विषय

नरक क्या है: बाइबल के अनुसार न्याय और अनन्त दण्ड की सच्चाई

परिचय

एक अंतिम संस्कार के बाद एक युवक ने मुझसे पूछा, "मेरे पिता अच्छे इंसान थे। उन्होंने कभी किसी का बुरा नहीं किया। क्या वे नरक में हैं?" उसकी आँखों में जो दर्द था, वह किसी धर्मशास्त्रीय बहस का दर्द नहीं था। वह एक बेटे का दर्द था।

ऐसे सवालों के सामने हम दो तरह से भागते हैं। कुछ लोग नरक को बिलकुल मिटा देते हैं और कहते हैं कि प्रेम करने वाले परमेश्वर ऐसा कुछ करेंगे ही नहीं। दूसरे लोग नरक को हथियार बना लेते हैं और उसे डराने के लिए इस्तेमाल करते हैं। बाइबल इन दोनों रास्तों पर नहीं चलती।

इस पृष्ठ पर आप देखेंगे कि पवित्रशास्त्र वास्तव में नरक के बारे में क्या कहता है, पुराने नियम की पहली छाया से लेकर प्रकाशितवाक्य की आग की झील तक, और सबसे बढ़कर यह कि इस भयानक सच्चाई के ठीक बीच में अनुग्रह का द्वार कहाँ खुलता है।

इस मार्गदर्शिका का दृष्टिकोण

हम नरक को आग की डरावनी तस्वीरों से नहीं, बल्कि दो चीज़ों से समझेंगे। पहली, उस आवाज़ से जिसने नरक के बारे में बाइबल में सबसे ज़्यादा बोला, और वह आवाज़ किसी कठोर न्यायाधीश की नहीं, यीशु मसीह की है, जो बच्चों को गोद में उठाते थे। दूसरी, एक ही केंद्रीय शब्द से: अलगाव। 2 थिस्सलुनीकियों 1:9 नरक को "प्रभु के साम्हने से दूर" होना कहता है। आग, कीड़ा, अंधकार, ये सब उसी एक त्रासदी के चित्र हैं। और जब हम इसे अलगाव के रूप में देखते हैं, तब क्रूस पर यीशु का वह चिल्लाना, "तू ने मुझे क्यों छोड़ दिया", अचानक सबसे अनमोल वाक्य बन जाता है।

बाइबल नरक के बारे में क्या कहती है?

सबसे पहले शब्दों को साफ़ करना ज़रूरी है, क्योंकि हिंदी बाइबल में "नरक" और "अधोलोक" दो अलग शब्द हैं और लोग अक्सर इन्हें गड्डमड्ड कर देते हैं।

पुराने नियम में इब्रानी शब्द "शिओल" आता है, जिसका अनुवाद अक्सर अधोलोक या कब्र किया गया है। यह मरे हुओं का स्थान है, वह जगह जहाँ धर्मी और दुष्ट दोनों उतरते हैं। पुराना नियम यहाँ बहुत विस्तार नहीं देता; वह एक धुंधली, छायादार तस्वीर देता है। नए नियम में यूनानी शब्द "हेडीज़" उसी के समानांतर है, और हिंदी में यह भी अधोलोक कहलाता है। लेकिन यीशु एक तीसरा शब्द इस्तेमाल करते हैं: "गेहन्ना", जिसे हिंदी बाइबल "नरक" कहती है। गेहन्ना यरूशलेम के बाहर हिन्नोम की घाटी थी, वह जगह जहाँ कभी मोलेक को बच्चों की बलि चढ़ाई जाती थी और जो बाद में शहर का कूड़ाघर बन गई, जहाँ आग हमेशा सुलगती रहती थी। यीशु ने यह जानी-पहचानी, बदबूदार, जलती हुई घाटी उठाई और कहा: अंतिम न्याय के बाद एक वास्तविकता ऐसी ही है।

और यहाँ वह बात आती है जो हमें असहज करनी चाहिए। नए नियम में नरक के बारे में सबसे ज़्यादा किसने बोला? पौलुस ने नहीं। पतरस ने नहीं। स्वयं यीशु मसीह ने। मरकुस 9:43 में वे कहते हैं: "यदि तेरा हाथ तुझे ठोकर खिलाए तो उसे काट डाल। टुण्डा होकर जीवन में प्रवेश करना, तेरे लिये इस से भला है कि दो हाथ रहते हुए नरक में जाए, उस आग में जो कभी बुझने की नहीं।" यह अतिशयोक्ति है, कोई सचमुच हाथ काटने का आदेश नहीं, परन्तु अतिशयोक्ति का उद्देश्य यही है कि हम खतरे की गंभीरता को नापें। यीशु कह रहे हैं: इस दुनिया में तुम्हें जो भी कीमत चुकानी पड़े, वह नरक की तुलना में सस्ती है।

