के पास जा खड़ा होता है।
फिर नया नियम खुलता है और स्वर्गदूतों की चहल-पहल अचानक बढ़ जाती है, क्योंकि राजा आ रहे हैं। गब्रिएल ज़करयाह और मरियम के पास भेजा जाता है, यूसुफ़ को स्वप्न में दूत समझाता है, बैतलहम के चरवाहों के सामने स्वर्गदूतों की सेना महिमा का गीत गाती है। जंगल में परीक्षा के बाद दूत आकर यीशु मसीह की सेवा करते हैं; गतसमनी में एक दूत उन्हें सामर्थ देता है; और खाली कब्र पर एक दूत पत्थर लुढ़काकर उस पर बैठ जाता है और स्त्रियों को कहता है कि वह जी उठा है। प्रेरितों के काम में वे जेल के दरवाज़े खोलते हैं, पतरस की बेड़ियाँ गिराते हैं, फिलेप्पुस को मार्ग दिखाते हैं, पौलुस को तूफ़ान में भरोसा दिलाते हैं। पतरस लिखता है कि सुसमाचार की इन बातों को स्वर्गदूत भी झाँककर देखने की लालसा रखते हैं। अनंत काल के प्राणी क्रूस के रहस्य पर झुककर देख रहे हैं।
और प्रकाशितवाक्य में सब कुछ अपने शिखर पर पहुँचता है। करोड़ों स्वर्गदूत मिलकर एक ही बात कहते हैं, कि वध किया हुआ मेम्ना सामर्थ और धन और ज्ञान और आदर पाने के योग्य है। इब्रानियों 2:16 साफ़ कहता है कि मसीह ने स्वर्गदूतों को नहीं, अब्राहम के वंश को सम्भाला। देहधारी होकर वे हमारे भाई बने, स्वर्गदूतों के नहीं।
इसीलिए स्वर्गदूतों का अध्ययन कभी स्वर्गदूतों पर ख़त्म नहीं होता। उनका पूरा वजूद एक तीर की तरह है, और तीर की नोक मसीह की ओर है।
आम भ्रांतियाँ
पहली भ्रांति: मरने के बाद अच्छे लोग स्वर्गदूत बन जाते हैं। यह सोच फ़िल्मों और सांत्वना-संदेशों से हमारे मन में आई है, बाइबल से नहीं। स्वर्गदूत एक अलग प्रकार की सृष्टि हैं, जिन्हें परमेश्वर ने मनुष्यों से पहले बनाया। मनुष्य मरने पर मसीह के साथ रहने जाते हैं और अंत में पुनरुत्थान के शरीर पाते हैं, न कि पंख। यीशु मसीह ने मत्ती 22 में कहा था कि पुनरुत्थान में लोग स्वर्ग के दूतों के "समान" होंगे, विवाह के मामले में, पर वे दूत बन जाएँगे, ऐसा उन्होंने नहीं कहा। आपकी दादी स्वर्गदूत नहीं बनी हैं; वे मसीह में उससे भी बड़ी महिमा की वारिस हैं, क्योंकि 1 कुरिन्थियों 6:3 कहता है कि संत स्वर्गदूतों का भी न्याय करेंगे।
दूसरी भ्रांति: स्वर्गदूतों से प्रार्थना करना या उनके नाम से माँगना ठीक है। यहीं कुलुस्सियों 2:18 हमें रोकता है: "कोई मनुष्य दीनता दिखाने और स्वर्गदूतों की पूजा करने में तुम्हें दोषी न ठहराए।" कुलुस्से की कलीसिया में कुछ लोग अपनी आत्मिकता को ऊँचा दिखाने के लिए स्वर्गदूतों की आराधना का चलन ले आए थे, और पौलुस इसे विनम्रता नहीं, घमंड कहता है, क्योंकि यह सिर से, यानी मसीह से, जुड़ाव तोड़ देता है। प्रकाशितवाक्य में दो बार यूहन्ना एक दूत के पैरों पर गिरता है, और दोनों बार दूत उसे रोककर कहता है कि ऐसा न कर, मैं तेरा संगी दास हूँ, परमेश्वर ही को दण्डवत् कर। जिन प्राणियों को हम ऊँचा उठाना चाहते हैं, वे ख़ुद हमारे साथ घुटनों पर आ जाते हैं।