मत्ती 25:46 में यीशु भेड़ों और बकरियों के दृष्टान्त का अंत इन शब्दों से करते हैं: "और ये अनन्त दण्ड भोगेंगे, परन्तु धर्मी अनन्त जीवन में प्रवेश करेंगे।" ध्यान दीजिए कि एक ही वाक्य में एक ही शब्द "अनन्त" दोनों तरफ लगा है। जो लोग कहते हैं कि दण्ड अस्थायी है पर जीवन अनन्त है, उन्हें इस वाक्य की बनावट तोड़नी पड़ती है। यीशु ने जानबूझकर इसे संतुलित रखा।

पौलुस इसी सच्चाई को अलग भाषा में कहते हैं। 2 थिस्सलुनीकियों 1:9 कहता है: "वे प्रभु के साम्हने से, और उसकी शक्ति के तेज से दूर होकर अनन्त विनाश का दण्ड पाएंगे।" यह परिभाषा सबसे महत्वपूर्ण है। नरक का सार आग नहीं है। नरक का सार यह है कि परमेश्वर की उपस्थिति, जिसमें सारी भलाई, सारी सुंदरता, सारा प्रेम और सारी आशा बसती है, वहाँ नहीं है। जो कुछ भी इस जीवन में हमें अच्छा लगता है, सूरज की गर्मी, दोस्ती की हँसी, संगीत, भोजन, क्षमा, वह सब परमेश्वर की उदारता से आता है। उस स्रोत से पूरी तरह कट जाने का क्या अर्थ होगा, इसकी कल्पना करना ही कठिन है।

नरक अलगाव है, और अलगाव ही उसकी सबसे गहरी पीड़ा है।

प्रकाशितवाक्य अंतिम तस्वीर देता है। प्रकाशितवाक्य 20:15 लिखता है: "और जिस किसी का नाम जीवन की पुस्तक में लिखा हुआ न मिला, वह आग की झील में डाला गया।" यहाँ कसौटी कोई तौल-तराजू नहीं है जिसमें अच्छे काम और बुरे काम तोले जाएँ। कसौटी एक ही है: क्या तुम्हारा नाम मेम्ने की जीवन की पुस्तक में लिखा है? यानी, क्या तुम उसके हो जिसने तुम्हारे लिए अपना लहू बहाया?

बाइबल में चलने वाला सूत्र

नरक अचानक नए नियम में प्रकट नहीं होता। उसकी जड़ें बाइबल के तीसरे अध्याय तक जाती हैं।

उत्पत्ति 3 में जब आदम और हव्वा ने पाप किया, तो परिणाम केवल शर्म नहीं था, बल्कि निष्कासन था। उन्हें वाटिका से बाहर कर दिया गया और जीवन के वृक्ष के मार्ग पर पहरा बिठा दिया गया। यही बाइबल का पहला "दूर होना" है। पाप का स्वभाव ही यह है कि वह परमेश्वर की उपस्थिति से दूरी पैदा करता है। नरक उसी दूरी का अंतिम और स्थायी रूप है।

पुराने नियम में न्याय की आग बार-बार दिखाई देती है। सदोम और अमोरा पर आग बरसती है, और यहूदा 1:7 बाद में कहता है कि वे नगर "आग के अनन्त दण्ड में पड़कर दृष्टान्त ठहरे हैं"। दानिय्येल 12:2 पहली बार साफ़-साफ़ दो तरह के पुनरुत्थान की बात करता है, कुछ सदा के जीवन के लिए और कुछ सदा की घृणा के पात्र होने के लिए।

और फिर पूरे पुराने नियम की सबसे अंतिम आयत आती है। यशायाह अपनी पुस्तक नई सृष्टि के दर्शन के साथ समाप्त करते हैं, पर उसका आखिरी वाक्य चौंका देने वाला है। यशायाह 66:24 कहता है: "तब वे निकलकर उन लोगों की लोथों पर जो मुझ से बलवा करते थे, दृष्टि करेंगे; क्योंकि उन में पड़नेवाला कीड़ा न मरेगा और उनकी आग न बुझेगी; और सारे प्राणियों को उन से घृणा होगी।" कीड़ा जो नहीं मरता, आग जो नहीं बुझती। यीशु ने मरकुस 9:48 में बिलकुल यही शब्द उठाए। यानी जब यीशु नरक की बात करते हैं, वे कोई नई डरावनी कहानी नहीं गढ़ रहे; वे यशायाह को उद्धृत कर रहे हैं।

नए नियम में यह सूत्र तेज़ होता है। लूका 16:23 में धनवान और लाजर की कहानी में लिखा है: "और अधोलोक में उस ने पीड़ा में पड़े हुए अपनी आंखें उठाईं, और दूर से इब्राहीम की गोद में लाजर को देखा।" यह कहानी हमें बताती है कि मृत्यु के बाद चेतना बनी रहती है, कि स्थिति मृत्यु के बाद नहीं बदलती, और सबसे मार्मिक बात यह कि धनवान अपने भाइयों की चिंता करता है। नरक में भी वह याद रखता है।

लेकिन अब वह मोड़ आता है जो सब कुछ बदल देता है। यदि नरक "परमेश्वर के साम्हने से दूर" होना है, तो गुड फ्राइडे की दोपहर को क्या हुआ? मत्ती 27:46 बताता है कि यीशु ने ऊँचे शब्द से पुकारकर कहा, "एली, एली, लमा शबक्तनी? अर्थात हे मेरे परमेश्वर, हे मेरे परमेश्वर, तू ने मुझे क्यों छोड़ दिया?" अनादि काल से पिता के साथ जिस पुत्र की संगति कभी नहीं टूटी थी, उसने हमारी जगह वह त्याग दिया जाना सह लिया जिसके हम हकदार थे।

यही है वह सूत्र जो उत्पत्ति से प्रकाशितवाक्य तक चलता है: परमेश्वर से अलगाव मनुष्य की सबसे बड़ी त्रासदी है, और यीशु मसीह ने वह अलगाव स्वयं अपने ऊपर ले लिया ताकि हमें कभी उसे न सहना पड़े।

आम भ्रांतियाँ

पहली भ्रांति: नरक की शिक्षा कठोर पुराने नियम की है, यीशु तो केवल प्रेम सिखाते थे।

यह बात जितनी लोकप्रिय है, उतनी ही गलत है। पुराने नियम में नरक के बारे में बहुत कम कहा गया है। सबसे स्पष्ट, सबसे विस्तृत और सबसे गंभीर शिक्षा यीशु मसीह के मुँह से आती है। मत्ती 10:28 में वे कहते हैं: "जो शरीर को घात करते हैं, पर आत्मा को घात नहीं कर सकते, उन से मत डरना; पर उसी से डरो, जो आत्मा और शरीर दोनों को नरक में नाश कर सकता है।" मत्ती 23:33 में वे धर्मगुरुओं से पूछते हैं, "तुम नरक के दण्ड से क्योंकर बचोगे?" जिस व्यक्ति ने यह चेतावनी दी, उसी ने क्रूस पर अपने हत्यारों के लिए प्रार्थना की। प्रेम और चेतावनी एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं; माँ अपने बच्चे को आग से इसीलिए चिल्लाकर रोकती है क्योंकि वह उससे प्रेम करती है।

दूसरी भ्रांति: परमेश्वर लोगों को नरक में भेजने के लिए बेताब हैं।

पवित्रशास्त्र ठीक उल्टा कहता है। यहेजकेल 33:11 में परमेश्वर कहते हैं, "मेरे जीवन की सौगन्ध, मैं दुष्ट के मरने से प्रसन्न नहीं होता, परन्तु इस से कि दुष्ट अपने मार्ग से फिरकर जीवित रहे।" 2 पतरस 3:9 कहता है कि प्रभु "नहीं चाहता, कि कोई नाश हो; वरन यह कि सब को मन फिराव का अवसर मिले।" और मत्ती 25:41 में एक छोटी सी बात छिपी है: अनन्त आग "शैतान और उसके दूतों के लिये तैयार की गई है"। वह मनुष्यों के लिए डिज़ाइन नहीं की गई थी। जो व्यक्ति अंत तक परमेश्वर से कहता रहता है "मुझसे दूर रहें", परमेश्वर अंततः उसकी इच्छा का सम्मान करते हैं, और वही सम्मान नरक है।