तीसरी भ्रांति: स्वर्गदूत सर्वशक्तिमान हैं, या वे जो चाहें कर सकते हैं। वे शक्तिशाली हैं, पर सीमित हैं। वे सब कुछ नहीं जानते; यीशु मसीह ने कहा कि उस दिन और उस घड़ी के बारे में स्वर्ग के दूत भी नहीं जानते। वे सर्वव्यापी नहीं; दानिय्येल 10 में एक दूत को आने में देर लगती है। वे आदेश के बिना कुछ नहीं करते। इसलिए भरोसा स्वर्गदूतों पर नहीं, उन्हें भेजने वाले पर रखना है। जो डॉक्टर के बजाय एम्बुलेंस के ड्राइवर पर भरोसा करता है, वह ग़लत जगह आशा रख रहा है।
चौथी भ्रांति: स्वर्गदूत हर प्रकाश-अनुभव और हर आकर्षक आत्मिक दर्शन के पीछे होते हैं। बाइबल चेतावनी देती है कि शैतान भी ज्योतिर्मय दूत का रूप धारण कर लेता है, और गलातियों 1:8 में पौलुस कहता है कि यदि स्वर्ग से कोई दूत भी हमारे सुनाए हुए सुसमाचार से अलग सुसमाचार सुनाए, तो वह शापित हो। कसौटी अनुभव की चमक नहीं, संदेश की सच्चाई है। कोई भी सच्चा स्वर्गदूत आपको मसीह से दूर, या अपनी ओर, कभी नहीं खींचेगा।
सच्चे दूत की पहचान उसकी चमक नहीं, उसका संदेश है।
आज इसे जीवन में उतारना
मत्ती 18:10 में प्रभु यीशु एक अजीब सी बात कहते हैं: "सावधान, इन छोटों में से एक को भी तुच्छ न जानो; क्योंकि मैं तुम से कहता हूँ, कि स्वर्ग में उनके दूत मेरे स्वर्गीय पिता का मुँह सदा देखते हैं।" यह पद अक्सर "हर बच्चे का अपना रक्षक दूत" साबित करने के लिए पढ़ा जाता है, पर प्रभु इसे किसी और वजह से कह रहे हैं। वे कह रहे हैं: जिन्हें तुम छोटा, महत्वहीन, नज़रअंदाज़ करने लायक़ समझते हो, उनके बारे में स्वर्ग में चर्चा होती है। उनके दूत पिता के सामने खड़े हैं। इसका असर आपके सोमवार पर पड़ना चाहिए।
इसका मतलब यह है कि ऑफ़िस में वह चपरासी, घर में वह बूढ़ी सास, कलीसिया में पीछे बैठने वाला वह मंदबुद्धि लड़का, और गली में वह मज़दूर का बच्चा, ये कोई पृष्ठभूमि के पात्र नहीं हैं। स्वर्ग की व्यवस्था में उनके लिए संसाधन लगे हुए हैं। जिस व्यक्ति के लिए परमेश्वर दूत नियुक्त करते हैं, उसे आप और मैं तुच्छ न जानें।
दूसरा असर डर पर पड़ता है। जब बैंक का मैसेज आता है और खाते में उम्मीद से कम पैसे हैं, जब रिपोर्ट में वह शब्द लिखा होता है जिससे आप डरते थे, जब बेटा फ़ोन नहीं उठाता और रात गहरा जाती है, तब भजन संहिता 91:11 आपको यह नहीं सिखाता कि अब कुछ बुरा नहीं होगा। वह आपको सिखाता है कि आप अकेले नहीं हैं और बेहिसाब नहीं हैं। दानिय्येल सिंहों की मांद में गया; वह मांद से बाहर नहीं रखा गया, मांद के भीतर संभाला गया। अक्सर परमेश्वर की सेवा हमें परिस्थिति से नहीं, परिस्थिति के डर से निकालती है।
तीसरा असर आराधना पर पड़ता है। जब रविवार की सुबह आप थके हुए, मन मारकर, आधे-अधूरे दिल से गाना शुरू करते हैं, प्रकाशितवाक्य 5:11 याद रखिए। आपका छोटा सा स्वर, जो आपको कमज़ोर लगता है, एक ऐसे गाना बजाने वाले दल में शामिल हो रहा है जिसकी गिनती लाखों और करोड़ों की है। आप अकेले नहीं गा रहे।
और चौथा असर पहुनाई पर। इब्रानियों 13:2 कहता है कि अतिथि-सत्कार को न भूलो, क्योंकि इसके द्वारा कितनों ने बिन जाने-पहचाने स्वर्गदूतों की पहुनाई की है। यानी हर खटखटाते दरवाज़े को उस गंभीरता से लीजिए, जैसे स्वर्ग से कोई आया हो। स्वर्गदूतों पर विश्वास का सबसे व्यावहारिक नतीजा यह नहीं है कि आप आकाश की ओर ताकें, बल्कि यह है कि आप अपने दरवाज़े और अपनी मेज़ खोलें।
दर्पण
अब सीधी बात। आप स्वर्गदूतों के बारे में यह सब क्यों पढ़ रहे हैं?
अगर आप इसे किसी रोमांच की तरह पढ़ रहे हैं, कि कोई रहस्य खुले, कोई अलौकिक अनुभव मिले, कोई सुरक्षा का तरीक़ा हाथ लगे, तो पवित्रशास्त्र आपके हाथ में एक अजीब सा उत्तर रखता है। वह आपको स्वर्गदूतों की तस्वीरें नहीं, उनकी दिशा दिखाता है। और उनकी दिशा हमेशा सिंहासन की ओर है। जिस मेम्ने के सामने करोड़ों दूत झुके हैं, वही आपके कमरे में, आपके बिस्तर के पास, आपकी थकान के बीच उपस्थित हैं। क्या आप उन्हें जानते हैं, या आप सिर्फ़ उनके नौकरों के किस्से इकट्ठा कर रहे हैं?
और अगर आप दूसरी तरफ़ झुके हैं, अगर आपने अदृश्य दुनिया को अपनी व्यावहारिक सोच से बाहर निकाल दिया है, तो ज़रा ईमानदारी से देखिए कि उसकी कीमत आप कहाँ चुका रहे हैं। आपका कैलेंडर ऐसे भरा है जैसे सब कुछ आप ही पर टिका है। आपकी बचत ऐसे गिनी जाती है जैसे वही आपकी एकमात्र दीवार है। आपका शरीर थककर चूर है क्योंकि आपने मान लिया है कि मदद कहीं से नहीं आएगी। अकेलापन आपको इसलिए नहीं खाता कि कमरे में कोई नहीं, बल्कि इसलिए कि आपने यक़ीन कर लिया है कि कमरे में कोई नहीं।
एलीशा के सेवक की आँखें खुलने तक पहाड़ ख़ाली ही लग रहा था। पहाड़ बदला नहीं था, उसकी नज़र बदली थी।
इसलिए यह अध्याय आपसे एक छोटी, चुभने वाली बात पूछता है: आज रात आप किस पर टेक लगाकर सोएँगे? अपनी योजना पर, या उस परमेश्वर पर जो आज तक अपने लोगों के लिए संदेश, रोटी, छुटकारा और हिम्मत भेजते आए हैं, और जिनकी सबसे बड़ी भेंट कोई दूत नहीं, उनका पुत्र था? स्वर्गदूत आए और चले गए। मसीह आए और रुक गए।
बच्चों के लिए समझाया गया
बच्चों के मन में स्वर्गदूत पहले से बसे होते हैं, पर अक्सर कार्टून और किस्सों के रास्ते। इसलिए उन्हें समझाने का सबसे अच्छा तरीक़ा घटाना नहीं, सुधारना है।