तीसरी भ्रांति: नरक में लोग शैतान के साथ राज करेंगे, या शैतान वहाँ का राजा है।

यह विचार कविताओं और फिल्मों से आया है, बाइबल से नहीं। प्रकाशितवाक्य 20:10 के अनुसार शैतान स्वयं आग की झील में डाला जाएगा। वह नरक का मालिक नहीं, कैदी है। नरक में कोई सत्ता, कोई साथी-भाईचारा, कोई रोमांच नहीं है। अलगाव का अर्थ अकेलापन है, और वही सबसे गहरी यातना है।

चौथी भ्रांति: अच्छे लोग बच जाएँगे, बुरे लोग नरक जाएँगे।

यह सबसे खतरनाक भ्रांति है, क्योंकि यह सबसे धार्मिक लगती है। प्रकाशितवाक्य 20:15 में कसौटी नैतिक प्रदर्शन नहीं, बल्कि जीवन की पुस्तक में नाम का होना है। रोमियों 3:23 के अनुसार सबने पाप किया है और परमेश्वर की महिमा से रहित हैं। यदि उद्धार अच्छाई के आधार पर मिलता, तो किसी को नहीं मिलता। यही कारण है कि सुसमाचार को सुसमाचार कहा जाता है। वह अच्छे लोगों के लिए इनाम नहीं, डूबते हुए लोगों के लिए रस्सी है।

आज इसे जीवन में उतारना

नरक की शिक्षा को केवल जानकारी बनाकर रख देना सबसे बड़ी गलती होगी। यह सत्य आपके सोमवार को बदलने के लिए है।

सबसे पहले, यह आपकी प्रार्थनाओं को बदलता है। जब आप अपने उस भाई के बारे में सोचते हैं जो वर्षों से मसीह से दूर है, या उस सहकर्मी के बारे में जो हँसकर विश्वास का मज़ाक उड़ाता है, तो नरक की सच्चाई आपकी प्रार्थना से लापरवाही निकाल देती है। आप उनके लिए केवल अच्छी नौकरी और अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना नहीं करेंगे। आप रोएँगे।

दूसरा, यह गवाही को ज़रूरी बना देता है। हममें से बहुत लोग चुप रहते हैं क्योंकि हमें लगता है कि धर्म एक निजी मामला है और किसी को असहज करना अशिष्टता है। पर अगर आपके पड़ोसी के घर में आग लगी हो, तो दरवाज़ा खटखटाना अशिष्टता नहीं है। पौलुस ने 2 कुरिन्थियों 5:11 में लिखा, "सो प्रभु का भय मानकर हम लोगों को समझाते हैं।" ध्यान दीजिए, वे लोगों को डराते नहीं, समझाते हैं। आपका लहजा कोमल हो सकता है और होना भी चाहिए, पर आपकी चुप्पी प्रेम नहीं है।

तीसरा, यह पाप के साथ आपके समझौते को तोड़ता है। मरकुस 9:43 की कठोर भाषा आज भी लागू होती है। वह मोबाइल ऐप जो आपकी शुद्धता खा रहा है, वह रिश्ता जो आपको लगातार झूठ बोलने पर मजबूर करता है, वह व्यापारिक सौदा जिसमें आपकी ईमानदारी बिक रही है। यीशु कहते हैं: काट दो। यह आत्म-घृणा नहीं, आत्म-रक्षा है। जो चीज़ आपको परमेश्वर से दूर ले जा रही है, उससे अलग होने की कीमत हमेशा उसे पकड़े रखने की कीमत से कम होती है।

चौथा, यह दुख में आशा देता है। जब आप किसी अन्याय को देखते हैं जिसका इस धरती पर कभी हिसाब नहीं हुआ, वह बच्चा जिसके साथ दुर्व्यवहार हुआ और अपराधी आज़ाद घूम रहा है, वह गरीब जिसकी ज़मीन छीन ली गई, तो न्याय की सच्चाई आपको यह कहने की ताकत देती है कि कोई भी अन्याय बिना हिसाब के नहीं रहेगा। यही कारण है कि रोमियों 12:19 हमें बदला लेने से रोकता है। हम हिसाब छोड़ सकते हैं, क्योंकि हिसाब लिया जाएगा।

और अंत में, यह कृतज्ञता जगाता है। हर सुबह जब आप आँख खोलते हैं, तो आप उस अलगाव से बचे हुए हैं जिसे यीशु ने आपकी जगह सहा। यह सच्चाई किसी भी धन्यवाद के गीत को गहरा कर देती है।

दर्पण

अब मैं सीधे आपसे बात करना चाहता हूँ।

शायद आपने यह पूरा पृष्ठ एक दर्शक की तरह पढ़ा है, जैसे कोई दूर की खबर पढ़ता है। पर यह विषय आपके बारे में है। इब्रानियों 9:27 कहता है, "और जैसे मनुष्यों के लिये एक बार मरना और उसके बाद न्याय का होना नियुक्त है।" आपके लिए भी।