छोटे बच्चों से आप इतना कह सकते हैं: परमेश्वर ने दो तरह के ख़ास दोस्त बनाए, एक हम लोग और एक स्वर्गदूत। स्वर्गदूत हमें दिखते नहीं, क्योंकि उनके शरीर हमारे जैसे नहीं होते। वे बहुत बलवान हैं, पर वे अपनी मनमानी नहीं करते; वे परमेश्वर की बात मानकर काम करते हैं, जैसे एक बहुत भरोसेमंद डाकिया चिट्ठी लेकर जाता है। एक बार परमेश्वर ने गब्रिएल नाम का दूत मरियम के पास भेजा था, यह बताने के लिए कि यीशु मसीह आने वाले हैं। और बैतलहम में चरवाहों को सबसे ख़ुशी की ख़बर भी स्वर्गदूतों ने ही सुनाई थी।
इसके साथ यह ज़रूरी बात भी जोड़िए: हम स्वर्गदूतों से प्रार्थना नहीं करते, और उनसे डरते भी नहीं। हम प्रभु यीशु से बात करते हैं, और वे हमारी सुनते हैं। स्वर्गदूत भी उनके सामने झुकते हैं।
बड़े बच्चों के साथ दानिय्येल 6:22 पढ़ना बहुत असरदार होता है, क्योंकि उसमें रोमांच है और सही निष्कर्ष भी: दानिय्येल दूत की तारीफ़ नहीं करता, वह कहता है कि मेरे परमेश्वर ने दूत भेजा।
हमारी वेबसाइट पर इस विषय की उम्र के हिसाब से अलग-अलग व्याख्याएँ उपलब्ध हैं, छोटे बच्चों (तीन से छह साल) के लिए सरल कहानी-रूप में, प्राथमिक उम्र (सात से बारह साल) के लिए बाइबल के पदों के साथ, और किशोरों (बारह वर्ष से ऊपर) के लिए उन सवालों के जवाब सहित जो वे दोस्तों और इंटरनेट से लेकर आते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
स्वर्गदूत कौन हैं और वे कहाँ से आए?
स्वर्गदूत परमेश्वर के द्वारा सृजे गए आत्मिक प्राणी हैं, जो उनके संदेशवाहक और सेवक के रूप में काम करते हैं। "स्वर्गदूत" शब्द का मूल अर्थ ही "भेजा गया दूत" है, यानी उनका नाम उनके काम से बना है। कुलुस्सियों 1:16 के अनुसार अदृश्य संसार की सारी शक्तियाँ भी मसीह ही के द्वारा और उन्हीं के लिए सृजी गईं, और भजन संहिता 148 स्वर्गदूतों को भी स्तुति करने के लिए बुलाती है। वे सृष्टि के आरंभ में बनाए गए, मनुष्य से पहले, और इब्रानियों 1:14 उनकी भूमिका एक वाक्य में बताता है: वे विश्वासियों की सेवा के लिए भेजे जाते हैं।
क्या हर व्यक्ति का अपना रक्षक स्वर्गदूत होता है?
बाइबल सीधे-सीधे यह नहीं कहती कि हर व्यक्ति को एक व्यक्तिगत स्वर्गदूत सौंपा गया है, पर वह यह ज़रूर कहती है कि परमेश्वर अपने लोगों की रक्षा के लिए दूतों को आज्ञा देते हैं। मत्ती 18:10 में प्रभु यीशु छोटों के दूतों की बात करते हैं, और प्रेरितों के काम 12 में कलीसिया के लोग पतरस की आवाज़ सुनकर कहते हैं कि यह उसका दूत होगा, जिससे लगता है कि यह विचार उनके बीच प्रचलित था। सुरक्षित बात यही है: आपकी सुरक्षा किसी नियत दूत के नाम पर नहीं, परमेश्वर की नियत देखरेख पर टिकी है।
क्या स्वर्गदूतों के पंख होते हैं?