मैं जानता हूँ कि आपका जीवन भरा हुआ है। ईएमआई चल रही है, बच्चों की फीस देनी है, घर में कोई बीमार है, और रात को जब आप थककर लेटते हैं तो सोचने की ताकत ही नहीं बचती। अनन्तकाल के सवाल हमेशा "बाद में" की सूची में चले जाते हैं। पर क्या आपने कभी गौर किया कि वह "बाद में" कभी नहीं आता? धनवान व्यक्ति ने भी सोचा होगा कि अभी समय है।

शायद आपके साथ उल्टा है। शायद आप कलीसिया में नियमित हैं, दशमांश देते हैं, और फिर भी रात को एक डर आपको पकड़ता है: क्या मैं सचमुच बचा हुआ हूँ? अगर ऐसा है, तो सुनिए। प्रकाशितवाक्य 20:15 आपके कामों की सूची की बात नहीं करता, वह एक नाम की बात करता है जो एक पुस्तक में लिखा है, और वह पुस्तक मेम्ने की है। आपकी सुरक्षा आपकी पकड़ की मज़बूती में नहीं, उसकी पकड़ की मज़बूती में है।

और शायद आप वह हैं जो किसी अपने के बारे में सोचकर तड़प रहे हैं, जो बिना मसीह को जाने चला गया। उस दर्द के लिए मेरे पास आसान जवाब नहीं है, और मैं झूठा आराम नहीं दूँगा। पर यह मैं कह सकता हूँ: जो न्यायी हैं वे वही हैं जो आपके लिए मरे। उनका न्याय कभी लापरवाह, कभी जल्दबाज़, कभी निर्दयी नहीं होगा। आप अपने प्रियजन को ऐसे हाथों में छोड़ सकते हैं जिनमें कीलों के निशान हैं।

पर अपने बारे में इंतज़ार मत कीजिए।

आज का दिन अनुग्रह का दिन है, कल का वादा किसी के पास नहीं।

बच्चों के लिए समझाया गया

माता-पिता अक्सर पूछते हैं कि बच्चों से नरक के बारे में बात करनी चाहिए या नहीं। जवाब है हाँ, पर बहुत सावधानी और बहुत कोमलता के साथ, और हमेशा यीशु मसीह के प्रेम के ढाँचे के भीतर।

बच्चों को डराकर विश्वास में लाना कभी काम नहीं करता। जो बच्चा डर से प्रार्थना करता है, वह किशोरावस्था में उसी डर को त्याग देता है। इसके बजाय बच्चों को सबसे पहले यह समझना चाहिए कि परमेश्वर उनसे प्रेम करते हैं और उनके साथ रहना चाहते हैं। उसी नींव पर यह बात रखी जा सकती है कि पाप हमें परमेश्वर से दूर करता है, जैसे कोई बच्चा भीड़ में माँ का हाथ छोड़कर खो जाए। और फिर सबसे अच्छी खबर: यीशु हमें ढूँढ़ने आए, और उन्होंने क्रूस पर वह दूरी स्वयं सह ली ताकि हम कभी खोए हुए न रहें।

बच्चों से बात करते समय आग, कीड़े और यातना के चित्रों पर ज़्यादा ज़ोर न दें। उनकी कल्पना उन चित्रों को रात में भयानक रूप दे देती है। इसके बजाय "परमेश्वर से दूर" और "परमेश्वर के साथ" की भाषा का प्रयोग करें, जो बाइबल के अनुसार भी ज़्यादा सटीक है।

हर उम्र की अपनी भाषा होती है। तीन से छह साल के छोटे बच्चों को केवल इतना चाहिए कि परमेश्वर उन्हें कभी नहीं छोड़ते। सात से बारह साल के बच्चे न्याय और सही-गलत के सवाल पूछने लगते हैं और उन्हें ईमानदार, सरल उत्तर चाहिए। बारह साल से ऊपर के किशोर कठिन सवाल पूछते हैं, जैसे कि क्या यह अन्याय नहीं है, और उन्हें टालना नहीं चाहिए। हमारे पास इन तीनों उम्र-वर्गों के लिए अलग-अलग तैयार की गई व्याख्याएँ उपलब्ध हैं, जिन्हें आप अपने बच्चे की उम्र के अनुसार चुन सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नरक क्या है और यह कहाँ है?

बाइबल के अनुसार नरक वह अंतिम अवस्था है जिसमें वे लोग रहते हैं जो परमेश्वर से अलग होकर मरते हैं। 2 थिस्सलुनीकियों 1:9 इसे "प्रभु के साम्हने से, और उसकी शक्ति के तेज से दूर" होकर अनन्त विनाश का दण्ड पाना कहता है। पवित्रशास्त्र नरक का कोई भौगोलिक पता नहीं देता; यह किसी ग्रह या भूमिगत गुफा का नाम नहीं है। यह एक वास्तविक अवस्था है जहाँ परमेश्वर की भलाई और उपस्थिति का अनुभव पूरी तरह समाप्त हो जाता है, और प्रकाशितवाक्य 20:15 के अनुसार यह अंतिम न्याय के बाद आग की झील के रूप में वर्णित है।

क्या नरक सचमुच हमेशा के लिए है?

मत्ती 25:46 में यीशु कहते हैं, "और ये अनन्त दण्ड भोगेंगे, परन्तु धर्मी अनन्त जीवन में प्रवेश करेंगे।" यहाँ एक ही यूनानी शब्द दोनों पक्षों पर लगाया गया है। अगर दण्ड सीमित है तो उसी तर्क से जीवन भी सीमित होगा, जो पूरे नए नियम के विरुद्ध है। इसी तरह मरकुस 9:43 उस आग की बात करता है "जो कभी बुझने की नहीं"। कलीसिया ने इतिहास भर इसी को माना है, भले ही यह सच्चाई हमें बहुत भारी लगती है।

अधोलोक और नरक में क्या अंतर है?

अधोलोक, यानी इब्रानी शिओल और यूनानी हेडीज़, मृत्यु और पुनरुत्थान के बीच की मध्यवर्ती अवस्था है, जैसा लूका 16:23 में दिखता है: "और अधोलोक में उस ने पीड़ा में पड़े हुए अपनी आंखें उठाईं।" नरक, यानी गेहन्ना, अंतिम न्याय के बाद की स्थायी अवस्था है। प्रकाशितवाक्य 20:14 कहता है कि मृत्यु और अधोलोक दोनों आग की झील में डाले गए। यानी अधोलोक अस्थायी है और नरक अंतिम। हिंदी अनुवाद में दोनों शब्द कभी-कभी मिलते-जुलते लगते हैं, इसलिए संदर्भ देखना ज़रूरी है।

क्या नरक की आग असली आग है?

बाइबल आग, अंधकार, कीड़ा, दाँत पीसना और झील जैसे कई चित्र इस्तेमाल करती है, और ये चित्र शाब्दिक रूप से एक-दूसरे के साथ नहीं बैठते, क्योंकि आग और घोर अंधकार एक साथ नहीं रह सकते। इससे कई विद्वान मानते हैं कि ये प्रतीकात्मक भाषा है। पर यह ध्यान रखिए कि प्रतीक का अर्थ "कम भयानक" नहीं होता। यशायाह 66:24 का "कीड़ा न मरेगा और उनकी आग न बुझेगी" एक ऐसी वास्तविकता की ओर इशारा करता है जो हमारे चित्रों से बड़ी है, छोटी नहीं।

यीशु ने नरक के बारे में कितनी बार बात की?

सुसमाचारों में नरक, न्याय और अनन्त दण्ड से जुड़ी शिक्षा यीशु के मुँह से बार-बार आती है, और नए नियम में इस विषय पर सबसे अधिक बोलने वाले वही हैं। मत्ती 10:28, मत्ती 23:33, मत्ती 25:41, मरकुस 9:43 और लूका 16 की पूरी कहानी इसके उदाहरण हैं। यह बात हमारी इस धारणा को तोड़ती है कि नरक की शिक्षा किसी कठोर पुराने धर्म की देन है। जो सबसे कोमल थे, उन्होंने ही सबसे साफ़ चेतावनी दी, और वह चेतावनी प्रेम से निकली थी।

क्या प्रेम करने वाले परमेश्वर किसी को नरक में भेज सकते हैं?

यह सवाल ईमानदार है और इसका उत्तर परमेश्वर के चरित्र में छिपा है। यहेजकेल 33:11 में परमेश्वर कहते हैं कि वे दुष्ट के मरने से प्रसन्न नहीं होते, और 2 पतरस 3:9 कहता है कि वे नहीं चाहते कि कोई नाश हो। परमेश्वर किसी को खींचकर नरक में नहीं डालते; वे जीवन भर बुलाते रहते हैं। पर प्रेम ज़बरदस्ती नहीं करता। जो व्यक्ति अंत तक परमेश्वर की उपस्थिति को ठुकराता है, अंततः उसे वही मिलता है जो उसने चुना, परमेश्वर से दूरी।

जिन लोगों ने कभी सुसमाचार नहीं सुना, उनका क्या होगा?