बाइबल में कुछ स्वर्गीय प्राणियों के पंखों का साफ़ ज़िक्र है, जैसे यशायाह 6 के सेराफ, जिनके छह पंख हैं, और यहेजकेल के दर्शन के करूब। लेकिन जब स्वर्गदूत मनुष्यों के पास संदेश लेकर आते हैं, तो वे अक्सर जवान पुरुषों जैसे दिखते हैं, और कई बार लोग उन्हें पहचान भी नहीं पाते; इब्रानियों 13:2 कहता है कि कुछ लोगों ने बिन जाने-पहचाने स्वर्गदूतों की पहुनाई की। इसलिए पंख वाली तस्वीरें ग़लत नहीं, पर वे पूरी कहानी नहीं हैं। उनका स्वरूप आत्मिक है, और वे ज़रूरत के अनुसार प्रकट होते हैं।
स्वर्गदूत और प्रधान स्वर्गदूत में क्या अंतर है?
बाइबल स्वर्गदूतों के बीच कुछ श्रेणियों का संकेत देती है, पर उनका विस्तृत नक़्शा नहीं देती। "प्रधान दूत" की पदवी बाइबल में केवल मीकाईल के लिए इस्तेमाल हुई है, यहूदा 1:9 में, और दानिय्येल में मीकाईल को इस्राएल के पक्ष में खड़े होने वाले प्रधान के रूप में दिखाया गया है। करूब और सेराफ परमेश्वर की उपस्थिति और पवित्रता से जुड़े प्राणी हैं। गब्रिएल मुख्य रूप से संदेशवाहक के रूप में आता है। इन भेदों पर ज़्यादा अनुमान लगाने के बजाय यह याद रखना बेहतर है कि हर श्रेणी एक ही आदेश मानती है।
क्या मरने के बाद इंसान स्वर्गदूत बन जाते हैं?
नहीं। यह एक लोकप्रिय धारणा है, पर पवित्रशास्त्र से नहीं निकलती। स्वर्गदूत और मनुष्य परमेश्वर की दो अलग-अलग सृष्टियाँ हैं। मसीह में मरने वाले विश्वासी प्रभु के साथ होते हैं और अंतिम दिन पुनरुत्थान के महिमामय शरीर पाएँगे, दूत का रूप नहीं। यीशु मसीह ने मत्ती 22 में कहा कि पुनरुत्थान में लोग विवाह नहीं करेंगे, बल्कि स्वर्ग के दूतों के समान होंगे, यानी इस एक पहलू में उनके जैसे, पर वे दूत बन जाएँगे, ऐसा कहीं नहीं लिखा। इब्रानियों 2:16 तो यह भी कहता है कि मसीह ने स्वर्गदूतों को नहीं, मनुष्यों को सम्भाला।
शैतान और दुष्टात्माएँ क्या पतित स्वर्गदूत हैं?
बाइबल बताती है कि कुछ स्वर्गदूतों ने अपनी ठहराई हुई जगह छोड़ दी और विद्रोह किया; 2 पतरस 2:4 और यहूदा 1:6 ऐसे दूतों की बात करते हैं जिन्हें परमेश्वर ने न्याय के लिए रख छोड़ा है। शैतान इस विद्रोह का अगुवा है, जिसे यीशु मसीह ने झूठ का पिता कहा। इसका अर्थ यह है कि आत्मिक संसार तटस्थ नहीं है, वहाँ विरोध भी है; इफिसियों 6 इसीलिए हमें परमेश्वर के सारे हथियार बाँधने को कहता है। लेकिन यह भी याद रखिए कि ये शक्तियाँ पराजित हैं, क्योंकि क्रूस पर मसीह ने उन्हें खुले आम नीचा दिखाया।
क्या हम स्वर्गदूतों से प्रार्थना कर सकते हैं?