बाइबल इस प्रश्न का पूरा विवरण नहीं देती, और जहाँ वह चुप है वहाँ हमें भी विनम्र रहना चाहिए। पर दो बातें स्पष्ट हैं। पहली, रोमियों 1 और 2 के अनुसार हर व्यक्ति को सृष्टि और अपने विवेक के द्वारा कुछ न कुछ प्रकाश मिला है, और परमेश्वर हर एक का न्याय उसी के अनुसार न्यायसंगत रीति से करेंगे। दूसरी, उत्पत्ति 18:25 कहता है कि सारी पृथ्वी का न्यायी क्या न्याय न करेगा। हम परमेश्वर की निष्पक्षता पर भरोसा कर सकते हैं, और इसी कारण हमें सुसमाचार पहुँचाने की तात्कालिकता महसूस करनी चाहिए।

क्या छोटे बच्चे नरक में जाते हैं?

पवित्रशास्त्र इस पर सीधा सिद्धांत नहीं देता, पर जो संकेत देता है वे सांत्वना देने वाले हैं। 2 शमूएल 12:23 में दाऊद अपने मरे हुए शिशु के बारे में कहते हैं कि वे उसके पास जाएँगे, जो मिलन की आशा दिखाता है। यीशु ने बच्चों को अपने पास बुलाया और कहा कि परमेश्वर का राज्य ऐसों ही का है। अधिकांश कलीसिया ने सदा यह माना है कि जो बच्चे समझने की उम्र से पहले मर जाते हैं, वे मसीह के अनुग्रह में सुरक्षित हैं। परमेश्वर का हृदय किसी भी माता-पिता से अधिक कोमल है।

मरने के तुरंत बाद क्या होता है?

बाइबल सिखाती है कि मृत्यु के साथ चेतना समाप्त नहीं होती। लूका 16:23 में धनवान मरने के बाद भी देखता है, याद रखता है और बात करता है। क्रूस पर यीशु ने डाकू से कहा कि आज ही तू मेरे साथ स्वर्गलोक में होगा। पौलुस 2 कुरिन्थियों 5:8 में देह से अलग होकर प्रभु के साथ रहने की बात करते हैं। यानी मृत्यु के तुरंत बाद एक मध्यवर्ती अवस्था आती है, और अंतिम पुनरुत्थान तथा न्याय के बाद स्थायी अवस्था आती है, जिसका वर्णन प्रकाशितवाक्य 20 और 21 में है।

क्या एक विश्वासी नरक में जा सकता है?

यूहन्ना 10:28 में यीशु कहते हैं कि वे अपनी भेड़ों को अनन्त जीवन देते हैं और कोई उन्हें उनके हाथ से छीन नहीं सकता। रोमियों 8:1 घोषित करता है कि जो मसीह यीशु में हैं उन पर अब दण्ड की आज्ञा नहीं। इसलिए सच्चा विश्वासी नरक में नहीं जाएगा, और यह आश्वासन हमारे प्रदर्शन पर नहीं, मसीह के पूरे किए गए काम पर टिका है। पर नया नियम यह भी चेतावनी देता है कि केवल मुँह से विश्वास का दावा करना और जीवन में मसीह के न होने में अंतर है, इसलिए हमें स्वयं को जाँचना चाहिए।

क्या शुद्धिकरण स्थान, यानी पर्गेटरी, बाइबल में है?

मृत्यु के बाद शुद्धिकरण की किसी अवस्था की शिक्षा पवित्रशास्त्र में नहीं मिलती। इब्रानियों 9:27 कहता है कि मनुष्यों के लिये एक बार मरना और उसके बाद न्याय का होना नियुक्त है, और बीच में किसी तीसरी जगह का उल्लेख नहीं है। इसके अलावा इब्रानियों 10:14 कहता है कि एक ही चढ़ावे के द्वारा उसने उन्हें सदा के लिये सिद्ध कर दिया है जो पवित्र किए जाते हैं। यदि मसीह का बलिदान पूरा है, तो उसमें कुछ जोड़ने के लिए कोई अतिरिक्त शुद्धिकरण आवश्यक नहीं रहता।

क्या नरक में सबको एक ही जैसा दण्ड मिलेगा?

बाइबल संकेत देती है कि न्याय में अंतर होगा। लूका 12:47 और 48 में यीशु उस दास की बात करते हैं जो स्वामी की इच्छा जानता था और नहीं माना, और कहते हैं कि वह अधिक मार खाएगा, जबकि न जानने वाला कम। मत्ती 11:22 में वे कहते हैं कि न्याय के दिन सोर और सैदा की दशा उन नगरों से अधिक सहने योग्य होगी जिन्होंने चमत्कार देखे और मन न फिराया। यानी जिसे जितना प्रकाश मिला, उससे उतनी ही ज़िम्मेदारी माँगी जाएगी।

मैं नरक से कैसे बच सकता हूँ?

एक ही रास्ता है, और वह किसी धार्मिक उपलब्धि का नहीं, एक व्यक्ति का नाम है। यूहन्ना 3:16 कहता है कि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए। आपको पहले अच्छा बनने की ज़रूरत नहीं है; आपको केवल अपने पाप को मानकर यीशु मसीह के पास आना है और भरोसा करना है कि उन्होंने क्रूस पर आपकी जगह पूरी कीमत चुका दी। जो उन्हें पुकारता है, वह कभी नहीं ठुकराया जाता।

अंत में

नरक की शिक्षा को हमने उस आवाज़ से सुना जिसने इसके बारे में सबसे ज़्यादा बोला, और उस शब्द से समझा जो इसके केंद्र में है: अलगाव। परमेश्वर के साम्हने से दूर होना ही वह आग है, वही वह कीड़ा है, वही वह अंधकार है।

और यही कारण है कि यह पृष्ठ निराशा पर नहीं, अनुग्रह पर समाप्त होता है। क्योंकि जब हम कहते हैं कि नरक परमेश्वर से त्यागा जाना है, तो हमें तुरंत याद आता है कि एक व्यक्ति ने वह त्याग स्वेच्छा से सहा। गुड फ्राइडे की उस अंधेरी दोपहर में पुत्र ने पिता से पूछा कि उन्हें क्यों छोड़ दिया गया, ताकि आपसे वह सवाल कभी न पूछना पड़े।

जो आपके लिए त्यागा गया, वह आपको कभी नहीं त्यागेगा।

अब इसके आगे क्या? मैं आपको सुझाव दूँगा कि लूका 16 की पूरी कहानी धीरे-धीरे पढ़िए, फिर मत्ती 25 का अंतिम न्याय का दृश्य, और अंत में प्रकाशितवाक्य 21, जहाँ परमेश्वर हर आँसू पोंछ देते हैं। इन तीनों को एक साथ पढ़ने से आपको वह संतुलन मिलेगा जो अकेले किसी एक से नहीं मिलता: गंभीर चेतावनी, जीती हुई आशा, और एक ऐसा उद्धारकर्ता जो आज भी बुला रहे हैं।

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अंतर्दृष्टियों की दीवार

पवित्रशास्त्र में आपको क्या स्पर्श करता है? हम किसके लिए प्रार्थना करें? हम परमेश्वर का किसके लिए धन्यवाद करें?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर मीका 7:13

तो भी यह देश अपने निवासियों के कारण, उनके कामों के फल के कारण उजाड़ हो जाएगा।" मीका बहाली की…

प्रार्थना संपादकीय पर 2 तीमुथियुस 2:6

पिता, किसान की तरह मुझे भी धीरज से मेहनत करना सिखा। जब फल दिखाई नहीं देता, तब भी मैं हाथ…

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर न्यायियों 4:1

जब एहूद मर गया तब इस्राएलियों ने फिर यहोवा की दृष्टि में बुरा किया।" ध्यान दो, पाप एहूद के जीते…

धन्यवाद संपादकीय पर एस्तेर 8:9

पिता, धन्यवाद कि आपने मोर्दकै के द्वारा छुटकारे की चिट्ठियाँ लिखवाईं और भारत से लेकर कूश तक एक सौ सत्ताईस…

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर न्यायियों 1:29

एप्रैम कमज़ोर गोत्र नहीं था। यहोशू इसी गोत्र से था। फिर भी लिखा है, "एप्रैम ने भी गेजेर में रहनेवाले…

प्रार्थना संपादकीय पर सभोपदेशक 2:26

पिता, मैं जमा करने और सहेजने में इतना उलझ जाता हूँ कि आनंद भूल जाता हूँ। मुझे बुद्धि और समझ…

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