नहीं, और इस बारे में बाइबल असामान्य रूप से साफ़ है। कुलुस्सियों 2:18 स्वर्गदूतों की पूजा को एक ख़तरनाक भटकाव बताता है, क्योंकि वह मसीह को, जो सिर हैं, किनारे कर देती है। प्रकाशितवाक्य में जब यूहन्ना एक दूत के पैरों पर गिरने लगता है, वह दूत उसे रोककर कहता है कि वह उसका संगी दास है और आराधना केवल परमेश्वर की होनी चाहिए। हमारी प्रार्थना का एक ही मार्ग है, यीशु मसीह, और 1 तीमुथियुस 2:5 के अनुसार परमेश्वर और मनुष्यों के बीच एक ही मध्यस्थ है।
बाइबल में स्वर्गदूतों के कौन से नाम बताए गए हैं?
पवित्रशास्त्र में केवल दो स्वर्गदूतों के नाम दिए गए हैं, मीकाईल और गब्रिएल। मीकाईल युद्ध और सुरक्षा से जुड़े संदर्भों में दिखता है, जैसे दानिय्येल 10 और 12 तथा यहूदा 1:9 में; गब्रिएल संदेश लेकर आता है, दानिय्येल के पास और फिर लूका 1:26 में मरियम के पास। बाइबल के बाहर की किताबों और परंपराओं में कई और नाम मिलते हैं, पर उन पर कोई सिद्धांत खड़ा करना या उन नामों को प्रार्थना में पुकारना बुद्धिमानी नहीं। जहाँ परमेश्वर ने चुप रहना चुना, वहाँ हमारी जिज्ञासा को संयम सीखना है।
क्या स्वर्गदूत आज भी काम करते हैं?
हाँ। इब्रानियों 1:14 वर्तमान काल में लिखा गया है और उन सबके लिए है जो उद्धार के वारिस हैं, यानी आज के विश्वासियों के लिए भी। फ़र्क़ यह है कि आज हम दर्शनों और प्रकट दिखावों पर नहीं, लिखे हुए वचन पर टिके हैं, क्योंकि मसीह में परमेश्वर का अंतिम और पूरा वचन आ चुका है। इसलिए किसी स्वर्गदूतीय अनुभव की खोज करना हमारा बुलावा नहीं; भरोसा करना हमारा बुलावा है। परमेश्वर आज भी भेजते हैं, पर उनके भेजे हुए सेवक अपना इंटरव्यू नहीं देते, वे चुपचाप काम करके चले जाते हैं।
"यहोवा का दूत" कौन है, क्या वह यीशु मसीह हैं?
पुराने नियम में "यहोवा का दूत" कई बार ऐसे बोलता है जैसे वह स्वयं परमेश्वर हो, और लोग उसकी आराधना करते हैं, जैसे हाजिरा, मूसा और गिदोन के प्रसंगों में। इसीलिए कलीसिया के इतिहास में कई विश्वासियों ने माना है कि ये प्रकटीकरण देहधारण से पहले पुत्र के प्रकट होने के संकेत हैं। यह एक सम्मानित समझ है, पर बाइबल हर जगह इसे खोलकर नहीं कहती, इसलिए इसे हठ के साथ नहीं, नम्रता के साथ रखना चाहिए। जो बात निश्चित है वह यह है कि परमेश्वर अपने लोगों के पास आना चाहते हैं, और अंत में वे मसीह में आए।
स्वर्गदूत कितने हैं?
बाइबल कोई गिनती नहीं देती, पर वह उनकी संख्या के बारे में बहुत कुछ कह देती है। प्रकाशितवाक्य 5:11 में यूहन्ना ऐसे स्वर्गदूतों की आवाज़ सुनता है जिनकी गिनती लाखों और करोड़ों की थी, और इब्रानियों 12:22 स्वर्गदूतों की "लाखों" सभा की बात करता है। पुराने नियम में परमेश्वर का एक नाम ही "सेनाओं का यहोवा" है, यानी वे अनगिनत स्वर्गीय सेनाओं के सेनापति हैं। इसका अर्थ यह है कि आप जिस परमेश्वर से प्रार्थना करते हैं, उनके पास संसाधनों की कमी कभी नहीं रही।
मुझे कैसे पता चलेगा कि कोई आत्मिक अनुभव परमेश्वर की ओर से है?
कसौटी अनुभव की तीव्रता नहीं, संदेश की सच्चाई है। गलातियों 1:8 कहता है कि यदि स्वर्ग से कोई दूत भी उस सुसमाचार से अलग कुछ सुनाए जो पहले सुनाया गया, तो वह शापित हो, और 1 यूहन्ना 4 हमें आत्माओं को परखने को कहता है। पूछिए: क्या यह अनुभव मुझे यीशु मसीह की ओर, वचन की ओर, पश्चाताप और आराधना की ओर ले जा रहा है, या किसी गुप्त ज्ञान, किसी विशेष पहचान, या अपनी ही आत्मिक बड़ाई की ओर? सच्चा संदेश हमेशा मसीह को बड़ा और मुझे छोटा करता है।
करूब और सेराफ क्या होते हैं?
ये स्वर्गीय प्राणियों की दो ख़ास श्रेणियाँ हैं, जो परमेश्वर की उपस्थिति से जुड़ी हैं। करूब उत्पत्ति 3 में अदन के मार्ग की रखवाली करते हैं, वाचा के संदूक के ढकने पर उनकी आकृतियाँ बनी थीं, और यहेजकेल उन्हें परमेश्वर के सिंहासन के रथ के साथ देखता है। सेराफ यशायाह 6 में दिखते हैं, जहाँ वे अपने मुँह और पैर ढाँपे हुए "पवित्र, पवित्र, पवित्र" पुकारते हैं। दोनों ही श्रेणियाँ हमें एक ही बात सिखाती हैं: परमेश्वर की पवित्रता इतनी भारी है कि उनके सबसे नज़दीकी सेवक भी उनके सामने अपना चेहरा ढँक लेते हैं।
अंत में
स्वर्गदूतों के बारे में जानने के बाद सबसे बड़ा ख़तरा यह है कि हम उन पर मोहित हो जाएँ, और सबसे बड़ी बरकत यह है कि हम उनकी दिशा में देखना सीख जाएँ। इब्रानियों 1:14 से शुरू करके हम इसी नतीजे पर पहुँचे: वे सेवक हैं, संगी दास हैं, भेजे हुए संदेशवाहक हैं, और उनकी हर उड़ान, हर संदेश, हर छुटकारा और हर गीत एक ही सिंहासन की ओर मुड़ता है, जहाँ वध किया हुआ मेम्ना बैठा है।
इसलिए अगली बार जब आप रात के अंधेरे में, अस्पताल के गलियारे में, या किसी भारी फ़ैसले के सामने खड़े हों, अपनी आँखें आकाश में किसी चमकती आकृति की खोज में न भटकाएँ। उन्हें पुकारिए जिनके एक शब्द पर करोड़ों दूत हिलते हैं, और जिन्होंने दूत भेजने के बजाय अपने पुत्र को भेज दिया।
आगे बढ़ने के लिए इब्रानियों का पहला और दूसरा अध्याय एक साथ धीरे-धीरे पढ़िए, फिर प्रकाशितवाक्य 5 और भजन संहिता 91 पर रुकिए। और अंत में एक छोटी प्रार्थना कीजिए: "प्रभु, मुझे अदृश्य सहायता देखने की आँखें दीजिए, और उससे भी बढ़कर, आपको देखने की।"
